नाथ समाज - योगियों का वो पंथ जिसने इतिहास बदल दिया सोचिए... एक ऐसा पंथ, जिसके योगियों के सामने बड़े-बड़े राजा झुक जाते थे।
एक ऐसा समाज, जिसने भारत को योग दिया, हठयोग दिया... और जिसकी धूनी आज भी पूरे भारत में जल रही है।
ये कहानी है उस समाज की, जो शिव से शुरू होता है... और आज आपके और हमारे बीच मौजूद है।
नमस्कार, आज हम बात करेंगे नाथ समाज के उस विस्मृत इतिहास की, जो किताबों में नहीं मिलेगा।
अगर आप नाथ समाज से हैं, तो ये वीडियो आपके रोंगटे खड़े कर देगा। और अगर नहीं हैं, तो आप भारत के सबसे शक्तिशाली योगी पंथ को जान जाएंगे।
वीडियो को अंत तक देखिए, क्योंकि अंत में मैं बताऊंगा नाथ समाज के 12 पंथ कौन से हैं और आपका गोत्र किस पंथ से जुड़ा है।
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल पर।
दोस्तों, जब हम भारतीय इतिहास पढ़ते हैं, तो हमे मुगल, राजपूत, मराठा... इन सबका इतिहास मिल जाता है। लेकिन एक समाज ऐसा है जिसने तलवार से नहीं, बल्कि योग और भभूत से इस देश पर राज किया है। वो है नाथ समाज।
आम भाषा में हम इन्हें जोगी, नाथ जोगी, या सिर्फ नाथ समाज कहते हैं।
तो सवाल उठता है... आखिर नाथ समाज की उत्पत्ति कहाँ से हुई? क्या ये कोई जाति है, या एक योग परम्परा?
उत्पत्ति का रहस्य - शिव से शुरूआत
नाथ शब्द का अर्थ ही बहुत गहरा है। नाथ का मतलब होता है - स्वामी, रक्षक, या जो खुद मोक्ष का मार्ग जानता हो।
नाथ पंथ की उत्पत्ति किसी इंसान से नहीं, बल्कि स्वयं भगवान शिव से मानी जाती है। इसीलिए इन्हें शैव पंथ का सबसे प्राचीन और प्रमुख पंथ कहा जाता है।
कहा जाता है कि सबसे पहले भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया। ये ज्ञान था - अमर कथा। उसी अमर कथा को एक मछली ने सुन लिया। वही मछली आगे चलकर मत्स्येंद्रनाथ बनी।
मत्स्येंद्रनाथ... नाथ पंथ के प्रथम नाथ, आदिनाथ के बाद।
इतिहासकारों के अनुसार नाथ पंथ का व्यवस्थित रूप 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच आया। ये वो समय था जब भारत में बौद्ध धर्म का पतन हो रहा था और कई तांत्रिक पंथ बिखर रहे थे। ऐसे समय में मत्स्येंद्रनाथ जी ने बिखरी हुई योग परम्पराओं को एक सूत्र में पिरोया।
और उनके शिष्य ने इस पंथ को अमर कर दिया। वो शिष्य थे - गुरु गोरक्षनाथ जी।
यहाँ एक बात समझिए, अगर गोरक्षनाथ जी नहीं होते तो आज जो योग पूरी दुनिया कर रही है, वो योग होता ही नहीं। जी हाँ, आज जिम में, अमेरिका में, यूरोप में जो योगा मैट बिछाकर योग किया जाता है, उसका असली जनक नाथ पंथ ही है। कैसे? वो आगे बताऊंगा।
गोरखनाथ जी - जिन्होंने इतिहास बदल दिया
गोरखनाथ जी का जन्म कहाँ हुआ, इसे लेकर मतभेद हैं। कोई पंजाब कहता है, कोई पूर्वी भारत। लेकिन उनका कार्यक्षेत्र पूरा भारतवर्ष रहा।
गोरखनाथ जी ने क्या किया? उन्होंने दो महान काम किये।
पहला - उन्होंने हठयोग को जन्म दिया। हठ मतलब - ह और ठ। ह मतलब सूर्य, ठ मतलब चंद्रमा। शरीर के अंदर सूर्य और चंद्र नाड़ियों को संतुलित करने की विद्या। आज की भाषा में कहें तो Body और Mind को साधने की सबसे वैज्ञानिक पद्धति। गोरक्ष संहिता, गोरक्ष शतक, सिद्ध सिद्धांत पद्धति जैसे ग्रंथ आज भी योग का आधार हैं।
दूसरा - उन्होंने नाथ समाज को संगठित किया। उन्होंने पूरे भारत में घूम-घूम कर 12 पंथों की स्थापना की।
और यहीं से नाथ समाज एक पंथ से एक विशाल समाज बन गया।
नाथ समाज के 12 पंथ और 18 वर्ण
दोस्तों, नाथ समाज कोई एक जाति नहीं है। ये एक विशाल वटवृक्ष है।
गोरखनाथ जी ने जिन 12 पंथों की स्थापना की, उनके नाम हैं:१. सत्यनाथी पंथ,२ . धर्मनाथीपंथ,३ . रामपंथ,४ . नाटेश्वरीपंथ,५. कंथड़पंथ,६. कपि लानी पंथ,७. वैराग्य पंथ,८. माननाथी पंथ,९. आई पंथ,१०.पागल पंथ,११. ध्वज पंथ,१२. गंगानाथी पंथ
हर पंथ का अपना अलग कार्य, अपनी अलग पहचान थी। कोई धूनी रमाता था, कोई राजाओं को उपदेश देता था, कोई आयुर्वेद का ज्ञाता था।
और 9 नाथ और 84 सिद्ध... ये इस परम्परा के स्तंभ हैं। 9 नाथों में गोरक्षनाथ, मत्स्येंद्रनाथ, जालंधरनाथ, कानिफनाथ जैसे महान योगी आते हैं।
इतिहास कैसे बदला?
अब आते हैं हमारे टाइटल पर - इतिहास कैसे बदला?
योग क्रांति: नाथ योगियों ने योग को गुफाओं से निकालकर आम आदमी तक पहुंचाया। उन्होंने कहा - हर इंसान योगी बन सकता है।
राजनीतिक शक्ति: आप जानकर हैरान होंगे, नेपाल का राजवंश खुद को गोरखनाथ जी का वंशज मानता था। जोधपुर, बीकानेर जैसे कई राज्यों के राजगुरु नाथ जोगी ही होते थे। राजा युद्ध पर जाता था तो नाथ योगी की भभूत लेकर जाता था।
सामाजिक क्रांति: नाथ पंथ ने जात-पात को कभी नहीं माना। उनका एक ही नारा था - "अलख निरंजन"। मतलब, जो दिखता नहीं, वही सत्य है। उनके यहाँ हर जाति, हर धर्म के लोग दीक्षित हो सकते थे। ये उस समय की सबसे बड़ी सामाजिक क्रांति थी।
साहित्य और भाषा: गोरखनाथ जी हिंदी साहित्य के पहले बड़े कवि माने जाते हैं। उन्होंने संस्कृत को छोड़कर आम जन की भाषा में उपदेश दिए।
दोस्तों, अगर आप यहाँ तक आ गए हैं, तो आपको ये इतिहास गर्व महसूस करा रहा होगा। तो इस गर्व को कमेंट में जरूर दिखाइए। कमेंट में लिखिए - "आदेश आदेश, जय बाबा गोरखनाथ" या "हर हर महादेव"
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नाथ समाज का वर्तमान
समय बदला, मुगल आए, अंग्रेज आए। नाथ समाज जो कभी राजगुरु था, धीरे-धीरे घुमंतू और अलख जगाने वाला समाज बन गया। आज नाथ समाज भारत, नेपाल, पाकिस्तान तक फैला हुआ है।
आज भी आप देखेंगे, नाथ समाज के लोग कान में कुंडल पहनते हैं - इसे दर्शन या मुद्रा कहते हैं। गले में काली ऊन का जनेऊ - जिसे सेली कहते हैं। हाथ में चिमटा, और कंधे पर झोली। ये सिर्फ वेश नहीं, ये एक पूरी योग परम्परा है।
आज नाथ समाज OBC में आता है और अपने हक और इतिहास को फिर से पहचान रहा है।
तो दोस्तों, नाथ समाज कोई साधारण समाज नहीं है। ये शिव की परम्परा है, योग की परम्परा है, त्याग की परम्परा है।
ये वो पंथ है जिसने सिखाया - भटको मत, अपने अंदर ही ईश्वर को खोजो।
मुझे उम्मीद है आज आपको नाथ समाज के गौरवशाली इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानने को मिला होगा।
इस वीडियो को अपने हर नाथ भाई तक शेयर जरूर करें। ताकि हर नाथ युवा को अपने इतिहास पर गर्व हो।
वीडियो को लाइक करें,
फिर मिलेंगे एक और गौरवशाली इतिहास के साथ। तब तक के लिए...
आदेश! आदेश! अलख निरंजन!
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