6.6.26

मिश्रोली मुक्तिधाम में जनसेवा का उदाहरण: डॉ. दयाराम आलोक का बेंच दान

 

मिश्रोली ग्राम का मुक्तिधाम, जहाँ टाइलों से सुसज्जित प्रांगण, हरित वृक्षों की छाया में शीतलता का वरदान

बरसात से बचाव हेतु विशाल बरामदा, श्रद्धांजलि का पावन स्थल, ग्राम पंचायत के संरक्षण में, सजता है यह पुण्य धाम।

समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक का अनुपम दान, सात सीमेंट बेंचों से सुसज्जित हुआ स्थान। दान पट्टिका अंकित कर सरपंच जगमाल सिंह जी ने, स्मृति को अमर बना दिया, और समाज को प्रेरणा का दीप जला दिया।

श्लोक-

दानं महत्तमं पुण्यं लोकहिताय समर्पितम्। आलोकस्य कृपाशीलं बेंचदानं शुभाय वै॥

लोकहित के लिए किया गया दान महान पुण्य है। डॉ. आलोक का करुणाशील बेंच‑दान समाज के कल्याण और शुभ के लिए है

राजस्थान के झालावाड़ जिले का एक गाँव मिश्रोली 

यहाँ के मुक्तिधाम  के परिसर मे टाइल्स लगी हुई हैं और आगंतुकों  के लिए गर्मी मे शीतलता  प्रदान करने के लिए पेड़ पौधे शोभित हैं। बरसात से बचाव और मृत आत्मा को श्रद्धांजलि  के लिए बडा  बरामदा  निर्मित है। 

मुक्तिधाम का रख रखाव  ग्राम पंचायत  के अधीन है। 

यहाँ के सरपंच जगमाल सिंग जी हैं। 

दागियों के लिए बैठक सुविधा सृजन करने के लिए समाजसेवी  डॉ . दयाराम जी आलोक ने इस मुक्तिधाम को 7 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की हैं। 

सरपंच साहब ने इस दान को यादगार बनाने के लिए दान दाता की  दान पट्टिका  बरामदे  के पिलर पर स्थापित कर दी है ताकि लोगों को दान की प्रेरणा मिलती रहेगी। 

दान के लिए आभार व्यक्त किया गया । 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयारा
म आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।





मिश्रोली के मुक्ति धाम को

21 हजार रु. की 7 बेंच भेंट .


मुक्तिधाम मे बेंच लगाई गईं.



 
 
मिश्रोली के सरपंच साहेब जगमाल सिंग जी की अनुमति से दान सम्पन्न । 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 शामगढ़ द्वारा दान सम्पन्न

चम्बल की गोद मे विराजमान पशुपति नाथ मंदिर ढलमु ,Dr. Dayaram Aalok का आध्यात्मिक दान‑पथ

 



श्री पशुपति नाथ मन्दिर जूना ढलमु जिला मंदसौर हेतु

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा

बैंच व्यवस्था

 काव्यात्मक छंद

छंद 1 चम्बल की गोद में विराजे, पशुपति नाथ महान। ढलमु ग्राम का गौरव मंदिर, भक्तों का कल्याण।। जगदीशचंद्र जी संरक्षक, सेवा में तत्पर सदा। दान पट्ट अंकित हुआ, समाजसेवा का ध्वजा।।

छंद 2 भागीरथ जी प्रबंधन प्रमुख, मंदिर की शोभा बढ़ाएँ। व्यवस्था की नींव मजबूत कर, श्रद्धा दीप जलाएँ।। भोनीराम जी पुजारी, पूजा में रत हर क्षण। भक्तों को आशीष प्रदान कर, करते मंगल वंदन।।

छंद 3 डॉ. दयाराम आलोक ने, दान दिया अनुपम। तीन सिमेन्ट बेंच और राशि, किया जनहित समर्पण।। समाजसेवा का दीप प्रज्वलित, मंदिर में छाया प्रकाश। दान पट्ट अंकित हुआ, श्रद्धा का अद्भुत आभास।।

छंद 4 ढलमु जूना की धरती पर, सेवा का अद्भुत गान। गौशालाएँ, मुक्ति धाम, मंदिर सबका कल्याण।। दानदाता का सम्मान हुआ, समिति ने आभार जताया। सामाजिक चेतना का दीप, जन-जन में जगमगाया।।

श्लोक 

पशुपतिनाथाय नमः सर्वलोकहिताय च। दानं यः समर्पयति, स पुण्यफलमश्नुते।।

जगदीशचन्द्रभागीरथभवानीरामसमन्विताः। मन्दिरस्य रक्षणाय, सेवायां नित्यनिरताः।।

आलोकदयारामेन दत्तं बेंचत्रयं शुभम्। जनसुविधाय समर्पितं, यशः कीर्तिर्विवर्धते।।

चम्बल तट पर मंदिर महान, पशुपतिनाथ का पावन स्थान। बरखा में जल जब चारों ओर, भक्तों को मिलता शांति का ठौर। डॉ. आलोक का दान अनूप, बेंचें बनीं सेवा स्वरूप। समर्पण से जन-सेवा का पथ, दान पट्टिका बने प्रेरणा-स्मृत।
चम्बल तट पर मंदिर महान, पशुपतिनाथ का पावन स्थान। बरखा में जल जब चारों ओर, भक्तों को मिलता शांति का ठौर। डॉ. आलोक का दान अनूप, बेंचें बनीं सेवा स्वरूप। समर्पण से जन-सेवा का पथ, दान पट्टिका बने प्रेरणा-स्मृत।



मंदसौर जिले   की तहसील  गरोठ  के अंतर्गत  ग्राम  ढलमु  जूना  स्थित है। 

यहाँ का  चमत्कारिक  पशुपतिनाथ मंदिर  चम्बल नदी की गोद  मे  प्रतिष्ठित  है। 

मंदिर के विशाल परिसर मे विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे  शोभा बढ़ा  रहे हैं 

सामाजिक कार्यकर्ता  जगदीश जी पाटीदार ने मंदिर मे बेंच व्यवस्था  का अनुरोध किया । 

समाजसेवी  डॉ  दयाराम जी  आलोक ने  तीन सिमेन्ट बेंच  और 1500/-की राशि समर्पित की 

भवानी राम जी पाटीदार मंदिर के मुख्य पुजारी हैं 

समिति ने अन्य समर्थ जनों को दान हेतु प्रेरित  करने के लिए दान दाता का दान पट्ट  मंदिर मे स्थापित किया 

दान दाता  का समारोहपूर्वक सम्मान किया आभार  व्यक्त किया। 

                                                           

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी   

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

          आध्यात्मिक दान- पथ 

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।



पशुपतिनाथ मंदिर जूना  ढलमु  को 

३ सीमेंट बेंच और १५०० नकद दान 



ढलमु मन्दिर में दान पट्टी लगी ४/३/२०२३ 


मन्दिर हेतु १५०० रुपये  कमल किशोर  जी पाटीदार  को फोन पे किये ५/३/२०२३ 


श्री पशुपतिनाथ  मंदिर चित्रावली 












पशुपति नाथ मन्दिर ढलमु का विडियो 





 डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656  शामगढ़   द्वारा  पशुपति नाथ  मन्दिर  ढलमु हेतु दान सम्पन्न| 10/3/2023 
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हनुमान मंदिर ढलमु मगरा :भक्ति का दीप :आस्था का समंदर :Aalok bench donation

 हनुमान मंदिर ढलमु मगरा 

✨ काव्यात्मक विवरण

ढलमु मगरा ग्राम का हनुमान मंदिर, भक्ति का दीप, आस्था का समंदर। भव्य प्रतिमा में पवनपुत्र विराजे, माँ चम्बल की धारा निकट सजाजे।

रंग-रोगन से मंदिर दमक रहा, श्रद्धा का दीपक हर मन में जग रहा। समिति प्रमुख श्री कमलेश जी विश्वकर्मा, सेवा में अग्रणी, मंदिर का धर्मा।

समर्पण से जुड़े जगदीश जी पाटीदार, भक्ति-पथ पर चलते, दान में अपार। डॉ. आलोक ने बेंचें भेंट कीं, भक्तों की सुविधा हेतु निधि दीं।

दान पट्टिका मंदिर में स्थापित हुई, प्रेरणा की ज्योति समाज में जगी। जय-जयकार गूँजे हर द्वार, “बोलिए पवनपुत्र हनुमान की जयकार!”


श्लोक-

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। ढलमु मगरा मंदिर में विराजे, भक्तों के संकट हरि कर साजे।

पवनपुत्राय वीराय भक्तानां सुखदायिने।

ढल्मु मग्रामध्ये नित्यं हनुमते नमः॥

दानधर्मे प्रतिष्ठायै कमलेश-जगदीशकौ।

आलोकस्य महादाने जयतु भक्तिसंविधिः॥

मंदसौर जिले मे गरोठ तहसील का ग्राम  ढलमु मगरा

यहाँ का हनुमान मंदिर ग्रामीण जन की आस्था का केंद्र है। 

हनुमान जी की भव्य प्रतिमा बहुत सुन्दर और आकर्षक है। 

मंदिर का रंग रोगन आकर्षक है । 

माँ चम्बल निकट बह रही है। 

मंदिर प्रबंधन  समिति के प्रमुख हैं श्री कमलेश जी विश्वकर्मा

डॉ . आलोक ने भक्तों की सुविधा के लिए cement  बेंचें   भेंट की  और मंदिर विकास हेतु 1500/-नकद दिए ।  

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को  दान के लिए प्रेरित करने की मंशा से  दान  दाता की दान पट्टिका  मंदिर मे स्थापित की 

बोलिए पवन पुत्र हनुमान की जय !

 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी
  डॉ. दयाराम आलोक 
                        

     


                                      
                                  


शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 हनुमान  मन्दिर ढल्मु मगरा


३ सीमेंट की बेंच+ १५००/- नकद दान 

हनुमान मन्दिर ढलमु मगरा  के पिलर पर शिलालेख 



कमलेश जी के खाते में मन्दिर हेतु १५००/- पेमेंट किये २४/४/२०२३ 




मन्दिर के प्रमुख कार्यकर्ता -

कमलेश जी विश्वकर्मा ९४०७१-१८४८३ 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा हनुमान मंदिर ढलमु मगरा   हेतु  सिमेन्ट बेंच व नकद  दान सम्पन्न 

28.5.26

श्रीहरि गौशाला सुवासरा गौ सेवा है कार्य महान :डॉ आलोक बेंच प्रदान: आगंतुक सुविधा सम्मान । Suwasra goushala

 

काव्यात्मक विवरण

सुवासरा की पावन भूमि पर, श्रीहरि गौशाला का गौरव खिला। गायों की सेवा, जल और घास की व्यवस्था, भक्ति और करुणा का संगम मिला।

अध्यक्ष भेरूसिंग जी देवड़ा ने नेतृत्व संभाला, संरक्षक प्रह्लाद जी रत्नावत ने संरक्षण का दीप जलाया। पत्रकार राजेन्द्र जी धनोतिया ने दान हेतु समाज को पुकारा, और जन-जन में सेवा का भाव जगाया।

इस पुकार पर समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपने आध्यात्मिक दान-पथ से चार सीमेंट बेंचें भेंट कीं। उनके पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर ने भी दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ से सहयोग बढ़ाया।

समिति ने दान पट्टिका स्थापित कर दानदाताओं का सत्कार और आभार किया। गौशाला के कर्मचारी कन्हैया लाल जी ने सेवा भाव से इस कार्य को आगे बढ़ाया।

श्लोक-

सुवासरायां पवित्रायां, श्रीहरिगौशाला शुभा। भेरूसिंहाध्यक्षेन, धर्ममार्गः प्रबोधितः॥ रत्नावतः प्रह्लादेन, रक्षणं धर्मसंयुतम्। धनोतियेन राजेन्द्रेण, दानस्य प्रेरणा कृता॥ आलोकदयारामेण, बेंचदानं समर्पितम्। अनिलेन च राठौरेण, सहयोगः सदा कृतः॥ कन्हैयालालकर्मणा, सेवायाः दीप उज्ज्वलः। गौशालायाः महात्म्यं, धर्मे नित्यं प्रवर्धते॥


 

श्रीहरि  गौशाला मेला ग्राउन्ड सुवासरा मे बैठक सुविधा हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट की बेन समर्पित 

सुवासरा की श्रीहरि  गौशाला  मे गौ सेवा  को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है| 

गौशाला का माहात्म्य बहुत अधिक है और यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। गौशाला एक ऐसी संस्था है जहां गायों और अन्य पशुओं की देखभाल की जाती है और उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

श्रीहरि गौशाला मे दान दाता  दामोदर पथरी चिकित्सालय की दान पट्टिका स्थापित की  गई 


श्रीहरि गौशाला  सुवासरा मे डॉ .अनिल  कुमार जी राठौर दामोदर शामगढ़ द्वारा 4 सिमेन्ट की बेंच लगवाई 



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

 आध्यात्मिक दान -पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

श्रीहरि गौशाला  सुवासरा मे 

4 सिमेन्ट की बेंच भेंट.29/12/2024 

गौशाला के  संरक्षक और शुभचिंतक -

अध्यक्ष: भेरूसिंग जी  देवड़ा 

प्रह्लाद जी रत्नावत 

 गौशाला कर्मचारी  -कन्हैया लाल जी 

दान की प्रेरणा _ राजेन्द्र जी धनोतिया  पत्रकार घसोई 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्रीहरि गौशाला सुवासरा हेतु हेतु  दान सम्पन्न 28/12/2024 

27.5.26

ब्रहमाणी माता मंदिर अंतरालिया :जहां गूँजती है श्रद्धा की घंटियां वहाँ आलोकजी का दिव्य योगदान:Brahmani Mata Temple Antaraliya

 

काव्यात्मक विवरण

अंतरालिया ग्राम की पावन धरा, चम्बल तट पर बसी सुनहरी गाथा। भानपुरा-बाबुल्दा से जुड़ी राहें, ले जातीं ब्रह्माणी माता के दरबार में।

मंदिर की शोभा रंग-रोगन से निखरी, भक्तों की आस्था यहाँ सदा बिखरी। राजू सोलंकी टेलर ने किया निवेदन, “बैठक सुविधा हो भक्तों के जीवन।”

समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक ने निभाया व्रत, दान-पथ पर बढ़ाया सेवा का रथ। राम दयाल पाटीदार समिति के प्रमुख, संभाले प्रबंधन, रहे मंदिर के सजग।

दान की परंपरा, सेवा का विस्तार, मंदसौर की धरती पर आलोक का उपहार। आध्यात्मिक पथ पर चलती यह ज्योति, भक्तों के लिए बनी बेंचें, सुख-सुविधा की होती।

श्लोक-

अंतरालियाग्रामे ब्रह्माण्यमाता प्रतिष्ठिता । राजुसोलंकीप्रार्थना, भक्तानां सुखसाधिका ॥ दयाराम आलोकस्य दानपथो महान् शुभः । रामदयालपाटीदारः समित्याः धर्मपालकः ॥

 मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का एक ग्राम है -  अंतरालिया 

यह गाँव  चम्बल नदी के समीप है। 

भानपूरा और बाबुल्दा से  अंतरालिया  जाने के लिए पक्की सड़क  है। 

यहाँ का ब्रहमाणी माता का मंदिर प्रसिद्ध है। 

मंदिर की बनावट और रंग रोगन उच्च कोटि  का है। 

गाँव के राजू भाई  सोलंकी टेलर ने इस मंदिर के लिए बेंचों की सुविधा  के लिए अनुरोध किया .

डॉ .दयाराम जी आलोक ने  भक्तों को सुविधा और सम्मान के लिए बेंचों की व्यवस्था कर दी है। 

राम दयाल जी पाटीदार  समिति के प्रमुख हैं। 



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक






शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 


अंतरालिया के ब्रहमाणी मंदिर
भक्तों के लिए बेंच व्यवस्था  

Antraliya ka brhmani mandir 



अंतरालिया के ब्रहमाणी मंदिर मे बेंच लगीं 11/11/2022

राजू सोलंकी टेलर 85179-23890 अंतरालिया का सुझाव 

मंदिर प्रबंधक राम दयाल जी पाटीदार 97557-47790 हैं 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल  98267-95656  शामगढ़ द्वारा  ब्रहमानी माता मंदिर अंतरालिया  हेतु दान सम्पन्न 11/11/2022


Dudhakhedi Mata Mandir Barkheda Gangasa: जहां सजता है माता का दरबार वहाँ बेंच का दिव्य योगदान :भक्तों को सुविधा सम्मान

 काव्यात्मक वर्णन

बरखेड़ा गांगासा ग्राम में, दूधाखेड़ी माता का धाम। श्रद्धा से झुकते जनमन, मिलता जीवन का वरदान।

सर्पदंश पीड़ित पाते, माता की कृपा से प्राण। भंडारे की गूँज निरंतर, भक्तों का होता कल्याण।

प्रांगण विशाल, शेड सुशोभित, सेवा का अद्भुत आयोजन। बदरीलाल जी फरक्या की, प्रबंधन में विशेष भूमिका सदा अमूल्य योगदान।

समाजसेवी आलोक जी ने, पाँच बेंचें दान कीं। भक्तों की सुविधा हेतु, श्रद्धा की ज्योति प्रज्वलित कीं।

दान-पट्ट अंकित हुआ, प्रेरणा का दीप जलाया। माँ नागणेचिया के आशीष से, आध्यात्मिक दान-पथ अपनाया

श्लोक 

बरखेड़ा ग्रामे प्रतिष्ठितं, दूधाखेड़ी मातामन्दिरम्। सर्पदंशे कृपां दत्त्वा, जनजीवनं पुनः प्रदम्॥ भंडारैः भक्तजनानां, सेवा सततं प्रवर्तते। फरक्या बदरीलालस्य, प्रबंधनं यशः वर्धते॥ पञ्च सिमेन्टबेंच दत्ताः, आलोकस्य कृपान्विताः। दानपथेन यशोदीपः, समाजे नित्यं दीप्यते॥

मंदसौर जिले  की तहसील गरोठ का ग्राम बरखेड़ा गाँगासा 

यहाँ का दूधाखेड़ी माता का मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। 

सर्पदंश पीड़ित लोगों को जीवन दान मिलता है  माता  की कृपा  से। 

प्रतिवर्ष हजारों लोगों का भंडारा आयोजन होता है। 

मंदिर के संरक्षक और प्रबंधक बदरीलाल जी फरक्या  की विशेष भूमिका रहती है। राय 

मंदिर का प्रांगण विशाल है। चद्दर के विशाल शेड मे लोग भंडारा  का लाभ लेते हैं । 

फरक्या जी ने भक्तों के लिए बेंच व्यवस्था का अनुरोध किया। 

शामगढ़ के समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने 5 सिमेन्ट की बेंचें  दान कीं 

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को दान के लिए प्रेरित करने हेतु  दान दाता  का दान पट्ट  मंदिर मे स्थापित किया । 




 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान- पथ

 कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से साहित्य मनीषी  डॉ.दयाराम आलोकजी  राजस्थान और मध्यप्रदेश के  आगर,मंदसौर,नीमच ,झालावाड़ ,कोटा और झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्ति धाम में निर्माण व विकास  हेतु नकद और  आगंतुकों के बैठने  हेतु  सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
 आलोकजी  एक  सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ  आध्यात्मिक दान-पथ  पर अग्रसर हैं . इसमे वो राशि भी शामिल है जो  आपको  google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| आपकी  ६ वेबसाईट पर google  विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% आपको मिलता है|  समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें  पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.


 

 

माँ दूधाखेड़ी मंदिर बरखेड़ा गांगासा हेतु 
 5 सिमेन्ट बेंच भेंट 

अंकितजी ने नेम प्लेट लगाकर फोटो भेजा 
माँ दूधाखेड़ी मंदिर बरखेड़ा का चित्र
Dudhakhedi mata mandir bench donation   8/9/2022
बरखेड़ा गांगासा के दुधाखेड़ी माताजी के मंदिर का विडियो 
बरखेड़ा गांगासा की माँ दुधाखेड़ी के मंदिर मे बेंच लगीं 8/9/2022

अंकित जी फरक्या 84589-54116 का सहयोग 

बदरीलाल  परमार टेलर  82694-40534 का सुझाव 

बद्री लाल जी फरक्या 99260-43873 मंदिर प्रबंधन के अध्यक्ष हैं.

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 आत्मज  डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल   98267-95656,शामगढ़   द्वारा दूधाखेड़ी माताजी  मंदिर बरखेड़ा गांगासा हेतु दान सम्पन्न