21.5.26

मंशापूर्ण हनुमान मंदिर देथली बुजुर्ग : जहां होती है मन्नते पूरी वहाँ आलोकजी का दिव्य दान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Dethali Hanuman Mandir

 

✨ काव्यात्मक वर्णन

देथली बुजुर्ग ग्राम में, मंशापूर्ण हनुमान विराजे। लाल पथरों से सजा मंदिर, भक्ति की ज्योति यहाँ आजे॥

रामसिंह मीना पटेल रक्षक, भवानी शंकर शुभेच्छुक साथ। शिवलिंग की विशाल रचना, धर्म का दीपक जगमग रात॥

जगदीश पाटीदार ने पुकारा, बैठक सुविधा का विस्तार। डॉ. आलोक ने दान दिया, तीन बेंचें और धन अपार॥

दान-पट्टिका मंदिर में चमके, प्रेरणा का संदेश जगाए। जय-जयकार गूँजे गाँव में, मंशापूर्ण हनुमान जी की जय॥

श्लोक 

देथलीग्रामे हनुमानः, मंशापूर्णः प्रतिष्ठितः।  

लालश्मशाने निर्मितं, भक्तानां श्रद्धया युतम्॥  


दानं दत्तं बेंचत्रयं, सह सहस्रपञ्चशतैः।  

आलोकस्य महादाने, धर्ममार्गः प्रकाशितः॥  

मंदसौर जिले की गरोठ तहसील का ग्राम देथली  बुजुर्ग 

मंशापूर्ण हनुमान मंदिर इस गाँव मे धार्मिक श्रद्धा का केंद्र बिन्दु है। 

मंदिर निर्माण  मकराना के लाल पथरों से हुई है जो बेहद आकर्षक  है। 

रामसिंगजी मीना पटेल मंदिर के सरंक्षक हैं . 

भवानी शंकर जी धाकड़  मंदिर के शुभेच्छुक हैं। 

मंदिर मे शिवलिंग की विशाल रचना  है। 

मंदिर मे  निम्न जातियों के लोगों  को प्रवेश की मांग उठाई जाती रही है। 

मंदिर मे बैठक सुविधा विस्तार हेतु ढलमु के जगदीश जी पाटीदार ने  मुझे  फोन कर सिमेन्ट बेंचें और आर्थिक सहयोग  करने का अनुरोध किया । डॉ . दयाराम जी आलोक ने मंदिर को 3 सिमेन्ट बेंचें और 1500/-नकद दान दिया। 

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को दान के लिए प्रेरित करने के भाव से दान दाता  की दान पट्टिका  मंदिर मे स्थापित की है। 

बोलिए देथली के मंशापूर्ण हनुमान जी की जय । 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक


शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


मंशापूर्ण  हनुमान  मन्दिर देंथली बुजुर्ग

तीन बेंच+१५००/- दान 


video Manshapurn Hanuman Denthli 



मन्दिर  के लिए १५००/- का दान 


मन्दिर में बेंच लगीं १८/४/२०२३ 


हनुमान मन्दिर के प्रमुख कार्यकर्ता :

रामसिंग जी  मीणा पटेल ९७५४७-१५७९१  देंथली

भवानी शंकर जी धाकड़ 

दान का सुझाव  देने वाले जगदीश जी पाटीदार  ढलमु

20.5.26

मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग :जहां रूह को शांति मिले वहाँ आलोकजी का सुन्दर योगदान :दागियों को सुविधा सम्मान :Muktidham bus stand dag


ग नगर का मुक्तिधाम,

शांति, सुकून का पावन धाम।

हरे-भरे वृक्षों की छाया,

मन को देती निर्मल माया॥


डगेश्वरी माता की कृपा,

नगर में फैली शुभ तपस्या।

दान-पथ पर आलोक जी चले,

सेवा से जीवन को उजले॥


सीमेंट बेंचें, सुविधाएँ न्यारी,

जन-कल्याण की छवि है प्यारी।

पेंशन को समाज हेतु समर्पित,

मानवता का दीपक प्रज्वलित॥


मंदसौर, नीमच, रतलाम में,

दान की गूँज हर धाम में।

गौशालाएँ, मंदिर, मुक्तिधाम,

आलोक जी का अनुपम काम॥


दान पट्टिका से प्रेरणा फैली,

समाज सेवा की राह निकली।

सच्चा दान वही कहलाए,

जो जनहित में फलित हो जाए॥

श्लोक -

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना।

आलोकस्य करुणा ज्योति, जनहिताय समर्पिता॥


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक


शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 डग के बस स्टेंड स्थित मुक्तिधाम हेतु



15000 हजार  रुपये नकद + 6 सीमेंट बेन्च

मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग का विडिओ आलोक की आवाज 




मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग का विडिओ आलोक की आवाज 


डग के बस स्टैंड वाले मुक्ति धाम का विडियो आलोक की आवाज में 

                                                            




सौरभ कुमार जी पँवार ९७९९५-७०००० डग की पहल

राधेशाम जी पँवार टेलर डग 

मुक्तिधाम का प्रबंधन रोहित जी जैन करते हैं.


 


18.5.26

हनुमान मंदिर :ढलमु मगरा पावन धाम :आलोकजी का दिव्य योगदान: भक्तों को सुविधा सम्मान :Dhalmu Magra mandir


ढलमु मगरा की पावन धरती, जहाँ आस्था का दीप प्रज्वलित है। हनुमान जी की भव्य प्रतिमा, भक्तों के हृदय में अमरित है।

माँ चम्बल की निर्मल धारा,

मंदिर के समीप बहती है। दान-पथ पर आलोक जी का संकल्प, समाज सेवा में रमता है।

श्लोक-

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। ढलमु मगरा मंदिर में विराजे, भक्तों के संकट हरि कर साजे।


मंदसौर जिले मे गरोठ तहसील का ग्राम  ढलमु मगरा

यहाँ का हनुमान मंदिर ग्रामीण जन की आस्था का केंद्र है। 

हनुमान जी की भव्य प्रतिमा बहुत सुन्दर और आकर्षक है। 

मंदिर का रंग रोगन आकर्षक है । 

माँ चम्बल निकट बह रही है। 

मंदिर प्रबंधन  समिति के प्रमुख हैं श्री कमलेश जी विश्वकर्मा

डॉ . आलोक ने भक्तों की सुविधा के लिए 3 बेंच  भेंट की  और मंदिर विकास हेतु 1500/-नकद दिए ।  

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को  दान के लिए प्रेरित करने की मंशा से  दान  दाता की दान पट्टिका  मंदिर मे स्थापित की 

बोलिए पवन पुत्र हनुमान की जय !

 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी
  डॉ. दयाराम आलोक 
                        

     


                                      
                                  


शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 हनुमान  मन्दिर ढल्मु मगरा


३ सीमेंट की बेंच+ १५००/- नकद दान 

हनुमान मन्दिर ढलमु मगरा  के पिलर पर शिलालेख 



कमलेश जी के खाते में मन्दिर हेतु १५००/- पेमेंट किये २४/४/२०२३ 




मन्दिर के प्रमुख कार्यकर्ता -

कमलेश जी विश्वकर्मा ९४०७१-१८४८३ 

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16.5.26

बाबा रामदेव मंदिर निपानिया -मेलखेड़ा : लोक देवता उज्वल धाम :डॉ . आलोक बेंच प्रदान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Ramdev Nipaniya

निपानिया का पावन धाम, रामदेव जी का जग में नाम। तीन बेंचें दान स्वरूप मिलीं, नकद राशि से सेवा खिली।

दामोदर अस्पताल का योगदान, भक्तों के सुख का संधान। शिलालेख मंदिर में स्थापित हुआ, समाज में प्रेरणा का दीप जला।

श्लोक -

रामदेवस्य मंदिरं दिव्यम्, निपानियायां ग्रामे स्थितम्। दामोदरात् प्रदत्तं दानं, भक्तानां सुखवर्धनम्॥ दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना। आलोककुलात् प्रदत्तं, समाज हिताय साधना॥



मंदसौर जिले का एक ग्राम है  निपनिया जो  शामगढ़ और मेलखेड़ा के नजदीक है 

गाँव छोटा है लेकिन यहाँ का राम मंदिर अनोखा है। 

बाबा रामदेव हिन्दू जन जन के आराध्य देवता माने जाते हैं 

प्रांगण विशाल है और टाइल्स से सुसज्जित है। 

परागण मे  सामाजिक  कार्यक्रम आयोजित होते  हैं । 

बगदीराम जी शर्मा ने इस मंदिर मे दान का सुझाव दिया 

मंदिर मे दान दाता  की दान पट्टिका स्थापित की गई 

दामोदर अस्पताल शामगढ़ की तरफ से 3 सिमेन्ट बेंच और 1500/- नकद दान किया गया  । 

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम आलोक                              

     


                                      
                                  


शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


 श्री रामदेव मन्दिर  निपानिया (शामगढ़) 

३ बेंच+१५००/- नकद दान 


mandir ke liye liye 1500/- ka payment 


बाबा राम देव मंदिर निपनिया का विडिओ 



नारायणसिंग जी सौन्धिया ९९८१९५६३९५  निपानिया  मन्दिर  कार्यकर्ता 

श्याम सिंग जी पंडा ९७५५३०२३४७ मन्दिर  के पुजारी 

बगदीराम जी शर्मा ९६६९४-२७४२६ 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656  शामगढ़ द्वारा  श्री रामदेव मंदिर  निपानिया हेतु दान सम्पन्न 10/1/2023 

हनुमान मंदिर ग्राम पिंछला :जहां होती है मुरादें पूरी वहाँ डॉ. आलोक का दिव्य योगदान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Pinchala Hanuman Mandir

 मंदसौर जिले के अंतर्गत गाँव पिंछला 

पहाड़ी पर हनुमान जी का सुन्दर मंदिर 

संकट मोचक हनुमान मंदिर 

डॉ. आलोकजी की तरफ से बैठक व्यवस्था के लिए सिमेन्ट बेंचें और 1500/- नकद दान 


पिंछला गाँव की पावन पहाड़ी, हनुमान मंदिर की शोभा न्यारी। संकटमोचक का दिव्य धाम, भक्तों के मन में जगाता विश्वास तमाम।

डॉ. आलोक का दान अनोखा, बेंचों से मिला विश्राम सदा। १५०० नकद संग तीन बेंचें, श्रद्धा का दीप जला निरंतर।

शिलालेख में अंकित नाम, सेवा का अद्भुत यह आयाम। मंदसौर से फैली पुण्य धारा, समाजसेवा का उज्ज्वल नजारा।

श्लोक-

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा लोकहिताय च। पिंछला हनुमद् धामे, आलोकस्य कृपा सदा॥


हनुमान  मन्दिर पिंछ्ला (शामगढ़)

  3 cement बेंच +१५००/- नकद)

शिलालेख लगाया गया 



मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक





शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।




मंदिर के शुभचिंतक :

बगदीराम जी शर्मा 96694-27426 मन्दिर के मुख्य पुजारी हैं 

शंकर लाल जी  90091-71616 

घनश्याम जी  परमार 97537-24369 

15.5.26

मुक्तिधाम पिडावा :जहाँ रूह को मिले शांति, वहीं डॉ. आलोक ने दिया सम्मान; एक प्रेरणादायी बदलाव:Muktidham Pidawa

  झालावाड़  जिले का पिडावा  कस्बा 

मुक्तिधाम मे बेंच  व्यवस्था 

डॉ . आलोक का पावन दान 


पेंशन का पुण्य पथ, आलोक जी ने साधा,  

दान से जग में फैला, सेवा का इरादा।  


मुक्तिधाम में बेंचें, श्रद्धा से सजाईं,  

थके हुए जनों को, विश्राम की छाँव दिलाईं।  


झालावाड़ से मंदसौर तक, सेवा का विस्तार,  

गौशालाएँ, मंदिर, धाम—सबमें आलोक अपार।  


शामगढ़ का दान-पथ, प्रेरणा का दीप बने,  

समाजसेवा की गाथा, युगों तक जीवित रहे।  

श्लोक -

दानं धर्मस्य साधनं, लोकहिताय शुभं सदा।  
आलोकस्य कृपायुक्तं, पुण्यं तिष्ठतु सर्वदा॥  

मुक्तिधामे बेंचदानं, जनसेवा महोदयम्।  
श्रद्धया यः करोत्येव, स पुण्यफलमश्नुते॥  


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


पिडावा के मुक्तिधाम हेतु 
 5  सिमेन्ट  बेंच भेंट 

मुक्तिधाम के पिलर पर नेम प्लेट लगी /19/8/2022 




pidawa muktidham video बेंच लगीं 25/9/2022
पीडावा मुक्तिधाम मे बेंच लगीं 25/9/2022



सुनील जी शर्मा अध्यापक 97851-39832  पिड़वा की पहल 

पिंकेशजी भावसार 99293-95221 पीड़ावा मुक्तिधाम अध्यक्ष हैं 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा पिडावा के मुक्तिधाम हेतु  दान सम्पन्न