✨ काव्यात्मक वर्णन
देथली बुजुर्ग ग्राम में, मंशापूर्ण हनुमान विराजे। लाल पथरों से सजा मंदिर, भक्ति की ज्योति यहाँ आजे॥
रामसिंह मीना पटेल रक्षक, भवानी शंकर शुभेच्छुक साथ। शिवलिंग की विशाल रचना, धर्म का दीपक जगमग रात॥
जगदीश पाटीदार ने पुकारा, बैठक सुविधा का विस्तार। डॉ. आलोक ने दान दिया, तीन बेंचें और धन अपार॥
दान-पट्टिका मंदिर में चमके, प्रेरणा का संदेश जगाए। जय-जयकार गूँजे गाँव में, मंशापूर्ण हनुमान जी की जय॥
श्लोक
देथलीग्रामे हनुमानः, मंशापूर्णः प्रतिष्ठितः।
लालश्मशाने निर्मितं, भक्तानां श्रद्धया युतम्॥
दानं दत्तं बेंचत्रयं, सह सहस्रपञ्चशतैः।
आलोकस्य महादाने, धर्ममार्गः प्रकाशितः॥
मंदसौर जिले की गरोठ तहसील का ग्राम देथली बुजुर्ग
मंशापूर्ण हनुमान मंदिर इस गाँव मे धार्मिक श्रद्धा का केंद्र बिन्दु है।
मंदिर निर्माण मकराना के लाल पथरों से हुई है जो बेहद आकर्षक है।
रामसिंगजी मीना पटेल मंदिर के सरंक्षक हैं .
भवानी शंकर जी धाकड़ मंदिर के शुभेच्छुक हैं।
मंदिर मे शिवलिंग की विशाल रचना है।
मंदिर मे निम्न जातियों के लोगों को प्रवेश की मांग उठाई जाती रही है।
मंदिर मे बैठक सुविधा विस्तार हेतु ढलमु के जगदीश जी पाटीदार ने मुझे फोन कर सिमेन्ट बेंचें और आर्थिक सहयोग करने का अनुरोध किया । डॉ . दयाराम जी आलोक ने मंदिर को 3 सिमेन्ट बेंचें और 1500/-नकद दान दिया।
समिति ने अन्य समर्थ लोगों को दान के लिए प्रेरित करने के भाव से दान दाता की दान पट्टिका मंदिर मे स्थापित की है।
बोलिए देथली के मंशापूर्ण हनुमान जी की जय ।
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

मंशापूर्ण हनुमान मन्दिर देंथली बुजुर्ग


















