बरखेड़ा राठौर के पावन धाम में सेवा का एक और दीप
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का छोटा सा किन्तु आस्था से परिपूर्ण गाँव बरखेड़ा राठौर। यहाँ स्थित है जन-जन के आराध्य श्री काला स्वामी मंदिर। यह केवल एक मंदिर नहीं, सर्पदंश से पीड़ितों के लिए आस्था और उपचार का पावन धाम है, जहाँ नागदेवता की विशाल प्रतिमा फन उठाए भक्तों की रक्षा का आशीर्वाद देती है और पुजारी जी की झाड़ा-परम्परा आज भी जीवित है।
इसी पावन धाम में भक्तों की सुविधा के लिए एक छोटा सा किन्तु हृदय से बड़ा कार्य सम्पन्न हुआ है - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा 3 सीमेंट की बेंचों की भेंट।
बरखेडा राठौर के पावन धाम,
श्री काला स्वामी मंदिर का नाम।
दामोदर पथरी अस्पताल का दान,
भक्तों हेतु बेंचों का सम्मान।
यह दान किसी एक संस्था का नहीं, एक जीवन-दर्शन का प्रतीक है - डॉ. दयाराम आलोक जी का आध्यात्मिक दान-पथ।
डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद भोग नहीं, त्याग का मार्ग चुना। उनका संकल्प है -
डॉ. दयाराम आलोक का तपस्वी मार्ग,
सेवा-संस्कार से आलोकित हर आँगन।
पेंशन की राशि, ब्लॉग की कमाई,
दान-पथ पर सब समर्पित कराई।
उन्होंने अपनी 5 वर्ष की सम्पूर्ण पेंशन राशि और साथ ही ब्लॉग तथा यूट्यूब से प्राप्त गूगल आय को समाज कल्याण में समर्पित करने का व्रत लिया है। अपने सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार दामोदर के साथ मिलकर वे इस कार्य को दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के नाम से कर रहे हैं।
उनका यह दान-पथ एक गाँव या एक जिले तक सीमित नहीं है। जैसा कि इस लेख में विस्तार से वर्णित है, उनका सेवा-विस्तार -
मंदसौर, नीमच, रतलाम, झालावाड़,
मुक्तिधाम, मंदिर, गौशाला विस्तार।
मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झाबुआ और राजस्थान के झालावाड़ सहित अनेक जिलों तक फैला है। अब तक 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में उन्होंने सीमेंट बेंचें, रंग-रोगन और बैठक सुविधा विस्तार जैसे मूलभूत किन्तु अत्यंत उपयोगी कार्य करवाए हैं। वृद्धों, यात्रियों और दर्शनार्थियों को बैठने के लिए स्वच्छ और स्थायी स्थान मिले, यही उनका सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण है।
इसी शृंखला में प्रस्तुत है श्री काला स्वामी मंदिर, बरखेड़ा राठौर में 3 सीमेंट बेंचों का दान, जो दिनांक 23/10/2023 को सम्पन्न हुआ। इस ब्लॉग लेख में आपको मंदिर का वीडियो, बेंचों पर बैठे भक्तगण, दान पट्टिका का नमूना, गूगल नक्शे पर मंदिर की स्थिति और इस कार्य की सम्पूर्ण झलक मिलेगी।
इस सेवा-यज्ञ के मर्म को हमारे शास्त्रों ने यों कहा है -
दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना।
आलोकस्य कृपायुक्तं, समाज हिताय साधना॥
मंदिरेषु मुक्तिधामेषु, गौशालासु च सर्वदा।
बेंचदानं समर्प्यैव, भक्तानां सुखवर्धनम्॥
पेंशनं समर्प्यैव, गूगल लाभं च योजितम्।
अनिलेन सह दत्तं, दामोदर पथरी नाम्ना॥
अंत में, यह दान केवल बेंचें नहीं, प्रेरणा है। दान-पट्टिका लगाकर पारदर्शिता बनाए रखना और दूसरों को भी जनकल्याण के लिए प्रेरित करना - यही समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक के आध्यात्मिक दान-पथ की प्रमुख विशेषता है।
आइये, इस लेख के माध्यम से इस पावन सेवा-यात्रा के साक्षी बनें।
बरखेडा राठौर के पावन धाम, श्री काला स्वामी मंदिर का नाम। दामोदर पथरी अस्पताल का दान, भक्तों हेतु बेंचों का सम्मान।
डॉ. दयाराम आलोक का तपस्वी मार्ग, सेवा-संस्कार से आलोकित हर आँगन। पेंशन की राशि, ब्लॉग की कमाई, दान-पथ पर सब समर्पित कराई।
मंदसौर, नीमच, रतलाम, झालावाड़, मुक्तिधाम, मंदिर, गौशाला विस्तार। सीमेंट बेंचें, रंग-रोगन का दान, १५१ संस्थानों में सेवा महान।
shlok-
दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना। आलोकस्य कृपायुक्तं, समाज हिताय साधना॥ मंदिरेषु मुक्तिधामेषु, गौशालासु च सर्वदा। बेंचदानं समर्प्यैव, भक्तानां सुखवर्धनम्॥ पेंशनं समर्प्यैव, गूगल लाभं च योजितम्। अनिलेन सह दत्तं, दामोदर पथरी नाम्ना॥
आद्यात्मिक दान-पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
दानपट्टिका का नमूना
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा
श्री काला स्वामी मंदिर बरखेडा राठौर हेतु दान सम्पन्न २३/१०/२०२३
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -






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