30.5.23

मुक्ति धाम रामपुरा नाका -2 :जहाँ रूह को मिले शांति, वहीं डॉ. आलोक ने दिया सम्मान; एक प्रेरणादायी बदलाव:muktidham Rampura

मुक्ति धाम नाका-2 रामपुरा 
के लिए दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ 
द्वारा 5 बेंच और 2001 /-नकद दान 

जहाँ रूह को मिले शांति का स्थान, वहीं आलोक ने दिया सम्मान। पेंशन समर्पित, सेवा महान, मुक्तिधाम में हुआ परिवर्तन जान।

सुरेशजी ने पट्ट लगाया, दानदाता का नाम जगमगाया। रामपुरा की धरती पर छाया, मानवता का दीप जलाया।

श्लोक-

यत्र रूहः शान्तिम् लभते, तत्र मान्यम् ददौ आलोकः। प्रेरणादायी परिवर्तनं, मानवता-सेवा-समर्पणम्॥ सुरेशेन मकवानेन, पावनं दानं स्मृत्यर्थम्। दानदातुः पट्टः स्थाप्यः, प्रेरणां जनयिष्यति॥ जीवनस्य सत्यं मृत्युर्नाम, तत्र शान्तिप्रदं स्थलम्। आलोकस्य करुणा-कार्येण, मुक्तिधामं सुशोभितम्॥





"यत्र रूहः शान्तिम् लभते, तत्र मान्यम् ददौ आलोकः।
प्रेरणादायी परिवर्तनं, मानवता-सेवा-समर्पणम्॥"

संस्कृत श्लोक

"सुरेशेन मकवानेन, पावनं दानं स्मृत्यर्थम्।
दानदातुः पट्टः स्थाप्यः, प्रेरणां जनयिष्यति॥"

भावार्थ: सुरेशजी मकवाना ने इस पावन दान को यादगार बनाने हेतु दानदाता (डॉ. आलोक) का दान पट्ट स्थापित किया है, जिससे समाज में दान की प्रेरणा निरंतर मिलती रहेगी।
"जीवनस्य सत्यं मृत्युर्नाम, तत्र शान्तिप्रदं स्थलम्।
आलोकस्य करुणा-कार्येण, मुक्तिधामं सुशोभितम्॥"
(जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, परंतु डॉ. आलोक के करुणामय कार्य से मुक्ति धाम सुंदर और शांतिपूर्ण बना।
"जहाँ रूह को मिले शांति, वहीं डॉ. आलोक ने दिया सम्मान; एक प्रेरणादायी बदलाव।"
जीवन का अंतिम सत्य 'मृत्यु' है, लेकिन जहाँ सांसें थम जाती हैं, उस स्थान को सम्मान और शांतिपूर्ण वातावरण देना एक पुनीत कार्य है। रामपुरा (Rampura) के मुक्ति धाम की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। यहाँ सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं हुआ, बल्कि अंतिम यात्रा पर आने वाले परिजनों के लिए सम्मान और सुविधा के प्रबंध किए गए हैं। सुरेशजी मकवाना ने इस पावन दान को यादगार बनाने के लिए दान दाता का दान पट्ट स्थापित किया ,इससे लोगों को दान की प्रेरणा मिलती रहेगी
                                             

रामपुरा नगर के मुक्ति धाम  नाका-२ के निमित्त

 डॉ दयाराम जी आलोक का दान 

रामपुरा शहर का अतीत गौरवशाली रहा है। गाँधीसागर बांध बनने के बाद आस पास के गाँव डूब मे आ जाने से रामपुरा के धंधे व्यवसाय चौपट हो गए । बड़े व्यवसायी रामपुरा छोड़कर अन्य जगह पलायन कर गए। अब रामपुरा का वैभव आहिस्ता आहिस्ता लौट रहा है। रामपुरा शहर मे मुख्य रूप से दो मुक्ति धाम हैं |पहिला गांधी सागर रोड पर है और दूसरा नाका नंबर 2 का है। मुझे लगा कि दोनों ही मुक्ति धाम मे बैठक सुविधा उन्नत करने की आवश्यकता है। सामाज सेवी सुरेश कुमार जी मकवाना से जानकारी लेकर मैंने अपने आध्यात्मिक दान-पथ के सिलसिले मे कैलाशजी फरक्या और जीतू भाई जैन से संपर्क किया । दान -पट्टिकाऐं यथास्थान लगने के बाद डॉ . अनिल कुमार राठौर ,दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से प्रत्येक मुक्ति धाम को 5-5 बेंचें और दो -दो हजार नकद दान समर्पित करते हुए दान संपन्न किया ।रामपुरा  मे गायत्री शक्तिपीठ अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है. समिति बनी हुई है | मुख्य व्यवस्थापक मदन लाल जी मंडवारिया  से  संपर्क किया और मंदिर को 5 बेंच और 2 हजार नकद का दान समर्पित किया । तीनों संस्थानों की समितियों द्वारा दान दाता का आभार ज्ञापित किया गया . 

  समाजसेवी  सुरेशजी मकवाना  लिखते हैं-"डॉ दयाराम आलोक जी का यह कार्य वास्तव में प्रशंसनीय है! उन्होंने अपनी दान भावना को साकार करते हुए अपनी पूर्व कर्म भूमि रामपुरा नगर के गायत्री मंदिर और नगर के दोनों मुक्तिधाम में सीमेंट की बेंच दान की है, जिससे श्रद्धालुओं और नगर के नागरिकों को सुविधा होगी।इसके अलावा, 1981 में दर्जी समाज का प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन का सफल आयोजन करना भी एक महत्वपूर्ण कार्य है, जिससे समाज में एकता और सौहार्द को बढ़ावा मिला |
  रामपुरा नगर के नागरिक समाज को डॉ आलोक जी की सेवाओं का स्मरण होना जरूरी है , क्योंकि उन्होंने अपने जीवन को समाज की सेवा में समर्पित किया है। उनका यह कार्य एक मिसाल है जो दूसरों को भी समाज के लिए 
कुछ करने के लिए प्रेरित कर सकता है।डॉ आलोक जी को उनके इस कार्य के लिए धन्यवाद और अभिनंदन"     

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 मुक्ति धाम नाका -२ रामपुरा 

17551/-  का दान (५ बेंच+२०००/-नकद) 




मुक्ति धाम नाका-2  के शुभ चिंतक 

सुरेश जी मकवाना ९४०६८-५९०१६ 

जीतू भाई जैन ९९०७९-१९४०६ मुक्ति धाम प्रबंधक हैं|

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