लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। सनातन आध्यात्म -जाति इतिहास-दान विमर्श : माँ आशापुरा मंदिर : गेलना रूंडी गैलाना विराजित :चौहान वंश कुलदेवी :आलोक का पावन आसन दान

23.5.23

माँ आशापुरा मंदिर : गेलना रूंडी गैलाना विराजित :चौहान वंश कुलदेवी :आलोक का पावन आसन दान



नमस्कार, जय माँ आशापुरा!



माँ आशापुरा की महिमा अपरम्पार है। वे आशा को पूर्ण करने वाली, भक्तों की सिद्धिदायिनी हैं। राजस्थान की सांभर लेक सिटी में आज से लगभग 1300 वर्ष पूर्व स्थापित उनका प्रथम मंदिर इस बात का साक्षी है कि माँ आशापुरा चौहान वंश की कुलदेवी, सोनगरा चौहान वंश की आराध्य देवी के रूप में युगों-युगों से पूजित हैं।
इसी दिव्य परम्परा को आगे बढ़ा रहा है, मध्यप्रदेश-राजस्थान की सीमा पर स्थित रुंडी गेलाना का पावन धाम - माँ आशापुरा मंदिर। यहाँ भक्तों की अटूट आस्था तो है ही, साथ ही मंदिर समिति की निस्वार्थ सेवा भी इस धाम को नित्य शोभायमान कर रही है। इस सेवा के प्रमुख आधार स्तंभ हैं मंदिर के प्रमुख व्यवस्थापक श्री महेंद्र सिंग जी देवरिया विजय, प्रबंधक और श्री करण सिंग जी गोरधनपुरा, अध्यक्ष - जिनकी तत्परता से यह धाम सेवा और श्रद्धा का संगम बना है।
 आध्यात्मिक दान-पथ]
धार्मिक संस्थानों में दर्शनार्थियों के बैठने हेतु सीमेंट बेंचों की व्यवस्था करना महान पुण्य का कार्य है। इसी भावना को एक पवित्र अनुष्ठान के रूप में साकार कर रहे हैं शामगढ़ के साहित्य मनीषी, समाजसेवी और सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक।
डॉ. आलोक जी ने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को दान करने के पवित्र संकल्प के साथ, अपने ब्लॉग और YouTube चैनल से प्राप्त राशि को मिलाकर, एक विराट सेवा-यज्ञ प्रारंभ किया है। इस यज्ञ के अंतर्गत राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में नकद दान और सैकड़ों सीमेंट बेंचें भेंट की जा रही हैं। यह समस्त दान पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ के माध्यम से समर्पित हो रहा है।
इसी आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है - माँ आशापुरा मंदिर, रुंडी गेलाना में किया गया सेवा-समर्पण।
मंदिर समिति से संपर्क स्थापित कर, डॉ. अनिल कुमार राठौर के माध्यम से दिनांक 16 नवम्बर 2022 को माँ के चरणों में -
1. श्रद्धालुओं के बैठने और ध्यान हेतु 5 सीमेंट बेंचें
2. मंदिर परिसर के विश्राम कुटी के रंग-रोगन हेतु 5,000 रुपये नकद दान
समर्पित किए गए।
दान की इस पवित्र भावना का सम्मान करते हुए मंदिर समिति ने दिनांक 21 दिसम्बर 2022 को दान पट्टिका स्थापित की और दिनांक 22 दिसम्बर 2022 को आशापुरा माता के सेंट्रल बैंक अकाउंट में 5 हजार रुपये जमा कर विश्राम गृह पर अत्यंत आकर्षक रंग-रोगन का कार्य संपन्न करवाया।
आज वे 5 सीमेंट बेंचें मंदिर में सुखद आसन के रूप में श्रद्धालुओं को विश्राम दे रही हैं।
दान ही धर्म का मूल है। तो आइए, इस ब्लॉग लेख के माध्यम से इस सेवा-यात्रा के दर्शन करें, और जानें कि कैसे पेंशन-दान से उपजा यह पुण्य-प्रवाह समाज के लिए प्रेरणा बन रहा है।
जय हो माँ आशापुरा रुंडी गेलाना वाली!



माँ आशापुरा मंदिर, रुंडी गेलाना - श्रद्धा, सेवा और दान का संगम

माँ आशापुरा की महिमा अपरम्पार है। वे भक्तों की आशा को पूर्ण करने वाली, सिद्धि दायिनी हैं। राजस्थान की सांभर लेक सिटी में लगभग 1300 वर्ष पूर्व स्थापित उनका प्रथम मंदिर इस बात का साक्षी है कि माँ आशापुरा चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में, सोनगरा चौहान वंश की आराध्य देवी के रूप में युगों-युगों से पूजित हैं।

इसी दिव्य परम्परा को आगे बढ़ाता है, रुंडी गेलाना स्थित माँ आशापुरा का पावन धाम। जहाँ भक्तों की आस्था तो है ही, साथ ही मंदिर समिति की निस्वार्थ सेवा भी इस धाम को नित्य शोभायमान कर रही है।

#### एक संकल्प - आध्यात्मिक दान-पथ

धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थानों में दर्शनार्थियों के बैठने हेतु सीमेंट बेंचों की व्यवस्था करना महान पुण्य का कार्य है। इसी भावना को साकार कर रहे हैं शामगढ़ के साहित्य मनीषी, समाजसेवी और सेवानिवृत्त अध्यापक **डॉ. दयाराम जी आलोक।**

डॉ. आलोक जी ने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को दान करने के पवित्र संकल्प के साथ, साथ ही अपने ब्लॉग और You Tube चैनल से प्राप्त राशि को मिलाकर, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में नकद दान और सैकड़ों सीमेंट बेंचें भेंट करने का अनुष्ठान गतिमान रखा है। यह समस्त दान पुत्र **डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़** के माध्यम से समर्पित हो रहा है।

 माँ आशापुरा मंदिर रुंडी गेलाना में सेवा



इसी आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान की कड़ी में समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने माँ आशापुरा मंदिर, रुंडी गेलाना के लिए एक विशेष दान समर्पित किया।

मंदिर के प्रमुख व्यवस्थापक **श्री महेंद्र सिंग जी देवरिया विजय, प्रबंधक** और **श्री करण सिंग जी गोरधनपुरा, अध्यक्ष** से संपर्क स्थापित कर, डॉ. अनिल कुमार राठौर के माध्यम से दिनांक **16/11/2022** को माँ के चरणों में -

1.   5 सीमेंट बेंचें - श्रद्धालुओं के बैठने और ध्यान हेतु**

2.    5,000 रुपये नकद दान - मंदिर परिसर के विश्राम कुटी के रंग-रोगन हेतु**

समर्पित किए गए।

दान  की इस भावना का सम्मान करते हुए मंदिर समिति ने दिनांक **21/12/2022 को दान पट्टिका स्थापित की** और दिनांक **22/12/2022 को आशापुरा माता के सेंट्रल बैंक अकाउंट में 5 हजार रुपये जमा कर** विश्राम गृह पर अत्यंत आकर्षक रंग-रोगन का कार्य संपन्न करवाया। आज वे 5 सीमेंट बेंचें मंदिर में सुखद आसन के रूप में श्रद्धालुओं को विश्राम दे रही हैं।

> **छंद -**

> माँ आशापुरा की महिमा महान,

> भक्तों के जीवन में करती कल्याण।

> महेंद्रसिंग जी प्रबंधक सदा तत्पर,

> सेवा में रत, श्रद्धा अमर।

> सीमेंट बेंचें बनीं सुखद आसन,

> श्रद्धालु बैठें करें ध्यान रसधन।

> पाँच हजार दान रंग रोगन हेतु,

> मंदिर में छाया सौंदर्य प्रखर।

> **श्लोक -**

> आशापुरां नमाम्यहम्, भक्तानां सिद्धिदायिनीम्।

> महेंद्रकरणसंयुक्तं, सेवायां नित्यनिरतं॥

> दानं धर्मस्य मूलं हि, पुण्यं लोकस्य पावनम्।

> आलोकस्य कृते दानं, भवतु सर्वहिताय च॥

दान ही धर्म का मूल है। डॉ. दयाराम जी आलोक का यह पेंशन-दान से उपजा सेवा-यज्ञ न केवल मंदिर की व्यवस्था को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी है कि अपनी अर्जित पूँजी को माँ के दरबार में समर्पित कर पुण्य का भागी बना जाए।

**जय हो माँ आशापुरा रुंडी गेलाना वाली!**

*समाजसेवी - डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़*

*आध्यात्मिक दान-पथ - राजस्थान एवं मध्यप्रदेश*

माँ  आशापुरा का मंदिर रुंडी  गेलाना के लिए 

समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा 

5 सिमेन्ट बेंच और 5 हजार नकद दान      


धार्मिक,आध्यात्मिक संस्थानों मे दर्शनार्थियों के लिए सिमेन्ट की बैंचों की व्यवस्था करना महान पुण्य का कार्य है। दान की भावना को साकार करते हुए डॉ. दयाराम जी आलोक मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मुक्ति धाम और मंदिरों के लिए नकद दान के साथ ही सैंकड़ों सीमेंट की बेंचें भेंट करने के अनुष्ठान को गतिमान रखे हुए हैं |
आशापुरा माता, चौहान वंश की कुलदेवी हैं. उन्हें शाकंभरी (सांभर लेक सिटी, राजस्थान) के सोनगरा चौहान के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि सांभर में ही करीब 1300 साल या उससे ज़्यादा पहले आशापुरा माता का पहला मंदिर बना था.
अपने आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान के परिप्रेक्ष्य मे समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने  माँ आशापुरा मंदिर रुंडी गेलाना के प्रबंधक महेंद्र सिंग जी देवरिया विजय और करण सिंग जी गोरधन पूरा से संपर्क करते हुए डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से माता आशापुरा के चरणों 5 सिमेन्ट बेंचें और 5 हजार नकद दान समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया | 5 हजार रुपये का रंग रोगन विश्राम कुटी पर करवा दिया है| --जय हो माँ आशापुरा रुंडी गेलाना वाली !
                                

माँ आशापुरा मन्दिर रुंडी गैलाना का विडियो 

   

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




आद्यात्मिक दान-पथ

  


माँ आशापुरा मंदिर रूंडी गैलाना
5 बेंच और  5000/- नक़द दान


श्री महेंद्र सिंग जी ने दान पट्टिका  स्थापित  किया /  21/12/2022 



उक्त रेस्ट हाउस पर कलर करने के लिए 


*आशापुरा  माता  के सेंट्रल बेंक अकाउंट मे 5 हजार रुपये जमा किए 22/12/2022 


आशापुरा मंदिर के प्रबंधक श्री करन सिंग जी और श्री महेंद्र सिंग जी ने दान दाता डॉ.दयाराम जी आलोक की भावना को समझते हुए रेस्ट हाउस पर बहुत ही आकर्षक कलर करवा दिया है .





मंदिर समिति के प्रमुख व्यवस्थापक -

महेंद्र सिंग जी  देवरिया विजय प्रबंधक   82250-98088

  करण सिंग जी  गोरधनपुरा  अध्यक्ष    80854-90606

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा माँ  आशापुरा मंदिर गैलाना  हेतु दान सम्पन्न 16/11/2022
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