मध्यप्रदेश की पावन धरा नलखेड़ा में स्थित माँ बगलामुखी का यह महाशक्तिपीठ केवल एक मंदिर नहीं, आस्था का वह केंद्र है जहाँ देश के कोने-कोने से, बड़े-बड़े राजनेताओं से लेकर सामान्य भक्त तक, अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। आगर-मालवा से 30 किमी दूर स्थित इस चमत्कारी धाम में नवरात्रि पर तो जन-सैलाब उमड़ पड़ता है।
इसी पुण्यभूमि पर यात्रियों और दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए एक छोटा सा सेवा-प्रयास किया गया है।
समाजसेवी, साहित्य मनीषी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़ द्वारा अपने संकल्पित आध्यात्मिक दान-पथ के अंतर्गत माँ बगलामुखी शक्तिपीठ में दर्शनार्थियों के विश्राम हेतु 12 सीमेंट बेंचें और 10,000 रुपये नकद सहित कुल 51,000 रुपये का दान समर्पित किया गया है।
यह दान केवल ईंट-सीमेंट का दान नहीं, यह पेंशन से निकला त्याग है। डॉ. आलोक जी अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में बेंचों और निर्माण हेतु समर्पित कर रहे हैं। उनके ब्लॉग और YouTube से प्राप्त राशि भी इसी पुण्य कार्य में लग रही है। यह समस्त दान उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के नाम से समर्पित है।
तहसीलदार आदरणीय श्री पारस जी की अनुमति एवं कार्यालय प्रबंधक श्री विनोद जी गवली के सहयोग से इस सेवा की स्मृति स्वरूप दान-पट्टिका को अखंड रामायण पाठ-भवन की दीवार पर स्थापित किया गया है, ताकि इसे देखकर अन्य भक्त भी दान-पथ पर प्रेरित हो सकें।
आइये, इस दान-यात्रा की भावपूर्ण झलक, तस्वीरों और वीडियो के साथ दर्शन करते हैं और माँ पीताम्बरा से प्रार्थना करते हैं -
सेवा, श्रद्धा, त्याग का संगम,
दान-पथ बने धर्म का आलम।
जय हो माँ बगला मुखी !
यात्रियों ,दर्शनार्थियों की बैठक सुविधा के लिए
समाजसेवी डॉ .आलोक शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बेंचें और नकद दान
पीताम्बरा माँ के दरबार में, श्रद्धा की गूँज है अपार में। नलखेड़ा की पावन भूमि पर, भक्तों का स्नेह है हर क्षण स्वर।
सीमेंट बेंचें बनीं विश्राम हेतु, दान-पट्टी चमके धर्म के वेतु। डॉ. आलोक का संकल्प महान, पेंशन समर्पित, सेवा का दान।
रामायण भवन की दीवार पे, शिलालेख जगमगाए उजियार पे। भक्त जन बैठें सुख से यहाँ, माँ बगला मुखी दें आशीर्वाद जहाँ।
सेवा, श्रद्धा, त्याग का संगम, दान-पथ बने धर्म का आलम। जय हो माँ की कृपा अपार, भक्तों का जीवन हो सदा साकार।
दान के श्लोक -
दानं महादानमिदं महात्मा, भक्तानुकम्पा परमार्थ साध्या।
श्लोक २
माँ बगलामुख्याः कृपानुग्रहेण, नलखेड़ायां पुण्यभूमिरेषा।
श्लोक ३
सुविधा सम्मानमिदं प्रदत्तं, भक्तजनानां सुखसंपदर्थम्।
श्लोक ४ दानं यशः कीर्तिमिदं प्रदत्तं, भक्तजनानां सुखसंपदर्थम्। आलोक दयाराम धर्मपथेन, प्रेरयति लोकं सत्कर्मयुक्तम्॥
श्लोक ५ माँ बगलामुख्याः कृपानुग्रहेण, भक्तजनानां मनोकामनाः सिद्धाः। नलखेड़ायां पुण्यभूमिरेषा, दान-पथेन धर्ममार्गः प्रदीप्तः॥
श्लोक ६ सुवर्णस्मृति स्थिरमस्तु लोके, आलोक दानं भवतु प्रेरणाय। भक्तजनानां सुखसमृद्ध्यर्थं, जयति धर्मः जयति श्रद्धाय॥
जय हो मां बगला मुखी
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.










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