आवर का मुक्तिधाम - एक भूमिका
राजस्थान के झालावाड़ जिले की गोद में बसा है एक प्राचीन कस्बा - आवर। चारों ओर आहू नदी की शीतल धारा से घिरा हुआ, यह कस्बा केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति का एक मौन साक्षी है।
नगर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहाँ का मुक्तिधाम। राजस्थान की परम्परा के अनुसार जिसका प्रबंधन सरपंच के माध्यम से होता है, पर यह मुक्तिधाम केवल प्रबंधन नहीं, एक अनुभूति है। हरे-भरे वृक्षों की सघन छाया, आहू नदी की निकटता से आती शीतल वायु, और वह गहन शांति जो जीवन के अंतिम सत्य का बोध कराती है - यही इस स्थान को शांति का सागर बनाती है।
एक संकल्प से अभियान तक
इस शांत स्थल को और अधिक मानवीय, और अधिक सुविधापूर्ण बनाने की एक छोटी सी प्रेरणा ने एक बड़े अभियान का रूप ले लिया।
मेरे द्वारा चलाए जा रहे बेंच दान अभियान में आवर के दो प्रबुद्ध जनों - श्री कपिल जी पँवार और श्री जगदीश जी पँवार का सहयोग महान रहा। कपिल जी ने इस अभियान को गतिमान किया और जगदीश जी की सक्रियता से मुक्तिधाम में समर्थ लोगों को प्रेरणा देने हेतु दान-दाताओं का दान-पट्ट स्थापित किया गया। यह पट्ट केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि दानशीलता का एक आह्वान है।
इसी क्रम में आवर के मुक्तिधाम हेतु 8 सीमेंट बेंचें भेंट की गईं। इन बेंचों पर दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ की दान पट्टी स्थापित है, जो इस सेवा को एक स्थायी स्मृति प्रदान करती है।
नगर के प्रबुद्ध जनों ने इस अवसर पर डॉ. आलोक, डॉ. अनिल दामोदर और श्री रमेश जी आशुतोष का जो आत्मीय सत्कार किया और उन क्षणों को फोटोग्राफी में अमर बनाया, उसने इस दान को एक उत्सव में बदल दिया। कंवरलाल जी दर्जी जैसे अनेक जन जब दाह-संस्कार के अवसर पर इन बेंचों पर बैठते हैं, तो यह सुविधा नहीं, संवेदना बन जाती है।
आहूनदीतीरे रम्ये मुक्तिधामे शुभं स्थले।
कपिल-जगदीश-पँवारयोः दानं पुण्यवर्धनम्॥
डॉ. आलोक-डॉ. अनिल-रमेशैः सत्कारिताः सदा।
दानपथेन शोभन्ते, शामगढ़स्य महादया॥
आध्यात्मिक दान-पथ
साथियों, यह केवल बेंचों का दान नहीं है। यह मेरे जीवन का आध्यात्मिक दान-पथ है।
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद से, एक सेवानिवृत्त अध्यापक के रूप में मैंने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को दान करने का संकल्प लिया है। इसमें वह राशि भी सम्मिलित है जो मुझे मेरी 6 वेबसाइटों पर Google द्वारा प्रकाशित विज्ञापनों से प्राप्त होती है, जिसका 68% भाग मुझे मिलता है।
यह समस्त दान राशि और सीमेंट बेंचें मेरे पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के नाम से समर्पित हो रही हैं। यह अभियान केवल आवर तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदसौर, झालावाड़, आगर, नीमच, रतलाम, कोटा, झाबुआ जिलों के मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों तक विस्तारित है।
आवर का मुक्तिधाम इस दान-पथ का एक पवित्र पड़ाव है, जहाँ आहू नदी के तट पर मानवता और आध्यात्मिकता एक साथ विश्राम करती हैं।
आवर का मुक्तिधाम
आहू नदी की गोद में बसा, झालावाड़ का प्राचीन नगर, हरे-भरे वृक्षों की छाया में, मुक्तिधाम है शांति का सागर।
कपिलजी पँवार का सहयोग महान, दान अभियान को किया गतिमान जगदीशजी पँवार की सक्रियता से , दान पट्ट हुआ यहाँ स्थापित।
डॉ. आलोक, डॉ. अनिल, रमेशजी का सत्कार, नगर के प्रबुद्ध जनों ने किया दमदार फोटोग्राफी में बंधे क्षण अमर, दानशीलता का हुआ सुंदर स्वर।
आवर के मुक्तिधाम में बेंचें नई, आगंतुकों को मिली सुविधा सही। दामोदर पथरी अस्पताल का योगदान, शामगढ़ नगर का आध्यात्मिक दान।
श्लोक-
आहूनदीतीरे रम्ये मुक्तिधामे शुभं स्थले । कपिल-जगदीश-पँवारयोः दानं पुण्यवर्धनम् ॥ डॉ. आलोक-डॉ. अनिल-रमेशैः सत्कारिताः सदा । दानपथेन शोभन्ते, शामगढस्य महादया ॥
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
आध्यात्मिक दान -पथ
साथियों,
शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है|
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|
कपिलजी पँवार और जगदीशजी पँवार ने मुक्तिधाम के लिए सहयोग और प्रेरणा दी।
डॉ. आलोक, डॉ. अनिल और रमेशजी के स्वागत से नगर में दानशीलता का वातावरण बना।
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ की दान पट्टी ने इस अभियान को स्थायी स्मृति दी





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