नमस्कार मित्रों,
आज का यह आलेख एक ऐसे आध्यात्मिक दान-पथ की कथा है, जहाँ श्रद्धा, सेवा और समर्पण एक साथ मिलते हैं।
हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती दो गाँव - धतुरिया और धनवाडा के मध्य, जंगल में स्थित, अलौकिक प्रभाव के लिए प्रसिद्ध श्री पुतली माता मंदिर की।
यह वह पावन धाम है, जहाँ क्षेत्र के हिन्दू धर्मावलम्बियों की अगाध श्रद्धा है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई भक्तों की मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। जंगल के बीच स्थित होने के बाद भी यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है।
मंदिर समिति का सराहनीय प्रयास
इस मंदिर को केवल पूजास्थल ही नहीं, बल्कि एक सुंदर आध्यात्मिक परिसर बनाने में यहाँ की मंदिर समिति का बड़ा योगदान है। समिति के संरक्षक सरपंच श्री गुमान सिंह जी चौहान और समिति के अध्यक्ष श्री गोरधन सिंह जी के नेतृत्व में समिति ने यहाँ बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया है। आज मंदिर परिसर में उपवन जैसा मनोरम दृश्य सृजित हो गया है, जो इसे सुगंधित और शांतिमय स्थान बनाता है।
शामगढ़ के समाजसेवी का आध्यात्मिक दान
इसी पावन धाम की शोभा और दर्शनार्थियों की सुविधा को बढ़ाने के लिए शामगढ़ के साहित्य मनीषी, सेवानिवृत्त अध्यापक एवं समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा एक पुनीत दान अनुष्ठान सम्पन्न किया गया।
डॉ. आलोक जी द्वारा अपने पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से पुतली माता मंदिर हेतु 5 सीमेंट की बेंचें समर्पित की गई हैं। इन बेंचों पर "दामोदर पथरी" नाम अंकित है और मंदिर के फ्रंट पिलर पर इस सेवा कार्य का शिलालेख / दान पट्ट भी स्थापित किया गया है।
मंदिर समिति के सदस्यों, सरपंच श्री गुमान सिंह जी और अध्यक्ष श्री गोरधन सिंह जी ने दानदाता का सम्मान करते हुए हृदय से आभार व्यक्त किया है। यह दान न केवल बैठने की सुविधा देगा, बल्कि मंदिर के महत्व को भी बढ़ाता है।
जैसा कि इस सेवा पर रचित कविता में कहा गया है -
पुतली माता धाम में, श्रद्धा का आलोक,
दान दाता आलोक जी, जगमग करता लोक।
और संस्कृत श्लोक में इस भाव को यूं व्यक्त किया गया है -
दानं यः कुर्वते नित्यं, धर्ममार्गेण साधकः।
आलोकः पुण्यकर्मणा, जनसेवा परायणः॥
डॉ. आलोक जी का संकल्प - आध्यात्मिक दान-पथ
यह दान एक अकेली घटना नहीं है। डॉ. दयाराम जी आलोक जी ने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को दान करने के संकल्प के साथ एक आध्यात्मिक दान-पथ पर चलने का अनुष्ठान लिया है।
वे राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें और निर्माण व रंग-रोगन हेतु नकद दान समर्पित कर रहे हैं।
इस पवित्र कार्य में उनके ब्लॉग और YouTube वीडियो से Google से प्राप्त होने वाली राशि भी समाहित है। यह समस्त दान उनके पुत्र के अस्पताल के नाम से समर्पित हो रहा है, जो सेवा को परिवार-संस्कार के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
तो आइए, इस ब्लॉग और वीडियो के माध्यम से हम पुतली माता धाम के दर्शन करते हैं, उन 5 बेंचों को देखते हैं और डॉ. आलोक जी के इस प्रेरणादायी दान-पथ को नमन करते हैं।
मध्य प्रदेश -राजस्थान के सीमावर्ती गाँव धतुरिया और धनवाडा के
पुतली माता मन्दिर के लिए
डॉ.दयाराम जी आलोक शामगढ़ द्वारा
सीमेंट की ५ बेंच की व्यवस्था
पुतली माता विकास की कविता
छन्द 1 पुतली माता धाम में, श्रद्धा का आलोक, दान दाता आलोक जी, जगमग करता लोक। गुमान सिंह सरपंच जी, संरक्षक बन आए, गोरधन सिंह अध्यक्ष संग, मंदिर गौरव बढ़ाए।
छन्द 2 जंगल में उपवन सजे, वृक्षारोपण महान, समिति के प्रयास से, मंदिर हुआ सुगंधित स्थान। पाँच बेंचें समर्पित हुईं, दामोदर पथरी नाम, दान पट्ट मंदिर में सजे, बढ़ा श्रद्धा का धाम।
छन्द 3 भक्तों की मनोकामना, होती यहाँ पूर्ण, पुतली माता की कृपा, करती जीवन धुर्न। गुमान सिंह जी सरपंच, आभार व्यक्त करें, गोरधन सिंह अध्यक्ष संग, श्रद्धा को दृढ़ करें।
छन्द 4 दान पथ पर आलोक जी, जीवन धन्य बनाए, पेंशन राशि अर्पित कर, पुण्य पथ दिखलाए। समिति ने दान पट्ट को, मंदिर में स्थापित किया, सेवा और श्रद्धा का, अमर प्रतीक रच दिया

पुतली माता मंदिर श्लोक
दानं यः कुर्वते नित्यं, धर्ममार्गेण साधकः।
आलोकः पुण्यकर्मणा, जनसेवा परायणः॥
पुतली माता का मंदिर:
- अलौकिक प्रभाव के लिए जाना जाता है
- क्षेत्र के हिन्दू धर्मावलम्बी की पुतली माता के प्रति अगाध श्रद्धा
- भक्तों की मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं
- राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा से लगा हुआ
- जंगल में स्थित
मंदिर समिति की पहल:
- वृक्षारोपण कार्य में जुटी
- उपवन जैसा दृश्य सृजित हो गया है
डॉ. दयाराम आलोक जी का दान:
- दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से 5 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित की
- मंदिर समिति के सदस्य, सरपंच गुमान सिंग जी और अध्यक्ष गोरधन सिंग जी ने दान दाता का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया
यह दान दर्शनार्थियों के लिए सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया है, और मंदिर की सुंदरता और महत्व को बढ़ाता है। डॉ. दयाराम आलोक जी का यह दान समाज सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है
समाजसेवी
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube पर विडियो से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ
मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर
जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार
मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट
जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार
जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी
मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़


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