मुक्ति धाम सुनेल, जिला झालावाड़ में सेवा का एक और दीप
शांत, सुव्यवस्थित और हरियाली से आच्छादित स्थल ही सच्चे अर्थों में मुक्ति धाम कहलाता है। ऐसा ही एक पावन स्थल है - राजस्थान के झालावाड़ जिले का प्रमुख नगर सुनेल का मुक्ति धाम।
यह मुक्ति धाम अपने विशाल स्वरूप के लिए जाना जाता है। इसका प्रांगण सुंदर टाइलों से सुसज्जित है, चारों ओर हरे-भरे वृक्षों की शीतल छाया है जो वातावरण में एक असीम सुकून और शांति का संचार करती है। यहाँ दाह-संस्कार की उत्तम सुविधाओं के साथ-साथ दागियों के स्नान के लिए भी उत्तम व्यवस्था है, जो जन-सुविधा के प्रति प्रबंध समिति की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
इसी जन-सुविधा को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक छोटा सा सेवा-प्रयास किया गया है।
मुक्ति धाम के शुभचिंतक श्री गोपालजी धनोतिया जो व्यावसायिक हिसाब से नियमित तौर पर शामगढ़ से सुनेल जाते है , ने सुझाव दिया कि मुक्ति धाम में आगंतुकों, विशेषकर वृद्धजनों के बैठने हेतु बेंचों की आवश्यकता है। इस पावन प्रेरणा को साकार करने के लिए समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़ ने मुक्ति धाम के अध्यक्ष श्री चेनसिंह जी गुर्जर (98295-01825) से संपर्क किया।
परिणामस्वरूप दिनांक 29/07/2022 को सुनेल मुक्ति धाम हेतु लगभग 15 हजार रुपये की लागत से 5 सीमेंट बेंचों की व्यवस्था डॉ. आलोक जी एवं उनके आत्मज डॉ. अनिल कुमार दामोदर (98267-95656) के सहयोग से सम्पन्न की गई। यह भेंट शोकाकुल परिवारों और परिजनों को कुछ क्षण शांति से बैठने का सहारा प्रदान करेगी।
दानं जनहितायैव, धर्ममार्गस्य शोभनम्।
आलोकस्य कृपायुक्तं, मुक्तिधामे सुसंस्कृतम्॥
यह बेंच दान कोई एकल घटना नहीं, बल्कि डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा संचालित 'आध्यात्मिक दान-पथ' का एक हिस्सा है। एक सेवानिवृत्त अध्यापक के रूप में उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
उनका यह स्व-वित्तपोषित सेवा-मॉडल उनकी पेंशन और गूगल से उनके ब्लॉग व यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्राप्त आय पर आधारित है - अर्थात् तकनीक से अर्जित को परोपकार में लगाना।
आज उनका सेवा-दायरा केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम, झाबुआ सहित अनेक जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में वे बेंच दान, बैठक व्यवस्था और रंग-रोगन जैसे सुविधा-केंद्रित कार्य कर चुके हैं। दान में पारदर्शिता और अन्य लोगों को प्रेरणा मिले, इस हेतु वे दान की गई वस्तुओं पर विनम्र शिलालेख भी लगवाते हैं।
सुनेल मुक्ति धाम में लगी ये पाँच बेंचें उसी निरंतर सेवा-यात्रा का प्रतीक हैं -
सुनेल धाम में शांति का सागर, हरे वृक्षों से छाया अमर।
टाइलों से सुसज्जित प्रांगण महान, दान से दमके आलोक का मान।।
प्रस्तुत लेख में इसी सेवा-कार्य की कुछ झलकियाँ और वीडियो आपके साथ साझा किए जा रहे हैं।
मुक्ति धाम सुनेल जिला झालावाड़ हेतु
समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक शामगढ़
की तरफ से बेंच व्यवस्था
सुनेल धाम में शांति का सागर,
हरे वृक्षों से छाया अमर।
टाइलों से सुसज्जित प्रांगण महान,
दान से दमके आलोक का मान।
गोपालजी की प्रेरणा पावन,
चेनसिंह संग हुआ आयोजन।
पाँच बेंचें बनीं सेवा का प्रतीक,
आलोकजी का दान अद्वितीय।
जन‑सुविधा का दीप जलाया,
सेवा का पथ जग में दिखाया।
मुक्ति धाम में सुख का संचार,
आलोकजी का पुण्य अपार।
श्लोक -
दानं जनहितायैव, धर्ममार्गस्य शोभनम्।
आलोकस्य कृपायुक्तं, मुक्तिधामे सुसंस्कृतम्॥
वृक्षछायासमायुक्तं, शान्तिसौख्यप्रदं स्थलम्।
बेंचदानं महादानं, लोकसेवा सदाऽन्वितम्॥
सुनेल झालावाड़ जिले का प्रमुख नगर है
यहाँ का मुक्तिधाम बहुत बड़ा है। प्रांगण टाइल्स से सुससज्जित है।
हरे भरे पेड़ों से वातावरण मे सुकून रहता है।
दागियों के नहाने की उत्तम व्यवस्था है।
शवदाह की सुविधाएं अच्छी हैं ।
गोपालजी धनोतिया ने मुक्तिधाम मे बेंचें दान करने का सुझाव दिया
डॉ . आलोकजी ने अध्यक्ष चेनसिंग जी से संपर्क किया और 5 सिमेन्ट बेंच की व्यवस्था कर दी है।
आद्यात्मिक दान-पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ
मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर
जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार
मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट
जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार
जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी
मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़






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