श्री नृसिंह मंदिर बालोदा जिला मंदसौर हेतु
दामोदर अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बेंच व्यवस्था और विकास दान
छंद 1 बालोदा ग्राम की पावन धरती, नृसिंह मंदिर आस्था भरती। डॉ. आलोक ने दान दिखाया, बेंच व्यवस्था से सुख फैलाया।
छंद 2 चंद्रावत कुल ने मंदिर रचाया, भक्तों ने श्रद्धा का दीप जलाया। सीमेंट बेंचें, दान महान, जन-सेवा का अनुपम विधान।
छंद 3 पेंशन त्याग जनहित में किया, मंदिरों में सुविधा का दिया। दान पट्ट श्यामलाल ने सजाया, समिति ने सम्मान दिलाया।
छंद 4 मंदसौर से रतलाम तक छाया, आगर-नीमच में पुण्य फैलाया। आध्यात्मिक पथ आलोक महान, सेवा-दान से बढ़ा सम्मान।
श्लोक
नृसिंहदेवाय नमो नमस्ते भक्तप्रह्लादरक्षकाय ते। दानेन बेंचाः प्रदत्ताः शुभाः जनसुखाय सदा भवतु॥
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्री नरसिंग मंदिर बलोदा के निमित्त टीना -कन्हैया लाल प्रजापति बालोदा के अकाउंट मे 1500/-फोन पे किया| 30/1/2023
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम आलोक के सामाजिक ,साहित्यिक कार्य सुनिए इस लिंक में
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