श्री राधा कृष्णा मंदिर गुराडिया कलां हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट की बेंचें भेंट
काव्यात्मक छंद
गुराडिया कलां ग्राम में, राधा-कृष्णा धाम।
भक्तों की श्रद्धा बढ़े, गूँजे हरि का नाम।।
सीमेंट बेंचें दान कर, आलोकजी ने दी।
सीमेंट बेंचें दान कर, आलोकजी ने दी।
बैठक सुविधा भक्त को, सेवा सदा निधि।।
दामोदर अस्पताल से, अनिल राठौर संग।
दामोदर अस्पताल से, अनिल राठौर संग।
दान-पथ पर अग्रसर, समाज में रच रंग।।
मंदिर समिति ने किया, दानदात का मान।
मंदिर समिति ने किया, दानदात का मान।
समरसता का दीप है, यह पावन अभियान।।
श्लोक
राधाकृष्णप्रसादेन भक्तानां सुखवर्धनम्।
श्लोक
राधाकृष्णप्रसादेन भक्तानां सुखवर्धनम्।
दानं सिमेन्टपीठानां आलोकस्य महाकृतम्॥
गुराडियाकलाग्रामे देवालये मनोहरम्।
अनिलेन सह दत्तं पीठदानं प्रशस्यते॥
समरस्यानुग्रहायै समाजे धर्मवर्धनम्।
समरस्यानुग्रहायै समाजे धर्मवर्धनम्।
दानपथेन यः याति स आलोकः प्रशंस्यते॥
गुराडीया कलाँ झालावाड़ जिले का डग नगर से कुछ ही किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम है। इस गाँव मे राधा कृष्ण का सुन्दर मंदिर है। मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। श्यामदासजी बैरागी परंपरा से मंदिर की पूजा करते आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों को नकद और सिमेन्ट की बेंचें दान करने के अपने आध्यात्मिक दान -पथ के तहत डॉ दयाराम जी आलोक ने इस मंदिर की बैठक सुविधा उन्नत करने के मकसद से 4 सिमेन्ट बेंचें पुत्र डॉ . अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से मंदिर के परिसर मे लगवा दी हैं, जिससे भक्तों मे हर्ष है|
मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों को नकद और सिमेन्ट की बेंचें दान करने के अपने आध्यात्मिक दान -पथ के तहत डॉ दयाराम जी आलोक ने इस मंदिर की बैठक सुविधा उन्नत करने के मकसद से 4 सिमेन्ट बेंचें पुत्र डॉ . अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से मंदिर के परिसर मे लगवा दी हैं, जिससे भक्तों मे हर्ष है|
मंदिर समिति और शंकर सिंग जी सोलंकी सालरिया ने दान दाता का सम्मान किया और आभार व्यक्त किया है। यह एक सुंदर और पवित्र कार्य है जो समाज में आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है|
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान
राधा कृष्ण मंदिर के शुभचिंतक
गुराडिया कलां के राधा कृष्णा मंदिर का विडियो
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्यामदास जी बैरागी गुराडीया कलां (पुजारी)
गोविन्द जी बैरागी ७७२६९-२१६५४
शंकर सिंग जी सोलंकी सालारिया ९८२८९-१२४१३
दान पट्टी फिट करने वाले मिस्त्री विष्णु जी विश्वकर्मा
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा श्री राधाकृष्ण मंदिर गुराडीया कलाँ हेतु दान सम्पन्न
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ

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