जब सेवा ही साधना बन जाए
दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ द्वारा रामपुरा को 5 बेंच समर्पित
जीवन की आपाधापी में मनुष्य अक्सर यह भूल जाता है कि अंतिम सत्य क्या है। जन्म और मृत्यु के बीच की यह यात्रा ही जीवन है, पर जिस स्थान पर यह यात्रा पूर्ण होती है, उस 'मुक्ति धाम' को स्वच्छ, शांत और सम्मानजनक बनाना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।
नीमच जिले का ऐतिहासिक कस्बा रामपुरा अपने गौरवशाली अतीत के लिए जाना जाता है। कहते हैं गांधी सागर बांध बनने के बाद जब आसपास के सैकड़ों गाँव जलमग्न हुए तो रामपुरा का व्यापार-व्यवसाय भी उजड़ गया। बड़े व्यवसायी पलायन कर गए और वैभव धुंधला हो गया। पर आज, रामपुरा फिर से अपनी पहचान लौटा रहा है, और इस लौटते वैभव में उन सपूतों का योगदान अविस्मरणीय है जो अपनी कर्मभूमि को नहीं भूले।
ऐसे ही एक सपूत हैं साहित्य मनीषी, सेवानिवृत्त अध्यापक और समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़। उन्होंने अपनी 5 वर्ष की सम्पूर्ण पेंशन राशि और अपनी लेखनी से अर्जित राशि को ईश्वर को समर्पित करने का एक अनुपम संकल्प लिया है - "आध्यात्मिक दान-पथ"।
इसी दान-पथ के अंतर्गत राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, आगर, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में आगंतुकों के विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचें और निर्माण हेतु नकद राशि का अनुष्ठान वे सतत कर रहे हैं।
इसी श्रृंखला में उनकी पूर्व कर्मभूमि रामपुरा के लिए यह सेवा प्रस्तुत है। समाजसेवी श्री सुरेश कुमार मकवाना जी की प्रेरणा और श्री कैलाश जी फरक्या एवं जीतू भाई जैन के सहयोग से, उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ के माध्यम से -
1. मुक्ति धाम, गांधी सागर रोड, रामपुरा को 5 बेंच + 2000/- नकद
2. मुक्ति धाम, नाका नंबर 2, रामपुरा को 5 बेंच + 2000/- नकद
3. गायत्री शक्तिपीठ, रामपुरा को 5 बेंच + 2000/- नकद
का दान ससम्मान समर्पित किया गया है।
यह केवल बेंचों का दान नहीं है, यह अंतिम यात्रा में आए हुए थके-हारे परिजनों को दो पल बैठकर सांत्वना देने का, और श्रद्धा स्थल को सम्मान देने का भाव है। समितियों द्वारा शिलालेख लगाकर इस सेवा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है।
यह लेख उसी पुण्य सेवा की एक छोटी सी झलक है।
दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा
5 बेंच समर्पित
नमस्ते मित्रों,
जीवन का अंतिम सत्य 'मृत्यु' है, लेकिन जहाँ सांसें थम जाती हैं, उस स्थान को सम्मान और शांतिपूर्ण वातावरण देना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। नीमच जिले का ऐतिहासिक और प्राचीन रामपुरा कस्बा अपने मे गौरवशाली अतीत की कहानी समेटे हुए है।
गांधीसागर मार्ग पर स्थित 'मुक्ति धाम' की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। इस वीडियो में हम आपको दिखा रहे हैं कि कैसे समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित होकर, उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर (दामोदर पथरी हॉस्पिटल, शामगढ़) ने इस स्थान को एक सुंदर, शांत और व्यवस्थित स्थल (Mukti Dham Beautification) बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया है।
प्रमुख विशेषताएँ:दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ की ओर से 5 सिमेन्ट बेंचें और 2000 /- नकद दान किए हैं ।
अंतिम यात्रा पर आने वाले परिजनों के बैठने और विश्राम के लिए उचित प्रबंध।
एक अव्यवस्थित स्थान को सम्मानजनक स्थल में बदलने का सफल प्रयास।
डॉ. दयाराम जी आलोक ने ईश्वर की अनुकम्पा से मंदसौर, आगर, झालावाड़, रतलाम, नीमच और झाबुआ जिलों के अनगिनत मंदिरों और मुक्तिधामों में सेवा का जो 'अनुष्ठान' शुरू किया है, यह उसी कड़ी का एक हिस्सा है। समिति ने इस दान के लिए शिलालेख चस्पा कर आभार व्यक्त किया है।
संपर्क:
दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़
मोबाइल: 9826795656
राठौर वंश की कुलदेवी माँ नागनैचिया
समाजसेवी
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube पर विडियो से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
रामपुरा का मुक्ति धाम गाँधी सागर रोड
सुरेशजी मकवाना रामपुरा ९४०६८-५९०१६


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