20.5.23

खजूरी पंथ का मंदिर पावन: काशी विश्वनाथ मन भावन :आलोकजी का आसन दान :भक्तों को सुविधा सम्मान:vishwanath khajuri panth

 मंदसौर जिले का ग्राम खजूरी पंथ 

काशी विश्वनाथ मंदिर 

डॉ . दयाराम आलोक द्वारा 

5 बेंच व्यवस्था    


काशी विश्वनाथ मंदिर, खजूरी पंथ हरियाली से घिरा पावन स्थल, जहाँ यज्ञ-हवन की परंपरा अमर है। श्रद्धा की ज्योति प्रज्वलित करती, भक्तों के मन में शिव का स्वर है।

डॉ. दयाराम आलोक ने दान दिया, पाँच बेंचें भक्तों की विश्रांति हेतु। समिति ने सम्मानित कर प्रेरणा दी, दान-पथ बना समाज सेवा का सूत्र।

📜 संस्कृत श्लोक

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा लोकहिताय च।
आलोकस्य महादानं, भक्तानां सुखकारकम्॥

काशीविश्वनाथदेवालये, खजूरीपन्थग्रामके।
पञ्च बञ्चकानि दत्तानि, भक्तानां विश्रान्तये॥

पेंशनधनसमर्पणेन, गूगललाभयोगतः।
आलोकः समाजसेवी, यशः कीर्तिं प्रकीर्तयन्॥

एक ऊंचे चबूतरे पर निर्मित  काशी विश्वनाथ का भव्य मंदिर 

शामगढ़ नगर से 3 कोस की  दूरी पर है ग्राम खजूरी पंथ 

मंदिर मे नियमित यज्ञ हवन  करने की लंबी परंपरा है 

मंदिर का परिसर हर भरे वृक्षों  से सुशोभित है। 

मंदिर के मुख्य पुजारी बाबूलाल जी पटवारी हैं 

मंदिर के संरक्षक  शिव नारायण जी सर  हैं। 

राकेश जी पँवार टेलर मंदिर के प्रति समर्पित भाव से सेवा करते हैं । 

डॉ . दयाराम  आलोक ने मंदिर मे 5 बेंच भेंट की। 

समिति ने लोगों को दान के लिए प्रेरित करने के भाव से दान दाता का दान पट्ट  मंदिर मे स्थापित किया । 

समिति ने एक आयोजन कर डॉ . आलोक  का सम्मान  अभिनंदन किया । 

                                                                       

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

  

काशी विश्वनाथ मंदिर खजूरी पंथ
 5 बेंच भेंट 



खजूरी पंथ काशी विश्व नाथ नाथ मंदिर मे बेंच लगीं 

खजूरी पंथ काशी विश्व नाथ मंदिर का विडियो 

राकेशजी पँवार 99938-41829  टेलर 

भवानी शंकर जी धाकड़ पत्रकार 

दुर्गेशजी योगी 99813-44918 


डॉ.अनिल कुमार दामोद s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल   98267-95656 शामगढ़द्वारा  विश्वनाथ मंदिर  खजूरी पंथ  हेतु दान सम्पन्न 
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 *मुक्ति धाम आगर -मालवा/मोती सागर तालाब बम्बई घाट/ डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 10 सिमेन्ट बेंच दान 


 


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