मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में, चंबल नदी के किनारे बसा एक छोटा सा ग्राम है - मोला खेड़ी (सोहनगढ़)।
यहाँ कोलाहल से दूर, हरियाली के बीच एकांत में सुशोभित है श्रद्धा का एक दिव्य केंद्र - श्री बालाजी मंदिर।
कहते हैं इस धाम में बालाजी की कृपा से भक्तों की मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं। इसी आस्था के कारण यह मंदिर दूर-दूर तक लोगों के विश्वास का केंद्र बन गया है। मंदिर की व्यवस्था एक समर्पित प्रबंधन समिति द्वारा की जाती है, जिसके मुख्य पुजारी और प्रमुख सेवादार श्री राजू जी बैरागी हैं, जो अपनी निःस्वार्थ सेवा से मंदिर की गरिमा को बनाए हुए हैं।
भक्तों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने यहाँ बैठक व्यवस्था हेतु सहयोग का अनुरोध किया था।
समिति के इस आग्रह को स्वीकार करते हुए, शामगढ़ के आध्यात्मिक दान-पथ के प्रणेता, समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपने आध्यात्मिक दान अभियान के अंतर्गत दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से रु. 11551/- मूल्य की 3 सीमेंट बेंचें मंदिर को भेंट कीं।
मंदिर के प्रमुख सेवादार श्री राजू बैरागी जी द्वारा दानदाता का सम्मान करते हुए मंदिर परिसर में दान पट्टिका स्थापित की गई, ताकि यह सेवा-भाव अन्य दानवीरों के लिए भी प्रेरणा बन सके।
कविता
हरियाली में छिपा, चंबल तट पर,
श्रद्धा का दीपक जलता निरंतर।
राजू बैरागी की सेवा महान,
भक्तों की सुविधा का किया विधान।
यह छोटा सा सहयोग उसी बड़े संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत डॉ. आलोक जी अपनी पेंशन राशि से मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झालावाड़ और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में सेवा कार्य कर रहे हैं।
आइये, इस पुण्य धाम और इस सेवा यात्रा के दर्शन करते हैं।
बोलिए मोला खेड़ी वाले बालाजी की जय!
बालाजी मंदिर ग्राम मोला खेडी (सोहन गढ़) तहसील गरोठ हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बैंच -व्यवस्था
मोलाखेड़ी बालाजी मंदिर
हरियाली में छिपा, चम्बल तट पर, श्रद्धा का दीपक जलता निरंतर।
राजू बैरागी की सेवा महान, भक्तों की सुविधा का किया विधान।
डॉ. आलोक ने दान दिया अपार, तीन बेंचें बन गईं सुख का आधार।
दानपट्टिका मंदिर में जगमगाए, सेवा-संदेश सबको प्रेरित कर जाए।
📜 संस्कृत श्लोक
दानं धर्मस्य मूलं हि, भक्तानां सुखकारकम्।मोलाखेड़ी बालाजिनं, आलोकस्य महादानकम्॥
त्रयः बञ्चकाः दत्ताः, भक्तानां विश्रान्तये।
राजुबैरागिणा स्थापिता, दानपट्टिका शोभते॥
चम्बलतीरे ग्रामेऽस्मिन्, हरितालोकसुशोभिते।
बालाजी कृपया नित्यं, भक्तानां सिद्धिदायकः॥
मोलाखेडी का बालाजी का मंदिर ऐसा दीखता है
आध्यात्मिक दान पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्री बालाजी मंदिर मोला खेडी -सोहनगढ़ हेतु
११५५१/- की ३ सीमेंट बैंच भेंट
दान पट्टी का प्रारूप
मंदिर का विडियो
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


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