साहित्य, समाज और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरोने वाले डॉ. दयाराम आलोक द्वारा संकल्पित 'आध्यात्मिक दान अनुष्ठान' के अंतर्गत देश के 150+ मंदिर, मुक्तिधाम, गौशाला एवं विद्यालयों में सीमेंट बेंच एवं नकद सेवा अर्पित की गई है। उसी पावन श्रृंखला में प्रस्तुत है, इस स्थल पर किए गए सेवा-समर्पण का वृत्तांत।
लखम खेड़ी जिला मंदसौर के
श्री हनुमान मंदिर मेंदामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बेंच व्यवस्था
सड़क किनारे आन बसा, मंदसौर का ग्राम,
हनुमान जी का थान जहाँ, जपते सब जन नाम।
तूफान सिंह जी मीणा सँभाले, सेवा का सारा काम,
कमलेश जी के साथ जुड़ा, समिति का निष्काम।।
बैठने को ठाँव मिला
वृद्ध जन आवें दर्शन को, धूप में होते हैरान,
बैठने को ठौर नहीं, यह पीर हृदय ने जान।
दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ से दिया दान,
डॉ. दयाराम आलोक ने, दिया सुखद समाधान।।
तीन बेंच का दान
ग्यारह हजार दो सौ इक्यावन, श्रद्धा का सम्मान,
तीन सीमेंट बेंच अर्पित, इक्कीस जुलाई को दान।
शिलालेख पर लिखा हुआ, सेवा का अभिमान,
समिति ने स्वागत किया, दिया हृदय से मान।।
आध्यात्मिक दान-पथ
सेवा-निवृत्त शिक्षक का, यह है पावन प्रण,
पेंशन का पाई-पाई, जनहित में अर्पण।
मंदसौर से झालावाड़ तक, गौशाला, मुक्तिधाम,
डेढ़ सौ से अधिक संस्थानों में, गूँज रहा यह नाम।।
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ
*दामोदर दर्जी समाज महासंघ आयोजित सामूहिक विवाह के विडिओ
*दर्जी समाज मे मोसर (मृत्युभोज) के विडिओ
पौराणिक कहानियाँ के विडिओ
मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियों के विडिओ भाग 1
*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा
*डॉ . आलोक का काव्यालोक
*दर्जी वैवाहिक महिला संगीत के विडिओ
*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3
*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2
*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4
मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5
*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 6
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 7
*मनोरंजन,शिक्षा ,पर्यटन,उपदेश के विडिओ
*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ
*जातियों के महापुरुषों की जीवनी के विडिओ
*धार्मिक ,सामाजिक त्योहार व जुलूस के विडिओ


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