दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बैंच व्यवस्था
मंदिर के गेट के पिलर पर दान पट्टी स्थापित
दुर्गावास नगरी में, नागदेव का धाम महान,
श्रद्धा से गूंजे आँगन, भक्तों का हो सम्मान।
सीमेंट बेंचें सजीं यहाँ, विश्राम का उपहार,
दामोदर पथरी अस्पताल ने किया पुण्य विस्तार।
गेट पर पट्टिका दमके, सेवा का हो प्रमाण,
डॉ. आलोक के आदर्शों से, अनिल राठौर का दान।
टाइलों से सजा प्रांगण, वृक्षों की हरियाली,
कालेश्वर की कृपा से मिटे, विषदंश की काली।
जय नागदेव कालेश्वर, दुर्गावास का गौरव गान,
मेला लगे प्रतिवर्ष यहाँ, भक्त करें गुणगान।
श्लोक
नागदेवाय कालेश्वराय नमः ।
भक्तजनानां रक्षणाय, विषदंशनिवारणाय च ॥
दानं बेंचसमर्पणं, भक्तानां विश्रान्तये ।
आलोकस्य आदर्शेभ्यः, राठोरेण समर्पितम् ॥
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के अंतर्गत दुर्गावास का नाग मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और परंपरा से परिपोषित हिंदुओं की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहाँ सांप या अन्य जहरीले जंतुओं के काटे लोगों को लाया जाता है और भगवान कालेश्वर उनकी जीवन रक्षा करते हैं। मंदिर के प्रांगण मे टाइल्स लगी हुई हैं। कुछ हरे भरे वृक्ष भी लगे हुए हैं। ढलमु निवासी जगदीश जी रामचन्द्र पाटीदार ने इस क्षेत्र के कई मंदिरों मे सिमेन्ट बेंच लगवाने हेतु मुझे सुझाव भी दिया और हमारी दान पट्टिकाऐं मंदिरों मे स्थापित करने का कार्य भी किया है . यहाँ के पुजारी पुरुषोत्तम जी शर्मा एक विद्वान व्यक्ति हैं मंदिर का प्रबंधन कुशलतापूर्वक कर रहे हैं । विडिओ मे उनसे लिए गए इंटर व्यू को शामिल किया गया है। समाजसेवी डॉ दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा इस मंदिर मे भक्तों के बैठने के लिए 3 सिमेन्ट की बेंचें लगवा दी गई हैं। बोलिये नाग देव कालेश्वर शंखोंद्धार दुर्गावास की जय !
यहाँ प्रतिवर्ष मेला लगता है
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

दुर्गावास शंखोद्धार का नागदेव मन्दिर
तीन बेंच +१५००/- का दान
दुर्गावास के नाग मंदिर का विडियो आलोक की आवाज
दुर्गावास के नागदेव मन्दिर हेतु १५००/- नकद दान की रसीद
जगदीश जी पाटीदार ९८२६६-८९२१० ढल्मु
प्रकाश जी पाटीदार ९६६९०-६४६१२ साठीया
राजेन्द्र जी पाटीदार साठिया ८१२०४-७६१०५
दिनेशजी पाटीदार चचावदा ९८९३७-०८२१३
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ
मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर
जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार
मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट
जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार
जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी
मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़





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