
भूमिका - मुक्ति धाम हतुनिया में सेवा का दीपमध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का छोटा सा ग्राम हतुनिया, आज जन-सेवा और आध्यात्मिक चेतना का एक सुंदर उदाहरण बन रहा है। यहाँ का मुक्ति धाम केवल एक श्मशान परिसर नहीं, बल्कि जीवन के अंतिम सत्य को शांति, सौंदर्य और करुणा के साथ समझाने वाला पवित्र स्थल है।इसी पवित्र परिसर के विकास के क्रम में एक प्रेरणादायी अध्याय जुड़ा है - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा ७ सीमेंट बेंचों की भेंट।यह दान डॉ. अनिल कुमार दामोदर राठौर S/o साहित्य मनीषी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा अपने पिता के द्वारा प्रवर्तित 'आध्यात्मिक दान-पथ' के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए किया गया है।मुक्ति धाम हतुनिया - शांति का सागरहतुनिया मुक्ति धाम की कहानी उसकी समिति के समर्पण की कहानी है। श्री फूलचंद जी चौधरी - अध्यक्ष, श्मशान समिति, श्री घनश्याम जी चौहान और श्री सत्यनारायण जी टेलर जैसे शुभचिंतकों के नेतृत्व में समिति ने इसे एक आदर्श परिसर बनाया है।इसकी विशेषताएं मन को मोह लेती हैं -शांत और पवित्र परिसरहरित वृक्षों की शीतल छायाखुशनुमा और आत्मिक संतोष देने वाला वातावरणआगंतुकों के लिए सीमेंट की स्थायी बेंचेंगहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वइसी भाव को हमारे काव्य ने यूं पिरोया है -मुक्ति धाम हतुनिया में, शांति का सागर बहता है,फूलचंद जी के नेतृत्व से, सेवा का दीपक रहता है।सीमेंट बेंचें सजतीं यहाँ, श्रद्धा का स्वर गूँजता है,दान अनिल राठौर का, जन-कल्याण में पूज्य बनता है।यह दान केवल बेंचें नहीं, एक विचार हैयह ७ बेंचों का दान, शामगढ़ के आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान का एक हिस्सा है, जिसे साहित्य मनीषी डॉ. दयाराम जी आलोक ने प्रारंभ किया है।इस दान-पथ की प्रमुख विशेषताएं हैं -सेवानिवृत्ति के बाद संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण में समर्पित करने का विरल संकल्प लिया है।व्यापक दायरा: उनका कार्य एक गाँव तक सीमित नहीं। मंदसौर, झालावाड़, आगर, नीमच, रतलाम, झाबुआ - मध्यप्रदेश और राजस्थान के 6 जिलों के मंदिरों, गौशालाओं और मुक्ति धामों तक इसका विस्तार है।सुविधा-केंद्रित दृष्टि: वृद्धजनों और यात्रियों को बैठने के लिए स्वच्छ, स्थायी स्थान मिले, इसी सोच से वे मुख्यतः सीमेंट बेंचें दान करते हैं।स्व-वित्तपोषित मॉडल: यह पूर्णतः उनकी पेंशन और उनके ब्लॉग व यूट्यूब चैनल @aloksandesh से प्राप्त गूगल आय पर आधारित है - तकनीक से परोपकार का अनुपम संगम।निरंतरता: यह एक बार का कार्य नहीं, अब तक 151 से अधिक संस्थानों में वे बैठक व्यवस्था और सौंदर्यीकरण में योगदान दे चुके हैं।पेंशन का त्याग कर, आलोक जी ने आदर्श दिखाया है,151 संस्थानों में, सेवा का दीप जलाया है।इसी परंपरा को उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार जी ने दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से आगे बढ़ाया है। मुक्ति धाम हतुनिया में लगाई गई इन बेंचों पर बैठे लोगों का समूह फोटो और "मुक्ति धाम हतुनिया का वीडियो आलोक की आवाज में" इस सेवा की जीवंत साक्षी हैं।शास्त्र कहता है -दानं धर्मस्य मूलं स्यात्, सेवा लोकहिताय च।आलोकस्य कृपायुक्तं, पुण्यं सर्वत्र शोभते॥मुक्तिधामे समायुक्तं, शान्तिः सौन्दर्यमेव च।अनिलेन प्रदत्तानि, बेंचाः भक्तानुपकारिणः॥निश्चित ही, जब शमशान समिति के परिश्रम, डॉ. आलोक के आदर्शों और डॉ. अनिल राठौर के सहयोग का त्रिवेणी संगम होता है, तो मुक्ति धाम केवल मुक्ति का नहीं, बल्कि मानवता और प्रेरणा का भी धाम बन जाता है मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के ग्राम ह्तुनिया के मुक्ति धाम में
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बेंचें भेंट
मुक्तिधाम का काव्यात्मक विवरण
छंद 1
मुक्ति धाम हतुनिया में, शांति का सागर बहता है,
फूलचंद जी के नेतृत्व से, सेवा का दीपक रहता है।
सीमेंट बेंचें सजतीं यहाँ, श्रद्धा का स्वर गूँजता है,
दान अनिल राठौर का, जन-कल्याण में पूज्य बनता है।
छंद 2
हरित वृक्षों की छाया में, जीवन का संदेश मिलता है,
खुशनुमा वातावरण में, आत्मा का संतोष खिलता है।
डॉ. आलोक के आदर्शों से, प्रेरणा का दीप जलता है,
समाज सेवा के पथ पर, हर जन का मन मचलता है।
छंद 3
पेंशन का त्याग कर, आलोक जी ने आदर्श दिखाया है,
151 संस्थानों में, सेवा का दीप जलाया है।
दान-पथ की गाथा उनकी, प्रेरणा का अमृत बनती है,
मुक्ति धाम की हर बेंच पर, करुणा की छाया रहती है।
छंद 4
शमशान समिति के संग, जन-कल्याण का स्वर गूँज रहा,
दान अनुष्ठान से समाज में, पुण्य का दीपक धधक रहा।
मंदसौर से झालावाड़ तक, सेवा का विस्तार हुआ,
आलोक जी के संकल्प से, धर्म-पथ उज्ज्वल हुआ।
श्लोक
दानं धर्मस्य मूलं स्यात्, सेवा लोकहिताय च।
आलोकस्य कृपायुक्तं, पुण्यं सर्वत्र शोभते॥
मुक्तिधामे समायुक्तं, शान्तिः सौन्दर्यमेव च।
अनिलेन प्रदत्तानि, बेंचाः भक्तानुपकारिणः॥
सेवानिवृत्तजीवनेऽपि, धर्ममार्गे स्थितो दृढः।
आलोकः समाजाय, दीपः पुण्यप्रकाशकः॥

मुक्तिधाम की कहानी बहुत प्रेरणादायक है! फूलचंद जी के नेतृत्व में मुक्तिधाम समिति की मेहनत और डॉ. दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित डॉ. अनिल कुमार राठौर का सहयोग इस परिसर को और भी सुंदर और उपयोगी बना रहा है।मुक्तिधाम की विशेषताएं:1. शांत और पवित्र परिसर2. हरित पेड़-पौधों की मौजूदगी3. खुशनुमा वातावरण4. सिमेन्ट की बेंचें5. धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वडॉ. अनिल कुमार राठौर का योगदान:1. दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से सहयोग2. ७ सीमेंट की बेंचें प्रदान कीं3. समाज सेवा और धार्मिक उत्थान में योगदानआपके चैनल @aloksandesh के माध्यम से धार्मिक और आध्यात्मिक वीडियोज़ प्राप्त करने के लिए सदस्यता लेना एक अच्छा विचार है!मुक्तिधाम के लिए आर्थिक सहयोग और समाज की भागीदारी से इस परिसर को और भी विकसित किया जा सकता है
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मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
मुक्ति धाम हतुनिया जिला मंदसौर हेतु
७ सीमेंट बेंचें भेंट
मुक्ति धाम हतुनिया का विडियो आलोक की आवाज
दामोदर अस्पताल शामगढ़ द्वारा लगवाई बेंचों पर बैठे लोगों का ग्रुप फोटो
फूलचंदजी चौधरी ९९७७१९४२८४ - अध्यक्ष शमशान समिति
घनशाम जी चौहान
सत्य नारायण जी टेलर
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा मुक्ति धाम हतुनिया हेतु दान सम्पन्न
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