नारायणगढ़ मुक्तिधाम में सेवा का एक मौन अध्याय
जीवन की अंतिम यात्रा का पड़ाव भले ही मौन हो, पर उस मौन को गरिमामय, शांत और सुंदर बनाने का दायित्व जीवित समाज का ही है। हमारे शास्त्रों ने श्मशान को भी तीर्थ कहा है, जहाँ देह पंचतत्व में विलीन होती है और आत्मा अपने अगले पथ पर अग्रसर होती है। ऐसा ही एक तीर्थ, अपनी पावनता, स्वच्छता और आत्मीय देखरेख के कारण समूचे क्षेत्र में आदर पा रहा है - मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ तहसील के प्रमुख कस्बा नारायणगढ़ का मुक्तिधाम।
सड़क किनारे स्थित यह मुक्तिधाम केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं है। यह प्राकृतिक सुंदरता, औषधीय जड़ी-बूटियों की हरियाली और मानवीय संवेदना से सुसज्जित एक जीवंत परिसर है। मंदसौर जिले के सर्वाधिक सुंदर और सर्व-सुविधा संपन्न मुक्तिधामों में नारायणगढ़ का नाम अग्रणी पंक्ति में लिया जाता है, और इसका श्रेय जाता है इसके समर्पित संरक्षक, समिति अध्यक्ष श्री बंशीलाल जी पाटीदार और उनकी टीम को, जो निरंतर इसे संवारने में लगे हैं।
इसी पावन स्थल पर सेवा की एक और कड़ी जुड़ी है। समाजसेवी और आध्यात्मिक चेतना के संवाहक डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़ के प्रेरणादायी प्रयासों से, उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ के माध्यम से मुक्तिधाम की सुविधा हेतु 10 सीमेंट बेंचों की भेंट की गई। ये बेंचें केवल बैठने का साधन नहीं, अपितु उस कठिन क्षण में आए परिजनों और आगंतुकों के लिए थोड़े विश्राम, थोड़े संबल का आधार हैं। इस निष्काम सेवा के सम्मान स्वरूप दानदाता की दान-पट्टिका मुक्तिधाम के हॉल में स्थापित की गई है तथा समिति द्वारा हृदय से आभार और सम्मान व्यक्त किया गया।
यह छोटा सा प्रसंग, एक बड़े आध्यात्मिक दान-पथ का हिस्सा है।
मंदसौर, झालावाड़, आगर, नीमच, रतलाम और कोटा, झाबुआ तक फैले मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों के लिए डॉ. दयाराम जी आलोक का यह अनुष्ठान निरंतर चल रहा है। दर्जी समाज की 9 कन्याओं के स्ववित्तपोषित निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन, डग के दर्जी मंदिर में सत्यनारायण प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा, सैकड़ों सीमेंट बेंचों और नकद सहयोग, दर्जी समाज की वंशावलियों का निर्माण, दामोदर दर्जी महासंघ का गठन और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सजग संघर्ष - ये सब उस व्यक्ति की जीवन-साधना हैं जो अपने 87 वें वर्ष में भी सेवा के नूतन अवसर सृजित करने के अरमान संजोए हुए है।
एक सेवानिवृत्त अध्यापक के रूप में उन्होंने अपनी कुल 5 वर्ष की पेंशन राशि को समाजार्पित करने का संकल्प लिया है। इस संकल्प में उनकी 6 वेबसाइटों से गूगल विज्ञापन से प्राप्त आय का 68% हिस्सा भी सम्मिलित है। यह समस्त दान राशि और सीमेंट बेंचें उनके पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़" के नाम से समर्पित हो रही हैं - परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद से।
नारायणगढ़ मुक्तिधाम में की गई यह बेंच व्यवस्था उसी त्याग, संस्कार और सेवा की परम्परा की एक कड़ी है, जो यह सिखाती है कि दान केवल वस्तु का नहीं, दृष्टि का भी होता है।
नारायण गढ़ जिला मंदसौर के मुक्ति धाम के लिए
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बैंच व्यवस्था
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-पथ
नारायणगढ़ मुक्तिधाम मे
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