लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। सनातन आध्यात्म -जाति इतिहास-दान विमर्श : शामगढ़ के खेड़ापति हनुमान मंदिर में 21 हजार का दान । डॉ .आलोक का आध्यात्मिक दान पथ

15.7.23

शामगढ़ के खेड़ापति हनुमान मंदिर में 21 हजार का दान । डॉ .आलोक का आध्यात्मिक दान पथ


दान है जीवन का सोपान - शामगढ़ के संकट हरण खेड़ापति हनुमान मंदिर में दामोदर अस्पताल परिवार का समर्पण


मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का एक प्रमुख व्यावसायिक नगर है - शामगढ़। आज का यह चहल-पहल भरा नगर, लगभग 100 वर्ष पूर्व के छोटे से शामगढ़ गाँव का ही विस्तारित रूप है। उसी मूल शामगढ़ गाँव में आज भी आस्था का एक अडिग केंद्र स्थित है - प्राचीन खेड़ा पति हनुमान मंदिर।
यह मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि भक्तों के संकट हरण का जीवंत स्थान है। पीढ़ियों से यहाँ हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा बनी हुई है। मंदिर की विशेषता यह भी है कि इससे लगा हुआ एक विशाल प्रांगण है, जहाँ वर्ष भर शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। इस परिसर में पानी और भोजन बनाने के बर्तनों की उपलब्धता होने से आयोजकों को बड़ी सुविधा मिलती है। इस संस्थान के मुख्य पुरोहित श्री सत्यनारायण जी पंडित हैं, और व्यवस्था के सूत्रधार हैं श्री मोहनलाल जी राठौर एवं श्री ललित जी पालीवाल।
इसी पावन स्थल पर जन-सुविधा के विस्तार हेतु एक पुण्यमय योगदान संपन्न हुआ है।
साहित्य मनीषी, समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक के सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा खेड़ापति हनुमान मंदिर हेतु 21 हजार रुपये का दान समर्पित किया गया है। इस दान में 5 सीमेंट बेंच एवं 5000 रुपये नकद सम्मिलित हैं। इस सहयोग से मंदिर परिसर में आने वाले वृद्धजनों, महिलाओं, यात्रियों एवं विवाह समारोह में आने वाले अतिथियों के लिए बैठक सुविधा का महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है।
पाँच सीमेंट बेंच और नकद दान, इक्कीस हजार का समर्पण महान।
यह दान किसी एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि एक दीर्घकालीन आध्यात्मिक दान अनुष्ठान का हिस्सा है।
इस दान अनुष्ठान की आत्मा - डॉ. दयाराम जी आलोक
डॉ. दयाराम जी आलोक एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं, जो विगत 60 वर्षों से निरंतर समाज सेवा के कार्यों में अग्रगण्य रहे हैं। सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को जन-कल्याण में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
उनके दान-पथ की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1. व्यापक सेवा दायरा: उनका कार्य एक मंदिर तक सीमित नहीं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम, झाबुआ जिलों तक फैले हुए अनेकों मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में वे सेवा दे चुके हैं।
2. सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे वही दान करते हैं जिसकी सबसे अधिक आवश्यकता है - वृद्धों और यात्रियों के बैठने के लिए पक्की, स्वच्छ सीमेंट बेंच, रंग-रोगन, और मूलभूत सुविधाएँ। अब तक 151 से अधिक संस्थानों में यह कार्य संपन्न हो चुका है।
3. स्व-वित्तपोषित और तकनीक से जुड़ा मॉडल: यह पूरा अनुष्ठान उनकी पेंशन और उनके ब्लॉग व यूट्यूब वीडियोज से गूगल से प्राप्त आय पर आधारित है। यह इस बात का प्रमाण है कि साहित्य और तकनीक को परोपकार का माध्यम कैसे बनाया जा सकता है।
4. पारदर्शिता और प्रेरणा: दान की गई बेंचों पर शिलालेख लगवाना, ताकि दानदाता का सम्मान हो और अन्य लोग भी प्रेरित हों।
शास्त्रों में कहा गया है - "दान है जीवन का सोपान, उच्च स्तर पर ले जाए इंसान।"
इसी भावना के साथ किया गया यह 21 हजार का दान, खेड़ापति हनुमान मंदिर के विकास में एक छोटा सा किन्तु अमिट निशान है। प्रस्तुत ब्लॉग में हम इसी दान यात्रा का वीडियो, मंदिर परिसर का विहंगम दृश्य और इस पुण्य कार्य से जुड़े सभी क्षणों को विस्तार से साझा कर रहे हैं।

शामगढ़ गाँव के प्रसिद्द  खेडापति हनुमान मदिर हेतु 

डॉ.अनिल कुमार राठौर दामोदर  शामगढ़ ने किया 

२१ हजार रुपये का दान 

शामगढ़ नगर की गाथा पुरानी, गाँव से नगर बनी कहानी। खेड़ा पति हनुमान का मंदिर महान, भक्तों के संकट हरण का स्थान। मंदिर से जुड़ा विशाल प्रांगण, शादी-विवाह का होता आयोजन। पानी-बर्तन की सुविधा यहाँ, आयोजकों को मिलती राहत जहाँ। साहित्य मनीषी आलोक महान, समाज सेवा में सदा अग्रगान। डॉ. अनिल राठौर का योगदान, दामोदर अस्पताल से दान। पाँच सीमेंट बेंच और नकद दान,इक्कीस हजार का समर्पण महान। बैठक सुविधा का विस्तार हुआ,भक्तों का जीवन आसान हुआ। सत्यनारायण पंडित पुरोहित प्रधान, मोहनलाल, ललितजी व्यवस्था निदान। साठ वर्षों से आलोक जी का प्रयास, दान-पुण्य से जीवन का विकास। मंदसौर, आगर, रतलाम, नीमच, झालावाड़, झाबुआ तक,मंदिरों-मुक्तिधाम में सेवा का पथ। सीमेंट बेंच और नकद दान, ईश्वर की छाया में पुण्य महान। दान है जीवन का सोपान,उच्च स्तर पर ले जाए इंसान। आलोक जी की सेवा अमिट निशान, समाज में गूँजता उनका सम्मान।

शामगढ़ मंदसौर जिले का एक प्रमुख व्यावसायिक नगर है | इस नगर के इतिहास मे जाएँ तो पता चलता है कि यह नगर 100 वर्ष पूर्व के शामगढ़ गाँव का ही विस्तारित रूप है| शामगढ़ गाँव मे खेड़ा पति हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है| यह मंदिर भक्तों के संकट हरण के लिए जाना जाता है| इस मंदिर से लगा हुआ एक विशाल परिसर है जिसमे शादी विवाह आदि आयोजन होते रहते हैं| पानी और भोजन बनाने के बर्तन यहाँ उपलब्ध रहने से आयोजकों को काफी सुविधा रहती है| इस संस्थान मे बैठक सुविधा विस्तार के लिए साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक 9926524852 के पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर 98267 95656 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 21 हजार का दान (5 सीमेंट बेंच और 5 हजार नकद )के रूप मे समर्पित किया गया है|मंदिर के मुख्य पुरोहित सत्यनारायणजी पंडित हैं| मोहनलाल जी राठौर और ललितजी पालीवाल यहाँ की व्यवस्था के सूत्रधार हैं| डॉ.दयाराम जी आलोक विगत ६० वर्षों से समाज सेवा के महत्वपूर्ण कार्य सम्पादित करते आ रहे हैं .प्रमुख बिंदु निम्न हैं- दान पुण्य मानव जीवन को उच्च स्तर पर ले जाने का सोपान है| ईश्वर की अनुकम्पा की छाया तले मैंने मंदसौर,आगर,झालावाड,रतलाम,नीमच और झाबुआ जिलों के अंतर्गत आने वाले अनेकों मंदिरों और मुक्तिधाम के लिए सीमेंट बेंच और नकद दान का अनुष्ठान चलाया हुआ है|

                                               

 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के



मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी,समाज सेवी-


डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान अनुष्ठान 

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

  • व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

  • सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

  • स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

  • निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

  • पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।



 खेड़ापति हनुमान मंदिर शामगढ़ गाँव 
21 हजार का दान (5 सीमेंट बेंच और 5 हजार रु.नकद )


शामगढ़ गाँव  मे स्थित खेड़ा पति  हनुमान मंदिर का विडियो 

5000/- nakad


खेड़ापती  हनुमान मंदिर शामगढ़  को 21 हजार दान का विडिओ 



समिति प्रमुख सत्यनारायण जी पुरोहित 52248-08129 पुजारी हैं 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा  खेड़ापति हनुमान मंदिर  शामगढ़ गाँव  हेतु  दान सम्पन्न 
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