लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी।
संस्कृति और समाज: पौराणिक गाथाएं, जाति इतिहास और दान-महिमा: 05.23
इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है। यहाँ आपको भारतीय संस्कृति और समाज का अद्भुत संगम मिलेगा। जानिए वेदों, पुराणों की दिव्य 'पौराणिक गाथाएं' और गहरा 'आध्यात्म'। साथ ही पढ़िए विभिन्न समाजों का गौरवशाली 'जाति इतिहास' और महापुरुषों की जीवनियां। डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधामों व मंदिरों में सीमेंट बेंच और नकद दान के माध्यम से समाज सेवा और 'दान-महिमा' को समर्पित एक अनूठा प्रयास। संस्कृति, इतिहास और सत्कर्म से जुड़ने के लिए हमसे बने रहें-Dr.Dayaram Aalok,M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London)
आद्यात्मिक दान-पथ साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं. डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
भीमनी ग्राम की पहाड़ी पर स्थित गौराजी कालाजी मन्दिर के प्रांगण में दान की बेंचें
गौराजी कालाजी मंदिर भीमनी राज.
15001 का दान( 5 सीमेंट बेंच)
भीमनी मंदिर का विडियो रमाकांत व्यास की आवाज 30/9/2022
Goraji kalaji mandir Bhimni Raj.bench 15/10/2022
Bhimni mandir video
रामसिंग जी 94605-18401 भीमनी की पहल
कालुराम जी पंवार टेलर ९९८२८-८७३७७ का सुझाव
रमाकांतजी व्यास 95713-22802 का सहयोग
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 शामगढ़, दामोदर पथरी अस्पताल98267-95656 शामगढ़ द्वारा डूंगरी पर गोराजी कालाजी मंदिर भीमणी हेतु दान सम्पन्न 5/10/2022
जब सेवा ही साधना बन जाए दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ द्वारा रामपुरा को 5 बेंच समर्पित जीवन की आपाधापी में मनुष्य अक्सर यह भूल जाता है कि अंतिम सत्य क्या है। जन्म और मृत्यु के बीच की यह यात्रा ही जीवन है, पर जिस स्थान पर यह यात्रा पूर्ण होती है, उस 'मुक्ति धाम' को स्वच्छ, शांत और सम्मानजनक बनाना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। नीमच जिले का ऐतिहासिक कस्बा रामपुरा अपने गौरवशाली अतीत के लिए जाना जाता है। कहते हैं गांधी सागर बांध बनने के बाद जब आसपास के सैकड़ों गाँव जलमग्न हुए तो रामपुरा का व्यापार-व्यवसाय भी उजड़ गया। बड़े व्यवसायी पलायन कर गए और वैभव धुंधला हो गया। पर आज, रामपुरा फिर से अपनी पहचान लौटा रहा है, और इस लौटते वैभव में उन सपूतों का योगदान अविस्मरणीय है जो अपनी कर्मभूमि को नहीं भूले। ऐसे ही एक सपूत हैं साहित्य मनीषी, सेवानिवृत्त अध्यापक और समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़। उन्होंने अपनी 5 वर्ष की सम्पूर्ण पेंशन राशि और अपनी लेखनी से अर्जित राशि को ईश्वर को समर्पित करने का एक अनुपम संकल्प लिया है - "आध्यात्मिक दान-पथ"। इसी दान-पथ के अंतर्गत राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, आगर, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में आगंतुकों के विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचें और निर्माण हेतु नकद राशि का अनुष्ठान वे सतत कर रहे हैं। इसी श्रृंखला में उनकी पूर्व कर्मभूमि रामपुरा के लिए यह सेवा प्रस्तुत है। समाजसेवी श्री सुरेश कुमार मकवाना जी की प्रेरणा और श्री कैलाश जी फरक्या एवं जीतू भाई जैन के सहयोग से, उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ के माध्यम से - 1. मुक्ति धाम, गांधी सागर रोड, रामपुरा को 5 बेंच + 2000/- नकद 2. मुक्ति धाम, नाका नंबर 2, रामपुरा को 5 बेंच + 2000/- नकद 3. गायत्री शक्तिपीठ, रामपुरा को 5 बेंच + 2000/- नकद का दान ससम्मान समर्पित किया गया है। यह केवल बेंचों का दान नहीं है, यह अंतिम यात्रा में आए हुए थके-हारे परिजनों को दो पल बैठकर सांत्वना देने का, और श्रद्धा स्थल को सम्मान देने का भाव है। समितियों द्वारा शिलालेख लगाकर इस सेवा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। यह लेख उसी पुण्य सेवा की एक छोटी सी झलक है। मुक्ति धाम नाका-2 रामपुरा
के लिए दामोदर चिकित्सालय शामगढ़
द्वारा 5 बेंच और 2001 /-नकद दान
जहाँ रूह को मिले शांति का स्थान,
वहीं आलोक ने दिया सम्मान।
पेंशन समर्पित, सेवा महान,
मुक्तिधाम में हुआ परिवर्तन जान।
सुरेशजी ने पट्ट लगाया,
दानदाता का नाम जगमगाया।
रामपुरा की धरती पर छाया,
मानवता का दीप जलाया।
भावार्थ: सुरेशजी मकवाना ने इस पावन दान को यादगार बनाने हेतु दानदाता (डॉ. आलोक) का दान पट्ट स्थापित किया है, जिससे समाज में दान की प्रेरणा निरंतर मिलती रहेगी। "जीवनस्य सत्यं मृत्युर्नाम, तत्र शान्तिप्रदं स्थलम्। आलोकस्य करुणा-कार्येण, मुक्तिधामं सुशोभितम्॥" (जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है, परंतु डॉ. आलोक के करुणामय कार्य से मुक्ति धाम सुंदर और शांतिपूर्ण बना। "जहाँ रूह को मिले शांति, वहीं डॉ. आलोक ने दिया सम्मान; एक प्रेरणादायी बदलाव।" जीवन का अंतिम सत्य 'मृत्यु' है, लेकिन जहाँ सांसें थम जाती हैं, उस स्थान को सम्मान और शांतिपूर्ण वातावरण देना एक पुनीत कार्य है। रामपुरा (Rampura) के मुक्ति धाम की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। यहाँ सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं हुआ, बल्कि अंतिम यात्रा पर आने वाले परिजनों के लिए सम्मान और सुविधा के प्रबंध किए गए हैं। सुरेशजी मकवाना ने इस पावन दान को यादगार बनाने के लिए दान दाता का दान पट्ट स्थापित किया ,इससे लोगों को दान की प्रेरणा मिलती रहेगी
रामपुरा नगर के मुक्ति धाम नाका-२ के निमित्त
डॉ दयाराम जी आलोक का दान
रामपुरा शहर का अतीत गौरवशाली रहा है। गाँधीसागर बांध बनने के बाद आस पास के गाँव डूब मे आ जाने से रामपुरा के धंधे व्यवसाय चौपट हो गए । बड़े व्यवसायी रामपुरा छोड़कर अन्य जगह पलायन कर गए। अब रामपुरा का वैभव आहिस्ता आहिस्ता लौट रहा है। रामपुरा शहर मे मुख्य रूप से दो मुक्ति धाम हैं |पहिला गांधी सागर रोड पर है और दूसरा नाका नंबर 2 का है। मुझे लगा कि दोनों ही मुक्ति धाम मे बैठक सुविधा उन्नत करने की आवश्यकता है। सामाज सेवी सुरेश कुमार जी मकवाना से जानकारी लेकर मैंने अपने आध्यात्मिक दान-पथ के सिलसिले मे कैलाशजी फरक्या और जीतू भाई जैन से संपर्क किया । दान -पट्टिकाऐं यथास्थान लगने के बाद डॉ . अनिल कुमार राठौर ,दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से प्रत्येक मुक्ति धाम को 5-5 बेंचें और दो -दो हजार नकद दान समर्पित करते हुए दान संपन्न किया ।रामपुरा मे गायत्री शक्तिपीठ अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है. समिति बनी हुई है | मुख्य व्यवस्थापक मदन लाल जी मंडवारिया से संपर्क किया और मंदिर को 5 बेंच और 2 हजार नकद का दान समर्पित किया । तीनों संस्थानों की समितियों द्वारा दान दाता का आभार ज्ञापित किया गया .
समाजसेवी सुरेशजी मकवाना लिखते हैं-"डॉ दयाराम आलोक जी का यह कार्य वास्तव में प्रशंसनीय है! उन्होंने अपनी दान भावना को साकार करते हुए अपनी पूर्व कर्म भूमि रामपुरा नगर के गायत्री मंदिर और नगर के दोनों मुक्तिधाम में सीमेंट की बेंच दान की है, जिससे श्रद्धालुओं और नगर के नागरिकों को सुविधा होगी।इसके अलावा, 1981 में दर्जी समाज का प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन का सफल आयोजन करना भी एक महत्वपूर्ण कार्य है, जिससे समाज में एकता और सौहार्द को बढ़ावा मिला | रामपुरा नगर के नागरिक समाज को डॉ आलोक जी की सेवाओं का स्मरण होना जरूरी है , क्योंकि उन्होंने अपने जीवन को समाज की सेवा में समर्पित किया है। उनका यह कार्य एक मिसाल है जो दूसरों को भी समाज के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित कर सकता है।डॉ आलोक जी को उनके इस कार्य के लिए धन्यवाद और अभिनंदन"
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
कायावरणेश्वर शिवालय राजस्थान के झालावाड़ जिले में डग कस्बे से 7 किलोमीटर दूर स्थित एक प्राचीन और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका परिसर विशाल और हरित है।
मंदिर की विशेषताएं:
- प्राकृतिक मनोरम हरियाली पहाड़ियों से घिरा हुआ
- पौराणिक कालीन राजा जन्मेजय की कथा से जुड़ा हुआ
- विशाल परिसर
- उधयान में विभिन्न प्रजातियों के फल और फूलदार पेड़-पौधे
- गुरुकुल संचालित
- गौशाला से सम्बद्ध
- भगवान शिव की सैंकड़ों वर्ष पुरानी प्रतिमा
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक जी का योगदान:
- 20 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित
- मंदिर के महात्म्य को आत्मसात किया
- प्रबंधक मंडल से संपर्क और दान-विमर्श
- शिलालेख मंदिर के प्रमुख द्वार की दीवार पर लगाया गया
डॉ. दयाराम आलोक जी का यह दान न केवल मंदिर की सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि यह भक्तों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी है। उनका यह अनुष्ठान मंदिरों और मुक्तिधाम को व्यवस्थाएं उन्नत करने के लिए आर्थिक दान के साथ सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने का है। बोलिए कायावरणेश्वर महादेव की जय!
प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर:कायावर्णेश्वर महादेव के दर्शन
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का आध्यात्मिक दान -पथ
मित्रों, परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है| मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६ वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|
कायावर्णेश्वर महादेव क्यासरा -डग मन्दिर हेतु 20 सीमेंट बेंच
क्यासरा महादेव ,राजस्थान का विडियो पिंकेश जी भावसार पीडावा ने भेजा 25/9/2022
क्यासरा महादेव में दान पट्टी व् बेंच का दृश्य
क्यासरा महादेव का विडियो
क्यासरा महादेव मंदिर के शुभचिंतक व समिति संरचना
श्री मोहन लाल जी व्यास (गुरुजी सभाध्यक्ष),
एसडीएम गंगधार (पदेन अध्यक्ष),
श्री भेरू सिंह जी परिहार अध्यक्ष
श्री शम्भू जी पोरवाल
श्री ललित जी अग्रवाल
श्री कुन्दन जी व्यास
मनीष जी प्रेमी की पहल से दान प्रक्रिया सम्पन्न हुई।
अमृत जी कारपेंटर
किशोर राजगुरु
रामदयाल जी शर्मा
(कार्यालय)
डग कस्बे के समीप प्रकृति की गोद में क्यासरा स्थित कायावर्णेश्वर महादेव मंदिर हाड़ाैती का प्रमुख शिवालय है। इस प्राचीन मंदिर में स्थित सवा तीन फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शनार्थ पूरे सावन मास में राजस्थान व मध्यप्रदेश से शिव भक्त आते हैं। मंदिर में लगे प्राचीन जानकारी के अनुसार झालावाड़ के महाराजा स्वर्गीय राजेंद्र सिंह ने 1944 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था तथा उन्होंने यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशाला भी बनवाई थी। क्यासरा तीर्थ के भानपुरा पीठ पूर्व शंकराचार्य एवं भारत माता मंदिर हरिद्वार के संस्थापक स्वामी सत्यामित्रानंद गिरी महाराज की प्रेरणा से 1987 में यहां अन्न क्षेत्र का शुभारंभ किया था, जो वर्तमान में निरंतर जारी है। यहां 1992 में विशाल 1008 कुंडी लक्षचंडी महायज्ञ भी हुआ था।
क्या है मान्यता : स्थानीय निवासियाें के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग प्रति वर्ष तील व जाै के आकार जितना बढ़ता है। बुजुर्गाें का दावा है कि चर्म रोग या कुष्ठ रोग पीड़ित राेगी यहां मंदाकनी कुंड से जल लेकर स्नान करता है तो उसकी बीमारी खत्म हो जाती है।
कैसे पहुंचे: डग-सुकेत मेगा हाईवे पर डग कस्बे से आठ किमी दूर कायावर्णेश्वर महादेव मंदिर तक जाने के लिए डग से कई निजी वाहन उपलब्ध हैं।
डॉ.अनिल कुमार दामोदर आत्मज डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा कायावर्णेश्वर महादेव शिवालय हेतु 51 हजार का दान सम्पन्न
भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है। इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है। जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है। प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है। - डॉ. दयाराम आलोक
माँ आशापुरा का मंदिर रुंडी गेलाना के लिए
समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा
5 सिमेन्ट बेंच और 5 हजार नकद दान
छंद 1
माँ आशापुरा की महिमा महान,
भक्तों के जीवन में करती कल्याण।
महेंद्रसिंग जी प्रबंधक सदा तत्पर,
सेवा में रत, श्रद्धा अमर।
छंद 2
करणसिंग जी अध्यक्ष गोरधनपुरा,
मंदिर की व्यवस्था में नित्य सुधारा।
दान पट्ट अंकित आलोक का नाम,
पुण्य पथ पर जगमग धाम।
छंद 3
सीमेंट बेंचें बनीं सुखद आसन,
श्रद्धालु बैठें करें ध्यान रसधन।
पाँच हजार दान रंग रोगन हेतु,
मंदिर में छाया सौंदर्य प्रखर।
छंद 4
डॉ. आलोक का संकल्प महान,
पेंशन राशि दान कर किया सम्मान।
माँ आशापुरा की जयकार गूँजी,
भक्ति की धारा मंदिर में पूंजी।
धार्मिक,आध्यात्मिक संस्थानों मे दर्शनार्थियों के लिए सिमेन्ट की बैंचों की व्यवस्था करना महान पुण्य का कार्य है। दान की भावना को साकार करते हुए डॉ. दयाराम जी आलोक मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मुक्ति धाम और मंदिरों के लिए नकद दान के साथ ही सैंकड़ों सीमेंट की बेंचें भेंट करने के अनुष्ठान को गतिमान रखे हुए हैं | आशापुरा माता, चौहान वंश की कुलदेवी हैं. उन्हें शाकंभरी (सांभर लेक सिटी, राजस्थान) के सोनगरा चौहान के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि सांभर में ही करीब 1300 साल या उससे ज़्यादा पहले आशापुरा माता का पहला मंदिर बना था. अपने आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान के परिप्रेक्ष्य मे समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने माँ आशापुरा मंदिर रुंडी गेलाना के प्रबंधक महेंद्र सिंग जी देवरिया विजय और करण सिंग जी गोरधन पूरा से संपर्क करते हुए डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से माता आशापुरा के चरणों 5 सिमेन्ट बेंचें और 5 हजार नकद दान समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया | 5 हजार रुपये का रंग रोगन विश्राम कुटी पर करवा दिया है| --जय हो माँ आशापुरा रुंडी गेलाना वाली !
माँ आशापुरा मन्दिर रुंडी गैलाना का विडियो
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आद्यात्मिक दान-पथ साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं. डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
माँ आशापुरा मंदिर रूंडी गैलाना
5 बेंच और 5000/- नक़द दान
श्री महेंद्र सिंग जी ने दान पट्टिका स्थापित किया / 21/12/2022
उक्त रेस्ट हाउस पर कलर करने के लिए
*आशापुरा माता के सेंट्रल बेंक अकाउंट मे 5 हजार रुपये जमा किए 22/12/2022
आशापुरा मंदिर के प्रबंधक श्री करन सिंग जी और श्री महेंद्र सिंग जी ने दान दाता डॉ.दयाराम जी आलोक की भावना को समझते हुए रेस्ट हाउस पर बहुत ही आकर्षक कलर करवा दिया है .
मंदिर समिति के प्रमुख व्यवस्थापक -
महेंद्र सिंग जी देवरिया विजय प्रबंधक 82250-98088
करण सिंग जी गोरधनपुरा अध्यक्ष 80854-90606
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल98267-95656 शामगढ़ द्वारा माँ आशापुरा मंदिर गैलाना हेतु दान सम्पन्न 16/11/2022
मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के गाँव बरखेड़ा गाँगासा का दूधा खेड़ी माताजी का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। लकवे के रोगी ठीक होने का इतिहास है। इस मंदिर मे होने वाला भंडारा मशहूर है। हजारों लोग शरीक होते हैं। माता भक्त श्री बदरीलाल जी फरक्या मंदिर की व्यवस्था कार्य मे लगे रहते हैं। मंदिरों और मुक्ति धाम को सिमेन्ट की बेंच दान करने के अपने आध्यात्मिक अनुष्ठान के सिलसिले मे बद्री लाल जी से संपर्क हुआ । मंदिर मे बैठक सुविधा को उन्नत करने के लिए दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से ५ सिमेन्ट की बेंच समर्पित की गईं --डॉ .आलोक शामगढ़
दूधाखेडी माताजी के मन्दिर में दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ प्रदत्त सीमेंट बेंचें
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आद्यात्मिक दान-पथ साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube पर विडियो से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
माँ दूधाखेड़ी मंदिर बरखेड़ा गांगासा हेतु
5 सिमेन्ट बेंच भेंट
दूधाखेडी माताजी का मंदिर बरखेड़ा गंगासा विडियो १९/३/२०२४
अंकितजी ने दान पट्टिका स्थापित की
माँ दूधाखेड़ी मंदिर बरखेड़ा का चित्र
बरखेड़ा गांगासा के दुधाखेड़ी माताजी के मंदिर का विडियो
बरखेड़ा गांगासा की माँ दुधाखेड़ी के मंदिर मे बेंच लगीं 8/9/2022
दूधा खेड़ी माताजी बरखेड़ा गांगासा के शुभचिंतक
अंकित जी फरक्या 84589-54116
बद्री लाल जी फरक्या 99260-43873 मंदिर प्रबंधन के अध्यक्ष हैं.
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 आत्मज डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656,शामगढ़ द्वारादूधाखेड़ी माताजी मंदिर बरखेड़ा गांगासाहेतु दान सम्पन्न