आध्यात्मिक दान अनुष्ठान
भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है।इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है।
जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है।
प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है।
- डॉ. दयाराम आलोक
सुनारी गाँव तहसील भानपुरा जिला मंदसौर के
श्री हनुमान मंदिर हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बेंचों की व्यवस्था
हनुमान मंदिर ग्राम सुनारी का महात्म्य
काव्यात्मक छंद (4)
छंद 1 सुनारी के मंदिर में, श्रद्धा का उजास, कपिल जी परमार टेलर ने, दिया सेवा का प्रकाश। 97137‑37087 से, जुड़ा जन सम्मान, समाजहित में उनका, रहा अनुपम योगदान।
छंद 2 सत्यनारायणजी राजू भाई, उपसरपंच महान, मंदिर शुभ चिंतक बन, बढ़ाया जन कल्याण। धर्मस्थल की उन्नति में, उनका रहा विचार, जनसेवा की गाथा, अमर हुई अपार।
छंद 3 राम प्रताप जी गायरी, समिति अध्यक्ष बने, संगठन की शक्ति से, मंदिर कार्य सजे। सामूहिक प्रेरणा से, बढ़ा पुण्य प्रवाह, जनमानस में फैला, श्रद्धा का अथाह।
छंद 4 मुख्य पुजारी रामचन्द्र जी, पाटीदार का नाम, पूजन से मंदिर में, गूँजा पावन धाम। बाबुल्दा की धरती पर, सेवा का विस्तार, धन्य हुआ समाज, बढ़ा पुण्य अपार।
जय-जयकार गूँजे बालाजी सरकार भक्तों को सुविधा, श्रद्धा का उपहार।
श्लोक -
सुनारीग्रामे हनुमानप्रतिमा मनोहरम् । अनिलदामोदरदत्ताः बेंचाः भक्तानां सुखाय च ॥ आलोकदानपरम्परया पुण्यं प्रसारितम् । बालाजी सरकाराय नमः सर्वसिद्धिदायकम् ॥
रामप्रतापसमित्या च, अध्यक्षेन प्रतिष्ठितम्। रामचन्द्रपाटिदारेण, पूज्यं धर्मनिवासकम्॥
हनुमान मंदिर ग्राम सुनारी का दृश्य
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ
*दामोदर दर्जी समाज महासंघ आयोजित सामूहिक विवाह के विडिओ
*दर्जी समाज मे मोसर (मृत्युभोज) के विडिओ
पौराणिक कहानियाँ के विडिओ
मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियों के विडिओ भाग 1
*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा
*डॉ . आलोक का काव्यालोक
*दर्जी वैवाहिक महिला संगीत के विडिओ
*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3
*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2
*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4
मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5
*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 6
*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 7
*मनोरंजन,शिक्षा ,पर्यटन,उपदेश के विडिओ
*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ
*जातियों के महापुरुषों की जीवनी के विडिओ
*धार्मिक ,सामाजिक त्योहार व जुलूस के विडिओ


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