मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के नारिया बुज़ुर्ग ग्राम के
बाबा राम देव मंदिर में
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
3 सीमेंट की बेंचें भेंट
नारिया बुज़ुर्ग का पावन धाम, बाबा रामदेव जी का नाम। भव्य रंग-रोगन से शोभित मंदिर, भक्तों का विश्वास अटल, गंभीर।
तीन बेंचें दान स्वरूप मिलीं, सेवा की गाथा जग में खिली। दामोदर पथरी अस्पताल का योगदान, आलोक जी का समाज हित संधान।
ग्राम जनों ने किया सम्मान, पुजारी संग जताया आभार महान। दान पट्टिका मंदिर में स्थापित हुई, प्रेरणा की ज्योति सर्वत्र जली।
श्लोक-
रामदेवस्य मंदिरं दिव्यं, नारियायां ग्रामे स्थितम्। आलोकेन प्रदत्तं बेंचं, भक्तानां सुखवर्धनम्॥ दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना। पथरी अस्पतालात् दत्तं, समाज हिताय साधना॥
यह जानकारी से पता चलता है कि:
- बाबा रामदेव जी का मंदिर नरिया बुजुर्ग गाँव में स्थित है।
- मंदिर अपनी अलौकिक भव्यता और सुंदर रंग रोगन के लिए प्रसिद्ध है।
- डॉ. दयाराम जी आलोक ने मंदिर को 3 सिमेन्ट की बेंचें दान की।
- यह दान दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से सम्पन्न हुआ।
- मंदिर के पुजारी और ग्राम जनों ने आलोक जी का सम्मान किया
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान -पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

३ सीमेंट की बेंचें दान
रामदेवजी मंदिर नारिया बुज़ुर्ग के दृश्य
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


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