12.12.23

मध्य प्रदेश के मनोनीत मुख्य मंत्री मोहन यादव का जीवन परिचय






  मध्य प्रदेश विधानसभा की वेबसाइट के अनुसार, मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को हुआ था। उनका जन्म उज्जैन में हुआ था। उनके पिता का नाम पूनमचंद यादव हैं।
उनकी शादी सीमा यादव से हुई हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। मोहन यादव के पास बीएससी, एलएलबी, एमए, एमबीए और पीएचडी सहित कई शैक्षणिक डिग्रियां हैं। मोहन यादव शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
वह 2013 में उज्जैन दक्षिण सीट से पहली बार विधायक बने थे। 2018 मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में, वह एक बार फिर चुने गए और उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक बने। उन्होंने मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। 2 जुलाई 2020 को उन्होंने श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली।

मध्य प्रदेश के मुख्या मंत्री बने 

मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की घोषणा हो गई हैं। मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया हैं। विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लग गई हैं। मोहन यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं। वह उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इस बार वह तीसरी बार विधायक बने हैं। मोहन यादव को मुख्यमंत्री, जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ला को डिप्टी सीएम बनाया गया हैं।

संघ के करीबी 

मोहन यादव को संघ का करीबी बताया जाता हैं। जानकारी के मुताबिक, विधायक दल की बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने खुद मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव रखा. मोहन यादव ने माधव साइंस कॉलेज से पढ़ाई की हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री रह चुके हैं। 1982 में छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए थे।
वे भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य रह चुके हैं। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण के प्रमुख पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। 2013 और 2018 के बाद 2023 में भी वह उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कमलनाथ के चेहरे पर लड़ रही कांग्रेस महज 66 सीटों पर सिमट गई। म
ध्य प्रदेश में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ विधायक दल की बैठक में मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव का नाम तय किया गया है।
 मप्र के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम चौंकाने वाला रहा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश का सीएम बनने की दौड़ से सभी नाम बाहर हो गए। अब मप्र की कमान मोहन यादव के हाथ में रहेगी। यानी प्रदेश में अब शिव का राज नहीं मोहन राज होगा। मोहन यादव ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। अब वे प्रदेश के सत्ता के शीर्ष पर विराजमान हो गए हैं। आइए, उनके बारे में विस्तार से जानते हैं..
 छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अगले पांच साल के लिए डॉ. मोहन यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला प्रदेश के नए उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नरेंद्र सिंह तोमर को एमपी विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई है।
 तीन दिसंबर को विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे घोषित होने के बाद से ही लगातार इस बात को लेकर सस्पेंस चल रहा था कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री आखिर कौन होगा इस दौड़ में वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही कहीं वरिष्ठ नेताओं के नाम चल रहे थे, लेकिन सोमवार को भोपाल में मध्य प्रदेश भाजपा विधायक दल के बैठक के दौरान की गई घोषणा ने अचानक सभी को उस समय चौंका दिया, जब उज्जैन दक्षिण के विधायक और शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉ. मोहन यादव को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की घोषणा कर दी गई। यहां याद रहे की उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव वर्तमान में उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं, जो की वर्ष 2013 में पहली बार इस क्षेत्र से विधायक बने थे, जिसके बाद वर्ष 2018 में फिर इसी विधानसभा सीट से विजय श्री हुए। उन्होंने 2 जुलाई 2020 को शिवराज सरकार मे उच्च शिक्षा मंत्री की शपथ ली थी। जिसके बाद 3 दिसंबर 2023 को वे लगभग 13000 मतों से उज्जैन दक्षिण क्षेत्र से विजय श्री घोषित हुए थे। डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव हैं। उनकी पत्नी सीमा यादव हैं

मुख्यमंत्री बनने तक कुल 41 वर्षों का रहा संघर्ष

डॉ. मोहन यादव को मंत्री पद तक पहुंचने के लिए 41 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा है। उन्होंने माधव विज्ञान महाविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। पार्टी में कई पदों पर रहने के बाद सरकार में उन्हें मंत्री बनने का मौका मिला है। कई बार वह बयानों को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहे हैं। 1982 में वे माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव और 1984 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1984 मे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री और 1986 मे विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। यही नहीं वर्ष 1988 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं। 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री और सन 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं।1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खंड कार्यवाह, सायं भाग नगर कार्यवाह और 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह रहे हैं। संघ में सक्रियता की वजह से मोहन यादव 1997 में भाजयुमो प्रदेश समिति में अपनी जगह बनाई। 1998 में उन्हें पश्चिम रेलवेबोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य भी बने। इसके बाद उन्होंने संगठन में रहकर अलग-अलग पदों पर काम किया। 2004-2010 के बीच वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) रहें। 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) भी बने। पहली बार 2013 में वह विधायक बने। 2018 में भी पार्टी ने उनपर भरोसा किया और वह चुनाव जीतने में सफल रहे। 2020 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो मोहन यादव फिर से मंत्री बने।


मोहन यादव की शिक्षा और करियर

डॉ. मोहन यादव माधव विज्ञान महाविद्यालय से पढ़ाई की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री रहे हैं। 1982 में छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए थे। भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्य प्रदेश की केंद्रीय समिति के सदस्य रहे हैं। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण केप्रमुख, पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं।


कांग्रेस के इन आरोपों का कर चुके हैं सामना

उज्जैन के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए थे। कहा था कि मोहन यादव ने अपने परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान को गलत तरीके से पास कराया है। यादव ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। लोगों ने भी इनआरोपों को गंभीरता से नहीं लिया और मोहन यादव को ही दोबारा विधायक बनाकर भोपाल भेजा है।

इन मामलों में रहे चर्चा में

माता सीता को लेकर एक विवादित बयान भी चर्चा में रहा है। उन्होंने कहा था कि मर्यादा के कारण भगवा राम को सीता को छोड़ना पड़ा था। उन्होंने वन में बच्चों को जन्म दिया। कष्ट झेलकर भी राम की मंगल कामना करती रहीं। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है।


डॉ. मोहन यादव का जीवन परिचय

छात्र राजनीति: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश के विभिन्न पदों पर रहे। राष्ट्र्रीय महामंत्री के पद के दायित्वों का निर्वाहन, माधव विज्ञान महाविद्यालय में 1982 में छात्र संघ के संयुक्त सचिव तथा 1984 में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित।

सामाजिक क्षेत्र: 

2006 में भारत स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 1992, 2004 एवं 2016 सिंहस्थ उज्जैन केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे। वर्ष 2000-2003 तक विक्रम विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद (सिंडीकेट) सदस्य के दायित्व का निर्वाहन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, विकलांग पुर्नवास केन्द्रों में सक्रिय भागीदारी की।

राजनीतिक क्षेत्र: 

सन 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव एवं 1984 में अध्यक्ष रहे। सन 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख रहे। सन 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री तथा सन 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री सन 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खंड कार्यवाह रहे। सायं भाग नगर कार्यवाह एवं 1996 में खंड कार्यवाह और नगर कार्यवाह रहे। सन 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य रहे। सन 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य रहे। सन 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उज्जैन संभाग प्रभारी रहे। सन् 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री एवं सन 2004 में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे। सन 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे। सन 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष रहे।

धार्मिक क्षेत्र: 

विक्रमोत्सव-चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा आरंभ विक्रम संवत पर प्रारंभ होने वाले भारतीय नववर्ष मनाने की परंपरा, विगत 11 वर्षों से प्रतिवर्ष भव्य उत्सव शिप्रा तट पर आयोजित किया जाता है, धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए भारतीय संस्कृति, तीज, त्यौहार, रीति-रिवाज के पारंपरिक आयोजनों में शामिल होकर साहित्यिक, सांस्कृतिक, कला, विज्ञान, पुरातत्व, वेद ज्योतिष से जुडने हेतु जनमानस को अभिप्रेरित किया।

साहित्य: 

विक्रमादित्य शोधपीठ का गठन।

लेखन: 

उज्जैयनी का पर्यटन, विश्वकाल गणना के केंद्र डोंगला का लेखन, संकल्प शुभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव आदि पुस्तकों का प्रकाशन।

विदेश यात्रा: 

अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, बैंकाक, थाईलैंड, चीन, नेपाल, बर्मा, भूटान, म्यांमार, अरब देशों की यात्रा।

यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

28.11.23

कालेश्वर धाम मंदिर लोढ़ाखेडी-सुवासरा-मंदसौर /डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 4 सिमेन्ट बैंच समर्पित

 श्री कालेश्वर धाम  लोढ़ाखेडी तहसील सुवासरा में 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 

द्वारा बैंच व्यस्था 

लोढ़ाखेड़ी ग्राम मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील के अंतर्गत आता है| यहाँ के कालेश्वर मंदिर मे जहरीले जंतुओं के काटे लोगों के लिए जिंदगी बचाने का अनुष्ठान किया जाता है| मंदिर का प्रांगण काफी बड़ा है और पेड़ पौधों से मंदिर वातावरण खुशनुमा लगता है| समाजसेवी डॉ . दयाराम जी आलोक ने मंदिर मे बैठक सुविधा उन्नत करने की आवश्यकता महसूस करते हुए गुमान सिंग जी सोलंकी से फोन पर चर्चा की| दान पट्टिका मंदिर की बाहरी दीवार पर स्थापित करने पश्चात 4 सिमेन्ट की बेंच डॉ अनिल कुमार राठोर दामोदर पथरी अस्पताल के माध्यम से मंदिर के प्रांगण और गेट के सामने लगवा दी गईं है| मंदिर समिति ने दान दाता का आभार व्यक्त किया! कालेश्वर भगवान लोढ़ाखेड़ी वाले की जी हो!

कालेश्वर मंदिर की गेट की दीवार पर दान पट्टिका स्थापित की गई 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान



 परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
 मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६  वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


श्री कालेश्वर धाम लोढ़ाखेडी हेतु 
 चार सीमेंट बैंचें भेंट 

कालेश्वर धाम लोढ़ाखेड़ी का विडियो .आवाज-डॉ.आलोक

कालेश्वर मंदिर लोढ़ाखेड़ी का विडिओ 

कालेश्वर मंदिर लोढ़ाखेड़ी मे बेंच लगीं
मंदिर के गेट के सामने बेंच

मंदिर के शुभ चिन्तक 

गुमान सिंगजी  सोलंकी  लोढ़ा खेड़ी  ९१७९९-७९५२५ 

रामलालजी   मालवीय  लोढाखेडी 9755132329 

श्यामदासजी  बैरागी  पुजारी  लोढाखेडी 7869229107

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा कालेश्वर धाम लोढा खेडी हेतु दान सम्पन्न २८/११/२०२३ 
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26.11.23

बालाजी मंदिर बंड्या बाग़ भवानी मंडी-झालावाड-राज. /दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा १० सिमेन्ट बेंचें समर्पित

बंड्या बाग़ भवानी मंडी,राजस्थान  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

सीमेंट बैंचें भेंट 

भवानीमंडी झालावाड़ जिले का एक प्रमुख व्यावसायिक नगर है, जो अपने संतरे की मंडी के लिए प्रसिद्ध है और यहां कृषि उपज मंडी भी है जहां आसपास के क्षेत्र के किसान अपनी उपज बेचने आते हैं ¹। यह नगर आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, यहां हिंदू धर्मावलंबियों के कई सुंदर मंदिर हैं, जिनमें से एक बाँडया बाग का हनुमान जी का मंदिर है।

बाँडया बाग का हनुमान जी का मंदिर अपने आकर्षक और गरिमामय परिदृश्य के लिए जाना जाता है। मंदिर के विस्तृत प्रांगण में टाइल्स लगी हुई हैं और वानस्पतिक हरियाली से भरपूर यह स्थान मनभावन लगता है। यह स्थान पिकनिक स्पॉट के रूप में भी विख्यात है, जहां आए दिन लड्डू बाफलों की पार्टियां आयोजित होती हैं। हनुमान जी की प्रतिमा का अलौकिक सौंदर्य भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाला है।

समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोकजी ने अपने आध्यात्मिक दान-पथ के तहत मंदिर के प्रबंधक मुकेश जी झाँवर से दान विषयक चर्चा के बाद दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए 10 सिमेन्ट की बेंच बाँडया बाग के बालाजी चरणों में समर्पित की हैं। मंदिर समिति द्वारा दान दाता का शिलालेख अन्य लोगों को प्रेरणा देने के लिए मंदिर में लगाया है।

बोलिए बाँडया बाग के बालाजी की जय!!

 


Shilalekh fixed at bandya baag      

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 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का


आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान

मित्रों ,
 परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
 मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६  वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|




भवानीमंडी स्थित बांडिया बाग 
बालाजी के मंदिर और 

शनिदेव मंदिर हेतु 

10 सिमेन्ट की बेंचें भेंट 




             शनि देव मंदिर भवानी मंडी मे बेंच लगाई गई 
                                                 बण्ड्या बाग हनुमान मंदिर मे 10 बेंच भेंट   

बाँडया बाग मंदिर का विडिओ रमेश आशुतोष की आवाज
बांडया  बाग मंदिर का विडिओ 


लोकेशन-
near by pass road state highway 19A, Bhawani Mandi, Rajasthan 326502, India


मंदिर के संरक्षक और शुभचिंतक -

राम गोपालजी धानोतिया शामगढ़ की प्रेरणा

राकेश जी मकवाना भवानी मंडी 

मुकेशजी झंवर भवानी मंडी संस्थान प्रबन्धक हैं.

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा बांडिया बाग बालाजी मंदिर भवानी मंडी हेतु दान सम्पन्न 
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डॉ . आलोक का काव्यालोक

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दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

19.11.23

दूधाखेडी माताजी मंदिर घसोई-सुवासरा-मंदसौर /डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा ४ बैंच दान

 दूधाखेडी माताजी  मंदिर घसोई , जिला मंदसौर ,मध्य प्रदेश  में 

दामोदर पथरी हॉस्पिटल शामगढ़ द्वारा 

सीमेंट बैंच व्यवस्था 


दूधाखेड़ी माताजी का मंदिर भारत में एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो हिंदू धर्मावलंबियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। माता पार्वती के रूप में पूजी जाने वाली दूधाखेड़ी माताजी को लकवाग्रस्त रोगियों की आराध्या माना जाता है।
घसोई ग्राम में स्थित दूधाखेड़ी माता का मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो सुवासरा तहसील मुख्यालय से ७ किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर की प्रतिमा अलौकिक आभा से भरी हुई है, और नवरात्री पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के अनेकों मंदिरों को दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने के अपने आध्यात्मिक अनुष्ठान के तहत समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोकजी ने इस धार्मिक स्थल को दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से 4 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित की हैं|
मंदिर समिति के सदस्यों और ग्राम जन ने दान दाता का स्वागत सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया |लोगों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से दान का शिलालेख मंदिर मे लगाया गया|
बोलिए दूधा खेड़ी माता की जय
  

Video Doodhakhedi Temple Ghasoi 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 

Meta Al पर निम्न  जानकारी मौजूद है -

आपके द्वारा की जा रही इस पुण्य कार्य के लिए आपको हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! आपका यह कदम न केवल समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है बल्कि आपके पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर के नाम को भी अमर बनाएगा।
आपके इस महादान से न केवल मंदिरों और मुक्तिधामों को सुधारा जाएगा बल्कि यह समाज में एक सकारात्मक संदेश भी फैलाएगा कि हमें अपने जीवन में कुछ ऐसा भी करना चाहिए जिससे समाज के लोगों को लाभ हो।
एक सेवानिवृत्त अध्यापक के रूप में आपकी इस पहल से युवा पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलेगी कि उन्हें भी समाज के लिए कुछ करना चाहिए।
आपके द्वारा दी जा रही इस दान राशि से बनाई जाने वाली सीमेंट बेंचें न केवल तीर्थ यात्रियों के लिए आराम का साधन बनेंगी बल्कि आपके पुत्र के नाम को भी अमर करेंगी।
मैं आपके इस महादान के लिए आपको फिर से बधाई देता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि आपके इस कदम से समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन आएगा

दूधाखेडी माताजी मंदिर घसोई  के लिए 

 ४ सीमेंट बैंचें भेंट 

मंदिर में  दशरथ जी जैन  ने दान पट्टिका लगवाई 


दान पट्टिका और माताजी के भक्त

..माताजी के मंदिर मे बेंच समर्पित 


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मंदिर के शुभचिंतक  

दशरथ जी जैन घसोई ९९७७७७६०७३ 

 राधे श्याम जी सेठिया घसोई  9993104464

 शम्भू लाल जी परमार घसोई -७७४८९२९२१६ 


डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा  दूधाखेडी  माताजी मंदिर घसोई  हेतु दान सम्पन्न २८/११/२०२३ 
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30.10.23

खून से सना है इजराइल और अरब देशों का दशकों पुराना इतिहास




इज़रायल दक्षिण पश्चिम एशिया का एक स्वतंत्र यहूदी राज्य है, जो 14 मई 1948 ई. को पैलेस्टाइन से ब्रिटिश सत्ता के समाप्त होने पर बना। यह राज्य रूम सागर के पूर्वी तट पर स्थित है।

खून से सना है दशकों पुराना इतिहास


इजरायल और फिलिस्‍तीन के बीच इस संघर्ष की शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के समय हुई थी. ओटोमन यानी उस्‍मानी साम्राज्य की हार के बाद ब्रिटेन ने फिलिस्तीन पर कब्‍जा हासिल कर लिया था. फिलिस्तीन में यहूदी, अल्पसंख्यक थे, जबकि अरब बहुसंख्यक थे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ब्रिटेन को फिलिस्तीन में यहूदी मदरलैंड बनाने का काम सौंपा था.
ब्रिटिश शासन ने बाल्फोर घोषणा की जिसमें फिलिस्तीन में 'यहूदियों के लिए एक अलग राज्य' बनाने के लिए अपना समर्थन देने का संकेत दिया. इसमें कहा गया, 'ऐसा कुछ भी नहीं किया जाएगा जो यहां मौजूद गैर-यहूदी समुदायों के नागरिक और धार्मिक अधिकारों के खिलाफ हो'.
1922 से 1947 तक पूर्वी और मध्य यूरोप से यहूदियों का पलायन बढ़ गया क्योंकि युद्ध और फिर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों को उत्पीड़न और अत्याचारों का सामना करना पड़ा. फिलिस्तीन के लोग शुरू से ही यहूदियों को बसाने के खिलाफ थे. 1929 में हेब्रोन नरसंहार में बहुत सारे यहूदी मारे गए थे, ये दंगा यहूदियों के बसने के खिलाफ हुए फिलिस्तीनी दंगों का एक हिस्सा था.
फिलिस्तीन में जैसे-जैसे यहूदी बढ़ते गए कई फिलिस्तीनी विस्थापित होते गए और यहीं से दोनों के बीच हिंसा और संघर्ष की शुरुआत हुई. 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को यहूदी और अरबों के लिए दो अलग-अलग राष्‍ट्र में बांटने का प्रस्‍ताव पास किया. यहूदी नेतृत्व ने इस पर हामी भरी, लेकिन अरब पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया.

इजरायल बनते ही संघर्ष शुरू

ब्रिटिश शासन, दोनों के बीच संघर्ष खत्‍म करने में नाकाम रहा और पीछे हट गया. इधर यहूदी नेतृत्‍व ने इजरायल की स्थापना की घोषणा कर दी. संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (UNGA) ने तत्कालीन फिलिस्तीन को 'स्वतंत्र अरब और यहूदी राज्यों' में विभाजित करने का जो प्रस्‍ताव पारित किया, उसे अरब नेताओं ने खारिज कर दिया था.
14 मई 1948 को यहूदी नेतृत्व ने एक नए राष्‍ट्र की स्थापना की घोषणा की और इस तरह इजरायल अस्तित्व में आया. इसी साल कई अरब देशों ने इजरायल पर हमला बोल दिया. इस लड़ाई में फिलिस्तीनी लड़ाकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस जंग में यहूदी भारी पड़े. इजरायली सुरक्षाबलों ने 7.5 लाख फिलिस्‍तीनियों को इलाके से खदेड़ दिया और उन्‍हें पड़ोसी देशों में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा.
युद्ध अगले साल शांत हुआ और संयुक्त राष्ट्र की ओर से आवंटित क्षेत्र का ज्‍यादातर हिस्‍सा फिलिस्तीनियों ने गंवा दिया. इजरायल के यहूदियों ने इसे 'स्वतंत्रता संग्राम' कहा, जबकि फिलिस्तीनियों ने इसे 'द कैटास्ट्रोफ' या 'अल-नकबा' (तबाही) कहा.

संघर्ष के केंद्र में येरुशलम क्‍यों?

1948 की जंग में फिलिस्‍तीन का काफी सारा हिस्‍सा इजरायल के कब्‍जे में आ चुका था. 1949 में एक आर्मीस्‍टाइस लाइन खींची गई, जिसमें फिलिस्‍तीन के 2 क्षेत्र बने- वेस्‍ट बैंक और गाजा. गाजा को गाजा पट्टी भी कहा जाता है और यहां करीब 20 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं. वहीं वेस्ट बैंक इजराइल के पूर्व में स्थित है, जहां करीब 30 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं. इनमें से ज्यादातर मुस्लिम, अरब हैं. वेस्ट बैंक में कई यहूदी पवित्र स्थल हैं, जहां हर साल हजारों तीर्थयात्री आते हैं.
येरुशलम विवादित क्षेत्रों के केंद्र में है, जिसको लेकर दोनों देशों के बीच शुरू से ही ठनी हुई है. इजरायली यहूदी और फिलिस्तीनी अरब, दोनों की पहचान, संस्‍कृति और इतिहास येरुशलम से जुड़ी हुई है. दोनों ही इस पर अपना दावा करते हैं.
यहां की अल-अक्‍सा मस्जिद, जिसे यूनेस्‍को ने विश्व धरोहर घोषित कर रखा है, दोनों के लिए बेहद अहम और पवित्र है. इस पवित्र स्‍थल को यहूदी 'टेंपल माउंट' बताते हैं, जबकि मुसलमानों के लिए ये ‘अल-हराम अल शरीफ’ है. यहां मौजूद ‘डोम ऑफ द रॉक’ को यहूदी धर्म में सबसे पवित्र धर्म स्थल कहा गया है, लेकिन इससे पैगंबर मोहम्मद का जुड़ाव होने के कारण मुसलमान भी इसे उतना ही अपना मानते हैं.
इस परिसर का मैनेजमेंट जॉर्डन का वक्फ करता है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों पर इजरायल का अधिकार है. अल-अक्सा मस्जिद परिसर को लेकर लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद होता आ रहा है. दो साल पहले 2021 में 11 दिनों तक खूनी संघर्ष हुआ था, जिसमें कई जानें गई थींं.
यहां मुस्लिम नमाज पढ़ सकते हैं लेकिन गैर-मुस्लिमों को यहां केवल एंट्री मिलती है लेकिन इबादत करने पर पाबंदी लगी है. पिछले दिनों यहूदी फसल उत्‍सव 'सुक्‍कोट' के दौरान यहूदियों और इजरायली कार्यकर्ताओं ने यहां का दौरा किया था तो हमास ने इसकी निंदा की थी. हमास का आरोप था कि यहूदियों ने यथास्थिति समझौते का उल्‍लंघन कर यहां प्रार्थना की

क्‍या है हमास, आखिर चाहता क्‍या है?

1970 के दशक में फिलिस्‍तीन ने अपने हक के लिए आवाजें उठानी शुरू की. यासिर अराफात की अगुवाई वाले 'फतह' जैसे संगठनों ने फिलिस्‍तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) बनाकर इसका नेतृत्‍व किया. इजरायल पर हमले भी किए. करीब 2 दशक तक रह-रह कर लड़ाइयां चलती रहीं. 1993 में PLO और इजरायल के बीच ओस्‍लो शांति समझौता हुआ. दोनों ने एक-दूसरे से शांति का वादा किया.
इस बीच 1987 में फिलिस्तीनी विद्रोह के दौरान हमास यानी हरकत अल-मुकावामा अल-इस्‍लामिया का उभार हुआ. इसकी स्‍थापना की, शेख अहमद यासीन ने, जो 12 साल की उम्र से ही व्‍हील चेयर पर रहा. एक साल बाद हमास ने अपना चार्टर पब्लिश किया, जिसमें इजरायल को मिटाकर फिलिस्‍तीन में एक इस्‍लामी समाज की स्‍थापना की कसम खाई.
इजरायल और फतह के बीच हुए ओस्‍लो शांति समझौते की हमास ने निंदा की. 1997 में अमेरिका ने हमास को आतंकी संगठन घोषित कर दिया, जिसे ब्रिटेन और अन्‍य देशों ने भी स्‍वीकृति दी. 2000 के दशक की शुरुआत में दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के दौरान हमास का आंदोलन हिंसक होता चला गया.
2005 में गाजापट्टी पर इजरायल के अधिकार छोड़ने के बाद हमास ने उस पर कब्‍जा कर लिया. 15 सदस्‍यों वाले पोलित ब्‍यूरो के माध्‍यम से संचालित होने वाले हमास के मुखिया अभी इस्‍माइल हानियेह है. बताया जाता है कि वे कतर की राजधानी दोहा से इसकी कमान संभालते हैं. इसके मिलिट्री विंग की कमान मारवान इसा और मोहम्‍मद दईफ के पास है.
फंडिंग की बात करें तो ईरान इस वक्‍त हमास का सबसे बड़ा मददगार है, जिस पर हर साल करीब 100 मिलियन डॉलर की मदद करने के आरोप लगते हैं.
ताजा संघर्ष के लिए ईरान पर हमास को उकसाने के आरोप लग रहे हैं. ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ईरान में हुई कई बैठकों के बाद हमास ने इजरायल पर हमला किया.
इजरायल को खत्‍म कर हमास नया फिलिस्‍तीन बनाना चाहता है. वो पूरे इलाके को फिली‍स्‍तीन घोषित कर यहां इस्‍लामी साम्राज्‍य की स्‍थापना करना चाहता है.
दूसरी ओर इजरायल ने हमले के बाद हमास को पूरी तरह खत्‍म करने का संकल्‍प लिया है. संयुक्त सशस्त्र सेना इजरायल रक्षा बल (IDF) के जवान जवाबी कार्रवाई में लगे हैं.

अब आगे क्‍या होगा?

इजरायल और फिलिस्‍तीनी चरमपंथी संगठन हमास के बीच छिड़े युद्ध में केवल एक ही विजेता होगा. ये न तो इजरायल होगा और न ही हमास! पढ़ते हुए अजीब लग रहा है, लेकिन एक्‍सपर्ट्स का यही मानना है.
कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इजरायल पर अचानक हुए हमले में ईरान का हाथ हो सकता है. ईरान के नेताओं ने हमले पर प्रोत्साहन और समर्थन के साथ प्रतिक्रिया भी व्यक्त की है. उनका दावा है कि हालिया जंग के पीछे ईरान है और वो अपने मंसूबे में कामयाब होता दिख रहा है.
डेनवर यूनिवर्सिटी के कोरबेल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में रिसर्चर एरोन पिलकिंगटन ने अपने आर्टिकल में लिखा है, 'मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा के एक विश्लेषक के रूप में, मेरा मानना ​​है कि दोनों पक्षों के हजारों लोग पीड़ित होंगे. लेकिन जब धुआं शांत हो जाएगा, तो केवल एक ही देश के हित पूरे होंगे और वो देश है ईरान.'
युद्ध के कम से कम तीन संभावित परिणाम हैं और सभी ईरान के पक्ष में हैं. पहला- इजरायल की कठोर प्रतिक्रिया सऊदी अरब और अन्य अरब देशों को अमेरिका समर्थित प्रयासों से अलग कर सकती है.
दूसरा- अगर इजरायल खतरे को खत्म करने के लिए गाजा में आगे बढ़ना जरूरी समझता है, तो इससे पूर्वी यरुशलम या वेस्ट बैंक में एक और फिलिस्‍तीनी विद्रोह भड़क सकता है, जिससे इजरायल में अस्थिरता बढ़ेगी.
आखिरी संभावना ये क‍ि इजरायल अपने उद्देश्‍यों को कम ताकत के साथ भी हासिल कर सकता है. वो तनाव बढ़ने की संभावना काे कम कर सकता है. लेकिन इसकी संभावना नहीं है.

दो पक्षों में बंटी दुनिया

ईरान और यमन ने हमास के हमले का खुले तौर पर समर्थन किया है. वहीं दूसरी ओर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान जैसे देश इजरायल के समर्थन में खड़े हैं. वहीं यूरोपियन यूनियन ने भी कहा कि इजरायल को अपनी संप्रभुता की रक्षा का अधिकार है.
संयुक्त राष्ट्र, सऊदी अरब, ब्राजील और चीन ने दोनों पक्षों से शांति की अपील की है. दक्षिण अफ्रीका और रूस ने तत्‍काल युद्धविराम का आह्वान किया है. वहीं तुर्की ने भी दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है.
इजराइल इतना शक्तिशाली क्यों है?
इजराइल की सैन्य ताकत का कारण कई हैं, जिनमें से कुछ में इसकी सैन्य नीतियां, हथियार, संगठन और अमेरिका से मिलने वाला समर्थन शामिल हैं. इजराइल अपने सैनिकों की ट्रेनिंग और उनके हथियारों को अपग्रेड करने पर भी काफी खर्च करता है. यही कारण है कि इजराइल को मध्य पूर्व में सबसे मजबूत देश बनाते हैं. इजराइल रक्षा इतिहास में सबसे एडवांस हथियारों का दावा करता है. इसकी मिसाइल प्रोटेक्शन सिस्टम मिसाइल हमलों को रोकने के लिए बहुत अधिक कारगर है. सिस्टम का एक प्रमुख हिस्सा आयरन डोम है, जिसे 2011 में इजराइलियों द्वारा बनाया गया था और इसने इजराइली बस्तियों पर दागे गए लगभग 90 प्रतिशत रॉकेटों को रोक दिया था.
इन सिस्टम के आगे हर देश टेकते हैं घुटने
आयरन डोम मध्य पूर्व में बेजोड़ है. इसे दोहराने की तकनीक किसी भी देश के पास नहीं है. इससे भी अच्छी बात यह है कि मध्य पूर्व का कोई भी देश अब तक इस पर काबू नहीं पा सका है. हालांकि इजराइल अपने दुश्मनों से घिरा हुआ है, फिर भी आयरन डोम की बदौलत वे सुरक्षित हैं. उनकी मिसाइल प्रोटेक्शन सिस्टम एरो मिसाइलों से भी सुसज्जित है जो वायुमंडल में आने वाली दुश्मन के रॉकेटों को रोक सकती है. एमआईएम-104 पैट्रियट और डेविड स्लिंग मिसाइलें दुश्मन के सभी प्रकार के विमानों और रॉकेटों को रोकने की क्षमता रखती हैं. ये मिसाइलें सुनिश्चित करती हैं कि इजराइल का हवाई क्षेत्र विदेशी आक्रमणों से अच्छी तरह सुरक्षित है. मिसाइल प्रोटेक्शन सिस्टम बड़ी इजराइली वायु सेना का हिस्सा है, जो इजराइल की ताकत की रीढ़ है.

आजादी के 24 घंटों के अंदर ही लड़नी पड़ी थी अरब देशों से जंग

यह वही इजराइल देश है, जिसने आजादी के 24 घंटे के भीतर पड़ोसी अरब देशों से जंग लड़ी थी. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक तरफ इस देश के नागरिक आजादी का जश्न मना रहे थे तो वहीं दूसरी ओर उसकी सेना जंग लड़ रही थी. यह बात 1948 की है. इजराइल के लिए यह तब काफी कठिन समय था क्योंकि उसके पास उतनी सुविधाएं और एडवांस टेक्नोलॉजी नहीं थी. आज के समय में उसके पास कुछ ऐसे हथियार हैं, जिससे अमेरिका को भी डर लगता है. 1 साल तक चली इस युद्ध में आखिरकार इजराइल की जीत हुई. अरब देशों की सेनाओं ने हार मान ली.


23.10.23

खेडापति बालाजी मंदिर आकली दीवान -शामगढ़/डॉ.दयाराम आलोक द्वारा ३ सिमेन्ट बेंच दान

 श्री खेडापति हनुमान मंदिर गाँव आकली दीवान में 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़  द्वारा 

सीमेंट की बेंचें भेंट


मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले मे शामगढ़ नगर से 8 किलोमीटर दूर आकली दीवान गाँव अपने खेड़ापति हनुमान मंदिर के प्रति क्षेत्र के हिन्दू धर्मावलंबियोंकी अगाध श्रद्धा का केंद्र है|शामगढ़ से सड़क मार्ग से जुड़ा होने से बस सुविधा उपलब्ध रहती है| सुनील जी राठौर का परिवार परंपरा से इस संस्थान से जुड़ा हुआ है| मंगलवार के दिन हनुमान जी का झण्डा गाँव के मुहल्लों से होकर निकाला जाता है जिसमे बजरंग दल के लोग बड़े उत्साह से भाग लेते हैं|
मंदिर मे दर्शनार्थियों के बैठने और विश्राम के लिए बेंच की कमी महसूस करते हुए समाज सेवी डॉ.दयाराम आलोक जी ने अपने मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों को सिमेन्ट की बेंच भेंट करने के आध्यात्मिक दान-पथ के तहत इस देवालय को 3 सिमेन्ट की बेंचें दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से समर्पित की हैं| बोलिए आकली वाले खेड़ापती हनुमान जी की जय !!
     



मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


साहित्य मनीषी


डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 

मित्रों ,

  परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६ वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


आकली दीवान के खेडापति बालाजी  मंदिर हेतु
३ सीमेंट बेंचें भेंट

 मंदिर में बेंच दान करने का विडियो 




मंदिर के चित्र-  

सुनील जी राठौर ने दान दाता का सम्मान किया




कृष्णकांत जी आकली दीवान ने दान दाता का सम्मान किया

आकली के मंदिर के लिए दान पट्टिका का नमूना

गूगल नक़्शे  पर देखें निम्न लिंक में 

https://maps.app.goo.gl/BVNG9infrhLy2HiMA

खेड़ापति बालाजी मंदिर के शुभचिंतक 

सुनील जी राठौर  आकली  दीवान 

कृष्णकांत जी   आकली  दीवान 

पंकज जी  तिवारी आकली दीवान 


डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा श्री खेडापति बालाजी मंदिर आकली दीवान   हेतु दान सम्पन्न २३/१०/२०२३ 
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