परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा जी के युग-निर्माणकारी विचारों - हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा के पावन संकल्प को साकार करती हुई गायत्री शक्ति पीठें केवल उपासना केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय चेतना के जागरण केंद्र हैं।
राजस्थान के झालावाड़ जिले की पावन धरा पर स्थित माँ गायत्री शक्ति पीठ, डग भी ऐसे ही दिव्य केंद्रों में से एक है, जहाँ गायत्री मंत्र की साधना, सत्कर्म की प्रेरणा और मानव सेवा का संगम निरंतर प्रवाहित होता है। यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु शांति, श्रद्धा और संस्कार की अनुभूति लेकर जाता है।
इसी पावन धाम में श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा हेतु एक छोटा सा, परन्तु हृदय से किया गया सेवा-प्रयास प्रस्तुत किया गया है - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा 8 सीमेंट बेंचों की भेंट।
यह दान केवल बेंचों का दान नहीं है, यह 'आध्यात्मिक दान-पथ' की एक कड़ी है। एक सेवानिवृत्त अध्यापक द्वारा अपनी पेंशन को जन-कल्याण में समर्पित करने, अपनी लेखनी, अपने ब्लॉग और यूट्यूब जैसे तकनीकी माध्यमों से अर्जित आय को समाज के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में सेवा के रूप में लौटाने का एक जीवंत उदाहरण है।
प्रस्तुत लेख में इसी सेवा-भावना, गायत्री पीठ डग के महत्व और उस शिलालेख पर अंकित प्रेरणा का वर्णन है, जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है -
दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवनसाधनम्।
आइये, इस पुण्य यात्रा के सहभागी बनें।
माँ गायत्री शक्ति पीठ स्थान डग जिला झालावाड हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बैंच-व्यवस्था
कविता -
दान-पथ आलोक का उज्ज्वल, श्रद्धा का दीप प्रज्वलित, गायत्री पीठ डग में बेंचें, भक्तों हेतु सुख-सुविधा निर्मित।
आचार्य शर्मा के उपदेश, मानवता का अमृत संदेश, नैतिकता, आध्यात्मिकता, जीवन का सच्चा परिवेश।
सेवानिवृत्ति का संकल्प महान, पेंशन समर्पित जनकल्याण, मंदिर, गौशाला, मुक्ति धाम, आलोक जी का अनुपम दान।
तकनीक से सेवा का संगम, ब्लॉग-यूट्यूब से पुण्य प्रसंग, 151 संस्थानों में योगदान, समाजसेवा का अद्भुत रंग।
शिलालेख पर अंकित प्रेरणा, दान-पथ की उज्ज्वल चेतना, जन-कल्याण का दीप प्रज्वलित, आलोक जी का अमर साधना।
गायत्री पीठ डग में आज, श्रद्धा का अनुपम है राज, बेंचों पर बैठे भक्त सभी, अनुभव करें शांति का साज।
श्लोक-
दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवनसाधनम् । आलोकस्य कृपायुक्तं, जनहिताय समर्पितम् ॥ गायत्र्याः शक्तिपीठे च, भक्तानां सुखवर्धनम् । बञ्चकं समर्पितं तेन, पुण्यकर्म निरन्तरम् ॥ नैतिकता च आध्यात्म्यं, आचार्यवाक्यसंयुतम् । युगान्तराय मार्गदर्शं, मानवत्वप्रबोधकम् ॥
आचार्य रामचन्द्र शर्मा के विचारों और उपदेशों को विश्वभर में प्रचारित करने के लिए गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आचार्य शर्मा के युगांतकारी विचारों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है।
गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना न केवल भारत में बल्कि विश्व के अनेक देशों में की गई है, जो आचार्य शर्मा के विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता और महत्ता को दर्शाता है। इन पीठों के माध्यम से लोगों को आचार्य शर्मा के विचारों से परिचित कराने और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर मिलता है।
आचार्य रामचन्द्र शर्मा के विचार आधुनिक समय में भी प्रासंगिक हैं और लोगों को जीवन के सही मूल्यों और आदर्शों की ओर दिशा देते हैं। उनके उपदेशों में आध्यात्मिकता, नैतिकता, और मानवता के मूल्यों का समावेश है, जो विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना आचार्य शर्मा के विचारों को जीवंत रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर के रूप में संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण कार्य है
समाजसेवी
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।












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