लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। संस्कृति और समाज: पौराणिक गाथाएं, जाति इतिहास और दान-महिमा

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15.5.23

डग का गायत्री मंदिर:सड़क किनारे मंगल धाम :डॉ . आलोक बेंच दान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Gayatri Dag



परम पूज्य गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा जी के युग-निर्माणकारी विचारों - हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा के पावन संकल्प को साकार करती हुई गायत्री शक्ति पीठें केवल उपासना केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक, आध्यात्मिक और मानवीय चेतना के जागरण केंद्र हैं।
राजस्थान के झालावाड़ जिले की पावन धरा पर स्थित माँ गायत्री शक्ति पीठ, डग भी ऐसे ही दिव्य केंद्रों में से एक है, जहाँ गायत्री मंत्र की साधना, सत्कर्म की प्रेरणा और मानव सेवा का संगम निरंतर प्रवाहित होता है। यहाँ आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु शांति, श्रद्धा और संस्कार की अनुभूति लेकर जाता है।
इसी पावन धाम में श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा हेतु एक छोटा सा, परन्तु हृदय से किया गया सेवा-प्रयास प्रस्तुत किया गया है - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा 8 सीमेंट बेंचों की भेंट।
यह दान केवल बेंचों का दान नहीं है, यह 'आध्यात्मिक दान-पथ' की एक कड़ी है। एक सेवानिवृत्त अध्यापक द्वारा अपनी पेंशन को जन-कल्याण में समर्पित करने, अपनी लेखनी, अपने ब्लॉग और यूट्यूब जैसे तकनीकी माध्यमों से अर्जित आय को समाज के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में सेवा के रूप में लौटाने का एक जीवंत उदाहरण है।
प्रस्तुत लेख में इसी सेवा-भावना, गायत्री पीठ डग के महत्व और उस शिलालेख पर अंकित प्रेरणा का वर्णन है, जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है -
दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवनसाधनम्।
आइये, इस पुण्य यात्रा के सहभागी बनें।

  माँ गायत्री शक्ति पीठ स्थान डग जिला झालावाड  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

सीमेंट बैंच-व्यवस्था   

   कविता -

दान-पथ आलोक का उज्ज्वल, श्रद्धा का दीप प्रज्वलित, गायत्री पीठ डग में बेंचें, भक्तों हेतु सुख-सुविधा निर्मित।

आचार्य शर्मा के उपदेश, मानवता का अमृत संदेश, नैतिकता, आध्यात्मिकता, जीवन का सच्चा परिवेश।

सेवानिवृत्ति का संकल्प महान, पेंशन समर्पित जनकल्याण, मंदिर, गौशाला, मुक्ति धाम, आलोक जी का अनुपम दान।

तकनीक से सेवा का संगम, ब्लॉग-यूट्यूब से पुण्य प्रसंग, 151 संस्थानों में योगदान, समाजसेवा का अद्भुत रंग।

शिलालेख पर अंकित प्रेरणा, दान-पथ की उज्ज्वल चेतना, जन-कल्याण का दीप प्रज्वलित, आलोक जी का अमर साधना।

गायत्री पीठ डग में आज, श्रद्धा का अनुपम है राज, बेंचों पर बैठे भक्त सभी, अनुभव करें शांति का साज।

श्लोक-

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवनसाधनम् । आलोकस्य कृपायुक्तं, जनहिताय समर्पितम् ॥ गायत्र्याः शक्तिपीठे च, भक्तानां सुखवर्धनम् । बञ्चकं समर्पितं तेन, पुण्यकर्म निरन्तरम् ॥ नैतिकता च आध्यात्म्यं, आचार्यवाक्यसंयुतम् । युगान्तराय मार्गदर्शं, मानवत्वप्रबोधकम् ॥





आचार्य रामचन्द्र शर्मा के विचारों और उपदेशों को विश्वभर में प्रचारित करने के लिए गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आचार्य शर्मा के युगांतकारी विचारों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है।
गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना न केवल भारत में बल्कि विश्व के अनेक देशों में की गई है, जो आचार्य शर्मा के विचारों की वैश्विक प्रासंगिकता और महत्ता को दर्शाता है। इन पीठों के माध्यम से लोगों को आचार्य शर्मा के विचारों से परिचित कराने और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर मिलता है।
आचार्य रामचन्द्र शर्मा के विचार आधुनिक समय में भी प्रासंगिक हैं और लोगों को जीवन के सही मूल्यों और आदर्शों की ओर दिशा देते हैं। उनके उपदेशों में आध्यात्मिकता, नैतिकता, और मानवता के मूल्यों का समावेश है, जो विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना आचार्य शर्मा के विचारों को जीवंत रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर के रूप में संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण कार्य है
                              



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान -पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
  

डग के गायत्री शक्तिपीठ मंदिर  हेतु
 
 8 सीमेंट बेंच भेंट 

गायत्री शक्ति पीठ डग का विडिओ आलोक की आवाज 


  गायत्री शक्ति पीठ डग में मुख्य द्वार के पास दान -पट्टी का दृश्य   





  

मनीषजी प्रेमी अध्यापकजी -99285-87850 डग की  प्रेरणा

मोहन लाल जी  जोशी  ने  दान की अनुमति  दिलाई 

 सुरेशजी पँवार डग 97995-70000 का सहयोग 

गायत्री शक्ति पीठ के मुख्य प्रबन्धक नंदलाल जी शर्मा गुरुजी हैं

डॉ.अनिल कुमार दामोदर  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 शामगढ़ द्वारा गायत्री शक्ति पीठ ,डग हेतु दान सम्पन्न 
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14.5.23

मुक्ति धाम आवर -झालावाड़-राजस्थान /डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा ८ सिमेन्ट बेंचें भेंट

आध्यात्मिक दान अनुष्ठान
भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है।
इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है।
जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है।
प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है।
- डॉ. दयाराम आलोक

आवर का मुक्तिधाम

आहू नदी की गोद में बसा, झालावाड़ का प्राचीन नगर, हरे-भरे वृक्षों की छाया में, मुक्तिधाम है शांति का सागर।

कपिलजी पँवार का सहयोग महान, दान अभियान को किया गतिमान जगदीशजी पँवार की सक्रियता से , दान पट्ट हुआ यहाँ स्थापित।

डॉ. आलोक, डॉ. अनिल, रमेशजी का सत्कार, नगर के प्रबुद्ध जनों ने किया दमदार फोटोग्राफी में बंधे क्षण अमर, दानशीलता का हुआ सुंदर स्वर।

आवर के मुक्तिधाम में बेंचें नई, आगंतुकों को मिली सुविधा सही। दामोदर पथरी अस्पताल का योगदान, शामगढ़ नगर का आध्यात्मिक दान।

श्लोक-

आहूनदीतीरे रम्ये मुक्तिधामे शुभं स्थले । कपिल-जगदीश-पँवारयोः दानं पुण्यवर्धनम् ॥ डॉ. आलोक-डॉ. अनिल-रमेशैः सत्कारिताः सदा । दानपथेन शोभन्ते, शामगढस्य महादया ॥ 

राजस्थान के झालावाड़ जिले का एक प्राचीन कस्बा है -आवर 

यह कस्बा आहू नदी   से घिरा हुआ है । 

नगर का मुक्तिधाम एक किलोमीटर की दूरी पर है। 

राजस्थान  मे मुक्तिधाम का प्रबंधन  सरपंच के माध्यम  से होता है। 

मुक्तिधाम मे हरे भरे वृक्षों से शांति का एहसास होता है। 

कपिल जी पँवार ने मुक्तिधाम मे मेरे बेंच दान अभियान मे सहयोग किया 

समर्थ लोगों को मुक्तिधाम के लिए सहयोग करने हेतु दान दाता का दान पट्ट  मुक्तिधाम मे स्थापित कर दिया है।

नगर के प्रबुद्ध जनों ने डॉ .आलोक  ,डॉ . अनिल दामोदर और रमेशजी आशुतोष  का स्वागत किया और फोटोग्राफी  की । 

      आवर जिला झालावाड़ के मुक्तिधाम में  दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़  की दान पट्टी  




                                       

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम  जिलों  के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान -पथ 

साथियों,

शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है|
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं| 



आवर  के मुक्तिधाम हेतु 


8  सीमेंट बेंच भेंट) 

  आवर के मुक्तिधाम का विडियो                                     

कंवरलाल जी दर्जी आवर के दाह संस्कार मे सीमेंट बेंच पर बैठे लोग
                            

                                                                   आभार-पत्र


कपिलजी पँवार और जगदीशजी पँवार ने मुक्तिधाम के लिए सहयोग और प्रेरणा दी।

डॉ. आलोक, डॉ. अनिल और रमेशजी के स्वागत से नगर में दानशीलता का वातावरण बना।

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ की दान पट्टी ने इस अभियान को स्थायी स्मृति दी

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पतालशामगढ़ 98267-95656  द्वारा आवर के मुक्ति धाम हेतु दान सम्पन्न 
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 *मुक्ति धाम आगर -मालवा/मोती सागर तालाब बम्बई घाट/ डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 10 सिमेन्ट बेंच दान 



5.4.23

अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ का सफरनामा: लेखक: रमेश चंद्र जी राठौर आशुतोष

 


"अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ की स्थापना 1965 में डॉ दयाराम आलोक द्वारा हुई। समाज सेवा, पारदर्शिता और सामूहिक विवाह सम्मेलनों की प्रेरक गाथा।"

-रमेश राठौर आशुतोष की कलम से :

अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ(प्रधान कार्यालय शामगढ) की स्थापना 1965 में डॉ दयारामजी आलोक शामगढ द्वारा की गई । सामाजिक सेवाओं का जुनून आलोक साहेब को युवावस्था में मात्र 25 वर्ष की उम्र से ही हो गया था। आलोकजी ने महासंघ का सविंधान लिपिबद्ध किया जिसमे आवश्यक सुधार डॉ लक्ष्मीनारायण जी अलौकिक द्वारा  किए जाकर रसायन फार्मेसी प्रेस दिल्ली से संविधानआलेख  की पुस्तक छपवाकर समाज मे वितरित की गई थी।

महासंघ ने वार्षिक अधिवेशन की परंपरा के अंतर्गत 5 अधिवेशन किये जो क्रमशः 1965 में पहला अधिवेशन राठौर भवन शामगढ पर किया गया जिसमें दूर दराज के 134 समाजजनों ने अपनी उपस्तिथि दर्ज करवाई थी। उसके बाद 1966 में डग राजस्थान में  दर्जी समाज के  मन्दिर उद्यापन के समय किया गया।

 उल्लेखनीय है कि 1966 में दर्जी समाज के डग मन्दिर की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य व ऐतिहासिक कार्यक्रम दर्जी समाज डग के सभी दर्जी बन्धुओ की सहमति





व समाज सहयोग से महासंघ के तत्ववाधान में सम्पन्न हुआ है।

डग के सत्यनारायण मन्दिर के उद्यापन के लिए दान दाताओं की सूचि 

वार्षिक अधिवेशन श्रंखला में 1967 में ग्राम साठखेड़ा के दर्जी समाज के वित्तीय सहयोग से सम्पन्न हुआ। वर्ष 1968 व 1969 के अधिवेशन आलोक सदन शामगढ में सम्पन्न हुए।
उक्त अधिवेशन में समाज मे व्याप्त कुरीति नोंद प्रथा (इसमे महिलाओं को एक मुश्त भोजन सामग्री परोसी जाती थी जिसे बांधकर महिलाएं घर ले जाती थी) को बंद करने का प्रस्ताव भी रखा गया था जो कालांतर में बाद में शामगढ में एक मोसर आयोजन से बंद हुआ। यह हम सब जानते हैं कि कुप्रथाएं एक मीटिंग अथवा एक अधिवेशन से बंद नहीं हो सकती है। कुप्रथाएं व रूढ़ी , परम्परायें के लिए समाज को बार बार अवगत करना होता है। समयानुसार समाज के व्यक्तियों को समझ आती है और कुप्रथाएं लुप्त होती जाती है।
 1970 में डॉ आलोक साहेब का ट्रांसफर चचोर होने से महासंघ की गतिविधियों में रुकावट आ गई। चूंकि उस जमाने में वर्तमान जैसी डिजिटल  मीडिया सेवाएं नहीं होने से महासंघ की गतिविधियाँ मे ठहराव या गया था| । चचोर से बरलाई व बाद में आलोक साहेब का ट्रांसफर रामपुरा हुआ तब से पुनः समाज सेवा के द्वारा कुछ करने का जज्बा जाग्रत हुआ। रामपुरा दर्जी समाज को संगठित कर दर्जी समाज का पहला व मन्दसौर जिले का प्रथम सामूहिक विवाह सम्मेलन महासंघ के झंडे तले आयोजित कर सफलता हांसिल की।
    1983 में पुनः रामपुरा नगर में दूसरे विवाह सम्मेलन का बीड़ा उठाकर उसे अंजाम तक पहुंचाया।
1990 में शामगढ जिसे समाज का ह्रदय स्थल समझा जाता है में सामूहिक विवाह सम्मेलन की रूप रेखा तैयार कर श्री भेरुलालजी राठौरकी अध्यक्षता मे  विशाल आयोजन हुआ । महासंघ के तत्वावधान में आयोजित यह सरा सम्मेलन था।
आलोक साहेब के बोलिया आ जाने के बाद 2006 , 2008 व 2010 में एक एक वर्ष छोड़कर तीन सम्मेलन बोलिया में आयोजित किये गए।
ज्ञातव्य हो कि 2010 में बोलिया में नि:शुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन डाक्टर साहेब ने निज वित्त पोषण से  किया था जो अब तक के नए गुजराती दर्जी समाज  का एक मात्र  सामूहिक विवाह सम्मेलन है।
2012 के सम्मेलन का अध्यक्षीय नेतृत्व महासंघ में मुझे  याने (रमेश आशुतोष) को  दिया। मैंने कुछ हटकर इस सम्मेलन की प्लानिंग तैयार की थी । यह सम्मेलन भव्यता लिए हुए स्मरणीय आयोजन की सूची में जाना जाता है।
2014 के विवाह सम्मेलन में दर्जी समाज का पारिवारिक परिचय ग्रंथ समाज सेतु 2014 (प्रकाशक- अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ) का विमोचन कार्यक्रम रखा गया। इस सम्मेलन में भी कुछ नया करने के उद्देश्य से पहली बार सम्मेलन का नेतृत्व महिला को देने का काम महासंघ के खाते में जाता है। सु श्री माया राठौर पिता डॉ लक्ष्मीनारायण जी अलौकिक 2014 के सामूहिक विवाह सम्मेलन की अध्यक्ष बनाई गई जिनके नेतृत्व से सम्मेलन के प्रति समाज जनों में विश्वास , पारदर्शिता का संदेश पहुंचा।
समाज मे महासंघ की अगुवाई में विवाह सम्मेलनों की मांग को देखते हुए 2017 में नों वा सामूहिक विवाह सम्मेलन कंचन गंगा गार्डंन में आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ दयाराम जी आलोक साहेब ने बखूबी निभाई। महासंघ के सम्मेलनों की एक विशेषता यह रही है कि बचत राशि महासंघ ने कभी अपने कोष में सम्मिलित नहीं की उसे डिवाइड कर सभी जोड़ो को घर घर जाकर आना पाई का आय व्यय पत्रक छपवाकर पत्रक सहित रिटर्न दिया यह अपने आप मे महासंघ की लोकप्रियता व पारदर्शिता का प्रमाण है।

महासंघ की विशेषताएं:

1. स्वेच्छिक दान: महासंघ ने कभी भी धन संग्रह हेतु समाज के गांव में जाकर उगाई (वसूली) मुहिम नहीं की।
2. समाज सेवा का सिद्धांत: जिसने दिया उसका भी भला और जिसने नहीं दिया उसका भी भला।
3. सफल सम्मेलन: 9 सफल सम्मेलन आयोजित किए गए।
4. डिजिटल माध्यम से समाज सेवा: लोक डाउन के दौरान भी महासंघ के संस्थापक डॉ आलोक साहेब ने इंटरनेट को माध्यम बनाकर समाज सेवा की।
5. दर्जी समाज के फोटो: लगभग दस हजार फोटो इंटरनेट पर लोड किए गए।
6. पारदर्शिता: महासंघ का हिसाब पूछने का नहीं, देखने का समय होना चाहिए।
7. वंशावलि: सात पीढ़ियों तक की पारिवारिक जानकारी इकट्ठा की गई।

महासंघ की इन विशेषताओं को देखकर यह स्पष्ट होता है कि यह संगठन समाज सेवा और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ दयाराम आलोक साहेब की मेहनत और समर्पण की भावना प्रशंसनीय है| 
महाप्रबंधक-----
रमेश राठौर आशुतोष
संचालक: कंचनगंगा गार्डन गायत्री शक्तिपीठ के सामने शामगढ

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