मन्दसौर-मुक्तिधामे, दयारामेन सत्त्ववान् । अष्टादशासनं दत्तं, जनसेवा सदा प्रबान् ॥ समित्या पट्टकं स्थाप्यं, दानकर्तुः यशः स्फुटम् । प्रेरणा लोकनित्यं स्यात्, आगताः लभन्तु सत्कृतम् ॥
शिवना तट पर सेवा का एक अमिट हस्ताक्षर
इसी तीर्थ की शोभा और सुविधा को बढ़ाने हेतु, आध्यात्मिक दान-पथ के यात्री, शामगढ़ के सुप्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा एक अनुकरणीय पहल की गई है।
डॉ. अनिल कुमार, दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ की ओर से, अपनी पूज्य मातुश्री श्रीमती शांति देवी धर्मपत्नी डॉ. दयाराम जी आलोक की पावन स्मृति में, मुक्तिधाम के श्रद्धांजलि हॉल में 18 सीमेंट बेंचें समर्पित की गई हैं।
यह दान केवल बेंचों का दान नहीं है, यह उस घड़ी में परिजनों को सहारा देने का दान है, जब मन शोक में होता है। यह सेवा है उस स्थान की, जहाँ हर व्यक्ति अंतिम बार अपने प्रियजन को विदा करता है।
इस पुनीत कार्य की प्रेरणा बने श्री अनिल राठौर जी, और इसे साकार रूप दिया मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी बड़जात्या, सचिव श्री जवाहर लाल जी जैन एवं 25 वर्षों से निस्वार्थ सेवा दे रहे समाजसेवी श्री सुनील जी बंसल के सहयोग ने। समिति ने इस सेवा को चिरस्थायी बनाने हेतु 51 हजार के दान का शिलालेख भी स्थापित कर दानदाता का सम्मान किया है।
अठारह आसन दान किए, जनसेवा का उज्ज्वल विस्तार॥
मंदसौर, झालावाड़, आगर, नीमच, रतलाम तक फैली डॉ. दयाराम आलोक जी की दान परंपरा - मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों के लिए - आज समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
आइये, इस ब्लॉग के माध्यम से इस सेवा-यात्रा के भावपूर्ण क्षणों के साक्षी बनते हैं।
मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर के शिवना तट स्थित मुक्तिधाम हेतु
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा
18 सिमेन्ट बेंचें समर्पित
मंदसौर मुक्तिधाम सुशोभित, दयाराम आलोक कृपा अपार । अठारह आसन दान किए, जनसेवा का उज्ज्वल विस्तार ॥ समिति ने पट्ट प्रतिष्ठित किया, दानदाता का गौरव मान । प्रेरणा जग में सतत रहे, आगंतुक पाए सुविधा सम्मान ॥
मुक्तिधाम हेतु समर्पित पाँच छंद
छंद 1
शिवना तट पर मुक्तिधाम, शांति का पावन द्वार।
शांतिदेवी स्मृति में सजा, बेंचों का उपहार॥
धर्मपत्नी दयाराम की, माता अनिल महान।
अठारह आसन दान कर, रखा सेवा का मान॥
छंद 2
डॉ. अनिल दामोदर सुत, दामोदर पथरी धाम।
मातु ऋण चुकाने हेतु, किया अनुपम काम॥
श्रद्धांजलि हाल में लगीं, सीमेंट बेंचें सार।
आगंतुक बैठें शांति से, मिले सुविधा अपार॥
छंद 3
शांतिलाल बड़जात्या अध्यक्ष, समिति के सिरमौर।
जवाहर जैन सचिव प्रिय, धर्म ध्वजा के ठौर॥
सुनील बंसल सेवक सच्चे, पच्चीस बरस से लीन।
लावारिस अस्थि गंगा बहाते, मानवता में प्रवीण॥
छंद 4
इक्यावन सहस्र का शिलालेख, गौरव गाथा गाए।
दान-पट्टिका मुक्तिधाम में, प्रेरणा बन जाए॥
मंदसौर से झालावाड़ तक, नीमच रतलाम आग।
आलोक वंश की दान-धारा, जले पुण्य का राग॥
छंद 5
दानं धर्मस्य मूलं स्यात्, यह वेदों का सार।
शांतिदेवी नाम अमर रहे, युगों-युगों तक द्वार॥
मुक्तिधाम मंदसौर सुशोभित, आलोक कृपा अपार।
जन-जन के मन में गूँजेगा, इस सेवा का विस्तार॥
📜 संस्कृत श्लोक
मंदसौर मुक्तिधाम सुशोभित, दयाराम आलोक कृपा अपार । अठारह आसन दान किए, जनसेवा का उज्ज्वल विस्तार ॥ समिति ने पट्ट प्रतिष्ठित किया, दानदाता का गौरव मान । प्रेरणा जग में सतत रहे, आगंतुक पाए सुविधा सम्मान ॥
मंदसौर के मुक्तिधाम में 51 हजार दान का शिलालेख स्थापित किया गया
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-पथ






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