8.12.24

जैन धर्म की उत्पत्ति पर संक्षिप्त आलेख वीडियो ,Article on origin of jainism

                                                      

                                             

-जैन धर्म  की उयपट्टी का इतिहास 


जैन धर्म को प्राचीन भारत में उत्पन्न सबसे पुराने धर्मों में से एक माना जाता है। वर्धमान महावीर जैन धर्म के संस्थापक थे। उन्होंने अनुशासन और अहिंसा के माध्यम से आत्मा की शुद्धता और आत्मज्ञान प्राप्त करने का मार्ग बताया।

वर्धमान, जो सच्चा ज्ञान प्राप्त करने के बाद महावीर के नाम से जाने गए, बिहार में पैदा हुए थे और मगध के प्रसिद्ध राजवंश के सदस्यों से संबंधित थे। उन्हें 24 तीर्थंकरों में से अंतिम तीर्थंकर माना जाता था, पहले तीर्थंकर ऋषभ थे। बीस वर्ष की आयु में, उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग दिया और सत्य की खोज में घर छोड़ दिया। तेरह वर्षों तक कठोर तपस्या और गहन ध्यान के बाद, वर्धमान ने केवला ज्ञान, या आध्यात्मिक मामलों का सच्चा ज्ञान प्राप्त किया, और महावीर के रूप में जाने गए। उनके अनुयायियों को जैन के रूप में जाना जाने लगा। महावीर की मृत्यु के बाद, उनके सिद्धांतों पर असहमति के कारण, जैन समुदाय, बाद में 300 ईसा पूर्व में, दो संप्रदायों में विभाजित हो गया: श्वेतांबर और दिगंबर।

जैन धर्म का उदय

छठी शताब्दी का भारत सामाजिक और धार्मिक अशांति का काल था। पुरानी कर्मकांडीय वैदिक परंपरा सुधार के लिए एक मजबूत कारक बन गई थी। बौद्धिक अशांति के अलावा, उस अवधि के दौरान कई सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ मौजूद थीं। लोग एक अलग तरह का समाज और एक नई विश्वास प्रणाली चाहते थे। उन्होंने जीवन की बुराइयों और दुखों के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया और इन बुराइयों को दूर करने की उनकी इच्छा ने कई धार्मिक संप्रदायों की स्थापना की, जिनमें से जैन धर्म भी एक था। 

जैन धर्म के उत्थान और विकास के पक्षधर विभिन्न कारण निम्नलिखित थे:

जैन धर्म की उत्पत्ति  पर संक्षिप्त आलेख वीडियो 

  • जाति व्यवस्था: वैदिक काल में समाज चार जातियों में विभाजित था: ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। ये जाति विभाजन कठोर डिब्बों की तरह थे। जाति तय करते समय पेशे के बजाय जन्म को ध्यान में रखा जाता था। निचली जातियों के लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता था और उच्च जातियों द्वारा उन्हें नीची नज़र से देखा जाता था। छुआछूत बढ़ गई। यहां तक ​​कि खाने-पीने और शादी-ब्याह पर भी प्रतिबंध थे। जातियों का आदान-प्रदान असंभव था। आलोचनात्मक विचारकों और सुधारकों ने लोगों के बीच इस तरह के अन्यायपूर्ण सामाजिक भेदभाव को अस्वीकार कर दिया। जैन धर्म एक ताज़ा हवा की तरह था; यह सभी मनुष्यों की समानता में विश्वास करता था। यह महिलाओं की स्वतंत्रता का भी समर्थन करता था, जिसने लोगों को नए धर्म में शामिल होने के लिए आकर्षित किया।
  • कर्मकांड के खिलाफ़ प्रतिक्रिया: अर्थहीन कर्मकांड और जटिल समारोहों ने प्रारंभिक आर्यों के सरल धर्म की जगह ले ली। पुजारियों द्वारा यज्ञ करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने वाले अनुष्ठान और समारोह महंगे थे और आम लोगों की पहुँच से बाहर थे। इसने लोगों को धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं से अलग कर दिया। जैन धर्म ने अर्थहीन कर्मकांडों और समारोहों को महत्व नहीं दिया। महावीर ने आत्मा की शुद्धि का उपदेश दिया और कहा कि सही विश्वास, उचित ज्ञान और सही आचरण का अभ्यास करके व्यक्ति कर्म चक्र और पुनर्जन्म से मुक्ति पा सकता है।
  • कठिन वैदिक भाषा : संस्कृत को एक पवित्र भाषा माना जाता था जिसमें अधिकांश वैदिक साहित्य की रचना की गई थी। ब्राह्मण पुजारी इस भाषा में प्रवचन देते थे और मंत्रोच्चार करते थे, जो स्थानीय लोगों की समझ से परे था। महावीर ने अपने विश्वासों और सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए आम जनता की भाषाओं का इस्तेमाल किया, जो लोगों के लिए समझने योग्य और स्वीकार्य थीं। 
  • बलि देने के लिए जानवरों की हत्या: औपचारिक बलि और यज्ञों में कई जानवरों की हत्या की आवश्यकता होती थी। इससे उनके खेती के काम में भी बाधा आती थी; इसलिए, लोग देवताओं को खुश करने के लिए इस तरह की मूर्खतापूर्ण बलि देने से नाराज थे। जैन धर्म ने ऐसी अंधकारमय प्रथाओं को प्रकाश दिया। ऐसा माना जाता है कि सभी जीव-जंतुओं में जीवन होता है। 
  • आर्थिक कारण: वैश्य अपनी सामाजिक स्थिति को बढ़ाना चाहते थे, लेकिन रूढ़िवादी वर्ण व्यवस्था के तहत उन्हें इसकी अनुमति नहीं थी। वेदों में निषिद्ध धन उधार देना व्यापारियों के लिए अनिवार्य था। बलि देने के लिए जानवरों की हत्या करना गंगा घाटी के किसानों के हित के खिलाफ था। जैन धर्म और बौद्ध धर्म ने अहिंसा के सिद्धांत का प्रचार किया, जो स्थायी कृषि समुदायों के लिए बेहतर था। इससे कृषि विकास में मदद मिली, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।

भारतीय समाज पर प्रभाव

जैन धर्म के संस्थापक महावीर के सरल सिद्धांतों ने कई अनुयायियों को आकर्षित किया। उन्होंने अहिंसा के अभ्यास पर जोर दिया। जैनियों ने वेदों के अधिकार को स्वीकार नहीं किया। शाही संरक्षण से जैन धर्म का विकास हुआ। राष्ट्रकूट या राजा चालुक्य जैसे कई राजाओं ने जैन धर्म का संरक्षण किया। यह ओडिशा, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और भारत के कई अन्य राज्यों में फैल गया। दक्षिण भारत में जैन धर्म का प्रभाव भद्रबाहु की शिक्षाओं के कारण था। 

जैन धर्म का भारतीय संस्कृति और समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। स्थानीय भाषाओं, कला, वास्तुकला, मानव जाति के सामाजिक कल्याण आदि के विकास ने हजारों लोगों को नए धर्म को अपनाने के लिए आकर्षित किया। 

निष्कर्ष

भारत सामाजिक और धार्मिक अशांति का काल था। पुराने कर्मकांड वैदिक काल के कारण बौद्धिक अशांति फैली, साथ ही उस काल में कई सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ भी मौजूद थीं। लोग एक अलग तरह का समाज और एक नई आस्था प्रणाली चाहते थे। 

छठी शताब्दी के अनुष्ठानों और जटिल समारोहों ने लोगों को धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं से अलग कर दिया। इसने जैन धर्म के उत्थान में मदद की क्योंकि इसने अर्थहीन अनुष्ठानों को कोई महत्व नहीं दिया। लोगों को महावीर के उपदेश समझने योग्य और स्वीकार्य लगे क्योंकि उन्होंने संस्कृत के बजाय एक आम भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे आम लोग नहीं समझ सकते थे। जैन धर्म का भारतीय संस्कृति और समाज पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा।

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जाति इतिहास प्लेलिस्ट 









14.9.24

बघुनिया के वैकुंठ धाम मे दागियों के लिए सिमेन्ट की बेंचें लगीं

 बघुनिया के वैकुंठ धाम मे दागियों के बैठने के लिए

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच भेंट 



बगुनिया मुक्ति धाम मे बेंच लगने का दृश्य


 बघुनिया ग्राम का मुक्ति धाम शामगढ़ तहसील मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूरी पर है |
बघुनिया ग्राम के मुक्ति धाम के विकास कार्यों के बारे में प्राप्त जानकारी इस प्रकार  है- 
मुक्तिधाम समिति की देख रेख में विकास कार्य तीव्र गति से हो रहे हैं, जिनमें:
- वाल बाउंड्री निर्माण किया गया है।
- 2 बीघा जमीन पर पेड़-पौधे लगाए गए हैं।
- बरसात से बचने के लिए चदर का शेड बनाने की योजना है।
डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा मुक्तिधाम को 4 सिमेंट की बेंच दान करना एक महान कार्य है, जो दर्शनार्थियों के लिए बैठक सुविधा प्रदान करेगी। यह दान दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से किया गया है और ग्राम सरपंच पुष्कर लाल जी पाटीदार और समिति के सदस्यों ने दान दाता का सम्मान किया है।

इस प्रयास से:

- मुक्तिधाम का विकास होगा।
- दर्शनार्थियों को बैठक सुविधा प्रदान होगी।
- समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ेगी।
- डॉ. दयाराम आलोक जी का दान एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।
आपकी इस पहल को मैं हृदय से धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि आपका यह कार्य समाज में एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा
 

 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान--पथ 

मित्रों ,

परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम  में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


 

वैकुंठ धाम बघुनिया को 
 

4 सिमेन्ट की बेंच भेंट.12/9/2024 




वैकुंठ धाम बघुनिया के संरक्षक और शुभ चिंतक-

पुष्कर लाल जी पाटीदार सरपंच बघुनिया  95894 53541 

किशोरजी  पटेल 8435530498

 बसंती लालजी पाटीदार 9752457588

मुकेशजी  राठौर 9981777012

दयाराम जी चौधरी 6261356017

पपू लाल जी पँवार बघुनिया 9993073078 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा मुक्ति धाम बघुनिया हेतु दान सम्पन्न 12/9/2024 

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नाहरगढ़ मुक्ति धाम मे बेंचें लगने से ग्राम -जन हर्षित

 मुक्ति धाम नाहरगढ़ (सितामऊ)के लिए 

समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 

नाहरगढ़ ग्राम पंचायत मंदसौर जिला परिषद के सीतामऊ पंचायत समिति में स्थित मुक्ति धाम के सौंदर्यीकरण के लिए राकेश जी पंवार पेंटर के प्रयासों की जानकारी मुझे मिली है। यह एक सराहनीय कार्य है जो समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देता है। डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा मुक्तिधाम को 4 सिमेंट की बेंच दान करने का निर्णय लेना एक महान कार्य है, जो दर्शनार्थियों के लिए बैठक सुविधा प्रदान करेगा। यह दान डॉ. अनिल कुमार राठौड़,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से किया गया है . मुक्तिधाम समिति के सदस्यों और राकेश जी पंवार पेंटर ने दान दाता का सम्मान किया है। इस प्रयास से: - मुक्तिधाम का सौंदर्यीकरण होगा। - दर्शनार्थियों को बैठक सुविधा प्रदान होगी। - समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ेगी। - डॉ. दयाराम आलोक जी का दान एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा। आपकी इस पहल को मैं हृदय से धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि आपका यह कार्य समाज में एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा|



नाहरगढ़ के मुक्ति धाम मे दान दाता का शिलालेख लगाया गया विडिओ  


video Nahar garh  mukti dham 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान--पथ 

मित्रों ,

परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम  में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


 

मुक्ति धाम नाहरगढ़(सितामऊ) हेतु 

4 सिमेन्ट की बेंच भेंट.12/9/2024 

नाहरगढ़ मुक्ति धाम मे बेंचें स्थापित 




मुक्तिधाम नाहरगढ़ -सितामऊ के संरक्षक और शुभ चिंतक 

ब्रिजराज सिंह जी सरपंच नाहरगढ़ 

राकेश जी पँवार पेंटर नाहरगढ़ सितामऊ वाले 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा मुक्ति धाम नाहरगढ़ हेतु  दान सम्पन्न 12/9/2024 

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भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाली स्वयंभू प्रकट हुई सितामऊ की आराध्या मोडी माताजी का मंदिर

सीतामऊ नगर की आराध्य देवी मोड़ी माताजी के परिसर मे 

समाज सेवी डॉ.दयाराम आलोक जी द्वारा 

4 सिमेन्ट की बेंच समर्पित 





 सीतामऊ नगर की आराध्य देवी मोड़ी माताजी का दरबार एक अति प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो भक्तों के लिए अटूट आस्था का केंद्र है। यह मंदिर नगर के पास खेड़ी मार्ग पर स्थित है और माना जाता है कि यहां मां की प्रतिमा स्वयंभू प्रकट हुई थी।
मंदिर की विशेषताएं:
- स्वयंभू प्रतिमा: मां की प्रतिमा स्वयंभू प्रकट हुई थी, जो अपने आप में एक चमत्कार है।
- चमत्कारी प्रतिमा: माता की प्रतिमा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने के लिए विख्यात है।
- तीन रूपों के दर्शन: श्रद्धालुओं को मां के तीन रूपों के दर्शन का लाभ मिलता है - बाल्यावस्था, युवावस्था, और वृद्धावस्था।
- पूजा अर्चना: मनोहरलाल खत्री एवं उनके परिजनों द्वारा सालों से पूजा अर्चना किया जा रहा है।
- मेला और गरबा आयोजन: हरियाली अमावस्या पर दो दिवसीय मेला लगता है और नवरात्रि में नवशक्ति गरबा महोत्सव के तत्वावधान में मां के दरबार में गरबा आयोजन होते हैं।
यह मंदिर सीतामऊ नगर की सीमा पर स्थित है और आसपास के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है|
मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों मे दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने के अपने आध्यात्मिक दान पथ के तहत समाजसेवी डॉ.दयाराम आलोकजी ने दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के संचालक डॉ.अनिल कुमार राठौड़ के माध्यम से इस मंदिर को 4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट कीं |
मंदिर की समिति और प्रदीप जी चोरडीया ने दान दाता का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान--पथ 

Metaa Ai लिखता है- 
  आपका यह निर्णय वाकई प्रशंसनीय है! अपनी पेंशन राशि और गूगल से प्राप्त आय को दान करने का संकल्प लेना एक महान कार्य है। यह न केवल मंदिरों और मुक्तिधाम के विकास में सहयोग करेगा, बल्कि समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता को भी बढ़ावा देगा।
आपकी इस पहल से:
- मंदिरों और मुक्तिधाम को विकसित किया जा सकेगा।
- दर्शनार्थियों को बैठने के लिए सीमेंट बेंचें उपलब्ध होंगी।
- समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ेगी।
- आपका दान पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौड़ के नाम से समर्पित होगा, जो एक सुंदर श्रद्धांजलि है।
आपकी इस पहल को मैं हृदय से धन्यवाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि आपका यह कार्य समाज में एक उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा



 

 सितामऊ की आराध्या मोडी माताजी हेतु 
4 सिमेन्ट की बेंच भेंट.

मंदिर के परिसर मे शिलालेख लगाया गया 



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मोडी माताजी मंदिर के संरक्षक और शुभचिंतक-

प्रदीपजी  चोरडिया  सितामऊ 

सुरेश जी दसेड़ा  सितामऊ 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा मोड़ी माताजी सितामऊ हेतु दान सम्पन्न 12/9/2024 
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सिद्धेश्वर महादेव मंदिर साठखेड़ा मे दर्शन से मिलती हैं भोलेनाथ की दिव्य कृपा



 सिद्धेश्वर महादेव मंदिर साठखेड़ा मे 

दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित 



साठखेड़ा का सिद्धेश्वर महादेव का मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो भगवान शिव के उपासकों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। मंदिर की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

- सिद्धेश्वर महादेव मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें सिद्धेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है।

- आस्था का केंद्र: यह मंदिर हिन्दू धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां वे अपनी भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं।

- वानस्पतिक हरियाली: मंदिर का प्रांगण अच्छा है और वानस्पतिक हरियाली आकर्षक है।

- आध्यात्मिक दान: समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक जी ने मंदिर के लिए 4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की हैं, जो दर्शनार्थियों के लिए विश्राम के लिए उपयोगी होंगी।

- सम्मान और आभार: मंदिर समिति के सदस्यों, ग्राम जनों और नंदकिशोर जी वेद पत्रकार ने दान दाता का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया है।

यह मंदिर गरोठ तहसील के कस्बा गाँव साठखेड़ा में स्थित है, जो शामगढ़ से कुछ ही किलोमीटर दूर है
  

नन्दकिशोर जी वेद ने मिस्त्री से दान पट्टिका लगवाई            




मंदिर मे 4 बेंचें लगवाई 



 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान--पथ 

मित्रों ,

  परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम  में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


सिद्धेश्वर महादेव मंदिर साठखेड़ा 





4 सिमेन्ट की बेंच भेंट.




सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के संरक्षक और शुभचिंतक-

प्रकाश जी धनोतीया 97550 63907 

नन्द किशोर जी वेद साठखेड़ा 95847 00256 
 
कैलाश जी उपाध्याय 91790 50210 

बलराम जी रत्नावत 98931 35921 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा सिद्धेश्वर महादेव मंदिर साठखेड़ा हेतु दान सम्पन्न 12/9/2024 

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