दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
4 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित
काव्यात्मक विवरण
छंद 1 सिद्धेश्वर धाम साठखेड़ा, शिव की महिमा अपार। भक्तजन आते दर्शन को, मिलता विश्राम आधार। चार बेंचें दान स्वरूप, आलोक जी का संकल्प महान। आध्यात्मिक दान-पथ पर, जग में फैला पुण्य गान।
छंद 2 प्रकाश जी धनोतीया संग, नंदकिशोर वेद का साथ। कैलाश उपाध्याय जुड़े, सेवा में दिखता परमार्थ। शिवालय में श्रद्धा गूंजे, हरियाली से मन हरषाए। दान पट्टिका साक्षी बनकर, पुण्य कथा सबको सुनाए।
छंद 3 सेवानिवृत्ति का संकल्प, समाज सेवा में लगाया। पेंशन की राशि समर्पित कर, जनहित का दीप जलाया। मंदिर, मुक्ति धाम, गौशाला—सबमें आलोक का योगदान। 151 से अधिक संस्थानों में, बैठने को मिला सम्मान।
छंद 4 शामगढ़ का गौरव बढ़ा, जब दामोदर पथरी अस्पताल। दान की परंपरा निभाई, शिवधाम में किया कमाल। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में, श्रद्धालु पाए विश्राम सुख। आलोक जी की सेवा से, जन-जन में फैला शुभानुभव।
श्लोक
सिद्धेश्वराय महादेवाय नमः सदा भक्तजनप्रियः।
दानेन बेंचसमर्पणं, आलोकस्य महाकृतिः॥
समाजसेवी
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
सिद्धेश्वर महादेव मंदिर साठखेड़ा
दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
4 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित
साठखेड़ा का सिद्धेश्वर महादेव का मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो भगवान शिव के उपासकों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। मंदिर की विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- सिद्धेश्वर महादेव मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें सिद्धेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है।
- आस्था का केंद्र: यह मंदिर हिन्दू धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां वे अपनी भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करते हैं।
- वानस्पतिक हरियाली: मंदिर का प्रांगण अच्छा है और वानस्पतिक हरियाली आकर्षक है।
- आध्यात्मिक दान: समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक जी ने मंदिर के लिए 4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की हैं, जो दर्शनार्थियों के लिए विश्राम के लिए उपयोगी होंगी।
- सम्मान और आभार: मंदिर समिति के सदस्यों, ग्राम जनों और नंदकिशोर जी वेद पत्रकार ने दान दाता का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया है।
यह मंदिर गरोठ तहसील के कस्बा गाँव साठखेड़ा में स्थित है, जो शामगढ़ से कुछ ही किलोमीटर दूर है
नन्दकिशोर जी वेद ने मिस्त्री से दान पट्टिका लगवाई
सिद्धेश्वर महादेव मंदिर साठखेड़ा का फ्रंट व्यू
मंदिर मे 4 बेंचें लगवाई
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -




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