मुक्ति धाम नाहरगढ़ (सितामऊ)
ॐ शांति।
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले मे स्थित पावन नगरी सीतामऊ के समीप बसा है - नाहरगढ़ का मुक्ति धाम। यह केवल एक श्मशान घाट नहीं, बल्कि जीवन के अंतिम सत्य का, शांति और मोक्ष का तीर्थ है।
आज इस पवित्र मुक्ति धाम में हरियाली का विस्तार हो रहा है, स्वच्छता और सुविधा का संगम हो रहा है। इसके पीछे दो समर्पित हाथों का निरंतर श्रम है -
प्रबंधक श्री राकेश जी पँवार जो एक कुशल पेंटर होने के साथ-साथ दिन-रात इस धाम की देखरेख और साज-सज्जा में लगे हैं, और
संरक्षक श्री ब्रिजराज सिंह जी सरपंच, नाहरगढ़ जो सजग प्रहरी बनकर इस धाम के विकास के लिए सदैव खड़े हैं।
इसी सतत सेवा यज्ञ में एक पुण्य आहुति जुड़ी है - दिनांक 12 सितंबर 2024 को।
शामगढ़ के समाजसेवी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा अपने 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत नाहरगढ़ मुक्ति धाम हेतु 4 सीमेंट बेंचों का सप्रेम समर्पण किया गया।
यह दान दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ - डॉ. अनिल कुमार दामोदर S/o डॉ. दयाराम जी आलोक के माध्यम से सम्पन्न हुआ।
इस दान का उद्देश्य क्या है?
मुक्ति धाम में आने वाले वृद्धजनों, महिलाओं और दूर से आए परिजनों को बैठने के लिए एक स्वच्छ, स्थायी और सम्मानजनक स्थान मिल सके। थके-हारे मन को दो पल शांति से बैठने का सहारा मिल सके। यही सुविधा-केंद्रित सोच डॉ. आलोक जी के दान की सबसे बड़ी विशेषता है।
जैसा कि इस अवसर पर कहा गया -
नाहरगढ़ मुक्ति धाम में, हरियाली का विस्तार।
राकेशजी पँवार प्रबंधक, कर रहे सतत संभार।।
डॉ. आलोक जी का यह दान-पथ कोई एक दिन का कार्य नहीं है। सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण में लगाने का संकल्प लिया है। यह राशि स्वयं की पेंशन और गूगल के माध्यम से ब्लॉग व यूट्यूब से प्राप्त आय से सृजित है - अर्थात तकनीक से परोपकार का एक अनूठा मॉडल।
आज तक वे मंदसौर, नीमच, आगर, झालावाड़, रतलाम, झाबुआ सहित 151 से अधिक मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में बेंच, रंग-रोगन और अन्य जन-सुविधाओं का विस्तार कर चुके हैं। पारदर्शिता हेतु प्रत्येक स्थान पर शिलालेख भी स्थापित किया जाता है, ताकि समाज में दान की प्रेरणा जागृत हो।
नाहरगढ़ में भी दानदाता का शिलालेख सम्मान के साथ लगाया गया है।
दानं दयाराम आलोकस्य पुण्यं प्रशस्यते।
मुक्तिधामे नाहरगढे बेंचाः चतुर्भिः समर्पिताः।।
यह छोटा सा सहयोग नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है - कि पेंशन की एक-एक राशि भी यदि समाज हित में लगे तो वह मोक्षदायिनी बन जाती है।
हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं संरक्षक ब्रिजराज सिंह जी और प्रबंधक राकेश जी पँवार का, जिनके अथक प्रयासों से नाहरगढ़ मुक्ति धाम आज एक आदर्श मुक्ति धाम बन रहा है।
आइए, इस पुण्य कार्य के साक्षी बनें और इस प्रेरणा को आगे बढ़ाएं।
मुक्ति धाम नाहरगढ़ (सितामऊ)के लिए
समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा
4 सिमेन्ट बेंच समर्पित
काव्यात्मक छंद
छंद 1 नाहरगढ़ मुक्ति धाम में, हरियाली का विस्तार। राकेशजी पँवार प्रबंधक, कर रहे सतत संभार।। ब्रिजराज सिंह सरपंच सजग, संरक्षक बनकर खड़े। दानदाता आलोकजी, बेंचें चार यहाँ चढ़े।।
छंद 2 सीतामऊ की पावन भूमि, मुक्तिधाम महान। डॉ. दयाराम आलोक ने, किया जनहित दान।। दामोदर अस्पताल से, सहयोग निरंतर बहा। समर्पण की गाथा यह, समाज में दीपक रहा।।
छंद 3 शिलालेख में अंकित हुआ, दान का उज्ज्वल नाम। आलोकजी का पुण्य पथ, जग में करता है धाम।। प्रबंधक राकेशजी पँवार, श्रम से रचते रंग। सरपंच ब्रिजराज सिंह जी, सेवा में सदा उमंग।।
छंद 4 दान पथ आलोकजी का, प्रेरणा देता समाज। पेंशन राशि समर्पित कर, रचते सेवा का राज।। नाहरगढ़ का मुक्तिधाम, अब सुशोभित हुआ। जन-जन को सुविधा मिली, पुण्य पथ जग में छुआ।।
श्लोक -
दानं दयाराम आलोकस्य पुण्यं प्रशस्यते। मुक्तिधामे नाहरगढे बेंचाः चतुर्भिः समर्पिताः।।
समाजसेवी
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
video Nahar garh mukti dham
डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा मुक्ति धाम नाहरगढ़ हेतु दान सम्पन्न 12/9/2024
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -







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