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23.1.26

कुर्मी समाज की जड़ें: परंपरा, कुलदेवी और महान व्यक्तित्व



कुर्मी भारत के उत्तरी, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक प्राचीन कृषक और साहसी जाति है, जिसे कुनबी या कुलमी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि ये वैदिक काल के क्षत्रिय (योद्धा) वंशज हैं जो कृषि की ओर बढ़े। यह समुदाय अपनी कर्मशीलता, कठोर परिश्रम और उन्नत कृषि विधियों के लिए पहचाना जाता है।
कुर्मी जाति के इतिहास की मुख्य बातें:
उत्पत्ति और नाम: 'कुर्मी' शब्द संस्कृत के 'कृषि कर्मी' से व्युत्पन्न हो सकता है या 'कुटुम्बिक' (कृषक/कुल) से, जो बाद में कुंभी और कुर्मी बना। कुछ मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के कूर्म अवतार या क्षत्रिय पूर्वजों से संबंधित हैं।
सामाजिक स्थिति:
 इतिहास में इन्हें योद्धाओं के साथ-साथ कृषक माना गया है, जो साहसी गुणों के लिए जाने जाते हैं। महाराष्ट्र में इन्हें 2006 में 'कुनबी' के बराबर मान्यता दी गई है।
विस्तार और पहचान: मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और गुजरात में पाए जाने वाले इस समुदाय को पाटीदार, मराठा, कम्मा, रेड्डी, पटेल और कुनबी जैसी विभिन्न उप-जातियों के साथ समरूप माना जाता है।
ऐतिहासिक व्यक्तित्व: ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कुर्मी समुदाय खुद को मौर्य और गुप्त वंश जैसे प्राचीन शासकों से भी जोड़ता है। महान क्रांतिकारी और राजनेता जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल, शिवाजी महाराज इस समुदाय के समृद्ध इतिहास का हिस्सा माने जाते हैं।
सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान: ये लोग भारत में सबसे उत्पादक कृषक समुदायों में से एक हैं और इन्होंने भारतीय कृषि व ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह समुदाय 19वीं सदी के अंत से ही 'अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा' के माध्यम से संगठित रहा है।
कुर्मी (Kurmi) भारत की एक प्रमुख हिंदू कृषक जाति है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के गंगा के मैदानी इलाकों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में पाई जाती है।
इतिहास और उत्पत्ति -
पौराणिक संबंध:
 कुर्मी समुदाय स्वयं को सूर्यवंशी क्षत्रिय और भगवान राम के पुत्रों, लव और कुश का वंशज मानता है। इस आधार पर इन्हें 'कूर्मवंशी' भी कहा जाता है।
व्युत्पत्ति: 'कुर्मी' शब्द संस्कृत के 'कुर्म' (कछुआ) या 'कुनबी' (खेती करने वाला) से निकला माना जाता है। 'कूर्म' को पृथ्वी के रक्षक और स्थिरता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
सामाजिक भूमिका: 
ऐतिहासिक रूप से, इस समुदाय के लोग शांतिकाल में कृषि कार्य और युद्धकाल में सैनिक सहायता प्रदान करते थे। उनकी उत्कृष्ट कृषि पद्धतियों और कार्य नैतिकता के लिए मुगल और ब्रिटिश काल के प्रशासकों ने भी उनकी प्रशंसा की थी।
विभिन्न क्षेत्रों में पहचान
कुर्मी समुदाय भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों और उपनामों से जाना जाता है: 
महाराष्ट्र: यहाँ इन्हें कुनबी (Kunbi) कहा जाता है।
गुजरात: यहाँ ये पाटीदार या कनबी के रूप में पहचाने जाते हैं।
राजस्थान: यहाँ इन्हें अक्सर कलबी, चौधरी या पटेल के नाम से पुकारा जाता है।
प्रमुख उपनाम: पटेल, वर्मा, महतो, सचान, गंगवार, कटियार, और चौधरी जैसे 
सरनेम इस समुदाय में सामान्य हैं।
कुर्मी (क्षत्रिय-कूर्मवंशी) समाज के लोग मुख्य रूप से कश्यप, कौशिक या वशिष्ठ गोत्र के अंतर्गत आते हैं, जिनमें कश्यप गोत्र सबसे आम है। ये स्वयं को भगवान राम के पुत्र लव-कुश का वंशज मानते हैं। कुर्मी समाज की कुलदेवी विभिन्न क्षेत्रों में खोडियार माता, दुर्गा माता, काली माता या आंजणा माता (पटेल समाज में) पूजी जाती हैं।
गोत्र और शाखाएं (प्रमुख जानकारी):गोत्र: उत्तर भारत में अधिकांश कुर्मी कश्यप गोत्र के होते हैं। इसके अलावा कौशिक (शिवाजी महाराज के परिवार में) और वशिष्ठ गोत्र भी प्रचलित हैं।
उपनाम (बैक/शाखा): कुल या शाखाएं उन स्थानों के नामों पर आधारित होती हैं जहां से परिवार का विस्तार हुआ, जैसे- सचान, गंगवार, कटियार, जैसवार, पटेल, मराठा, शिंदे, वर्मा, चंद्राकर।
कुर्मी उपजातियां: बिहार में अवधिया, समसवार, जसवार प्रमुख हैं।
कुलदेवी/देवता: क्षेत्रवार, खोडियार माता, दुर्गा माता, काली माता या आंजणा माता (डांगी पटेल) कुलदेवी के रूप में मान्य हैं।
कुर्मी समाज को सूर्यवंशी क्षत्रिय माना जाता है और यह एक ऐतिहासिक कृषि-केंद्रित समुदाय है। सामाजिक और राजनीतिक स्थिति-
वर्तमान श्रेणी: भारत सरकार द्वारा अधिकांश राज्यों में इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में रखा गया है।
आरक्षण की मांग:
झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुर्मी समुदाय लंबे समय से खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) के रूप में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वे अपनी जड़ों को जनजातीय मानते हैं।
राजनीति:
यह समुदाय उत्तर भारत, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक शक्तिशाली प्रभाव रखता है।
ऐतिहासिक रूप से, कुर्मी अपनी उद्यमी प्रकृति और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए जाने जाते रहे हैं
कुर्मी समाज ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राजनीति, समाज सुधार और कृषि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरदार वल्लभभाई पटेल, नीतीश कुमार, डॉ. सोनेलाल पटेल और वीर शिवाजी (कुनबी/मराठा) जैसे प्रमुख नाम इस समाज से आते हैं, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है।
कुर्मी समाज के कुछ प्रसिद्ध व्यक्ति:
राजनीति एवं स्वतंत्रता संग्राम -सरदार वल्लभभाई पटेल: भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री, लौह पुरुष।
नीतीश कुमार: बिहार के मुख्यमंत्री।
छत्रपति शिवाजी महाराज: मराठा साम्राज्य के संस्थापक (ऐतिहासिक रूप से कुनबी-मराठा/कुर्मी से संबंधित)।
डॉ. सोनेलाल पटेल: अपना दल के संस्थापक।
बेनी प्रसाद वर्मा: पूर्व केंद्रीय मंत्री।
अनुप्रिया पटेल: केंद्रीय राज्य मंत्री।
संतोष गंगवार: पूर्व केंद्रीय मंत्री।
रघुनाथ महतो: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी।
सतीश प्रसाद सिंह: पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार।
विनय कटियार: वरिष्ठ भाजपा नेता।
अन्य प्रमुख व्यक्तिसंत तुकाराम महाराज: प्रसिद्ध भक्ति आंदोलन के संत।
डॉ. वर्गीज कुरियन: भारत में श्वेत क्रांति के जनक।
लोकप्रिय उपनाम:
कुर्मी समाज में मुख्य रूप से पटेल, महतो, सचान, गंगवार, कटियार, कुर्मी, पाटीदार और पाटिल जैसे उपनामों का प्रयोग किया जाता है।