शामगढ़ के मुक्तिधाम पर एक आध्यात्मिक हस्ताक्षर
मोक्ष की भूमि पर किया गया दान केवल ईंट-गारे का नहीं, बल्कि मानवीय करुणा का स्थायी स्थापत्य होता है। जहाँ जीवन अपनी अंतिम यात्रा पूरी करता है, वहाँ एक शांत कोना, बैठने का एक सहारा और जल की एक बूंद भी पुण्य के समान है। शामगढ़ नगर के मुक्तिधाम ने हाल के वर्षों में इसी करुणा और सेवा की भावना से एक नया स्वरूप पाया है।
इस पावन स्थल के कायाकल्प में श्री रमेश जी राठौर 'आशुतोष' के अथक प्रयास और समिति के अध्यक्ष श्री निर्मल कुमार जी सोनी, कोषाध्यक्ष श्री दीपक जी गोखरू सहित समस्त सेवाभावी साथियों का समर्पण वंदनीय है। हरियाली, जल-व्यवस्था, शेड, शिव मंदिर और स्नानगृह के निर्माण से यह धाम अब केवल एक श्मशान नहीं, बल्कि श्रद्धा, शांति और स्वच्छता का तीर्थ बन गया है।
इसी विकास-यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, आध्यात्मिक दान-पथ के अनवरत यात्री डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा एक प्रेरणादायी अध्याय जोड़ा गया। उनके द्वारा दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ - डॉ. अनिल कुमार दामोदर के माध्यम से दिनांक 11/11/2022 को मुक्तिधाम शामगढ़ के लिए 51,000 रुपये नकद और श्रद्धालुओं के विश्राम हेतु 4 सीमेंट बेंचें सादर समर्पित की गईं। मुक्तिधाम के मुख्य द्वार पर स्थापित शिलापट्ट पर यह दान-गाथा अमर अक्षरों में अंकित है, जो आने वाली पीढ़ियों को परोपकार के लिए प्रेरित करती रहेगी।
यह दान क्यों विशिष्ट है?
डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी पेंशन की 5 वर्ष की समस्त राशि और अपने ब्लॉग व यूट्यूब जैसे डिजिटल प्रयासों से अर्जित आय को समाज-सेवा के लिए समर्पित करने का विरल संकल्प लिया है।
उनका यह 'आध्यात्मिक दान-पथ' किसी एक नगर तक सीमित नहीं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झाबुआ और झालावाड़ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में सैकड़ों सीमेंट बेंचों की स्थापना और जन-सुविधा के कार्य उनके इसी संकल्प के साक्षी हैं। उनका ध्येय भव्यता नहीं, बल्कि उपयोगिता है - ताकि धाम पर आने वाले वृद्धजन, श्रद्धालु और यात्री को बैठने के लिए एक स्वच्छ और सम्मानजनक स्थान मिल सके।
इसी भाव को आपके द्वारा रचित काव्य-पंक्तियाँ अत्यंत सुंदरता से कहती हैं -
शामगढ़ नगर का मुक्तिधाम, पावन स्थल, श्रद्धा का धाम।
और शास्त्र कहता है -
दानं महत्तमं पुण्यं, लोकहिताय समर्पितम्।
आलोकस्य करुणायाः, मुक्तिधामे सदा स्मृतम्॥
वस्तुतः धार्मिक स्थलों पर विश्राम-व्यवस्था करना शास्त्रों में महापुण्य माना गया है। यह दान न केवल भौतिक सुविधा देता है, बल्कि थके-हारे मन को सांत्वना भी देता है।
यह ब्लॉग लेख उसी पुण्य-परंपरा, सेवा-भावना और शामगढ़ के मुक्तिधाम के निरंतर होते विकास की एक विनम्र दस्तावेजी प्रस्तुति है। आइए, इस वीडियो और चित्रों के माध्यम से इस पावन स्थल के दर्शन करें और दान की इस प्रेरणादायी परंपरा को नमन करें।
शामगढ़ नगर का मुक्तिधाम, पावन स्थल, श्रद्धा का धाम। रमेशजी आशुतोष ने किया प्रयास, हरियाली, जल, शेड का विकास।
निर्मलजी सोनी समिति संग, सेवा भाव से बढ़ा रंग। शिव मंदिर, स्नानगृह बने, श्रद्धालु सुख से यहाँ तृप्त रहें।
दान की परंपरा आगे बढ़ी, आलोकजी ने पुण्य निधि गढ़ी। इक्यावन हजार नकद समर्पित, चार बेंचें भी भक्तों हेतु अर्पित।
गेट पर पट्ट हुआ स्थापित, दान की गाथा अमर अंकित। समाज को प्रेरणा मिली अपार, दान पथ से जग हुआ साकार।
श्लोक -
दानं महत्तमं पुण्यं, लोकहिताय समर्पितम्। आलोकस्य करुणायाः, मुक्तिधामे सदा स्मृतम्॥ रमेशाशुतोषनेतृत्वे, निर्मलसोनीसमर्पिते। विकासः मुक्तिधामस्य, समाजे प्रेरणामयः॥ सीमेंट-बेञ्चाः दत्ताः, भक्तानां विश्रमार्थिनः। इक्यावन् सहस्रं च, दानं पुण्यप्रसाधनम्॥

मुक्तिधाम का विडिओ देखें
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा मुक्तिधाम शामगढ़ हेतु बेंच व्यवस्था
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्री रमेश जी राठौर आशुतोष 99264-26499- पूर्व प्रबंधक मुक्ति धाम
दीपक जी गोखरू- कोषाध्यक्ष मुक्ति धाम समिति
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा
मोक्षधाम शामगढ़ हेतु दान सम्पन्न 11/11/2022
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ
*मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर
*जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार
*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट
*जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार
*जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी
*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़




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