नीलकंठेश्वर के आंगन में - एक सेवानिवृत्त शिक्षक के दान-पथ की प्रस्तावना
मालवा धरा गहन गंभीर, पग-पग रोटी डग-डग नीर। इसी मालवा के मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील में बसा है एक छोटा सा गांव - तितरोद। और तितरोद की आत्मा है - श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर।
यह मंदिर ईंट-पत्थरों से नहीं, आस्था से बना है। गांव के बुजुर्ग आज भी कहते हैं, इसका निर्माण ग्रामीणों ने नहीं करवाया। सैकड़ों वर्ष पूर्व किसी सिद्ध संत महात्मा द्वारा यह मंदिर वायुमार्ग से उड़ाकर ले जाया जा रहा था। भोर हो गई, और भोर की लाली के साथ यह दिव्य धाम तितरोद की धरती पर ही उतर गया। तब से आज तक यह सिद्ध, प्राचीन और चमत्कारी स्थान के रूप में पूजनीय है। न कोई शिलालेख इसका काल बताता है, न कोई इतिहास इसका निर्माता - यही तो इसके स्वयंभू होने का प्रमाण है।
ऐसे ही जागृत देवालय में, जहां आध्यात्मिक आयोजनों की गूंज निरंतर रहती है, एक छोटा सा अभाव था - थके हुए भक्तों के दो पल बैठने का। इस अभाव की ओर ध्यान दिलाया तितरोद के सजग पत्रकार, मंदसौर गाथा चैनल के स्वामी श्री देविदास जी बैरागी ने।
बस एक फोन पर बात हुई। न मिलना हुआ, न मंदिर देखना। केवल महादेव के फोटो, वीडियो और मंदिर की कथा भेजी गई। और उधर शामगढ़ में बैठे समाजसेवी, साहित्य मनीषी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक ने संकल्प ले लिया।
यह संकल्प केवल तीन सीमेंट बेंचों का नहीं था। यह एक आध्यात्मिक दान-पथ का संकल्प है। परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया जी के आशीर्वाद से प्रेरित होकर डॉ. आलोक जी ने अपनी 5 वर्ष की समस्त पेंशन राशि, और अपनी 8 वेबसाइटों से गूगल विज्ञापन से प्राप्त होने वाली आय का 68% भाग, मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों के लिए समर्पित करने का व्रत लिया है। यह व्रत मंदसौर, झालावाड़, आगर, नीमच, रतलाम, झाबुआ और कोटा जिलों तक विस्तृत है।
इसी व्रत की एक कड़ी के रूप में, अपने पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के नाम पर, श्री नीलकंठेश्वर मंदिर के लिए 3 सीमेंट बेंचें और 1501 रुपये की सहयोग राशि भेंट की गई। मंदिर के व्यवस्थापक श्री राकेश पुरी जी गोस्वामी और मुख्य पुजारी श्री मुकेश पुरी जी की अनुमति से, दिनांक 28/01/2023 को नेम प्लेट के साथ ये बेंचें मंदिर प्रांगण में स्थापित कर दी गईं और 15001/- की राशि फोन पे के माध्यम से प्रबंधक के खाते में प्रेषित की गई।
तितरोद नगर की ओर से बैरागी न्यूज एजेंसी, बस स्टैंड तितरोद ने अपने आभार संदेश में लिखा - "ऐसे दानदाता बंधु का हृदय से धन्यवाद, जिनसे न कभी मिले, जो कभी मंदिर नहीं आए, पर महादेव के नाम पर भक्तों के बैठने हेतु कुर्सियां प्रदान कर दीं।"
यह ब्लॉग केवल तीन बेंचों की कथा नहीं है। यह एक शिक्षक की पेंशन के महादेव के चरणों में फूल बन जाने की कथा है। यह इस बात का प्रमाण है कि दान के लिए दौलत नहीं, दृष्टि चाहिए।
नीलकंठेश्वर महादेव की जय हो!
नीलकंठेश्वर महादेव मन्दिर तितरोद -सीतामऊ को
समाजसेवी डॉ . दयाराम जी आलोक शामगढ़ द्वारा
मंदिर मे बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु
3 सिमेन्ट बेंच भेंट
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के अंतर्गत सितामऊ तहसील के गाँव तितरोद मे निलकंठेश्वर महादेव का मंदिर अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजनों के लिए जाना जाता है। पत्रकार श्री देविदास जी बैरागी से परिचय हुआ ,इस मंदिर के लिए 3 सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने के सिलसिले मे मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी राकेश पुरीजी और मुकेश पुरीजी की अनुमति लेकर बेंचें मंदिर के प्रांगण मे लगवा दी गई हैं। नील कंठेश्वर महादेव की जय हो !
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम झाबुआ जिलों के
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
का
आध्यात्मिक दान-पथ
मित्रों ,
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 8 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|
यह विडियो मंदसौर गाथा चेनल के मालिक देविदास जी बैरागी पत्रकार ने बनाकर भेजा है |
की प्रेरणा से डॉक्टर श्री अनिल कुमार जी राठौर (दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ) द्वारा श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर तितरोद हेतु 3 सीमेंट की कुर्सिया भेट करने की घोषणा की थी जो आज महादेव मंदिर पर लगाई गई।। तितरोद नगर की ओर से दानदाता बन्धु का ह्रदय से धन्यवाद।। दानदाता बन्धु से न में कभी मिला न वो कभी श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर तितरोद आये बस एक बार फोन पर बात हुई,,महादेव जी के फोटो/वीडियो/मन्दिर की डिटेल भेजी तो उन्होंने कुर्सियां दान स्वरूप भक्तों के बैठने हेतु प्रदान कर दी ऐसे दान दाता बन्धु का पुनः धन्यवाद साथ ही क्षेत्र के अन्य प्रमुख मन्दिरो पर यह कुर्सियां उंन्होने भेंट करी।। महाकाल महाराज की कृपा सदैव आप पर बनी रहे।।--बैरागी न्यूज एजेंसी बस स्टैण्ड तितरोद-
नीलकंठेश्वर महादेव मन्दिर तितरोद,तहसील-सीतामउ,जिला मन्दसौर मध्यप्रदेश
श्री नीलकंठेश्वर महादेव जी तितरोद का मंदिर ऐतिहासिक होकर अत्यंत प्राचीन सिद्ध व चमत्कारी स्थान के रूप में सेकड़ो वर्षो से पूजनीय है।। गाँव के बड़े बुजुर्गों से हमने सदैव सुना है की इस मंदिर का निर्माण ग्रामीणों ने नही करवाया है प्राचीन समय मे यह मन्दिर किसी सिद्ध सन्त महात्मा द्वारा वायुमार्ग से उड़ाकर ले जाया रहा था लेकिन भोर का समय होने पर यह मंदिर तितरोद नगर में ही उतर गया ओर तब से आजतक मन्दिर यही है ओर इसकी पूजा अर्चना होती आई है इसलिये लिखित में ऐसा कोई इतिहास नही है कि मन्दिर किसने,,कब व किस काल मे बनाया जो यह साबित करता है कि यह मन्दिर सेकड़ो वर्षो पहले का मंदिर है।।
