श्री हनुमान मंदिर, गाँव दसोरिया (गरोठ)
आस्था और सेवा का संगम - दसोरिया धाम
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में स्थित ग्राम दसोरिया एक महत्वपूर्ण और पावन स्थल है। यह गाँव बरडिया अमरा से गरोठ रेलवे स्टेशन को जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है, जहाँ सौंधिया राजपूत और पाटीदार समाज का प्रभुत्व है।
इसी ग्राम के हृदय स्थल में स्थित है, श्रद्धा का अनुपम केंद्र - श्री हनुमान मंदिर दसोरिया।
मंदिर अपनी अलौकिक भव्यता और सुंदर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। ऊँचा उठा हुआ चबूतरा, दूर से दिखाई देने वाला उज्ज्वल शिखर, पक्का फर्श, विशाल प्रांगण और मंदिर तक पहुँचने के लिए बनी सीढ़ियाँ - इसकी विशेषताएँ हैं। ग्रामवासी यहाँ विराजमान बालाजी को अपनी मुरादें पूरी करने वाला मानते हैं और यहाँ गहरी आस्था रखते हैं।
सेवा का पुण्य कार्य
इसी पावन धाम में जन-सुविधा हेतु एक पुण्य कार्य सम्पन्न हुआ।
दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा - समाजसेवी, साहित्य मनीषी डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपनी आध्यात्मिक दान-पथ की परम्परा के अंतर्गत श्री हनुमान मंदिर दसोरिया हेतु 4 सीमेंट बेंचें दान स्वरूप समर्पित की हैं। यह दान दिनांक 20/01/2024 को डॉ. अनिल कुमार दामोदर के माध्यम से सम्पन्न हुआ।
इससे मंदिर में आने वाले वृद्धजनों, महिलाओं और यात्रियों को बैठने के लिए स्वच्छ और स्थायी व्यवस्था प्राप्त हुई है।
इस पुण्य कार्य को चिरस्थायी बनाने हेतु मंदिर के सेवादार श्री बालाराम जी पाटीदार ने मंदिर गेट के पास की दीवार पर दानदाता का शिलालेख स्थापित किया है, जो अन्य लोगों को भी दान की प्रेरणा देता है। इस कार्य पर ग्राम के सरपंच श्री होकम सिंह जी एवं समस्त ग्रामवासियों ने दानदाता के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
कविता रूप में -
दसोरिया ग्राम का पावन धाम, हनुमान मंदिर उज्ज्वल नाम।
सीमेंट बेंचें दान स्वरूप, डॉ. आलोक का पुण्य अनूप।
बालाराम पाटीदार ने शिलालेख सजाया, सरपंच होकम सिंह ने आभार जताया।
श्लोक रूप में -
दसोरियाग्रामे हनुमन्मन्दिरं शुभम् ।
दानेन बेंचाः चतुर्भिः संस्थापिता शुभम् ॥
दयारामस्य आलोकस्य पुण्यकर्म महान्यतः ।
जनसेवा समर्प्यते पेंशनराश्या स्वयम्भुवः ॥
आध्यात्मिक दान-पथ क्या है ?
डॉ. दयाराम आलोक एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण में समर्पित करने का संकल्प लिया है।यह दान केवल एक गाँव तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, नीमच, झालावाड़, रतलाम, झाबुआ, आगर जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों, गौशालाओं और विद्यालयों में वे निरंतर सहयोग कर रहे हैं।
अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बेंच, रंग-रोगन और बैठने की व्यवस्था का कार्य उनके द्वारा किया जा चुका है।
यह पूर्णतः स्व-वित्तपोषित मॉडल है - उनकी पेंशन और गूगल से ब्लॉग व यूट्यूब के माध्यम से प्राप्त आय से यह परोपकार चल रहा है।
पारदर्शिता हेतु प्रत्येक स्थान पर शिलालेख लगवाया जाता है, ताकि समाज में दान की प्रेरणा फैले।
दसोरिया हनुमान मंदिर में बेंचें लगने का वीडियो भी इस लेख के साथ संलग्न है, जो इस सेवा कार्य का जीवंत प्रमाण है।
सेवादार संपर्क:
श्री बालाराम जी पाटीदार, श्री होकम सिंह जी सरपंच, पुजारी श्री प्रकाश नाथ जी।
यह छोटा सा सहयोग भी यही दर्शाता है कि - मंदिर केवल पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि सेवा और श्रद्धा का संगम है।
श्री हनुमान मंदिर गाँव दसोरिया (गरोठ) हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बैंच व्यवस्था
दसोरिया ग्राम का पावन धाम, हनुमान मंदिर उज्ज्वल नाम। शिखर ऊँचा, चबूतरा महान, भक्तों का यहाँ है श्रद्धा स्थान।
सीमेंट बेंचें दान स्वरूप, डॉ. आलोक का पुण्य अनूप। दामोदर पथरी अस्पताल से, सेवा की गाथा जन-जन के।
बालाराम पाटीदार ने शिलालेख सजाया, दानदाता का गौरव जग में छाया। सरपंच होकम सिंह ने आभार जताया, ग्रामवासियों ने हर्ष मनाया।
पेंशन राशि का त्याग महान, 151 संस्थानों में दान। मंदिर, मुक्ति धाम, गौशाला में, सुविधा पहुँची हर आँगन में।
श्लोक
दसोरियाग्रामे हनुमन्मन्दिरं शुभम् । दानेन बेंचाः चतुर्भिः संस्थापिता शुभम् ॥ दयारामस्य आलोकस्य पुण्यकर्म महान्यतः । जनसेवा समर्प्यते पेंशनराश्या स्वयम्भुवः ॥ मन्दसौर-नीमच-झालावाड-रतलाम-झाबुआसु च । मन्दिरेषु मुक्तिधामेषु गौशालासु च सर्वदा ॥ आलोकस्य दानपथः प्रेरणां जनसंसदि । शिलालेखेन यः कृतः पुण्यकर्मणि कीर्त्यते ॥
दसोरिया गाँव, मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में स्थित एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहां सौंधिया राजपूतों और पाटीदार समाज का प्रभुत्व है ¹। यह गाँव बरडिया अमरा से गरोठ रेलवे स्टेशन को जाने वाली सड़क पर स्थित है, जो इसकी पहुंच को आसान बनाता है. आस्था का केंद्र है, जो अपनी अलौकिक भव्यता और सुंदर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर की विशेषताओं में उठा हुआ चबूतरा, दूर से दिखाई देने वाला शिखर, पक्का फर्श, अच्छा प्रांगण, और मंदिर पहुंचने के लिए सीढ़ियां शामिल हैं .
इस मंदिर के प्रति लोगों में गहरी आस्था है, और वे बालाजी को अपनी मुरादें पूरी करने वाले मानते हैं . समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने मंदिर को 4 सिमेंट की बेंच दान की हैं, जो आध्यात्मिक दान-पथ के तहत किया गया एक महत्वपूर्ण योगदान है. बालाराम जी पाटीदार द्वारा दान दाता का शिलालेख मंदिर गेट के पास की दीवार पर स्थापित किया गया है, जो अन्य लोगों को भी दान की प्रेरणा दिलाता है .सरपंच होकम सिंह जी और ग्राम जनों ने दान दाता का आभार व्यक्त किया है.
दसोरिया के हनुमान मंदिर में सीमेंट बेंचे लगने का विडियो
video mandir dasoriya
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के
मन्दिरों, मुक्ति धाम, गौशालाओं,विध्यालयों हेतु
साहित्य मनीषी,
डॉ.दयाराम आलोक
आद्यात्मिक दान -पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
हनुमान मंदिर दसोरिया हेतु
४ सीमेंट बेंचें समर्पित
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दसोरिया मंदिर में बेंचें लगीं
बालाराम जी पाटीदार दसोरिया 9977775834
होकम सिंग जी सरपच द्सोरिया 9630671634
प्रकाश नाथ जी पुजारी हनुमान मंदिर 9826519977
डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा हनुमान मंदिर दसोरिया हेतु दान सम्पन्न २०/१/२०२४
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