लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। सनातन आध्यात्म -जाति इतिहास-दान विमर्श : Balaji Mandir Khadawada
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23.9.25

"खड़ावदा में राड़ी वाला बालाजी : रुद्र अवतार की अलौकिक छवि: भक्तों की सेवा में डॉ. आलोक का पावन योगदान"





**राड़ी वाला बालाजी मंदिर, खडावदा में सेवा का एक और दीप                                          - डॉ. दयाराम आलोक द्वारा 4 सीमेंट बेंचों का दान**
जहाँ श्रद्धा की ज्योति निरंतर प्रज्वलित है, ऐसे पावन स्थल **राड़ी वाला बालाजी का मंदिर, खडावदा - गरोठ** में जन-सुविधा की दिशा में एक सराहनीय पहल सम्पन्न हुई है।
समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त अध्यापक **डॉ. दयाराम आलोक, शामगढ़** द्वारा मंदिर परिसर में भक्तजनों की सुविधा हेतु **4 सीमेंट बेंचें** भेंट की गई हैं। यह दान दिनांक **23 सितंबर 2025** को सम्पन्न हुआ, जिसकी साक्षी के रूप में दानदाता की **नाम पट्टिका मंदिर में लगाई गई** है, जो सदैव प्रेरणा का दीपक जलाएगी।
यह दान केवल वस्तु का नहीं, बल्कि करुणा और सेवा का प्रतीक है।
> दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा लोकहिताय च।
> आलोकस्य महादानं, भक्तानां सुखकारकम्॥
### शामगढ़ का आध्यात्मिक दान-पथ
डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा यह कार्य उनके संकल्पित **'आध्यात्मिक दान-पथ'** का ही एक हिस्सा है। इस दान-पथ की प्रमुख विशेषताएँ हैं -
**1. सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प:** एक सेवानिवृत्त शिक्षक होने के नाते उन्होंने अपनी कुल 5 वर्ष की पेंशन राशि को समाज कल्याण में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
**2. स्व-वित्तपोषित मॉडल:** उनका यह दान-पथ पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल साधना पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है।
> पेंशनधनसमर्पणेन, गूगललाभयोगतः।
> आलोकः समाजसेवी, यशः कीर्तिं प्रकीर्तयन्॥
**3. व्यापक सेवा का दायरा:** उनका कार्य एक मंदिर तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के **मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ** जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में निरंतर योगदान दे रहे हैं। अब तक **151 से अधिक संस्थानों** में बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन आदि कार्यों में वे अपना सहयोग दे चुके हैं।
**4. सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण:** वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान देते हैं जो वृद्धों, यात्रियों और आम भक्तों के लिए सर्वाधिक उपयोगी हैं। सीमेंट बेंचों के माध्यम से वे स्वच्छ और सुरक्षित विश्रांति स्थल उपलब्ध करा रहे हैं।
> यत्र यत्र जनाः सन्ति, विश्रान्तिं यत्र वाञ्छिताम्।
> तत्र तत्र बञ्चकानि, आलोकस्य कृपान्वितानि॥
इस पुण्य कार्य के लिए **श्री राड़ी वाला बालाजी मंदिर समिति, खड़ावदा** और समिति अध्यक्ष **श्री बजरंग जी धाकड़, बड़ी देंथली** तथा सहयोगी **डॉ. अनिल कुमार दामोदर, दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़** के माध्यम से यह दान विधिवत सम्पन्न हुआ।
> राड़ीबालाजि देवालये, खडावदग्रामे शुभे स्थले।
> चत्वारि बञ्चकानि दत्तानि, भक्तानां विश्रान्तये॥



डॉ.दयाराम आलोक द्वारा

४ सीमेंट बेंचें भेंट 

राड़ी वाला बालाजी मंदिर, खडावदा जहाँ श्रद्धा की ज्योति प्रज्वलित है, वहाँ समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक ने भक्तजन की सुविधा हेतु चार सीमेंट बेंचें अर्पित कीं।

यह दान केवल वस्तु का नहीं, बल्कि करुणा और सेवा का प्रतीक है। दानदाता की नाम पट्टिका मंदिर में अंकित होकर सदैव प्रेरणा का दीपक जलाएगी।

आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर आलोक जी अपनी पेंशन और तपःसंपदा को जनकल्याण में समर्पित कर रहे हैं। मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में बैठक सुविधा का विस्तार कर वे समाज को सहयोग और संवेदना का संदेश दे रहे हैं।

श्लोक -

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा लोकहिताय च। आलोकस्य महादानं, भक्तानां सुखकारकम्॥ राड़ीबालाजि देवालये, खडावदग्रामे शुभे स्थले। चत्वारि बञ्चकानि दत्तानि, भक्तानां विश्रान्तये॥ पेंशनधनसमर्पणेन, गूगललाभयोगतः। आलोकः समाजसेवी, यशः कीर्तिं प्रकीर्तयन्॥ यत्र यत्र जनाः सन्ति, विश्रान्तिं यत्र वाञ्छिताम्। तत्र तत्र बञ्चकानि, आलोकस्य कृपान्वितानि॥



   राड़ी वाला  बालाजी  का  मंदिर खडावदा
4 सिमेन्ट बेंच दान

दान दाता  की नाम पट्टिका  मंदिर मे  लगाई गई 



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

  

राडी वाले बालाजी के मंदिर में बेंच व्यवस्था का विडियो 





मंदिर के शुभचिंतक -

श्री राड़ी  वाला बालाजी मंदिर समिति ,खड़ावदा 

श्री बजरंग जी धाकड़  बड़ी देंथली -अध्यक्ष 

डॉ. अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा राडी वाला बालाजी मंदिर  खड़ा वदा हेतु दान सम्पन्न २३/9/२०२५