लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। संस्कृति और समाज: पौराणिक गाथाएं, जाति इतिहास और दान-महिमा: 05.26

फ़ॉलोअर

28.5.26

श्रीहरि गौशाला सुवासरा गौ सेवा है कार्य महान :डॉ आलोक बेंच प्रदान: आगंतुक सुविधा सम्मान । Suwasra goushala

 

काव्यात्मक विवरण

सुवासरा की पावन भूमि पर, श्रीहरि गौशाला का गौरव खिला। गायों की सेवा, जल और घास की व्यवस्था, भक्ति और करुणा का संगम मिला।

अध्यक्ष भेरूसिंग जी देवड़ा ने नेतृत्व संभाला, संरक्षक प्रह्लाद जी रत्नावत ने संरक्षण का दीप जलाया। पत्रकार राजेन्द्र जी धनोतिया ने दान हेतु समाज को पुकारा, और जन-जन में सेवा का भाव जगाया।

इस पुकार पर समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपने आध्यात्मिक दान-पथ से चार सीमेंट बेंचें भेंट कीं। उनके पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर ने भी दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ से सहयोग बढ़ाया।

समिति ने दान पट्टिका स्थापित कर दानदाताओं का सत्कार और आभार किया। गौशाला के कर्मचारी कन्हैया लाल जी ने सेवा भाव से इस कार्य को आगे बढ़ाया।

श्लोक-

सुवासरायां पवित्रायां, श्रीहरिगौशाला शुभा। भेरूसिंहाध्यक्षेन, धर्ममार्गः प्रबोधितः॥ रत्नावतः प्रह्लादेन, रक्षणं धर्मसंयुतम्। धनोतियेन राजेन्द्रेण, दानस्य प्रेरणा कृता॥ आलोकदयारामेण, बेंचदानं समर्पितम्। अनिलेन च राठौरेण, सहयोगः सदा कृतः॥ कन्हैयालालकर्मणा, सेवायाः दीप उज्ज्वलः। गौशालायाः महात्म्यं, धर्मे नित्यं प्रवर्धते॥

डॉ. दयाराम आलोक (शामगढ़) द्वारा मध्य प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न धार्मिक स्थलों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में सीमेंट की बेंचें भेंट करने का अनुष्ठान उनके जीवन-दर्शन का एक अनूठा पहलू है।
गौशालाओं में सीमेंट की बेंचों के इस भौतिक दान को यदि हम उनके साहित्यिक, व्यावहारिक और मानवतावादी दृष्टिकोण से जोड़कर देखें, तो इसके गहरे अर्थ निकलते हैं:
1. 'विश्राम' और 'सेवा' का सुंदर समन्वय
गौशालाएँ केवल गायों के रहने का स्थान नहीं, बल्कि भक्तों, सेवादारों और संतों के जुटने के केंद्र भी होती हैं। डॉ. आलोक इस बात को भली-भांति समझते हैं कि जो लोग वहाँ गायों की सेवा करने, दर्शन करने या धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं, उन्हें बैठने के लिए उचित स्थान की आवश्यकता होती है। गौशाला में सीमेंट की बेंचें दान करना वहाँ आने वाले 'गौ-भक्तों को विश्राम' प्रदान करने की भावना है, जिसे साहित्‍य में 'परोपकार' का व्यावहारिक रूप माना गया है।
2. स्थायित्व और 'अक्षय दान' का प्रतीक
सीमेंट की बेंचें अपनी प्रकृति में स्थाई और मजबूत होती हैं, जो धूप, आंधी और वर्षा को झेलते हुए वर्षों तक समाज की सेवा में टिकी रहती हैं। साहित्यिक दृष्टि से, डॉ. आलोक का यह दान उनके 'अक्षय दान' (ऐसा दान जो लंबे समय तक समाज के काम आए) के विचार को पुष्ट करता है। वे क्षणिक वाहवाही के लिए नहीं, बल्कि समाज की स्थाई व्यवस्था के निर्माण के लिए लिखते भी हैं और दान भी देते हैं।
3. गौशाला को सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाना
अक्सर लोग गौशालाओं में केवल घास-चारे का दान करते हैं, जो कि अनिवार्य है। परंतु, डॉ. आलोक ने वहाँ सीमेंट की बेंचें लगवाकर एक दूरदर्शी सोच दिखाई है। वे चाहते हैं कि लोग गौशालाओं में आएं, वहाँ बैठें, गोवंश के सामीप्य में समय बिताएं और शांत वातावरण में चिंतन-मनन करें। उनका यह प्रयास गौशालाओं को 'सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मिलन स्थल' के रूप में विकसित करने की साहित्यिक परिकल्पना का हिस्सा है।
4. कर्मयोगी कवि का वैचारिक यथार्थ
एक रचनाकार के रूप में डॉ. आलोक अपनी कविताओं में जिस 'सुखद और सहज समाज' की रचना का स्वप्न देखते हैं, ये सीमेंट की बेंचें उसी स्वप्न को धरातल पर स्थापित करने की ईंटें हैं। जैसे उनके शब्द पाठक के मन को सुकून देते हैं, वैसे ही उनके द्वारा दान की गई ये बेंचें गौ-सेवा की थकान के बाद सेवादारों के तन को सुकून देती है

श्रीहरि  गौशाला मेला ग्राउन्ड सुवासरा मे बैठक सुविधा हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट की बेन समर्पित 

सुवासरा की श्रीहरि  गौशाला  मे गौ सेवा  को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है| 

गौशाला का माहात्म्य बहुत अधिक है और यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। गौशाला एक ऐसी संस्था है जहां गायों और अन्य पशुओं की देखभाल की जाती है और उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

श्रीहरि गौशाला मे दान दाता  दामोदर पथरी चिकित्सालय की दान पट्टिका स्थापित की  गई 


श्रीहरि गौशाला  सुवासरा मे डॉ .अनिल  कुमार जी राठौर दामोदर शामगढ़ द्वारा 4 सिमेन्ट की बेंच लगवाई 



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

 आध्यात्मिक दान -पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

श्रीहरि गौशाला  सुवासरा मे 

4 सिमेन्ट की बेंच भेंट.29/12/2024 

गौशाला के  संरक्षक और शुभचिंतक -

अध्यक्ष: भेरूसिंग जी  देवड़ा 

प्रह्लाद जी रत्नावत 

 गौशाला कर्मचारी  -कन्हैया लाल जी 

दान की प्रेरणा _ राजेन्द्र जी धनोतिया  पत्रकार घसोई 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्रीहरि गौशाला सुवासरा हेतु हेतु  दान सम्पन्न 28/12/2024 

27.5.26

ब्रहमाणी माता मंदिर अंतरालिया :जहां गूँजती है श्रद्धा की घंटियां वहाँ आलोकजी का दिव्य योगदान:Brahmani Mata Temple Antaraliya

 

काव्यात्मक विवरण

अंतरालिया ग्राम की पावन धरा, चम्बल तट पर बसी सुनहरी गाथा। भानपुरा-बाबुल्दा से जुड़ी राहें, ले जातीं ब्रह्माणी माता के दरबार में।

मंदिर की शोभा रंग-रोगन से निखरी, भक्तों की आस्था यहाँ सदा बिखरी। राजू सोलंकी टेलर ने किया निवेदन, “बैठक सुविधा हो भक्तों के जीवन।”

समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक ने निभाया व्रत, दान-पथ पर बढ़ाया सेवा का रथ। राम दयाल पाटीदार समिति के प्रमुख, संभाले प्रबंधन, रहे मंदिर के सजग।

दान की परंपरा, सेवा का विस्तार, मंदसौर की धरती पर आलोक का उपहार। आध्यात्मिक पथ पर चलती यह ज्योति, भक्तों के लिए बनी बेंचें, सुख-सुविधा की होती।

श्लोक-

अंतरालियाग्रामे ब्रह्माण्यमाता प्रतिष्ठिता । राजुसोलंकीप्रार्थना, भक्तानां सुखसाधिका ॥ दयाराम आलोकस्य दानपथो महान् शुभः । रामदयालपाटीदारः समित्याः धर्मपालकः ॥

 मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का एक ग्राम है -  अंतरालिया 

यह गाँव  चम्बल नदी के समीप है। 

भानपूरा और बाबुल्दा से  अंतरालिया  जाने के लिए पक्की सड़क  है। 

यहाँ का ब्रहमाणी माता का मंदिर प्रसिद्ध है। 

मंदिर की बनावट और रंग रोगन उच्च कोटि  का है। 

गाँव के राजू भाई  सोलंकी टेलर ने इस मंदिर के लिए बेंचों की सुविधा  के लिए अनुरोध किया .

डॉ .दयाराम जी आलोक ने  भक्तों को सुविधा और सम्मान के लिए बेंचों की व्यवस्था कर दी है। 

राम दयाल जी पाटीदार  समिति के प्रमुख हैं। 



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक






शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 


अंतरालिया के ब्रहमाणी मंदिर
भक्तों के लिए बेंच व्यवस्था  

Antraliya ka brhmani mandir 



अंतरालिया के ब्रहमाणी मंदिर मे बेंच लगीं 11/11/2022

राजू सोलंकी टेलर 85179-23890 अंतरालिया का सुझाव 

मंदिर प्रबंधक राम दयाल जी पाटीदार 97557-47790 हैं 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल  98267-95656  शामगढ़ द्वारा  ब्रहमानी माता मंदिर अंतरालिया  हेतु दान सम्पन्न 11/11/2022


Dudhakhedi Mata Mandir Barkheda Gangasa: जहां सजता है माता का दरबार वहाँ बेंच का दिव्य योगदान :भक्तों को सुविधा सम्मान

 आध्यात्मिक दान अनुष्ठान

भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है।
इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है।
जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है।
प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है।
- डॉ. दयाराम आलोक

काव्यात्मक वर्णन

बरखेड़ा गांगासा ग्राम में, दूधाखेड़ी माता का धाम। श्रद्धा से झुकते जनमन, मिलता जीवन का वरदान।

सर्पदंश पीड़ित पाते, माता की कृपा से प्राण। भंडारे की गूँज निरंतर, भक्तों का होता कल्याण।

प्रांगण विशाल, शेड सुशोभित, सेवा का अद्भुत आयोजन। बदरीलाल जी फरक्या की, प्रबंधन में विशेष भूमिका सदा अमूल्य योगदान।

समाजसेवी आलोक जी ने, पाँच बेंचें दान कीं। भक्तों की सुविधा हेतु, श्रद्धा की ज्योति प्रज्वलित कीं।

दान-पट्ट अंकित हुआ, प्रेरणा का दीप जलाया। माँ नागणेचिया के आशीष से, आध्यात्मिक दान-पथ अपनाया

श्लोक 

बरखेड़ा ग्रामे प्रतिष्ठितं, दूधाखेड़ी मातामन्दिरम्। सर्पदंशे कृपां दत्त्वा, जनजीवनं पुनः प्रदम्॥ भंडारैः भक्तजनानां, सेवा सततं प्रवर्तते। फरक्या बदरीलालस्य, प्रबंधनं यशः वर्धते॥ पञ्च सिमेन्टबेंच दत्ताः, आलोकस्य कृपान्विताः। दानपथेन यशोदीपः, समाजे नित्यं दीप्यते॥

मंदसौर जिले  की तहसील गरोठ का ग्राम बरखेड़ा गाँगासा 

यहाँ का दूधाखेड़ी माता का मंदिर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है। 

सर्पदंश पीड़ित लोगों को जीवन दान मिलता है  माता  की कृपा  से। 

प्रतिवर्ष हजारों लोगों का भंडारा आयोजन होता है। 

मंदिर के संरक्षक और प्रबंधक बदरीलाल जी फरक्या  की विशेष भूमिका रहती है। राय 

मंदिर का प्रांगण विशाल है। चद्दर के विशाल शेड मे लोग भंडारा  का लाभ लेते हैं । 

फरक्या जी ने भक्तों के लिए बेंच व्यवस्था का अनुरोध किया। 

शामगढ़ के समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने 5 सिमेन्ट की बेंचें  दान कीं 

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को दान के लिए प्रेरित करने हेतु  दान दाता  का दान पट्ट  मंदिर मे स्थापित किया । 




 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान- पथ

 कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से साहित्य मनीषी  डॉ.दयाराम आलोकजी  राजस्थान और मध्यप्रदेश के  आगर,मंदसौर,नीमच ,झालावाड़ ,कोटा और झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्ति धाम में निर्माण व विकास  हेतु नकद और  आगंतुकों के बैठने  हेतु  सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
 आलोकजी  एक  सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ  आध्यात्मिक दान-पथ  पर अग्रसर हैं . इसमे वो राशि भी शामिल है जो  आपको  google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| आपकी  ६ वेबसाईट पर google  विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% आपको मिलता है|  समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें  पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.


 

 

माँ दूधाखेड़ी मंदिर बरखेड़ा गांगासा हेतु 
 5 सिमेन्ट बेंच भेंट 

अंकितजी ने नेम प्लेट लगाकर फोटो भेजा 
माँ दूधाखेड़ी मंदिर बरखेड़ा का चित्र
Dudhakhedi mata mandir bench donation   8/9/2022
बरखेड़ा गांगासा के दुधाखेड़ी माताजी के मंदिर का विडियो 
बरखेड़ा गांगासा की माँ दुधाखेड़ी के मंदिर मे बेंच लगीं 8/9/2022

अंकित जी फरक्या 84589-54116 का सहयोग 

बदरीलाल  परमार टेलर  82694-40534 का सुझाव 

बद्री लाल जी फरक्या 99260-43873 मंदिर प्रबंधन के अध्यक्ष हैं.

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 आत्मज  डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल   98267-95656,शामगढ़   द्वारा दूधाखेड़ी माताजी  मंदिर बरखेड़ा गांगासा हेतु दान सम्पन्न 

Shiv Hanuman Mandir Luka Ka Kheda: देवालय है पावन धाम :आलोक जी का दिव्य योगदान :भक्तों को सुविधा सम्मान

 आध्यात्मिक दान अनुष्ठान

भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है।
इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है।
जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है।
प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है।
- डॉ. दयाराम आलोक

✍️ काव्यात्मक विवरण

लुका का खेड़ा ग्राम पावन, शिव-हनुमान मंदिर का धाम। प्रतिमाएँ मनमोहक शोभित, भक्तों के मन में जगाती विश्वास तमाम।

तूफान सिंह जी की प्रेरणा, दान हेतु उठी पुकार। गोरधनजी टेलर का सहयोग, समाजसेवा का अद्भुत विस्तार।

डॉ. आलोक का पुण्य योगदान, तीन बेंचें संग नकद दान। उमराव सिंह जी के खाते पहुँची, भक्ति-सेवा की अनुपम पहचान।

शिलालेख में अंकित नाम, समर्पण का उज्ज्वल आयाम। बसों से पहुँचना सुगम यहाँ, गरोठ-शामगढ़ से खुला मार्ग महान।

श्लोक-

दानं धर्मस्य मूलं हि,  

सेवा लोकहिताय च।  

तूफान-गोरधन-संयुक्तं,  

आलोकस्य कृपा सदा॥  


मंदसौर  जिले की गरोठ तहसील का ग्राम लुका का खेड़ा 

ग्राम मे स्थित शिव हनुमान मदिर सनातन  धर्मावलंबियों का आस्था- केंद्र है 

मंदिर मे भगवान शिव और हनुमान जी  कि आकर्षक प्रतिमाएं देखते ही बनती है। 

मंदिर प्रबंधक तूफान सिग जी ने भक्तों के लिए बैंच व्यवस्था का अनुरोध किया  

समाज सेवी डॉ  दयाराम जी आलोक  ने  उमराव सिंगजी केअकाउंट मे 1500/-  phonepe  किए और  3 सिमेन्ट बैच का दिव्य योगदान किया । 

मंदिर प्रबंधक जी ने अन्य समर्थ जन को दान के लिए प्रेरित करने के भाव से दान दाता  का दान पट्ट स्थापित किया 

मंदिर पहुँचने के लिए गरोठ और शामगढ़ से बसें  उपलब्ध रहती हैं । 

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान- पथ

 कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से साहित्य मनीषी  डॉ.दयाराम आलोकजी  राजस्थान और मध्यप्रदेश के  आगर,मंदसौर,नीमच ,झालावाड़ ,कोटा और झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्ति धाम में निर्माण व विकास  हेतु नकद और  आगंतुकों के बैठने  हेतु  सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
 आलोकजी  एक  सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ  आध्यात्मिक दान-पथ  पर अग्रसर हैं . इसमे वो राशि भी शामिल है जो  आपको  google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| आपकी  ६ वेबसाईट पर google  विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% आपको मिलता है|  समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें  पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.


 

 

 शिव -हनुमान मंदिर ,लूका का खेड़ा
3 cement bench+1500/ दान 


शिलालेख लगाया 


Shiv Hanuman Mandir ke liye 200/-+1300=1500/-ka payment kiya 12/2/2023 





तुफान सिंग जी 88890-34253  की  सक्रियता

उमराव सिंग जी चौहान 78794-97915 के खाते मे दान की राशि फोन पे की 

गोर्धन जी पंवार 88270-3375 का सुझाव

मन्दिर के लिए पावटी से जा सकते  हैं |गरोठ से बस भी मिलती है|

 डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656  शामगढ़  शिव हनुमान मन्दिर लुका का खेडा  हेतु दान सम्पन्न १६/२/२०२३ 

कालेश्वर धाम खाईखेड़ा :जहां होता है सर्पदंश मुक्ति अनुष्ठान वहाँ आलोकजी का दिव्य योगदान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Kaleshwar Khaikheda

कालेश्वर धाम खाईखेड़ा

का

काव्यात्मक विवरण

*खाईखेड़ा ग्राम का गौरव, कालेश्वर धाम महान, सर्पदंशित जन की रक्षा, करता प्रभु भगवान। नाग देवता की प्रतिमा, मंदिर में शोभित है, आस्था का केंद्र बना, श्रद्धा से पूजित है।

शिव प्रिय नाग देवता, धरती के आधार, नाग पंचमी पर होती, पूजा अपार। सावन मास में भक्तजन, शिव‑नाग का ध्यान करें, मनोवांछित फल पाकर, जीवन में सुख भरें।

दानपथ पर अग्रसर, डॉ. दयाराम आलोक महान, पेंशन अर्पित कर रहे, जनसेवा का अभियान। डॉ. कृपाल सिंह खाईखेड़ा, मंदिर के शुभचिंतक, चरण सिंहजी चौहान, सहयोगी सत्पथिक।

श्याम सिंहजी सरपंच साब, ग्राम का नेतृत्व संभालें, जनहित के कार्यों से, गाँव को उज्ज्वल बनालें। डॉ. अनिल दामोदर का योगदान, बेंचों से सुविधा बढ़ी, आलोकित हुआ मंदिर प्रांगण, श्रद्धा की ज्योति जगी।**

📜 संस्कृत श्लोक

**ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि। तन्नो नागः प्रचोदयात्॥

ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि। तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥

दयाराम आलोकः समाजसेवा‑रतः सदा, कृपालसिंहः शुभचिन्तकः, धर्ममार्गे स्थितः।

चरणसिंहः सहयोगी, ग्रामहिते समर्पितः, श्यामसिंहः सरपंचः, जनकल्याणे प्रवर्तकः॥

अनिलदामोदरः भक्तानां, सुविधा‑दानकर्ता। कालेश्वरधामे सर्वे, पुण्यकर्मे प्रतिष्ठिताः॥**


मंदसौर जिले का एक ग्राम खाईखेड़ा 
यहाँ का कालेश्वर मंदिर  लोगों की आस्था का केंद्र बिन्दु है। 
सर्प दंशित लोगों के प्राण रक्षा के लिए जाना जाता है। 
मंदिर की बनावट बहुत आकर्षक है जिसमे नाग देवता की प्रतिमा विराजित है। 
मंदसौर जिले के अंतर्गत शामगढ़ नगर से १० किलोमीटर के फासले पर स्थित है ग्राम खाईखेडा .इस गाँव का कालेश्वर भगवान का मंदिर अपने चमत्कारी प्रभाव के लिए जाना जाता है. यहाँ सर्प काटे व्यक्तियों का जीवन बचाने का ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।। ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात्।।नाग देव को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया गया है. कहा जाता है कि नाग के फन पर ही धरती टिकी हुई है. नाग पंचमी का दिन नाग देवता की पूजा के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है नाग देवता की पूजा करने से जीवन में प्राप्त होते हैं मनोवांछित फल व अध्यात्मिक शांति पंचांग के मुताबिक हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को नाग पंचमी पर्व मनाते हैं। ये दिन पूरी तरह भगवान शिव के प्रिय नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित होता है। सावन माह का पूरे महीने भगवान शिव की पूजा की जाती है। . गाँव के सरपंच श्री पडिहार ने समाज सेवी दानदाता डॉ.दयाराम जी आलोक से मंदिर हेतु बेंचें दान करने काअनुरोध किया. दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ ९८२६७९५६५६ के माध्यम से डॉ.अनिल जी दामोदर की तरफ से ४ सीमेंट की बेंचें ११/२/२०२४ को मंदिर के परिसर में लगवा दी गई हैं. अब बैठक व्यवस्था ठीक हो गई है
.
समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

 
आध्यात्मिक दान -पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्री कालेश्वर मंदिर खाईखेड़ा हेतु 

4 सिमेन्ट बेंच दान 

मंदिर के शुभ चिंतक 

डॉ . कृपाल सिंग जी खाईखेड़ा   9754715666

चरण सिंगजी चौहान   9826672401 

श्याम सिंग जी सरपंच साब  9009862242


डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 आत्मज  डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल   98267-95656,शामगढ़   द्वारा  कलेश्वर धाम  खाईखेड़ा हेतु दान सम्पन्न 



21.5.26

मंशापूर्ण हनुमान मंदिर देथली बुजुर्ग : जहां होती है मन्नते पूरी वहाँ आलोकजी का दिव्य दान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Dethali Hanuman Mandir


देथली बुजुर्ग के मंशापूर्ण हनुमान जी - श्रद्धा, सेवा और समरसता का संगम

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में बसा ग्राम देथली बुजुर्ग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए जाना जाता है। इसी ग्राम में स्थित है श्रद्धा का केंद्र बिंदु - मंशापूर्ण हनुमान मंदिर।
कहते हैं कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। इसीलिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ अपनी मंशा लेकर आते हैं।
मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। राजस्थान के प्रसिद्ध मकराना के लाल पत्थरों से निर्मित यह मंदिर अपनी आकर्षक शिल्पकला के लिए विशिष्ट है। मंदिर परिसर में स्थापित विशाल शिवलिंग इसकी दिव्यता को और अधिक बढ़ा देता है। मंदिर के संरक्षक श्री रामसिंह जी मीना पटेल और शुभेच्छु श्री भवानी शंकर जी धाकड़ के सानिध्य में यह धाम निरंतर प्रगति के पथ पर है।
यह मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन रहा है, जहाँ सभी वर्गों के प्रवेश और सहभागिता की सकारात्मक पहल हो रही है।
इसी जन-सुविधा की भावना को आगे बढ़ाते हुए, बैठक व्यवस्था के विस्तार हेतु ढलमु के श्री जगदीश जी पाटीदार के आग्रह पर समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़ द्वारा इस मंदिर में 3 सीमेंट बेंच एवं 1500/- रुपये नकद का सहयोग प्रदान किया गया।
दान को प्रेरणा बनाने की पवित्र सोच से मंदिर समिति ने दानदाताओं की दान पट्टिका मंदिर में स्थापित की है, ताकि अन्य समर्थजन भी जनकल्याण के इस यज्ञ में आहुति दे सकें।
यह छोटा सा लेख उसी 'आध्यात्मिक दान-पथ' की एक कड़ी है, जिसके अंतर्गत डॉ. आलोक जी अपनी पेंशन राशि से मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झालावाड़ और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में निरंतर सेवा कर रहे हैं।
आइये, इस दिव्य धाम की इस सेवा यात्रा को विस्तार से जानते हैं।
बोलिए देथली के मंशापूर्ण हनुमान जी की जय!

✨ काव्यात्मक वर्णन

देथली बुजुर्ग ग्राम में, मंशापूर्ण हनुमान विराजे। लाल पथरों से सजा मंदिर, भक्ति की ज्योति यहाँ आजे॥

रामसिंह मीना पटेल रक्षक, भवानी शंकर शुभेच्छुक साथ। शिवलिंग की विशाल रचना, धर्म का दीपक जगमग रात॥

जगदीश पाटीदार ने पुकारा, बैठक सुविधा का विस्तार। डॉ. आलोक ने दान दिया, तीन बेंचें और धन अपार॥

दान-पट्टिका मंदिर में चमके, प्रेरणा का संदेश जगाए। जय-जयकार गूँजे गाँव में, मंशापूर्ण हनुमान जी की जय॥

श्लोक 

देथलीग्रामे हनुमानः, मंशापूर्णः प्रतिष्ठितः।  

लालश्मशाने निर्मितं, भक्तानां श्रद्धया युतम्॥  


दानं दत्तं बेंचत्रयं, सह सहस्रपञ्चशतैः।  

आलोकस्य महादाने, धर्ममार्गः प्रकाशितः॥  




मंदसौर जिले की गरोठ तहसील का ग्राम देथली  बुजुर्ग 

मंशापूर्ण हनुमान मंदिर इस गाँव मे धार्मिक श्रद्धा का केंद्र बिन्दु है। 

मंदिर निर्माण  मकराना के लाल पथरों से हुई है जो बेहद आकर्षक  है। 

रामसिंगजी मीना पटेल मंदिर के सरंक्षक हैं . 

भवानी शंकर जी धाकड़  मंदिर के शुभेच्छुक हैं। 

मंदिर मे शिवलिंग की विशाल रचना  है। 

मंदिर मे  निम्न जातियों के लोगों  को प्रवेश की मांग उठाई जाती रही है। 

मंदिर मे बैठक सुविधा विस्तार हेतु ढलमु के जगदीश जी पाटीदार ने  मुझे  फोन कर सिमेन्ट बेंचें और आर्थिक सहयोग  करने का अनुरोध किया । डॉ . दयाराम जी आलोक ने मंदिर को 3 सिमेन्ट बेंचें और 1500/-नकद दान दिया। 

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को दान के लिए प्रेरित करने के भाव से दान दाता  की दान पट्टिका  मंदिर मे स्थापित की है। 

बोलिए देथली के मंशापूर्ण हनुमान जी की जय । 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक


शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


मंशापूर्ण  हनुमान  मन्दिर देंथली बुजुर्ग

तीन बेंच+१५००/- दान 


video Manshapurn Hanuman Denthli 



मन्दिर  के लिए १५००/- का दान 


मन्दिर में बेंच लगीं १८/४/२०२३ 


हनुमान मन्दिर के प्रमुख कार्यकर्ता :

रामसिंग जी  मीणा पटेल ९७५४७-१५७९१  देंथली बुजुर्ग 

बजरंग जी धाकड़  बड़ी देथली 

दान का सुझाव  देने वाले जगदीश जी पाटीदार  ढलमु

डॉ.अनिल कुमार दामोदर  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा हनुमान  मंदिर  देथली बुजुर्ग  हेतु  12  सिमेन्ट बेंच दान सम्पन्न 18/4/2023 


20.5.26

मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग :जहां रूह को शांति मिले वहाँ आलोकजी का सुन्दर योगदान :दागियों को सुविधा सम्मान :Muktidham bus stand dag

आध्यात्मिक दान अनुष्ठान
भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है।
इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है।
जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है।
प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है।
- डॉ. दयाराम आलोक

डग नगर का मुक्तिधाम,

शांति, सुकून का पावन धाम।

हरे-भरे वृक्षों की छाया,

मन को देती निर्मल माया॥


डगेश्वरी माता की कृपा,

नगर में फैली शुभ तपस्या।

दान-पथ पर आलोक जी चले,

सेवा से जीवन को उजले॥


सीमेंट बेंचें, सुविधाएँ न्यारी,

जन-कल्याण की छवि है प्यारी।

पेंशन को समाज हेतु समर्पित,

मानवता का दीपक प्रज्वलित॥


मंदसौर, नीमच, रतलाम में,

दान की गूँज हर धाम में।

गौशालाएँ, मंदिर, मुक्तिधाम,

आलोक जी का अनुपम काम॥


दान पट्टिका से प्रेरणा फैली,

समाज सेवा की राह निकली।

सच्चा दान वही कहलाए,

जो जनहित में फलित हो जाए॥

श्लोक -

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना।

आलोकस्य करुणा ज्योति, जनहिताय समर्पिता॥





मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक


शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 डग के बस स्टेंड स्थित मुक्तिधाम हेतु



15000 हजार  रुपये नकद + 6 सीमेंट बेन्च

मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग का विडिओ आलोक की आवाज 




मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग का विडिओ आलोक की आवाज 


डग के बस स्टैंड वाले मुक्ति धाम का विडियो आलोक की आवाज में 

                                                            




सौरभ कुमार जी पँवार ९७९९५-७०००० डग की पहल

राधेशाम जी पँवार टेलर डग 

मुक्तिधाम का प्रबंधन रोहित जी जैन करते हैं.


 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा  मुक्तिधाम बस स्टैन्ड  डग  हेतु  12  सिमेन्ट बेंच दान सम्पन्न