चम्बल के किनारे आस्था और सेवा का संगम - बसई का शिव हनुमान मंदिर
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के छोटे से ग्राम बसई में, जहाँ चम्बल नदी अपनी कल-कल धारा के साथ बहती है, वहाँ स्थित है एक अत्यंत रमणीय और जाग्रत स्थल - श्री शिव हनुमान मंदिर।
नदी के विहंगम दृश्य के बीच बना यह मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीणों की अटूट आस्था का प्रतीक है। यहाँ शिव और हनुमान जी के एक साथ दर्शन कर भक्तों को अलौकिक शांति का अनुभव होता है।
इसी पावन स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए एक छोटा सा सेवा प्रयास किया गया है। दामोदर पथरी चिकित्सालय, शामगढ़ के माध्यम से समाजसेवी सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के बैठने हेतु 3 सीमेंट की बेंचें सप्रेम भेंट की गई हैं।
यह दान केवल बेंचों का दान नहीं, बल्कि डॉ. आलोक जी द्वारा संकल्पित 'आध्यात्मिक दान-पथ' का एक पड़ाव है, जिसके अंतर्गत वे अपनी पेंशन एवं स्व-अर्जित राशि से मालवा- मेवाड़ के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में इस प्रकार की सेवा कर रहे हैं।
आइए, इस लेख में दर्शन करते हैं चम्बल तट के इस दिव्य धाम के और इस निस्वार्थ सेवा भावना के।
जय शिव हनुमान!
चम्बल किनारे बसई ग्राम में श्री शिव हनुमान मंदिर में
दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा
भक्तों के बैठने के लिए सीमेंट की बेंचें भेंट
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के बसई गाँव में स्थित शिव हनुमान मंदिर वास्तव में एक अद्वितीय और आकर्षक स्थल है!
चम्बल नदी के किनारे स्थित इस मंदिर की संरचना और स्थानीय लोगों की भक्ति देखकर मन खुश होता है.
मंदिर के दर्शनार्थियों को शिव हनुमान की प्रतिमाओं के दर्शन के साथ चम्बल नदी का विहंगम दृश्य देखने का अवसर मिलता है.
डॉ. दयाराम आलोक जी शामगढ़ का आध्यात्मिक दान अनुष्ठान और मंदिर समिति के प्रमुख पांडे जी की की सक्रियता इस स्थल को और भी महत्वपूर्ण बनाती है.
दान पट्टिका की स्थापना लोगों को दान की प्रेरणा देने के लिए एक अच्छा कदम है.
यह स्थल पर्यटन और आध्यात्मिक अनुभव के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
जय शिव हनुमान!
शिव हनुमान मंदिर बसई में बेंचें लगने का दृश्य
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.


