सुसनेर मुक्तिधाम - जहाँ विश्राम पाती है जीवन यात्रा
मालवा की पावन धरा पर बसा सुसनेर, जिला आगर-मालवा, मध्य प्रदेश का एक ऐसा नगर है जहाँ परम्परा और प्रगति साथ-साथ चलती हैं। इसी नगर के एकांत में स्थित है वह स्थान, जहाँ जीवन की अंतिम साँसें परम विश्रांति में विलीन होती हैं - सुसनेर का मुक्तिधाम।
यह केवल श्मशान भूमि नहीं, यह मोक्ष का द्वार है, यह चिंतन का तीर्थ है। जहाँ कभी सूनेपन का आभास होता था, वहाँ आज सेवा, श्रद्धा और सत्कार की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है।
विकास के सारथी
इस पुण्य धाम के कायाकल्प के मूल में है मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष श्री नितेश जी सोनी की अथक साधना। उनकी दूरदर्शी देखरेख में मुक्तिधाम ने एक नया स्वरूप पाया है। उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं श्री दिनेश कुमार जी चौहान टेलर और श्री गंगाराम जी सोलंकी जैसे वृक्ष-मित्र। उनके स्नेहिल संरक्षण में यहाँ हरे-भरे वृक्षों ने अपनी शीतल छाया का वितान तान रखा है, जो ग्रीष्म की दाहकता में भी आगंतुकों को शांति का अनुभव कराता है।
समिति की सोच केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। यहाँ एक सुंदर बरामदे का निर्माण किया गया है, जहाँ दिवंगत आत्माओं की श्रद्धांजलि सभा गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सके। यह वह स्थान है जहाँ स्मृतियाँ सम्मान पाती हैं और बिछोह के क्षणों में भी मर्यादा बनी रहती है।
शामगढ़ से आया आध्यात्मिक दान-पथ
इसी विकास यात्रा में एक पावन अध्याय जुड़ा है शामगढ़ से।
दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से, डॉ. आलोक के आदर्शों से प्रेरित होकर उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार दामोदर ने सुसनेर मुक्तिधाम हेतु 12 सीमेंट बेंचों का दान किया है। यह दान केवल बेंचों का दान नहीं, यह थके-हारे, शोकाकुल और वृद्धजनों के लिए विश्राम का आधार है।
इस निःस्वार्थ सेवा को चिरस्थायी बनाने हेतु मुक्तिधाम परिसर में एक दान-पट्टिका स्थापित की गई है और समिति द्वारा हृदय से अभिनंदन किया गया है। यह संगम है सेवा और श्रद्धा का, जिसके कारण सुसनेर मुक्तिधाम आज सच्चे अर्थों में पुण्य धाम बन गया है।
इस अवसर पर कहा गया -
सुसनेर नगर का मुक्तिधाम, जहाँ थमती हैं जीवन की साँसें।
नितेशजी सोनी की देखरेख में, फैल रही है विकास की आभा।
हरे-भरे वृक्षों की छाया, दिनेशजी टेलर का स्नेहिल संरक्षण।
बरामदे में श्रद्धांजलि सभा, जहाँ स्मृतियाँ पाती हैं सम्मान।
डॉ. आलोक के आदर्शों से प्रेरित, डॉ. अनिल राठौर का पावन दान।
बारह सिमेन्ट बेंचों का उपहार, आगंतुकों को मिला विश्राम।
संस्कृत श्लोक में भावांजलि
इस पावन कृत्य को शास्त्रीय रूप में यों निबद्ध किया गया है -
सुसनेर नगरं पुण्यं, मुक्तिधामं मनोहरम्।
नितेशेन सोनीनाय, विकासः संप्रवर्धते॥
दिनेशेन वृक्षपालनं, हरितच्छायया युतम्।
बरामदं श्रद्धासभा, यत्र स्मृत्याः सदा स्थिराः॥
आलोकस्य आदर्शेभ्यः, प्रेरितोऽनिलराठौरः।
ददौ बेंचद्वादशं, भक्तानां विश्रमार्थम्॥
दानपट्टे प्रतिष्ठाय, समिति सम्मानितव्रतम्।
सेवा श्रद्धा च संयुक्तं, मुक्तिधामं दिवं धाम॥
इस दान के प्रेरणा-पुरुष : समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक
इस संपूर्ण सेवा-यज्ञ के मूल प्रेरणा-स्रोत हैं शामगढ़ के समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक। उनका जीवन स्वयं में एक आध्यात्मिक दान-पथ है।
एक सेवानिवृत्त अध्यापक के रूप में उन्होंने अपनी 5 वर्ष की संपूर्ण पेंशन राशि को समाज कल्याण में समर्पित करने का अद्वितीय संकल्प लिया है। उनका दायरा किसी एक नगर तक सीमित नहीं - राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम, झाबुआ सहित अनेक जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में उनकी सेवा पहुँची है।
उनकी दृष्टि अत्यंत व्यावहारिक है - वे वही देते हैं जिसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। वृद्धों, महिलाओं और पैदल यात्रियों के लिए सीमेंट की मजबूत बेंचें, ताकि उन्हें कहीं भी स्वच्छ और सम्मानजनक बैठने का स्थान मिल सके।
यह दान-पथ पूर्णतः स्व-वित्तपोषित है - उनकी पेंशन और उनके ब्लॉग व यूट्यूब चैनल से प्राप्त गूगल आय से। तकनीक को परोपकार से जोड़ने का यह एक सुंदर उदाहरण है। अब तक वे 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन और जीर्णोद्धार में अपना योगदान दे चुके हैं।
और वे दान को गुप्त नहीं रखते - प्रत्येक दान पर शिलालेख लगवाते हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अन्य सक्षम जन भी प्रेरित हों।
सुसनेर मुक्तिधाम में लगी ये 12 बेंचें उसी विराट संकल्प की एक कड़ी हैं।
यह लेख समर्पित है उन सभी शुभचिंतकों को -
श्री नितेश जी सोनी, अध्यक्ष, मुक्तिधाम कमेटी, सुसनेर
श्री दिनेश कुमार जी चौहान, सुसनेर
श्री गंगाराम जी सोलंकी, सुसनेर
डॉ. अनिल कुमार दामोदर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़
निश्चय ही, जब सेवा श्रद्धा से जुड़ती है, तब श्मशान भी मुक्तिधाम और मुक्तिधाम भी दिव्यधाम बन जाता है।
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बेंच व्यवस्था
सुसनेर नगर का मुक्तिधाम, जहाँ थमती हैं जीवन की साँसें।
हरे-भरे वृक्षों की छाया, दिनेशजी टेलर का स्नेहिल संरक्षण।
डॉ. आलोक के आदर्शों से प्रेरित, डॉ. अनिल राठौर का पावन दान।
दान पट्ट हुआ स्थापित, समिति ने किया अभिनंदन।
श्लोक -
सुसनेर नगरं पुण्यं, मुक्तिधामं मनोहरम्।
नितेशेन सोनीनाय, विकासः संप्रवर्धते॥
दिनेशेन वृक्षपालनं, हरितच्छायया युतम्।
बरामदं श्रद्धासभा, यत्र स्मृत्याः सदा स्थिराः॥
आलोकस्य आदर्शेभ्यः, प्रेरितोऽनिलराठौरः।
ददौ बेंचद्वादशं, भक्तानां विश्रमार्थम्॥
दानपट्टे प्रतिष्ठाय, समिति सम्मानितव्रतम्।
सेवा श्रद्धा च संयुक्तं, मुक्तिधामं दिवं धाम॥
समाजसेवी
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।मं
दिनेश कुमार जी चौहान सुसनेर
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -
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