भानपुरा के मुक्तिधाम हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
11 सीमेंट बेंच समर्पित
भानपुरा मुक्तिधाम में श्रद्धा का दीप, दान की धारा बहती अतीव। ग्यारह बेंचें समर्पित हुईं यहाँ, आलोकजी के संकल्प से जगमग हुआ जहाँ।
बरामदा, टाइलों का फर्श, वृक्षों की छाया, समिति के प्रयासों से बढ़ा सौंदर्य की माया। दान पट्ट अंकित हुआ पिलर पर महान, प्रेरणा बनेगा यह अद्भुत दान।
आध्यात्मिक पथ पर आलोकजी अग्रसर, पेंशन और आय का किया समर्पण अमर। मंदसौर, नीमच, झालावाड़, आगर के धाम, दान से प्रकाशित हुआ हर मुक़ाम।
श्लोक-
दानं धर्मस्य मूलं हि, लोकहिताय समर्पितम्। भानपुरे मुक्तिधामे, बेंचाः एकादशाः स्थिताः॥ आलोकस्य संकल्पेन, समाजे जागृतिर्नव। पथरीदामोदरालयेन, श्रद्धया सेव्यते सभाः॥
मंदसौर जिले के भानपुरा नगर में स्थित मुक्ति धाम एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो छोटे-बड़े महादेव पर्यटन स्थल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है।
यहाँ विकास कार्य जारी हैं, जिसमें एक बरामदा और लकड़ी का गोदाम वाला कमरा बनाया गया है। फर्श पर टाइल्स लगाई गई हैं और कुछ पेड़ भी लगाए गए हैं। हालांकि, बंदरों के उत्पात से पेड़-पौधों के पनपने में रुकावट आती है
मुक्ति धाम समिति की देखरेख में विकास गतिविधियाँ चल रही हैं। समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक जी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मुक्ति धाम में लोगों के विश्राम के लिए सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने का अनुष्ठान चलाया है। इसी सिलसिले में, इस शमशान घाट के लिए 11बेंचें भेंट करने का निर्णय लिया गया और दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से सभी 11बेंचें श्रद्धांजलि सभागृह में सजा दी गईं।
मुक्ति धाम समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने दान दाता का दान पट्ट बरामदे के पिलर पर स्थापित कर दिया है ताकि अन्य लोगों को दान की प्रेरणा मिलती रहे ।
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
डॉ .दयाराम आलोकजी का
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
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