अ हिल्या एक बहुत ही सुंदर स्त्री थी. अहिल्या को ये वरदान मिला हुआ था कि उनका योवन सदा बना रहेगा. अहिल्या की सुंदरता के आगे तो स्वर्ग की अप्सराएं भी पानी थी, इसलिए देवता भी अहिल्या के कायल हुआ करते थें. लेकिन एक श्राप के कारण अहिल्या पत्थर की शिला में तब्दील हो गई थी.
पौराणिक ग्रंथों में अहिल्या के बारे में बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं. तो चलिए जानते हैं आखिर किस श्राप की वजह से अहिल्या पत्थर की शिला बन गई थीं और फिर उसके बाद किस प्रकार से नया जीवनदान मिला.पुराणों के अनुसार अहिल्या ब्रह्मा की पुत्री थी. इसलिए वो काफी ज्ञानी और सुंदर थीं. अहिल्या के बड़ी होने पर ब्रह्माजी ने उनकी शादी किसी साधु से ही करने का फैसला किया. लेकिन शर्त यह रखी कि जो कोई पृथ्वी का चक्कर लगाकर सबसे पहले आएगा, उसी का विवाह अहिल्या से होगा.अति सुंदर अहिल्या को पाने के लिए सभी देवता और अन्य गणमान्य लोग शर्त पूरी करने के लिए निकल पड़ते हैं. लेकिन अहिल्या का ध्यान गौतम ऋषि की ओर जाता है. अहिल्या उनके चेहरे से इतनी प्रभावित होती हैं कि गौतम ऋषि से ही शादी करने की बात कहती है.
विवाह से इंद्र हुए नाराज :
महर्षि गौतम और अहिल्या का आपस में विवाह होता है. लेकिन दूसरे देवता इस शादी से बिल्कुल भी खुश नहीं होते हैं और ऐसा भी कहा जाता है कि देवराज इंद्र को भी अहिल्या काफी पसंद थी .इसीलिए जब उन्हें अहिल्या प्राप्त नहीं हुई तो इंद्र ने अपनी वासना को शांत करने के लिए एक षड्यंत्र रचा.
गौतम रोजाना भोर होने से पहले जग जाते और अपने नित्यकर्म निपटाने के लिए नदी किनारे जाते थे। वहां 2-3 घंटे का समय बिताकर फिर कुटिया में आते थे। इंद्र ने इसी मौके का फायदा उठाने की योजना बनाई। एक रात जब गौतम ऋषि और अहिल्या सो गए, फिर कुछ समय बाद इंद्र ने अपनी शक्ति से भोर होने का कृत्रिम आवरण बना लिया। ऋषि गौतम को लगा कि सुबह होने को है, वे रोजाना की तरह उठ गए और नित्यकर्म के लिए निकल पड़े।
इधर इंद्र ने गौतम ऋषि का भेस धारण कर कुटिया में प्रवेश किया। अहिल्या को लगा कि उनके पति नित्यकर्म से निपटकर आ गए हैं। फिर इंद्र ने गौतम ऋषि के भेस में अहिल्या से प्यार भरी बातें की और उसके साथ संबंध बना लिए। दूसरी ओर, जब ऋषि नदी किनारे पहुंचे तो वहां के जनजीवन को देखकर उन्हें आभास हो गया कि किसी ने धोखे से सुबह का आवरण बनाया है। वे तुरंत अपनी कुटिया में पहुंचे, जहां उनके भेस में इंद्र उनकी पत्नी के साथ सो रहे थे।
गौतम ऋषि ने दिया श्राप :
अहिल्या के साथ समागम करने के बाद इंद्र आश्रम से निकले. इंद्र को अपने ही आश्रम से निकलते हुए गौतम ऋषि ने देख लिया, एक ही बार में उन्हें सारी बात समझ में आ गई. इसलिए उन्होंने बिना किसी से कारण जाने अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दे दिया. इसके बाद कोई गलती ना होने के बावजूद भी अहिल्या ने पति के श्राप को स्वीकार किया |
अहिल्या ने गौतम ऋषि से कहा कि उन्हें बिल्कुल भी यह एहसास नहीं हुआ कि उनके भेस में कोई और शख्स उनके साथ सोया है। इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। उनके मन में छल की कोई भावना नहीं थी। गौतम ऋषि ने अहिल्या को वरदान दिया कि कालांतर में भगवान विष्णु का अवतार राम तुम्हारे पास आएगा और उसके छूने से तुम फिर से पहले जैसी बन जाओगी। सालों बाद श्रीराम ने विष्णु के अवतार के रूप में धरती पर जन्म लिया। राम ने ही बाद में अहिल्या को छूकर उन्हें श्राप से मुक्त किया।
दूसरी तरफ अहिल्या ने भी गौतम ऋषि से कहा कि उन्हें बिल्कुल भी यह एहसास नहीं हुआ कि उनके भेस में कोई और शख्स उनके साथ सोया है। इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। उनके मन में छल की कोई भावना नहीं थी। गौतम ऋषि ने अहिल्या को वरदान दिया कि कालांतर में भगवान विष्णु का अवतार तुम्हारे पास आएगा और उसके छूने से तुम फिर से पहले जैसी बन जाओगी। सालों बाद श्रीराम ने विष्णु के अवतार के रूप में धरती पर जन्म लिया। राम ने ही बाद में अहिल्या को छूकर उन्हें श्राप से मुक्त किया।