मौर्य, मुराव ,मुराई, मोरी ,मोरे समाज का गौरवशाली इतिहास ,मौर्य कुल की गोत्र सूचि Video
मौर्य शब्द का मतलब है क्षत्रियों का एक वंश और राजा या नेता। मौर्य साम्राज्य, प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली राजवंश था। इसकी स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी
मौर्य साम्राज्य, प्राचीन भारत के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली साम्राज्यों में से एक था , जिसने देश के इतिहास और संस्कृति को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से साम्राज्य की स्थापना की और फिर उसका विस्तार किया ,
मुराव ,मौर्य,मोरी यह एक क्षत्रिय और कृषक जाति है जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला एक जाति समुदाय हैं। जिन्हे मौर्य नाम से जाना जाता है।
मुराव जाति का इतिहास
मुराव मौर्य जाति का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। शाक्य गणराज्य में आने के कारण कुछ(काशी महाजनपद) के लोग अब शाक्य जाति के कहलाने लगे थे। बाद में शाक्य कुल में राजा शुद्धोधन का जन्म होता है जिनकी शादी कोलिय कुल के राजा अंजन की दो पुत्री महामाया व प्रजापति से होती है। शुद्धोधन महामाया से शाक्यमुनि गौतम बुद्ध सिद्धार्थ का जन्म होता है। जिन्होंने पूरे मानव कल्याण के लिए अपना सारा जीवन लगा दिया। शाक्य कुल में भगवान बुद्ध का जन्म होने के कारण शाक्य गणराज्य की गरिमा पूरे जम्मू द्वीप में और बढ़ गई थी। पिपलीवन में अधिक मात्रा में मोर के पक्षियों के पाए जाने के कारण इसे मोरीय गणराज्य कहा जाने लगा धीरे-धीरे शाक्य भी मोरिय कहे जाने लगे और अपनी पूर्व पहचान को भुलाकर खुद को मोरीय बताने लगे।
शाक्य जाति के लोगों के पीपलीवन में आकर बस जाने के कारण यह लोग मौर्य कहलाए क्योंकि पिपली वन में मोर पक्षियों की संख्या अधिक थी जिसके कारण शाक्यों को भी मौर्य कहा जाने लगा [मौर्य (संस्कृत),मोरिय (पाली)] शाक्य गणराज्य से विस्थापित चंद्रवर्धन मौर्य मोरीय गणराज्य के राजा हुआ करते थे। बौद्ध ग्रंथ ''उत्तरबिहारट्टकथायम्'' ( लेखक- थेर महिंद्र, सम्राट अशोक के पुत्र) के अनुसार मोरिय गणराज्य पर खत्तिय राजा चंद्रवर्धन शासन था| इनकी प्रधान रानी धम्म मोरिया बनी। उनके पुत्र चंद्रगुप्त पैदा हुए। चंद्रगुप्त मौर्य के पिता राजा चंद्रवर्धन 340 ईसा पूर्व 34 वर्ष की आयु में मगध के विस्तारवादी सीमा संबंधी युद्ध में मारे गए तथा मोरिय गणराज्य पर महापदमनंद का अधिकार हो गया| इस घटना के बाद रानी धम्म मोरिया बच निकली और अपने भाइयों की सहायता से पुत्र के साथ पुष्पपुर आ गई| यहीं पर चंद्रगुप्त मौर्य का बचपन मयूर पालको, शिकारियों तथा ग्वालो अर्थात चरवाहों के मध्य व्यतीत हुआ। वहीं से नंदो के द्वारा अपमानित चाणक्य ने चंद्रगुप्त को देखा तो वह समझ गया कि यह कोई साधारण बालक नहीं है। तथा चंद्रगुप्त को अपने साथ तक्षशिला ले जाते हैं और युद्ध विद्या की शिक्षा कूटनीति आदि ज्ञान देकर चंद्रगुप्त को अखंड भारत पर विजय प्राप्त करने के काबिल बनाते हैं। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए नंदों के साम्राज्य का अंत कर अखंड भारत का निर्माण कर दिया। उसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य जैन धर्म को अपना कर अपना जीवन व्यतीत करते हैं। चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र बिंदुसार हुए जिन्होंने अपने पिता के साम्राज्य को आगे बढ़ाते हुए अपने पुत्र सम्राट अशोक को राजा बना दिया। सम्राट अशोक इस पूरी दुनिया का सबसे महान राजाओं में से एक हैं। जिन्होंने संपूर्ण मानव जगत की कल्याण के लिए अनेकों कार्य किए। कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपना कर तथा उसके प्रचार प्रसार में अपना सारा जीवन व्यतीत किया। वैदिक धर्म को त्याग कर सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म अपनाने की बात ब्राह्मणों को रास नहीं आई। इसीलिए कई सारे ब्राह्मणों ने अपनी किताबों में मौर्य को शूद्र घोषित करने की चेष्टा की है| सम्राट अशोक ने अपने शिलालेखों में खुद को क्षत्रिय व बुद्ध शाक्य का वशंज बताया है।
इसलिए, चंद्रगुप्त मौर्य को मौर्य वंश का पहला राजा और संस्थापक भी माना जाता है। उनकी माता का नाम मुर था, इसलिए उन्हें संस्कृत में मौर्य कहा जाता था, जिसका अर्थ होता है मुर का पुत्र और इस प्रकार उनका वंश मौर्य वंश कहलाया।
चित्तोडिया(क्षत्रिय) कराडिया राजपूत(गुजरात),परमार,सक्तिया(सकटा) , भक्तिया(भगता) , ठाकुरिया , शाक्यसेनी , हल्दिया(मुराव) , पुर्विया , कछवाहा , उत्तराहा , दखिनाहा , प्रयागहा , तनराहा, कनौजिया , भदौरिया , ढंकुलिया , इत्यादि मौर्यों में पीरीवाल २३२ गोत्र हैं
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