22.3.23

हिंदी साहित्य में नयी कविता:Hindi sahitya me Nai Kavita




 कविता – 1953 ई.से प्रारंभ 


नयी कविता अनेक अर्थों में प्रयोगवाद का विकास मानी जाती है। उसने प्रयोग की अनेक उपलब्धियों को आत्मसात् किया है। ऐतिहासिक दृष्टि से नयी कविता ’दूसरा सप्तक’ (1951) के बाद की कविता को कहा जाता है।

जहाँ तक ’नयी कविता’ के नामकरण का प्रश्न है तो ’नई कविता’ नाम भी अज्ञेय द्वारा ही दिया गया है। सन् 1952 ई. में पटना रेडियो से उन्होंने इसकी घोषणा की थी।

लक्ष्मीकांत वर्मा के अनुसार नयी कविता(nayi kavita) मूलतः 1953 ई. में ’नये पत्ते’ के प्रकाशन के साथ विकसित हुई

जगदीश गुप्त तथा रामस्वरूप चतुर्वेदी के संपादन में प्रकाशित होने वाले संकलन ’नई कविता’ (1954 ई.) में सर्वप्रथम अपने समस्त संभावित प्रतिमानों के साथ प्रकाश में आयी।

1954 ई. में प्रयाग के ’साहित्य सहयोग’ नामक सहकारी संस्थान ने नयी कविता का प्रकाशन किया। इसी नई काव्यधारा को उन प्रतिमानों को लेकर विकसित किया गया, जो तत्कालीन भाव-बोध को वहन करते हुए सर्वथा नयी दृष्टि के साथ अवतरित हो रहे थे। नयी कविता(nayi kavita) का मूल स्रोत उस युग-सत्य और युग यथार्थ में निहित है।

प्रयोगवाद के अनेक कवियों ने प्रयोग को ही कविता का साध्य मान लिया इसलिए 1950 ई. के बाद एक समय प्रयोगवादी कहे जाने वाले कवियों ने ही प्रयोगवाद को नयी कविता की उदार और सहज अन्तर्धारा में विलयित कर दिया।

नयी कविता ने स्वातंत्र्योत्तर भारतीय जीवन आौर व्यक्ति की संश्लिष्ट जीवन-परिस्थितियों का रचनात्मक साक्षात्कार किया।
नयी कविता की विशेषताएँ/ प्रवृतियाँ – Characteristics of a nayi kavitaयथार्थ के प्रति उन्मुक्त दृष्टि
अहं के प्रति सजगता और व्यक्तित्व की खोज
नयी कविता लघुमानव की अवधारणा का सूत्रपात करती है।
नयी कविता आधुनिक भावबोध की कविता है।
निरर्थकता बोध आधुनिक भावबोध की एक स्थिति है।
अभिव्यक्ति की स्वछंद प्रवृत्ति।
आधुनिक यथार्थ से द्रवित व्यंग्यात्मक दृष्टि
क्षणवाद
नई कविता में चार तत्त्व प्रमुख हैं –वर्जना और कुंठा से मुक्ति
क्षणवाद
अनुभूति की सच्चाई
बुद्धिमूलक यथार्थवादी दृष्टि
नई कविता की प्रमुख कवि एवं रचनाएँ
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ’अज्ञेय’
भग्नदूत (1933), चिन्ता (1942), इत्यलम् (1946),
हरी घास पर क्षण भर (1949), बावन अहेरी (1954), इंद्रधनुष रौदे हुए थे (1957), अरी ओ करुणा प्रभामय (1959), आँगन के पार द्वार (1961), पूर्वा (1965), सुनहले शैवाल (1966), कितनी नावों में कितनी बार (1967), क्योंकि मैं उसे जानता हूँ (1969), सागर मुद्रा (1970), पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ (1973), महावृक्ष के नीचे (1977), नदी की बाँक छाया (1981), ऐसा कोई घर आपने देखा है (1986)।

प्रमुख कविताएँ – (1) असाध्यवीणा, (2) कलगी बाजरे की, (3) साँप (4) नदी के द्वीप (5) यह दीप अकेला।
गजानन माघव ’मुक्तिबोध’

(1) चाँद का मुँह टेढ़ा है (1964), (2) भूरि-भूरि खाक
धूल (1980 ई.)

प्रमुख कविताएँ-अंधेरे में, ब्रह्मराक्षस, अंतःकरण का आयतन आदि।

गिरिजा कुमार माथुर

(1) मंजीर (1941), (2) नाश और निर्माण (1946), (3) धूप के धान, (4) शिला पंख चमकीले (5) छाया मत छूना, (6) भीतरी नदी की यात्रा (1975), (7) अभी कुछ और (8) साक्षी रहे वर्तमान, (9) पृथ्वी कल्प

प्रभाकर माचवे

(1) मेपल (2) स्वप्नभंग, (3) अनुक्षण।
भारतभूषण अग्रवाल

(1) छवि के बंधन (2) जागते रहो (3) मुक्ति मार्ग (4) ओ अप्रस्तुत मन (5) अनुपस्थिति लोग (6) कागज के फूल (7) उतना वह सूरज है (8) अग्निलीक (1976)

शमशेर बहादुर सिंह

(1) कुछ कविताएँ (1959), (2) कुछ और कविताएँ (1961), (3) चुका भी हूँ मैं नहीं (1975), (4) इतने अपने आप (1980), (5) उदिता अभिव्यक्ति का संघर्ष (1980), (6) बातें बोलेगी (1981), (7) काल तुमसे होङ है मेरी (1988), (8) कहीं बहुत दूर से सुन रहा हूँ (1995), (9) सुकून की तलाश (1998)।

केदारनाथ सिंह

(1) अभी बिल्कुल अभी (1976), (2) जमीन पक रही है (1976), (3) अकाल में सारस (1976), (4) यहाँ से देखो (2005), (5) बाघ (2005), (6) उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ (2005), तालस्टाय और साईकिल (1995)।

कुँवर नारायण

(1) चक्रव्यूह (1956), (2) परिवेश हम-तुम (1961), (3) आमने-सामने (1979), (4) कोई दूसरा नहीं (1993), (5) आत्मजयी (प्रबन्धकाव्य, 1965), (6) वाजश्रवा के बहाने (प्रबंध काव्य 2008), (7) इन दिनों (2002)।
भवानी प्रसाद मिश्र

(1) गीत फरोश (1953), (2) चकित है दुःख (1968), (3) अंधेरी कविताएँ (1968), (4) गांधी पंचशती (1969), (5) बुनी हुई रस्सी (1971), (6) खुशबू के शिलालेख (1973), (7) व्यक्तिगत (1973), (8) अंतर्गत (1979), (9) अनाम तुम आते हो (1979), (10) परिवर्तन जिए (1976), (11) इद्नमम् (1977), (12) त्रिकाल संध्या (1978), (13) शरीर, कविता, फसलें और फूल (1980), (14) मानसरोवर दिन (1981), (15) सम्प्रति (1982), (16) नीली रेखा तक (1984), (17) तूस की आग (1985), (18) कालजयी (खण्ड काव्य-1980)

प्रमुख कविताएँ- (1) कमल के फूल (2) सतपूङा के जंगल (3) वाणी की दीनता, (4) गीत फरोश (5) टूटने का सुख।

रामविलास शर्मा

(1) रूप तरंग (1956), (2) सदियों के सोए जाग उठे (1988), (3) बुद्ध वैराग्य तथा प्रारंभिक कविताएँ (1997)।

रघुवीर सहाय

(1) सीढ़ियों पर धूप में (1960), (2) आत्महत्या के विरुद्ध (1967), (3) हँसी हँसी जल्दी हँसो (1975), (4) लोग भूल गए हैं (1982), (5) कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ (1989), (6) एक समय था।

विजयदेव नारायण साही

(1) साखी (2) मछलीघर (3) संवाद तुमसे।

हरिनारायण व्यास

(1) मृग और तृष्णा, (2) त्रिकोण पर सूर्याेदय, (3) बरगद के चिकने पत्ते।
नरेश मेहता

(1) वन पाखी सुनो (1957), (2) बोलने दो चीङों को (1961), (3) मेरा समर्पित एकांत (1963), (4) पिछले दिनों नंगे पेरों, (5) चैत्या, (6) उत्सवा (1979), (7) संशय की एक रात (प्रबंध काव्य-1962), (8) महाप्रस्थान (1964), (9) प्रवाद पर्व (1977), (10) शबरी (1977), (11) अरण्य, (12) आखिरी समुद्र से तात्पर्य, (13) प्रार्थना पुरुष (1985)।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

(1) काठ की खंटियाँ (1959), (2) बाँस का पुल (1963), (3) एक सूनी नाव (1966), (4) गर्म हवाएँ (1966), (5) कुआनी नदी (1973), (6) जंगल का दर्द (1976), (7) खूँटियों पर टंगे लोग (1982), (8) क्या कहकर पुकारूँ (9) कोई मेरे साथ चले।

धर्मवीर भारती

(1) ठण्डा लोहा (1952), (2) अंधा युग (1955), (3) कनुप्रिया (1957), (4) सात गीत वर्ष (1957), (5) देशांतर।

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उपर्युक्त कवियों से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य:

⇒ अज्ञेय अस्तित्ववाद में आस्था रखने वाले कवि है।

⇒ ’असाध्यवीणा’ अज्ञेय की प्रमुख कृति है, इसका मूल भाव ’अहं का विसर्जन’ ’समर्पण की भावना’ है। इसका कथानक चीनी-जापानी कथा ओकाकुरा से प्रभावित है।

नदी के द्वीप में व्यक्ति, संस्कृति और समाज तीनों के अस्तित्व की बात की गई है।
नदी के द्वीप के प्रतीकद्वीप – व्यक्ति/शिशु

नदी – परंपरा/माँ

भूखण्ड – समाज/पिता

⇒ मुक्तिबोध की ’अंधेरे में’ कविता का प्रथम प्रकाशन ’कल्पना’ पत्रिका में 1964 में ’आशंका के द्वीप’ ’अंधेरे में’ नाम से हुआ।

⇒ मुक्तिबोध ने ’अंधेरे में’ कविता की रचना फैंटेसी में की है।

शमशेर बहादुर सिंह के अनुसार –
’’यह कविता देश के आधुनिक जन इतिहास का स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात् का एक दहकता इस्पाती दस्तावेज है।’’

नामवर सिंह के अनुसार ’अंधेरे में’ कविता ’अस्मिता की खोज’ है।

रामविलास शर्मा ने ’अंधेरे में’ कविता को ’आरक्षित जीवन की कविता’ कहा है।

रामस्वरूप चतुर्वेदी ने लिखा है-’चाँद का मुँह टेढ़ा है’ एक बङे कलाकार की स्कैच-बुक लगता है।’

⇒ मुक्तिबोध पर टालस्टाय, बर्ग साॅ और माक्र्सवाद का स्पष्ट प्रभाव है।

⇔ शमशेर बहादुर को मलजय ने ’मूड्स का कवि’ कहा है।

⇒ शमशेर बहादुर सिंह के अनुसार – ’टेक्नीक में एजरा पाउंड शायद मेरा सबसे बङा आदर्श बन गया था।’

⇔ रामचन्द्र तिवारी ने शमशेर बहादुर के गद्य को ’हिन्दी का जातीय गद्य’ कहा है।

⇒ भवानी प्रसाद मिश्र को ’सहजता का कवि’ कहा जाता है।

⇔ भवानी प्रसाद मिश्र को ’हिन्दी कविता का गांधी’ कहा जाता है।
प्रयोगवादी/नई कविता के प्रमुख कवियों की महत्त्वपूर्ण काव्य पंक्तियाँ –

यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता
पर इसको भी पंक्ति दे दो

किन्तु हम हैं द्वीप।
हम धारा नहीं है,
स्थिर समर्पण है हमारा हम सदा से द्वीप है स्त्रोतास्विनी के।

साँप! तुम सभ्य तो हुए नहीं
नगर में बसना भी तुम्हें नहीं आया
तब कैसे सीखा डँसना-विष कहाँ पाया

मौन भी अभिव्यक्ति है
जितना तुम्हारा सच है
उतना ही कहो

भोर का बाबरा अहेरी
पहले बिछाता है आलोक को
लाल-लाल कनिया

वही परिचित दो आँखे ही
चिर माध्यम है
सब आँखों से सब दर्दों से
मेरे लिए परिचय का

ये उपनाम मैले हो गये हैं
देवता इन प्रतीकों से कर गए है कूच

एक तीक्ष्ण अपांग से कविता उत्पन्न हो जाती है
एक चुंबन से प्रणय फलीभूत हो जाता है।

’मुझे स्मरण है
और चित्र/प्रत्येक स्तब्ध, विजङित करता है मुझे
सुनता हूँ मैं

आ, मुझे भुला
तू उतर बीन के तारों में
अपने से गा/अपने को गा
अपने खग कुल को मुखरित कर

राजकुमुट सहसा हलका हो आया था
मानो हो फूल सिरिस का
ईष्र्या, महत्त्वकांक्षा, द्वेष, चाटुता
सभी पुराने झङ गये

हरी तलहटी में, छोटे की ओट, ताल पर
बंधे समय, वन-पशुओं की नानाविध
आतुर-तृप्त पुकारे
गर्जन, धुर्धर, चीख, भूँक, हुक्का
चिचिराहट है
मुक्तिबोध

मुझे भ्रम होता है कि प्रत्येक वाणी में महाकाव्य-पीङा है।

ओ मेरे आदर्शवादी मन
ओ मरे सिद्वान्तवादी मन

बहुत-बहुत ज्यादा लिया
दिया बहुत-बहुत कम
मर गया देश, अरे, जीवित रह गए तुम

अब अभिव्यक्ति के सारे खतरे, उठाने होंगे
तोङने होगें मठ और गढ़ सभी

कविता कहने की आदत नहीं, पर कह दूँ
वर्तमान समाज चल नहीं सकता
पूँजी से जुङा हुआ हृदय बदल नहीं सकता

खोजता हूँ पठार, पर्वत, समुद्र
जहाँ मिल सके मुझे
मेरी वह खोई हुई
परम अभिव्यक्ति अनिवार
आत्म-संभवा।
शमशेर बहादुर सिंह

एक पीली शाम
पतझर का जरा अटका हुआ पत्ता

बात बोलेगी, हम नहीं
भेद खोलेगी, बात ही

चूका भी हूँ मैं नहीं
कहाँ किया मैंने प्रेम अभी

घिर आया समय का रथ कहीं
ललिता से मढ़ गया है राग।

हाँ, तुम मुझसे प्रेम करो
जैबे मछलियाँ लहरों से करती है।

दोपहर बाद की धूप-छाँह में खङी
इंतजार की ठेलेगाङियाँ
जैसे मेरी पसलियाँ
खाली बोरे सूजों से रफू किये जा रहे हैं।

भूलकर जब राह-जब जब राह भटका मैं
तुम्हीं झलके हो महाकवि
सघन तम की आँख बन मेरे लिए।
भवानी प्रसाद मिश्र

जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ
मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ
मैं किसिम किसिम के गीत बेचता हूँ।

सतपुङा के घने जंगल
नींद में डूबे हुए से
उँघते अनमने जंगल।

टुटने का सुख
बहुत सारे बंधनों को आज झटका लग रहा है
टूट जायेंगे कि मुझको आज खटका लग रहा है।

फूल लाया हूँ कमल के
क्या करूँ इनका
छोङ दूँ
हो जाए जी हल्का
रघुवीर सहाय

राष्ट्रगान में भला कौन वह भारत भाग्य विधाता है
फटा सुथन्ना पहले, जिसका गुन हरचरना गाता है

मैं अपनी एक मूर्ति बनाता हूँ
और एक ढ़हाता हूँ
और आप कहते हैं कि कविता की है।

कितना अच्छा था छायावाद
एक दुःख लेकर वह गान देता था
कितना कुशल था प्रगतिवादी
हर दुःख का कारण पहचान लेता था

खबर हमको पता है हमारा आतंक है
हमने बनाई है
फिर वो लिखते हैं
खबर वातानुकूलित कक्ष में तय कर रही होगी
करेगा कौन रामू के तले की भूमि पर कब्जा

लोग भूल जाते हैं
अत्याचारी का चेहरा मुस्काने पर

भीङ में मैल खोरी गंध मिली
⇔भीङ में आदिम मूर्खता की गंध मिली
भीङ में नहीं मिली मुझे मेरी गंध

क्रांतिकारी लेखक को आशा है
कि औरों पर उसका अविश्वास
उसको तो उसके जीवन में
एक बङा आदमी बना देगा।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

लोकतंत्र को जूते की तरह
लाठी में लटकाए
भागे जा रहे हैं सभी
सीना फुलाए

मैं नया कवि हूँ
इसी से जानता हूँ
सत्य की चोट बहुत गहरी होती हे

लीक पर चले जिनके
चरण दुर्बल और हारे हैं
हमें तो हमारी यात्रा से बने
ऐसे अनिर्मित पंथ प्यारे हैं
केदार नाथ सिंह

मैंने जब भी सोचा
मुझे रामचन्द्र शुक्ल की मूँछे याद आई

मैं पूरी ताकत के साथ
शब्दों को फेंकना चाहता हूँ।
साठोत्तरी कविता

सन् 1960 ई. के बाद लघु पत्रिकाओं की बाढ़ आ गई तथा प्रत्येक लघु पत्रिका की छत्रछाया में कोई-न-कोई नये वाद अथवा काव्यान्दोलन पनपने लगे। जो आन्दोलन अपेक्षाकृत अधिक स्थिर एवं सुदृढ़ हो पाए, वे निम्न हैं –
⇒ निषेध मूलक
⇔संघर्ष मूलक
⇒ आस्थामूलक
निषेधमूलक वर्ग में उन काव्यान्दोलनों को समाहित किया जाता है, जिन्हांेने परंपरागत सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का निषेध करते हुए घोर व्यक्तिवाद, उच्शृंखल यौनवाद एवं नग्न भोगवाद को प्रश्रय दिया।
संघर्ष मूलक वर्ग के आन्दोलनों में सामाजिक, आर्थिक, एवं राजनीतिक परिस्थितियों के प्रति असंतोष तथा आक्रोश व्यक्त करते हुए उनके विरोध में संघर्ष का आह्वान किया गया।
आस्थामूलक वर्ग के आन्दोलनों में परंपरागत मूल्यों को स्वीकारते हुए उनकी पुनः प्रतिष्ठा पर जोर दिया गया।
प्रमुख काव्यांदोलन एवं प्रवर्तक
काव्यांदोलन प्रवर्तक
अकविता श्याम परमार
बीट पीढ़ी राजकमल चौधरी
अस्वीकृत कविता श्रीराम शुक्ल
आज की कविता हरीश मादानी
प्रतिबद्ध/वाम कविता डाॅ. परमानन्द श्रीवास्तव
सहज कविता डाॅ. रवीन्द्र भ्रमर
ताजी कविता लक्ष्मीकांत वर्मा
समकालीन कविता डाॅ. विशम्भरनाथ उपाध्याय
कैप्सूल/सूत्र कविता डाॅ. ओंकारनाथ त्रिपाठी
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19.3.23

गायत्री शक्तिपीठ शामगढ़-मंदसौर-मध्य प्रदेश /डॉ .दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 51-51 हजार रुपये के दो दान समर्पित

गायत्री शक्तिपीठ शामगढ़-मंदसौर-मध्य प्रदेश हेतु 

समाजसेवी डॉ.दयाराम जी आलोक द्वारा 

51-51 हजार रुपये के दो  दान समर्पित 



 श्रीराम शर्मा आचार्य के युग परिवर्तनकारी विचारों को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से सम्पूर्ण विश्व मे गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना की गई है | इन शक्ति पीठों के माध्यम से आम जन मानस मे उत्तम संस्कारों के बीज बोए जाते हैं| उल्लेखनीय है कि गायत्री शक्ति पीठ आध्यात्मिक और धार्मिक आयोजन के लिए ख्याति प्राप्त संस्थान है| विभिन्न फलों का रसाहार भी यहाँ लागत मूल्य पर उपलब्ध है| व्यायाम के लिए जिम जैसे उपकरण लोगों को आकर्षित करते हैं|गुरु पूर्णिमा जैसे खास अवसरों पर भंडारा का आयोजन संस्था की विशेषताओं मे से एक है|
  समाजसेवी डॉ.दयाराम जी आलोक ने राजस्थान और मध्यप्रदेश के चयनित मंदिरों को नकद दान और सीमेंट की बेंच भेंट करने के अपने आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के परिप्रेक्ष्य मे गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ को 51-51 हजार रुपये के दो दान डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से समर्पित किए हैं| तीन सीमेंट की बेंच भी प्रांगण मे रखवा दी गईं हैं| संस्थान द्वारा दान दाता की दान पट्टिकाएं दर्शनीय स्थानों पर स्थापित करवाई है| गायत्री मंदिर मे राशि और नक्षत्र के हिसाब से लगे पेड़ पौधे बेहद नयनाभिराम हैं|


गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ का मनोरम दृश्य 
                                   


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी


डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का


आध्यात्मिक  दान -पथ 

साथियों,

शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है|
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 5 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


 

  शामगढ़ की गायत्री शक्तिपीठ मे गुरु पूर्णिमा पर्व पर संस्थान से जुड़े सैंकड़ों परिवारों का सहभोज आयोजित किया गया| इस संस्थान को साहित्य मनीषी ,समाज सेवी डॉ.दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर 9826795656 ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा नव निर्माण कार्यों हेतु 51 हजार रुपये तथा गायत्री शक्ति पीठ के अंतर्गत संचालित ज्ञान मंदिर हेतु भी 51 हजार रुपये का दान दिया गया|यह शक्तिपीठ  डिम्पल चौराहे के पास सगोरिया रोड पर स्थित है| रमेशजी राठौर आशुतोष संस्थान के मुख्य प्रबंधक हैं| यह संस्थान स्वास्थ्यकारी जूस  सेंटर  भी चलाता है| जिसमे कई प्रकार के फलों के रस सहजता से लागत मूल्य पर उपलब्ध हैं| 
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 *मुक्ति धाम आगर -मालवा/मोती सागर तालाब बम्बई घाट/ डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 10 सिमेन्ट बेंच दान 



राम मंदिर लसुडिया-गरोठ/ दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 5 सिमेन्ट बैंच समर्पित

श्री राम मन्दिर लसुडिया का अनुपम दृश्य
                                                      


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम  जिलों  के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

अभिनव  दान -अनुष्ठान 

साथियों,

शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है|
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6  वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|  

 साहित्य मनीषी डॉ. दयाराम आलोक का परिचय सुनिए इसी लिंक में 


श्री राम मंदिर लसुड़ीया तेहसील गरोठ का विडिओ 

17501/-  की  (5 बेंच+ 2001/- नकद  दान)


श्री राम मंदिर लसु डिया  मे 5 बेंच लगीं 20/12/2022 


गोविंद  जी पंवार  टेलर गारिया खेड़ी  ने यह विडिओ अपनी आवाज मे बनाया 




राम मंदिर लसूडीया के विकास हेतु 2000 रुपये दुर्गा शंकर जी पुजारी को  फोन पे किए 



सूचना-जो भी व्यक्ति  इस मुक्तिधाम  के  फोटो या विडियो  ९९२६५२४८५२ पर whatsap से भेजेंगे  वे फोटो उनके नाम के साथ पोस्ट किये जायेंगे. 

श्री भवानी शंकरजी चौहान टेलर 89896-92699 का सूझाव

मंदिर के मुख्य पुजारी दुर्गा शंकर जी बैरागी हैं|

श्री राम मंदिर ग्राम लसूड़ीया तहसील गरोठ बहुत ही सुंदर है और दीवारों पर देवी देवताओं के बहुत ही आकर्षक चित्र बनाए हुए हैं| साहित्य मनीषी डॉ .दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ.अनिल कुमार जी राठौर ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा इस मंदिर के प्रांगण मे दर्शनार्थियों के बैठने कि सुविधा हेतु 5 सीमेंट बेंच और मंदिर के विकास के लिए 2000 हजार रुपये भेंट किए| मंदिर के मुख्य पुजारी दुर्गा शंकर जी बैरागी हैं| मंदिर मे बेंच और शिलालेख लगाने का प्रस्ताव भवानी शंकर जी चौहान का है| यह विडिओ गारिया खेड़ी निवासी गोविंद जी पंवार ने अपनी आवाज मे बनाया है|

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पता  शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्री राम  मंदिर लसूडीया हेतु दान सम्पन्न 20/12/2022 
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 *मुक्ति धाम आगर -मालवा/मोती सागर तालाब बम्बई घाट/ डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 10 सिमेन्ट बेंच दान 


बालोदा-मंदसौर के तीन मंदिरों को डॉ अनिल दामोदर पथरी का हॉस्पिटल शामगढ़ द्वारा 9 बेंच समर्पित

                           बालाजी मंदिर बालोदा -गरोठ-मंदसौर के लिए

समाजसेवी डॉ .दयाराम जी आलोक शामगढ़ की तरफ से   

दर्शनार्थियों के बैठने हेतु 4 सिमेन्ट की बेंच दान     

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का गाँव बालोदा चम्बल नदी की  गाँधीसागर झील के समीप  स्थित है। यहाँ का बालाजी का मंदिर गाँव के बीच मे है और लोगों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मंदिर के सामने खुला प्रांगण  है। मंदिर बहुत छोटा  है और टीन  के चद्दर लगे हुए हैं। मंदिर  प्रबंधन की समिति के लोगों मे ज्यादा उत्साह नहीं दिखाई दिया । फिर भी समाज सेवी डॉ .दयाराम जी आलोक शामगढ़ ने अपने आध्यात्मिक दान-पथ के सिलसिले मे शामलाल जी विश्वकर्मा मिस्त्री के अनुरोध पर आँख मूदकर भरोसा करते हुए  इस मंदिर मे 4  सिमेन्ट की बेंचें  भेंट की हैं।खुले मे पड़ी होने और देख रेख के अभाव मे एक बेंच टूट गई है, दान दाता  का शिलालेख भी विस्थापित कर दिया गया है। दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से इस छोटे से गाँव के 3 मंदिरों मे सिमेन्ट की 9  बेंच की व्यवस्था की गई है। हमारी टीम जब बलोदा पहुंची तो अनुभव किया कि शामलाल जी विश्वकर्मा पर भरोसा करना  गलत निर्णय था। एक अन्य  मंदिर के प्रबंधक शामनाथजी जो योगी हैं।ये  मंदिर मे शिलालेख लगाने की अपनी बात पर कायम रहने वाले व्यक्ति नहीं हैं।  जिन मंदिरों मे ऐसे प्रबंधक हों वहाँ  बाहर के दान दाताओं  को  दान  देते वक़्त  आँख खुली रखकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। नृसिंह मंदिर चंद्रावत राजाओं द्वारा निर्मित है जितेंद्र सिंग जी रावले ने नया निर्माण करवाया है। रावले ने नृसिंग मंदिर मे बेंच भेंट के लिए आभार माना !दान दाता  को संतुष्ट करना मंदिर समितियों का दायित्व बनता है. 

 


 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम  जिलों  के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 

मित्रों ,
परमात्मा की असीम अनुकंपा और

कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से 
डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,नीमच ,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं| 



बालोदा मंदसौर जिले का चम्बल नदी के पास बस हुआ छोटा सा गाँव है| इस गाँव मे बालाजी का मंदिर है| यह मंदिर स्थानीय और आस पास के ग्रामीण अञ्चल के आस्थावान हिन्दू लोगों के लिए हनुमान जी के प्रति अपनी श्रद्धा भक्ति प्रदर्शित करने का धर्म स्थल है| इस मंदिर के लिए यात्रा करने के लिए शामगढ़,गरोठ ,सुवासरा ,मंदसौर से बसें उपलब्ध हो जाती हैं| मंदिर मे दर्शनार्थियों के बैठने की सुविधा हेतु समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक 9926524852 के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय 9826795656 ,शामगढ़ द्वारा 4 सीमेंट बेंच और 1501/- नकद दान समर्पित किया गया है|


5.3.23

गायत्री शक्तिपीठ शामगढ़-मंदसौर /डॉ. दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा एक लाख दो हजार रूपये का दान .

                                          

गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ में विकास एवं निर्माण हेतु 

समाजसेवी  डॉक्टर दयाराम जी आलोक द्वारा 

५१ -५१ हजार के दो दान समर्पित किये गए.

 
 गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्थल है, जो न केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ वाचनालय, व्यायाम के उपकरण, स्वास्थ्य वर्धक पेय और वानस्पतिक जड़ी बूटियों की व्यवस्था इस शक्तिपीठ की विशेषता को दर्शाती है।
 मंदिर में माँ गायत्री, माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी जी की आकर्षक प्रतिमाएँ इस स्थल की आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाती हैं। गुरु पूर्णिमा पर आयोजित भंडारा और 'माला के मोती' ग्रुप की गतिविधियाँ इस स्थल की लोकप्रियता को दर्शाती हैं।
 समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोकजी का 51 हजार का नकद दान और समाज सेवी रमेश चंद्र जी राठौर "आशुतोष" की महती भूमिका इस स्थल के निर्माण और प्रबंधन में उल्लेखनीय है। मोहन जी जोशी गायत्री  के प्रखर प्रवक्ता  हैं और गायत्री के अनुष्ठान में उनकी अग्रणी भूमिका भी प्रशंसनीय है।
गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ ने हिन्दू धर्मावलंबियों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है, जो इसकी आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों के कारण है। यह स्थल लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है

स्व. श्रीमति शांति देवी धर्म पत्नि  डॉ .दयाराम जी आलोक  की स्मृति  मे पुत्र डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा ज्ञान मंदिर के लिए 51 हजार  दान का शिलालेख लगवाया 

ज्ञान मंदिर मे शिलालेख लगाया गया                                             


(यह 51 हजार का नकद दान डॉ. अनिल कुमार राठौर की

                                                               


स्वर्गीय मातुश्री श्रीमति शान्ति देवी धर्मपत्नी डॉ.दयाराम जी आलोक की पुण्य स्मृति में समर्पित )

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम  जिलों  के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 

साथियों,

  शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है|
  दर्जी कन्याओं के स्ववित्तपोषित निशुल्क सामूहिक विवाह सहित 9 सम्मेलन ,डग दर्जी मंदिर मे भगवान  सत्यनारायण की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा ,मंदिरों और मुक्ति धाम को नकद और सैंकड़ों सिमेन्ट बेंच दान ,दर्जी समाज की वंशावलियाँ निर्माण,दामोदर दर्जी महासंघ का गठन ,सामाजिक कुरीतियों को हतोत्साहित करना जैसे अनेकों समाज हितैषी लक्ष्यों के लिए अथक संघर्ष के प्राणभूत डॉ .दयाराम आलोक अपने 84 वे वर्ष मे भी सामाज सेवा के नूतन अवसर सृजित करने के अरमान सँजोये हुए है
  परमात्मा की असीम अनुकंपा और

कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ  नीमच  जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६ वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|

                                                                  

शामगढ़ गायत्री शक्तिपीठ के ज्ञान मंदिर हेतु

51 हजार रु. का प्रथम दान

गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ के अंतर्गत ज्ञानमंदिर के उदघाटन का विडियो



विडियो गुरु पूर्णिमा गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़  3/7/2023 



गायत्री शक्तिपीठ का दृश्य

                                                  
                                                                                                              

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा गायत्री शक्तिपीठ के अंतर्गत ज्ञान मंदिर हेतु 51 हजार का प्रथम दान समर्पित 

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शामगढ़ की गायत्री शक्तिपीठ हेतु

                     
                   
विकास और निर्माण कार्य के लिए 


51 हजार रुपये का दूसरा दान समर्पित

शामगढ़ गायत्री शक्तिपीठ का विडियो



मोहन लाल जी जोशी 95888-27033 गायत्री के प्रखर प्रवक्ता की प्रेरणा



राजू जी छाबड़ा ९४२५९-७८५८४ का सुझाव



गायत्री शक्तिपीठ का प्रबंधन रमेशजी राठौर आशुतोष-99264-26499 करते हैं.


डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ हेतु 51 हज़ार का दूसरा नक़द दान सम्पन्न

4.3.23

मुक्ति धाम शिवना तट मंदसौर/डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा १८ सिमेन्ट बैंच भेंट

मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर के शिवना तट  स्थित मुक्तिधाम हेतु 

समाजसेवी  डॉ. दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 

18 सिमेन्ट बेंचें समर्पित 

 मंदसौर शहर का मुक्ति धाम शिवना नदी के किनारे स्थित है| यहाँ का मुक्ति धाम शांतिलाल जी बड़जात्या और उनकी टीम के अनवरत प्रयासों से एक आदर्श मुक्ति धाम बन गया है| मुक्ति धाम मे बैठक सुविधा को विस्तार देते हुए साहित्य मनीषी ,समाज सेवी डॉ.दयारामजी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर 9826795656 ,दामोदर पथरी चिकित्सालय ,शामगढ़ ने इस संस्थान को 18 सीमेंट बेच भेंट की|सभी भेंट की गई |बेंचें श्रद्धान्जली सभा हाल में लगा दी गई हैं. ज्ञातव्य है कि हमारी संस्था दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा मध्य प्रदेश और राजस्थान के नीमच,मंदसौर,रतलाम,झाबुआ,झालावाड,आगर जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम को सीमेंट बेंच और नकद दान का अनुष्ठान चलाया हुआ है.

 मंदसौर के मुक्तिधाम में 51 हजार दान का शिलालेख स्थापित किया गया                           


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम  जिलों  के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 

  दर्जी कन्याओं के स्ववित्तपोषित निशुल्क सामूहिक विवाह सहित 9 सम्मेलन ,डग दर्जी मंदिर मे सत्यनारायण की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा ,मंदिरों और मुक्ति धाम को नकद और सैंकड़ों सिमेन्ट बेंच दान ,दर्जी समाज की वंशावलियाँ निर्माण,दामोदर दर्जी महासंघ का गठन ,सामाजिक कुरीतियों को हतोत्साहित करना जैसे अनेकों समाज हितैषी लक्ष्यों के लिए अथक संघर्ष के प्राणभूत डॉ .दयाराम आलोक अपने 85वे वर्ष मे भी सामाज सेवा के नूतन अवसर सृजित करने के अरमान सँजोये हुए है
  परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६ वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|

मंदसौर मे शिवना के किनारे 
मुक्तिधाम के लिए 18 सिमेन्ट बेंच भेंट.

Video of Bench donation to mukti dham Mandsaur 

                                                
  
    
मुक्ति धाम मंदसौर  के श्रद्धांजलि हाल  में १८ बैंच लगीं 


    मंदसौर के मुक्ति धाम मे  डॉ.अनिल कुमार  ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ की तरफ से 


मातुश्री  शांति देवी w/o डॉ.दयाराम जी आलोक की स्मृति में 18 बेंच लगी

मुक्ति धाम मंदसौर के शुभचिंतक ,प्रबंधक , संरक्षक -
                                                           
जवाहर लाल जी जैन मुक्तिधाम समिति के सचिव हैं. 

समाज सेवी  सुनील जी बंसल

शांतिलाल जी बड़जात्या 94259 23534 समिति के अध्यक्ष हैं.

मुक्ति धाम मंदसौर में शमशान समिति के पदाधिकारी कर्मचारी मानव की अंतिम सेवा कर अदा कर रहे इंसानियत का फर्ज समाज सेवी व शमशान समिति के पदाधिकारी श्री शांतिलाल जी बडजात्या मंदसौर में मानव की अंतिम सेवा कर अदा कर रहे इंसानियत का फर्ज |श्री सुनील जी बंसल दे रहे पिछले 25 वर्षों से नी स्वार्थ सेवा निरंतर कर रहे है। कोरो ना काल में शमशान समिति के माध्यम से कर्मचारी नगर पालिका कर्मी के सहयोग से करवा रहे अंतिम संस्कार की सभी तैयारी मृतकों के परिजनों को दुःख की घड़ी में करते है मदद जो लोग मुक्ति धाम से उनके परिजनो की अस्तिया हरिद्वार नहीं ले जा पाते उनकी मदद कर उनकी व कई लावारिश अस्थियों को हर वर्ष करते है गंगा जी में विधि विधान से प्रवाहित |

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा मंदसौर के मुक्तिधाम हेतु  18 बेंच  दान सम्पन्न