मिश्रोली धाम का अनुपम नज़ारा, अन्नपूर्णा माता का पावन सहारा। नव सौ वर्षों की गाथा महान, श्रद्धा की सीढ़ी, सेवा का सम्मान।
तीन सौ उन्नीस सीढ़ियाँ चढ़कर, भक्त पहुँचें माता के दर पर। हरी-भरी पहाड़ी, मानसून का रंग, प्रकृति और भक्ति का अद्भुत संग।
सत्यनारायण जी, प्रहलाद जी का प्रयास, समिति ने किया विकास का प्रकाश। दयाराम आलोक का दान अनमोल, सात बेंचों से हुआ पुण्य का संयोग।
शिला पट्ट पर अंकित नाम, दान की प्रेरणा, सेवा का धाम। नवरात्र में उमड़े जनसैलाब, मिश्रोली धाम बने श्रद्धा का आलाप।
नवशतवर्षप्राचीनं पर्वतशिखरे प्रतिष्ठितम्॥ त्रिशतनवदश सीढ्याः भक्तानां मार्गसुगमः। दयारामदानबेंचैः सेवासौख्यं समर्पितम्॥ शिलापट्टे दानिनां यशः प्रेरणायाः दीप्यमानम्। भवतु लोकहिताय, श्रद्धायाः पुण्यवर्धनम्॥"
अन्नपूर्णा माताजी मन्दिर (Temple) मिश्रोली में राजस्थान के झालावाड़ जिले के मिश्रोली गाँव में स्थित ९०० साल पुराना माँ अन्नपूर्णा मंदिर आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत केंद्र है। यहाँ 319 सीढ़ियाँ चढ़कर माता के दर्शन होते हैं। डॉ. दयाराम आलोक द्वारा दान की गई बेंचें और मंदिर समिति के विकास कार्य यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सेवा और सुविधा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
मिश्रोली माँ अन्नपूर्णा धाम की प्रमुख विशेषताएँ:प्राचीन और भव्य मंदिर: यह मंदिर 900 साल से अधिक पुराना माना जाता है, जहाँ माता अन्नपूर्णा पहाड़ी की चोटी पर विराजमान हैं।
सुगम दर्शन: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहाँ पक्की सीढ़ियाँ (कुल 319) और विश्राम के लिए विशाल शेड निर्मित हैं।
इस मंदिर की व्यवस्था एक समिति करती है जिसमे सत्यनारायण जी गौड़ और प्रहलाद जी नागर के नाम उल्लेखनीय हैं .इन महानुभाओं के अनुरोध का आदर करते हुए डॉ . दयाराम जी आलोक ने बेंचों का पावन दान किया। समिति ने दान दाता का शीला पट्ट लोगों को दान के लिए प्रेरित करने की मंशा से मंदिर मे दर्शनीय स्थल पर स्थापित कर दिया है और दान दाताओं का भवभीना सम्मान किया ।
प्राकृतिक सौंदर्य: मानसून के दौरान हरी-भरी पहाड़ी और मनमोहक दृश्य यहाँ की सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं।
आध्यात्मिक केंद्र: यहाँ नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और मेलों का आयोजन होता है, जिसमें राजस्थान और मध्य प्रदेश के श्रद्धालु आते हैं।
यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामूहिक प्रयासों से विकसित एक बेहतरीन पर्यटन स्थल भी है।
दामोदर पथरी Hospital शामगढ़ द्वारा बेंच व्यवस्था

समाजसेवी
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के आगर,मंदसौर,नीमच ,झालावाड़ ,कोटा और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
आलोकजी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . इसमे वो राशि भी शामिल है जो आपको google कंपनी से प्राप्त होती है| आपकी ६ वेबसाईट पर google विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% आपको मिलता है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
डॉ.अनिल दामोदर दो बेटियों के साथ
श्रीमती शीला देवी -डॉ.अनिल कुमार राठौर शामगढ़ -
और प्रहलाद जी नागर 97729-86206,



