श्री कंठालेश्वर महादेव टेम्पल रुनिजा हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ की तरफ से
4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट
कंठालेश्वर महादेव मंदिर: ग्राम रुनिजा की सांस्कृतिक धरोहर
काव्यात्मक विवरण
रुनिजा ग्राम की गंगा-जमुनी शान,
संस्कृति का अद्वितीय वरदान।
कंठालेश्वर महादेव का मंदिर महान,
शिव उपासकों का पावन स्थान।
सड़क किनारे स्थित यह धाम,
भक्तों को देता अलौकिक आराम।
शिव प्रतिमा का सौन्दर्य अपार,
भक्तों के मन में जगाता प्यार।
सावन में उमड़ती श्रद्धा की भीड़,
हरियाली संग भक्तों की पीर।
आना-जाना रहता निरंतर,
शिव नाम से गूँजता समस्त नगर।
संरक्षक डॉ. संजय राठौर का प्रयास,
समिति और पत्रकार राजेन्द्रजी का विश्वास।
दानदाताओं का शिलालेख स्थापित हुआ,
आभार का संदेश मंदिर में गूँजा।
रुनिजा ग्राम की विरासत महान,
प्राचीन मंदिरों और स्मारकों का सम्मान।
सांस्कृतिक धरोहर संजोए यहाँ के लोग,
समृद्धि का प्रतीक, श्रद्धा का संयोग।
निष्कर्ष
कंठालेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रुनिजा गाँव की सांस्कृतिक आत्मा है। यहाँ की गंगा-जमुनी परंपरा, शिव उपासना और समाज सेवा का संगम इस मंदिर को अमर बनाता है।
दानदाता की दान पट्टिका मंदिर मे स्थापित की गई
सावन के महीने में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है, और सड़क के पास होने से लोगों का आना जाना लगा रहता है। मंदिर के संरक्षक डॉ संजय जी राठौर, समिति के सदस्यों और पत्रकार राजेन्द्रजी धनोतिया ने लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से दान दाता का शिलालेख मंदिर में स्थापित किया और आभार व्यक्त किया।
रुनिजा गाँव की एक अन्य विशेषता यह है कि यहाँ के लोगों ने अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को संजो कर रखा है। गाँव में कई प्राचीन मंदिर और स्मारक हैं, जो यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रकट करते हैं।
समाजसेवी
आद्यात्मिक दान-पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
यह विडिओ पत्रकार राजेन्द्रजी धनोतिया के सौजन्य से प्राप्त
श्री कंठालेश्वर महादेव मंदिर मे 4 बेंक लगने का विडिओ
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -





