लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। संस्कृति और समाज: पौराणिक गाथाएं, जाति इतिहास और दान-महिमा

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2.6.23

श्री कालेश्वर मंदिर मेला प्रांगण सुवासरा :सर्पदंश से मुक्ति विधान: श्री दामोदर बेंच प्रदान :भक्तों को सुविधा विश्राम

साहित्य, समाज और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरोने वाले डॉ. दयाराम आलोक द्वारा संकल्पित 'आध्यात्मिक दान अनुष्ठान' के अंतर्गत देश के 150+ मंदिर, मुक्तिधाम, गौशाला एवं विद्यालयों में सीमेंट बेंच एवं नकद सेवा अर्पित की गई है। उसी पावन श्रृंखला में प्रस्तुत है, इस स्थल पर किए गए सेवा-समर्पण का वृत्तांत।

श्री कालेश्वर मंदिर ,मेला प्रांगण सुवासरा  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल  शामगढ़ द्वारा 

बैंच -व्यवस्था 

सुवासरायां नगरे महात्मा, कालेश्वरस्य मंदिरं प्रसिद्धम्। सर्पदंशविनाशाय, विधानं तत्र पावनम्॥ गोपीलालव्यासेन, पूज्यं कर्म निरन्तरम्। सत्यनारायणपाटीदारः, समितौ नाम गौरवम्॥ दिनेशव्यासेन याचितं, आसनदानं शुभं कृतम्। दामोदरपथरीदत्तं, भक्तानां विश्रमार्थम्॥ जय जय कालेश्वरदेव, भक्तानां जीवनरक्षकः। आस्थायाः केन्द्रं नित्यं, पुण्यं धर्मस्य पालकः॥

*पावन श्लोक*

सुवासरायां नगरे महात्मा, कालेश्वरस्य मंदिरं प्रसिद्धम्।

सर्पदंशविनाशाय, विधानं तत्र पावनम्॥


गोपीलालव्यासेन, पूज्यं कर्म निरन्तरम्।

सत्यनारायणपाटीदारः, समितौ नाम गौरवम्॥


दिनेशव्यासेन याचितं, आसनदानं शुभं कृतम्।

दामोदरपथरीदत्तं, भक्तानां विश्रमार्थम्॥


जय जय कालेश्वरदेव, भक्तानां जीवनरक्षकः।

आस्थायाः केन्द्रं नित्यं, पुण्यं धर्मस्य पालकः॥

कविता मे वर्णन -

सुवासरा नगर का मेला प्रांगण, कालेश्वर मंदिर आस्था का संगम। नागदेवता की पूजा परंपरा महान, सर्पदंश मुक्ति का यहाँ विधान।

मुख्य पुजारी गोपीलाल जी व्यास, श्रद्धा से करते अनुष्ठान का प्रयास। सत्यनारायण पाटीदार समिति में नाम, भक्तों की सेवा में रखते अभिराम।

दिनेशजी व्यास ने किया अनुरोध, बेंच दान हेतु उठाया संकल्प बोध। दामोदर पथरी अस्पताल ने निभाया धर्म, भक्तों को विश्राम मिला, हुआ पुण्य कर्म।

जय बोलो भगवान कालेश्वर की, आस्था अमर रहे हर भक्त की।


समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

  साहित्य मनीषी  डॉ.दयाराम जी आलोक  राजस्थान और मध्यप्रदेश के 
मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के  मंदिरों ,मुक्ति धाम और  गौशालाओं में निर्माण व विकास  हेतु नकद और  आगंतुकों के बैठने  हेतु  सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
 डॉ.आलोक जी  एक  सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ  आध्यात्मिक दान-पथ  पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने  हेतु  सीमेंट  बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में  आपकी वो राशि भी शामिल है जो  google कंपनी से उनके ब्लॉग  और  You tube पर विडियो से  प्राप्त होती  है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें  पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.



श्री कालेश्वर मंदिर सुवासरा  सुवासरा 
दो  सीमेंट बेंच भेंट 26/1/2023






श्री कालेश्वर मंदिर सुवासरा का विडिओ 











मंदिर के सेवादार और शुभचिंतक :

सत्य नारायण जी पाटीदार 

गोपीलाल जी व्यास  मुख्य पुजारी 

दिनेश जी व्यासआर्ट  76940-77933 सुवासरा 


डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656  शामगढ़ द्वारा  कालेश्वर मंदिर सुवासरा  हेतु दान सम्पन्न 26 /1/2023 
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

*मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

*जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

*जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

*जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

*दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

श्री नृसिंह मंदिर बालोदा-शामगढ़-मंदसौर /डॉ अनिल दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 3 सिमेन्ट बेंच दान

                      


श्री नृसिंह मंदिर बालोदा, जिला मंदसौर हेतु दामोदर अस्पताल शामगढ़ द्वारा बेंच व्यवस्था और विकास दान


मालवा की पावन धरा पर बसा बालोदा ग्राम, अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित प्राचीन श्री नृसिंह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि जन-आस्था का जीवंत केंद्र है। कहा जाता है कि सतयुग के चौथे चरण में प्रदोष काल में भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार धारण किया था। उसी रौद्र और करुणामय स्वरूप की आराधना इस मंदिर में होती है, जहाँ शाम के समय विशेष पूजा में भक्तों का अपार जनसमूह उमड़ता है।
इसी आस्था को और अधिक जन-सुखद बनाने के लिए शामगढ़ के समाजसेवी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम आलोक एवं उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार दामोदर, दामोदर अस्पताल, शामगढ़ द्वारा एक छोटा सा परन्तु अत्यंत उपयोगी सहयोग किया गया है।
आध्यात्मिक दान-पथ के इसी क्रम में दिनांक 25/01/2023 को श्री नृसिंह मंदिर बालोदा में 3 सीमेंट बेंचों की व्यवस्था तथा 1501/- रुपये का विकास सहयोग प्रदान किया गया। इस दान का शिलालेख मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है, तथा सहयोग राशि श्री टीना-कन्हैया लाल प्रजापति, बालोदा के माध्यम से मंदिर समिति को दिनांक 30/01/2023 को समर्पित की गई।
यह दान केवल बेंचों का दान नहीं है, यह वृद्धजनों, यात्रियों और दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए एक सुखद आश्रय है। यह डॉ. आलोक जी के उस वृहद संकल्प का एक हिस्सा है, जिसके अंतर्गत उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी पेंशन राशि को तथा अपने ब्लॉग एवं यूट्यूब से प्राप्त आय को मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झालावाड़ और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में जन-सुविधाओं के विकास हेतु समर्पित किया है।
इस पुण्य कार्य में मंदिर के संस्थापक श्री जितेन्द्र सिंह जी चंद्रावत, रावला, समिति सदस्य श्री कुलदीप जी सोलंकी एवं दान पट्ट को ससम्मान स्थापित करने वाले मिस्त्री श्री श्यामलाल जी विश्वकर्मा का सहयोग सराहनीय रहा।
प्रस्तुत ब्लॉग इस छोटे से सहयोग की कथा नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे एक शिक्षक की पेंशन, जब सेवा भाव से जुड़ती है तो वह सैकड़ों लोगों के लिए सुख का कारण बन जाती है।
नृसिंहदेवाय नमो नमः।

श्री नृसिंह  मंदिर बालोदा जिला मंदसौर हेतु 

दामोदर अस्पताल शामगढ़ द्वारा

 बेंच व्यवस्था और विकास दान 


छंद 1 बालोदा ग्राम की पावन धरती, नृसिंह मंदिर आस्था भरती। डॉ. आलोक ने दान दिखाया, बेंच व्यवस्था से सुख फैलाया।

छंद 2 चंद्रावत कुल ने मंदिर रचाया, भक्तों ने श्रद्धा का दीप जलाया। सीमेंट बेंचें, दान महान, जन-सेवा का अनुपम विधान।

छंद 3 पेंशन त्याग जनहित में किया, मंदिरों में सुविधा का दिया। दान पट्ट श्यामलाल ने सजाया, समिति ने सम्मान दिलाया।

छंद 4 मंदसौर से रतलाम तक छाया, आगर-नीमच में पुण्य फैलाया। आध्यात्मिक पथ आलोक महान, सेवा-दान से बढ़ा सम्मान।

श्लोक 

नृसिंहदेवाय नमो नमस्ते भक्तप्रह्लादरक्षकाय ते। दानेन बेंचाः प्रदत्ताः शुभाः जनसुखाय सदा भवतु॥

आलोकाचार्यः समाजसेवी पेंशनधनं समर्प्य यः। मन्दिरेषु बेंचदानं जनहिताय सदा स्थितः॥

शिलालेखेन यः कीर्तितो दानकर्त्ता सदा स्मृतः। नृसिंहमन्दिरे पुण्यं लोकहिताय प्रतिष्ठितम्॥

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयारा
म आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


श्री नृसिंह  मंदिर बालोदा जिला मंदसौर 
3 सीमेंट बेन्च +1501/- रुपये दान 


मंदिर मे शिलालेख लगा 25/1/2023





श्री नरसिंग मंदिर बलोदा के निमित्त टीना -कन्हैया लाल  प्रजापति  बालोदा  के अकाउंट मे 1500/-फोन पे किया| 30/1/2023 




नृसिंह अवतार सतयुग के चौथे चरण में हुआ था। ये भगवान विष्णु के रौद्र रूप का अवतार है। भगवान विष्णु अपने भक्त प्रहलाद को दैत्य हिरण्यकश्यप से बचाने के लिए इस रूप में प्रकट हुए। ये अवतार प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए शाम को भगवान नरसिंह की विशेष पूजा होती है।

मंदिर के शुभचिंतक 

जितेंद्र सिंह जी चंद्रावत  रावले  मंदिर संस्थापक 

कुलदीपजी  सोलंकी बालोदा  समिति सदस्य 

शामलाल जी विश्व कर्मा  मिस्त्री  ने दान दाता का  दान पट्ट स्थापित किया 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656  शामगढ़ द्वारा  नृसिंह मंदिर बलोदा  हेतु दान सम्पन्न 28 /1/2023 
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"शेष नाग मंदिर दुर्गावास: श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु नई बेंच व्यवस्था :डॉ. आलोक का प्रेरणादायी दान":Durgawas Shankhoddhar mandir

आध्यात्मिक दान अनुष्ठान
भारतीय संस्कृति में दान को केवल परोपकार नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का सोपान माना गया है। दानम् एकम् कलौ युगे - इस शास्त्र वचन को जीवन का ध्येय बनाकर साहित्य मनीषी, समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक ने एक मौन किन्तु महनीय आध्यात्मिक यात्रा का संकल्प लिया है।
इस आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के अंतर्गत उनके द्वारा अब तक 150 से अधिक पावन स्थलों - देवालयों, मुक्तिधामों, गौशालाओं और विद्यालयों में विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचों की भेंट तथा यथाशक्ति नकद सहयोग समर्पित किया गया है। यह दान किसी प्रदर्शन का विषय नहीं, बल्कि लोक-मंगल की भावना से किया गया एक विनम्र सेवा-यज्ञ है।
जहाँ मंदिर में बैठा थका पथिक क्षण भर प्रभु का स्मरण कर सके, जहाँ मुक्तिधाम में शोकाकुल मन को दो पल बैठने का सहारा मिले, जहाँ गौशाला में सेवा-भाव दृढ़ हो और जहाँ विद्यालय में ज्ञान की साधना करने वाले बालक विश्राम पा सकें - इसी उद्देश्य से यह सेवा-यात्रा सतत जारी है।
प्रस्तुत लेख इसी अनुष्ठान की एक कड़ी है। इस स्थल का परिचय, उसका महत्व और वहाँ सेवा समर्पण का भाव - इस आलेख में संकलित है।
- डॉ. दयाराम आलोक
दुर्गावास,शंखोद्धार तहसील गरोठ जिला मंदसौर के मन्दिर में

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा

सीमेंट बैंच व्यवस्था



मंदिर के गेट के पिलर पर दान पट्टी स्थापित 

दुर्गावास नगरी में, नागदेव का धाम महान,  
श्रद्धा से गूंजे आँगन, भक्तों का हो सम्मान।  

सीमेंट बेंचें सजीं यहाँ, विश्राम का उपहार,  
दामोदर पथरी अस्पताल ने किया पुण्य विस्तार।  

गेट पर पट्टिका दमके, सेवा का हो प्रमाण,  
डॉ. आलोक के आदर्शों से, अनिल राठौर का दान।  

टाइलों से सजा प्रांगण, वृक्षों की हरियाली,  
कालेश्वर की कृपा से मिटे, विषदंश की काली।  

जय नागदेव कालेश्वर, दुर्गावास का गौरव गान,  
मेला लगे प्रतिवर्ष यहाँ, भक्त करें गुणगान।  

श्लोक 

नागदेवाय कालेश्वराय नमः ।
भक्तजनानां रक्षणाय, विषदंशनिवारणाय च ॥

दानं बेंचसमर्पणं, भक्तानां विश्रान्तये ।
आलोकस्य आदर्शेभ्यः, राठोरेण समर्पितम् ॥

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के अंतर्गत दुर्गावास  का नाग मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और परंपरा से परिपोषित  हिंदुओं की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि  यहाँ सांप या अन्य जहरीले जंतुओं  के काटे लोगों को लाया जाता है और भगवान कालेश्वर  उनकी जीवन रक्षा करते हैं। मंदिर के  प्रांगण  मे टाइल्स लगी हुई हैं। कुछ हरे भरे वृक्ष भी  लगे हुए हैं। ढलमु  निवासी जगदीश जी रामचन्द्र पाटीदार ने इस क्षेत्र के कई  मंदिरों  मे सिमेन्ट बेंच लगवाने हेतु मुझे सुझाव  भी दिया और हमारी दान पट्टिकाऐं मंदिरों मे स्थापित करने का कार्य भी किया है . यहाँ के पुजारी पुरुषोत्तम जी शर्मा एक विद्वान व्यक्ति हैं मंदिर का प्रबंधन कुशलतापूर्वक कर रहे हैं । विडिओ मे  उनसे लिए गए इंटर व्यू  को शामिल किया गया है। समाजसेवी डॉ  दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ  अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा इस मंदिर मे भक्तों के बैठने के लिए 3 सिमेन्ट की बेंचें लगवा दी गई हैं। बोलिये  नाग देव कालेश्वर  शंखोंद्धार  दुर्गावास  की जय ! 


यहाँ प्रतिवर्ष मेला लगता है




 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


साहित्य मनीषी

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का



आध्यात्मिक दान-पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


दुर्गावास शंखोद्धार का नागदेव  मन्दिर 

तीन बेंच +१५००/- का दान 

दुर्गावास के नाग मंदिर का विडियो  आलोक की आवाज 



Nagdev mandir Durgawas Bench View 18/4/2023



दुर्गावास के नागदेव मन्दिर हेतु १५००/- नकद दान की रसीद



गेट पर भगवा कलर किया गया 



दुर्गावास मन्दिर में भगवान् की मूर्ति


दुर्गावास  मंदिर का विडियो 
मन्दिर में लगी बेंचों का दृश्य
  

दुर्गावास मन्दिर का फोटो 




दुर्गावास मन्दिर के शुभचिंतक और समर्पित कार्यकर्ता -

जगदीश जी पाटीदार ९८२६६-८९२१० ढल्मु

प्रकाश जी पाटीदार ९६६९०-६४६१२  साठीया

राजेन्द्र जी पाटीदार साठिया  ८१२०४-७६१०५ 

दिनेशजी पाटीदार  चचावदा ९८९३७-०८२१३ 
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

1.6.23

मुक्ति धाम सुसनेर : मानव का अंतिम विश्राम :आगंतुक सुविधा सम्मान:आलोकजी का आसन दान :muktidham susner

साहित्य, समाज और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरोने वाले डॉ. दयाराम आलोक द्वारा संकल्पित 'आध्यात्मिक दान अनुष्ठान' के अंतर्गत देश के 150+ मंदिर, मुक्तिधाम, गौशाला एवं विद्यालयों में सीमेंट बेंच एवं नकद सेवा अर्पित की गई है। उसी पावन श्रृंखला में प्रस्तुत है, इस स्थल पर किए गए सेवा-समर्पण का वृत्तांत।
सुसनेर जिला आगर ,मध्य प्रदेश के मुक्ति धाम हेतु

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा

बेंच व्यवस्था

सुसनेर नगर का मुक्तिधाम, जहाँ थमती हैं जीवन की साँसें। नितेशजी सोनी की देखरेख में, फैल रही है विकास की आभा।

हरे-भरे वृक्षों की छाया, दिनेशजी टेलर का स्नेहिल संरक्षण। बरामदे में श्रद्धांजलि सभा, जहाँ स्मृतियाँ पाती हैं सम्मान।

डॉ. आलोक के आदर्शों से प्रेरित, डॉ. अनिल राठौर का पावन दान। बारह सिमेन्ट बेंचों का उपहार, आगंतुकों को मिला विश्राम।

दान पट्ट हुआ स्थापित, समिति ने किया अभिनंदन। सेवा और श्रद्धा का संगम, मुक्तिधाम बना पुण्य धाम।

 श्लोक -   

                                                                                                                                                     सुसनेर नगरं पुण्यं, मुक्तिधामं मनोहरम्।  

नितेशेन सोनीनाय, विकासः संप्रवर्धते॥  

दिनेशेन वृक्षपालनं, हरितच्छायया युतम्।  

बरामदं श्रद्धासभा, यत्र स्मृत्याः सदा स्थिराः॥  

आलोकस्य आदर्शेभ्यः, प्रेरितोऽनिलराठौरः।  

ददौ बेंचद्वादशं, भक्तानां विश्रमार्थम्॥  

दानपट्टे प्रतिष्ठाय, समिति सम्मानितव्रतम्।  

सेवा श्रद्धा च संयुक्तं, मुक्तिधामं दिवं धाम॥  


 



समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक






शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
मं

 

सुसनेर के  मुक्तिधाम मे
 10 सीमेंट बेन्च भेंट 

 Susner Muktidham Video
                                               

मुक्तिधाम सुसनेर मे दान-पट्टिका और समिति के सदस्य 



  सुसनेर मुक्तिधाम मे बेंच लगाई गईं                                       


मुक्ति धाम सुसनेर के शुभचिंतक -

सुरेश कुमारजी चौहान पंचायत सचिव -99260-23152 सुसनेर 

दिनेश कुमार जी चौहान 

घनश्याम जी गोयल  मेडिकल 

नितेशजी सोनी- 99810-61290 मुक्तिधाम समिति सुसनेर के अध्यक्ष हैं.

डॉ.अनिल कुमार दामोदर  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा सुसनेर के मुक्तिधाम हेतु  12  सिमेन्ट बेंच दान सम्पन्न 

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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि