श्री नृसिंह मंदिर बालोदा, जिला मंदसौर हेतु दामोदर अस्पताल शामगढ़ द्वारा बेंच व्यवस्था और विकास दानमालवा की पावन धरा पर बसा बालोदा ग्राम, अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित प्राचीन श्री नृसिंह मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि जन-आस्था का जीवंत केंद्र है। कहा जाता है कि सतयुग के चौथे चरण में प्रदोष काल में भगवान विष्णु ने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार धारण किया था। उसी रौद्र और करुणामय स्वरूप की आराधना इस मंदिर में होती है, जहाँ शाम के समय विशेष पूजा में भक्तों का अपार जनसमूह उमड़ता है।इसी आस्था को और अधिक जन-सुखद बनाने के लिए शामगढ़ के समाजसेवी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम आलोक एवं उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार दामोदर, दामोदर अस्पताल, शामगढ़ द्वारा एक छोटा सा परन्तु अत्यंत उपयोगी सहयोग किया गया है।आध्यात्मिक दान-पथ के इसी क्रम में दिनांक 25/01/2023 को श्री नृसिंह मंदिर बालोदा में 3 सीमेंट बेंचों की व्यवस्था तथा 1501/- रुपये का विकास सहयोग प्रदान किया गया। इस दान का शिलालेख मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है, तथा सहयोग राशि श्री टीना-कन्हैया लाल प्रजापति, बालोदा के माध्यम से मंदिर समिति को दिनांक 30/01/2023 को समर्पित की गई।यह दान केवल बेंचों का दान नहीं है, यह वृद्धजनों, यात्रियों और दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए एक सुखद आश्रय है। यह डॉ. आलोक जी के उस वृहद संकल्प का एक हिस्सा है, जिसके अंतर्गत उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी पेंशन राशि को तथा अपने ब्लॉग एवं यूट्यूब से प्राप्त आय को मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झालावाड़ और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में जन-सुविधाओं के विकास हेतु समर्पित किया है।इस पुण्य कार्य में मंदिर के संस्थापक श्री जितेन्द्र सिंह जी चंद्रावत, रावला, समिति सदस्य श्री कुलदीप जी सोलंकी एवं दान पट्ट को ससम्मान स्थापित करने वाले मिस्त्री श्री श्यामलाल जी विश्वकर्मा का सहयोग सराहनीय रहा।प्रस्तुत ब्लॉग इस छोटे से सहयोग की कथा नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि कैसे एक शिक्षक की पेंशन, जब सेवा भाव से जुड़ती है तो वह सैकड़ों लोगों के लिए सुख का कारण बन जाती है।नृसिंहदेवाय नमो नमः।श्री नृसिंह मंदिर बालोदा जिला मंदसौर हेतु
दामोदर अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बेंच व्यवस्था और विकास दान

छंद 1
बालोदा ग्राम की पावन धरती,
नृसिंह मंदिर आस्था भरती।
डॉ. आलोक ने दान दिखाया,
बेंच व्यवस्था से सुख फैलाया।
छंद 2
चंद्रावत कुल ने मंदिर रचाया,
भक्तों ने श्रद्धा का दीप जलाया।
सीमेंट बेंचें, दान महान,
जन-सेवा का अनुपम विधान।
छंद 3
पेंशन त्याग जनहित में किया,
मंदिरों में सुविधा का दिया।
दान पट्ट श्यामलाल ने सजाया,
समिति ने सम्मान दिलाया।
छंद 4
मंदसौर से रतलाम तक छाया,
आगर-नीमच में पुण्य फैलाया।
आध्यात्मिक पथ आलोक महान,
सेवा-दान से बढ़ा सम्मान।
श्लोक
नृसिंहदेवाय नमो नमस्ते
भक्तप्रह्लादरक्षकाय ते।
दानेन बेंचाः प्रदत्ताः शुभाः
जनसुखाय सदा भवतु॥
आलोकाचार्यः समाजसेवी
पेंशनधनं समर्प्य यः।
मन्दिरेषु बेंचदानं
जनहिताय सदा स्थितः॥
शिलालेखेन यः कीर्तितो
दानकर्त्ता सदा स्मृतः।
नृसिंहमन्दिरे पुण्यं
लोकहिताय प्रतिष्ठितम्॥
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम आलोक

शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

श्री नृसिंह मंदिर बालोदा जिला मंदसौर
3 सीमेंट बेन्च +1501/- रुपये दान
मंदिर मे शिलालेख लगा 25/1/2023
श्री नरसिंग मंदिर बलोदा के निमित्त टीना -कन्हैया लाल प्रजापति बालोदा के अकाउंट मे 1500/-फोन पे किया| 30/1/2023
नृसिंह अवतार सतयुग के चौथे चरण में हुआ था। ये भगवान विष्णु के रौद्र रूप का अवतार है। भगवान विष्णु अपने भक्त प्रहलाद को दैत्य हिरण्यकश्यप से बचाने के लिए इस रूप में प्रकट हुए। ये अवतार प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए शाम को भगवान नरसिंह की विशेष पूजा होती है।
मंदिर के शुभचिंतक
जितेंद्र सिंह जी चंद्रावत रावले मंदिर संस्थापक
कुलदीपजी सोलंकी बालोदा समिति सदस्य
शामलाल जी विश्व कर्मा मिस्त्री ने दान दाता का दान पट्ट स्थापित किया
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा नृसिंह मंदिर बलोदा हेतु दान सम्पन्न 28 /1/2023
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