शनि देव मंदिर की पावन छाया, दूधाखेड़ी माता चौराहे पर आया। भक्तों के विश्राम का सुंदर विधान, डॉ. आलोक का अद्भुत दान।
पेंशन की राशि, तप का संकल्प, जनसेवा में उनका अनुपम विकल्प। पुत्र अनिल संग दामोदर पथरी, दान-पथ पर चली जीवन गाथा गंभीर।
मंदसौर, नीमच, रतलाम, झालावाड़, गौशालाएँ, मंदिर, मुक्तिधाम अपार। सीमेंट बेंचें बनें श्रद्धा का प्रतीक, आलोक जी का दान रहे सदा अद्वितीय।
श्लोक-
दानं धर्मस्य मूलं हि, लोकहिताय समर्पितम्। आलोकस्य महादेयं, भक्तजनस्य सुखाय च॥ शनि देवालये पुण्ये, आसनानि प्रदत्तानि। विश्रान्तिं जनभक्तानां, साधुकार्यं प्रशस्यते॥

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
@Dr.Dayaram Aalok :Shani Dev Hinduon ke pramukh devata hain. Vigat kuchh varshon se shani dev ke bhakto ki sankhya badh rahi hai.Jagah Jagah shanidev ke mandiron ka nirmaan ho raha hai| Aisa hi ek mandir madhya pradesh ke prasiddh Dudhakhedi Mata ke mandir ke chouraha ke paas sthit hai | is mandir me bhakton ke baithne ki suvidha ke liye Dr.Dayaram ji Aalok ke aadarshon se prerit putra Dr.Anil kumar rathore ,Damodar Pathri Hospital Shamgarh 9826795656 ne is mandir ko 5 sement bench bhent ki hain.Santosh ji joshi is mandir ke pujari hain.Satya Narayan ji parmar tailor Babulda ke sahyog se Shilalekh lagaya gaya.
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा शनि देव मंदिर दूधा खेड़ी माता जी चौराहा हेतु दान सम्पन्न
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मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ-शिवमंगल सिंह 'सुमन
सरहदें बुला रहीं.- डॉ॰दयाराम आलोक
हम पंछी उन्मुक्त गगन के-शिवमंगल सिंह 'सुमन'
सूरदास के पद
रात और प्रभात.-डॉ॰दयाराम आलोक
घाघ कवि के दोहे -घाघ
मुझको भी राधा बना ले नंदलाल - बालकवि बैरागी
बादल राग -सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
आओ आज करें अभिनंदन.- डॉ॰दयाराम आलोक
प्रेयसी-सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
साँसो का हिसाब -शिव मंगल सिंग 'सुमन"
राम की शक्ति पूजा -सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
गांधी के अमृत वचन हमें अब याद नहीं - डॉ॰दयाराम आलोक
बिहारी कवि के दोहे
रात और प्रभात.-डॉ॰दयाराम आलोक
कबीर की साखियाँ - कबीर
सरहदें बुला रहीं.- डॉ॰दयाराम आलोक
बीती विभावरी जाग री! jai shankar prasad
हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
उन्हें मनाने दो दीवाली-- डॉ॰दयाराम आलोक
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