सोयत कलां जिला आगर ,मध्य प्रदेश के
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर ,
चौसठ जोगनिया मंदिर ,
और मुक्तिधाम में
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बैंच व्यवस्था
छंद 1 सोयतकलां की पावन धरती, नर्मदेश्वर महादेव विराजे। भक्तों की सेवा हेतु यहाँ, दान की गाथा जग में साजे।
छंद 2 चौसठ जोगनिया माता का, मंदिर प्राचीन, गौरव महान। बेंच व्यवस्था से भक्तों को, मिलता विश्राम, मिलता सम्मान।
छंद 3 पिपलियाखेड़ा हनुमान धाम, श्रद्धा का अद्भुत संगम है। डॉ. आलोक के पुण्य कार्य से, भक्तों का जीवन मंगलम है।
छंद 4 मुक्तिधाम में शांति का वास, दान से बढ़ा जनकल्याण। समिति ने आभार जताया, साकार हुआ पुण्य अभियान।
श्लोक
सोयतकलां नगरं रम्यं, नर्मदेश्वर महेश्वरः। चौषष्टियोगिन्याः देव्या, हनुमानं च पूज्यते॥ आलोकस्य कृपादानेन, बेंचाः भक्तान् प्रदत्ताः। विश्रान्तिं जनसंसिद्ध्यै, पुण्यं कार्यं सुसम्पदम्॥
सोयतकलाँ, मध्य प्रदेश का एक सुंदर नगर, जिसमें माँ चौसठ जोगनिया और पिपलिया खेड़ा हनुमान मंदिर जैसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल हैं। डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा इन मंदिरों को दान की गई 6 सिमेन्ट की बेंचें भक्तों के लिए एक अच्छा कदम है यह कंठाल नदी के किनारे बसा हुआ है। सोयतकलां में माँ चौसठ जोगनिया का प्राचीनतम मंदिर स्थित है| सोयतकलां के समीप ही प्राचीन श्री हनुमान मंदिर है जो कि पिपलिया का खेड़ा नाम के गाँव में स्थित है इसी कारण इन्हें पिपलियाखेड़ा हनुमान मंदिर के नाम से भी जाना जाता है |
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -





कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें