मंदसौर जिले के गाँव रलायती के
दशरथ जी रलायती मंदिर के प्रहरी महान, प्रबंधक बनकर निभाते धर्म का सम्मान। श्रद्धा से सजता मंदिर का द्वार, उनकी सेवा से बढ़ता आस्था का संसार।
दिनेश जी चौहान समाजसेवी प्रेरणा के दीप, दान हेतु जगाते जन-जन का सलीक। लसुडिया ग्राम से उठी पुकार, सेवा-भाव से जगमगाता संसार।
डॉ. दयाराम जी आलोक दानपथ के उज्ज्वल दीप, पेंशन समर्पण से बने समाज के अतीव। मंदिर, मुक्ति धाम, गौशाला में छाया, उनके दान से धर्म का दीपक जगमगाया।
संरक्षक, प्रेरक और दानदाता का मेल, मंदिर में गूंजे पुण्य का खेल। भक्ति, सेवा और दान का संगम, धर्मस्थल बनता पुण्य का अंगन।
दशरथः रलायती धर्मरक्षकः सदा । मन्दिरस्य प्रबन्धेन यशः पुण्यं वर्धते ॥
रलायती का शिव मंदिर मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के अंतर्गत आता है।
आद्यात्मिक दान-पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -

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