आगर के मोती सागर तालाब के बंबई घाट मुक्तिधाम हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बेंच की व्यवस्था
आगर मालवा का मुक्ति धाम
मोती सागर के तट पर, मुक्ति धाम का उज्ज्वल स्वरूप, टाइलों से सजा प्रांगण, भोलेनाथ की प्रतिमा का अनुपम रूप।
सभा भवन में गूँजती श्रद्धांजलि, करुणा की छाया में अंतिम यात्रा, चद्दर शेड में शरण पाते श्रद्धालु, मानवता का यह अद्भुत साधना।
डॉ. आलोक का पावन दान, दस बेंचों का अमूल्य उपहार, समिति ने पट्ट स्थापित कर दिया संदेश— "दान से धाम, सेवा से नाम"।
श्लोक
मोतीसागरतीरे रम्यं मुक्तिधामं मनोहरम्। भवत्यत्र शिवप्रतिमा भक्तानां मोदकारणम्॥ सभागृहे श्रद्धाञ्जलिः अन्त्ययात्रायाः समर्पिता। आलोकस्य दानं पुण्यं बञ्चकाः सेवया युताः॥
३१ हजार रुपये के दान का शिलालेख
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

आगर के मोती सागर तालाब के
बंबई घाट मुक्ति धाम के लिए



