30.12.23

दूधाखेडी माता मंदिर फूलखेडा -गरोठ -मंदसौर/डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 4 बेंच दान

दूधाखेडी माता मंदिर फूलखेडा(गरोठ) में 

समाज सेवी डॉ.आलोक जी शामगढ़  द्वारा 

सीमेंट  बैंच व्यवस्था 





मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


साहित्य मनीषी


डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

अभिनव  दान-अनुष्ठान


साथियों,

शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है|
परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६  वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


     My You Tube Channel address :



फूल खेडा(गरोठ) के दूधाखेडी मंदिर 


१२५५१ रुपये की ४ सीमेंट बेंचें भेंट 








विडियो  दूध खेडी माताजी मंदिर फुल खेडा 



मंदिर के सेवादार 

पिंकेशजी  बैरागी फूलखेडा पुजारी  ९०९८५-६३२०९ 

शम्भुसिंग जी सरपंच  फुल खेडा 

सुनील जी  विश्व कर्मा  फूल खेडा 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा फूल खेडा  क दूधाखेडी  के मंदिर   हेतु दान सम्पन्न २८/१२/२०२३ 
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29.12.23

सकल जाति भेरूजी मंदिर रूंडी घसोई -सुवासरा-मंदसौर/ डॉ.दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 4 बेंच समर्पित

 जगत भेरूजी महाराज का  मंदिर रूंडी  घसोई  में 

दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा 

सीमेंट  बैंच व्यवस्था 




घसोई के जगत भेरुजी महाराज एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है, जो मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील में स्थित है। यहाँ की जानकारी निम्नलिखित है:

भेरुजी महाराज की विशेषताएं:

- हिंदू धर्म की मान्यतानुसार प्रत्येक कुल और गोत्र के भेरू महाराज होते हैं
- वर्ष के एक अवसर पर अधिकांश लोग अपने भेरुजी की पूजा आराधान करने के लिए आते हैं
- भेरुजी महाराज की पूजा के विधि विधान सामाजिक रूढ़ियों के अनुसार भिन्न भिन्न हैं

भेरुजी महाराज की पूजा विधि:


- प्रातः काल स्नान आदि के बाद भैरव बाबा के मंदिर जाकर उनकी पूजा-अर्चना करनी
- बाबा के मंदिर में इमरती, जलेबी, उड़द की दाल, पान व नारियल का भोग लगाना
- कालभैरवाष्टक का पाठ करने से बाबा भैरव प्रसन्न होते हैं

भेरुजी महाराज का महत्व:


- काल भैरव को शिव का प्रचंड स्वरुप माना जाता है, जिनका पूजन दुश्मनों को पराजित करने के लिए किया जाता है
- काल  भैरव का पूजन पिछली कई सदियों से किया जा रहा है
- देवी शक्ति के कोतवाल के रूप में पूजा जाता है

मंदिर की सुविधाएं:

- मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं
- नीचे सड़क के पास धर्मशाला भी बनी हुई है

 डॉ.दयाराम आलोकजी का दान-

मंदिर के महात्म्य की जानकारी के बाद साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम आलोक जी के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर जो दामोदर पथरी अस्पताल के संचालक हैं के माध्यम से इस मंदिर को 4 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित की गई हैं| 
मंदिर समिति के सदस्यों और राजेन्द्र जी धनोतीया  ने दान दाता का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया |बाबा काल भैरव की जय !



जगत  भेरूजी मंदिर -बैंच दृश्य 

 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 


परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६  वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|


जगत भेरूजी महाराज का मंदिर  घसोई हेतु 


 ४ सीमेंट बेंचें भेंट 








भैरव जी की उपासना से न केवल भयंकर विपत्तियां टलती हैं, बल्कि भूत-प्रेत सम्बन्धित बाधाओं का भी निवारण होता है, यही नहीं, भैरव जी की उपासना से क्रूर ग्रहों की पीड़ा से भी मुक्ति मिलती है। अगर कोई व्यक्ति शनि, राहु, केतु द्वारा निर्मित ग्रह दोषों से परेशान है, तो उसे भैरव जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए।
भगवान काल भैरव का महामंत्र ऐसे में जीवन से जुड़े सभी प्रकार के भय और दु:खों से मुक्ति पाने के लिए कालभैरवाष्टमी पर नीचे दिए गए मंत्रों का पूरी आस्था और विश्वास के साथ जप जरूर करें.
ॐ कालभैरवाय नम:।। ॐ भयहरणं च भैरव:।। ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्।

घसोई  के भेरूजी महाराज मंदिर  के शुभचिन्तक

श्री राजेंद्र जी धनोतिया पत्रकार ,घसोई  ९५१६४-९३४१४ 

श्री दशरथ जी जैन घसोई 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा jagat bheru ji mandir Ghasoi  हेतु दान सम्पन्न २८/१२/२०२३ 

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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

13.12.23

कायस्थ जाती के बारे में पूरी जानकारी




मूलतः कायस्थों के ऋषि गोत्र ये हैं :-

कश्यप, वत्स, वशिष्ठ, शांडिल्य, हुलस, हर्षल, भारद्वाज, अत्रि।
हिन्दू मिताक्षरा के अनुसार सगोत्र की मान्यता सात पीढ़ी तक रहती है और ऋषियों का अवसान हुये कई हजार वर्ष बीत गये हैं तो अब यह सगोत्र नहीं माना जायेगा। ये सब ऋषि भी मूलतः बृह्मा व मनु से उत्पन्न हुये हैं उस दृष्टि से तो हम सब के पिता एक ही थे।
जहाँ तक विवाह संबंधों की बात है तो वहाँ ऋषि गोत्र जिसे कुल गोत्र भी कहा गया है,नहीं अपितु पिंड गोत्र या परिवार गोत्र जिसे हम अल्ल कहते हैं को मिलाया जाता है ताकि परिवार समूह में अंतर जान सकें और ऐक ही परिवार समूह में विवाह न हो जाये।
Kayastha कायस्थ , एक 'उच्च' श्रेणी की जाति है हिन्दुस्तान में रहने वाले सवर्ण हिन्दू हैं ।चित्रगुप्त वंशी क्षत्रियो को ही कायस्थ कहा जाता है। स्वामी वेवेकानंद ने अपनी जाती की व्याख्या कुछ इस प्रकार की है :-
एक बार स्वामी विवेकानन्द से भी एक सभा में उनसे उनकी जाति पूछी गयी थी। अपनी जाति अथवा वर्ण के बारे में बोलते हुए 
यदि मेरी जाति की गणना छोड़ दी जाये, तो भारत की वर्तमान सभ्यता का शेष क्या रहेगा ? अकेले बंगाल में ही मेरी जाति में सबसे बड़े कवि, सबसे बड़े इतिहास वेत्ता, सबसे बड़े दार्शनिक, सबसे बड़े लेखक और सबसे बड़े धर्म प्रचारक हुए हैं।मेरी ही जाति ने वर्तमान समय के सबसे बड़े वैज्ञानिक (जगदीश चंद्र बसु) से भारत वर्ष को विभूषित किया है।
’’स्मरण करो एक समय था जब आधे से अधिक भारत पर कायस्थों का शासन था।
कश्मीर में दुर्लभ बर्धन कायस्थ वंश, काबुल और पंजाब में जयपाल कायस्थ वंश, गुजरात में बल्लभी कायस्थ राजवंश, दक्षिण में चालुक्य कायस्थ राजवंश, उत्तर भारत में देवपाल गौड़ कायस्थ राजवंश तथा मध्य भारत में सतवाहन और परिहार कायस्थ राजवंश सत्ता में रहे हैं। हम सब उन राजवंशों की संतानें हैं.
हम बाबू बनने के लिए नहीं, हिन्दुस्तान पर प्रेम, ज्ञान और शौर्य से परिपूर्ण उस हिन्दू संस्कृति की स्थापना के लिए पैदा हुए हैं ।जिन्होंने हमें जन्म दिया है। यही वह ऐतिहासिक वर्ग है जो श्रीचित्रगुप्तजी का वंशज है। इसी वर्ग की  चर्चा सबसे पुराने पुराण और वेद करते हैं।
यह वर्ग 12 उप-वर्गो में विभजित किया गया है। यह 12 वर्ग श्रीचित्रगुप्तजी की पत्नियो देवी शोभावति और देवी नन्दिनी के 12 सुपुत्रो के वंश के आधार पर है।
 कायस्थो के इस वर्ग की उपस्थिती वर्ण व्यवस्था में उच्चतम है। .
   पौराणिक उत्पत्त्ति कायस्थों का स्त्रोत भग्गवान श्री चित्रगुप्तजी महाराज को माना जाता है |कहा जाता है कि ब्रह्मा ने चार वर्ण बनाये ( ब्राह्मण , क्षत्रीय, वैश्य, शूद्र) तब यमराज ने उनसे मानवों का विवरण रखने मे सहायता मांगी।
फिर ब्रह्मा 11००० वर्षों के लिये ध्यानसाधना मे लीन हो गये और जब उन्होने आँखे खोली तो एक पुरुष को अपने सामने कलम, दवात-स्याही, पुस्तक तथा कमर मे तलवार बाँधे पाया। तब ब्रह्मा जी ने कहा कि "हे पुरुष! क्योकि तुम मेरी काया से उत्पन्न हुए हो, इसलिये तुम्हारी संतानो को कायस्थ कहा जाएगा। और जैसा कि तुम मेरे चित्र (शरीर) मे गुप्त (विलीन) थे इसलिये तुम्हे चित्रगुप्त कहा जाएगा " श्री चित्रगुप्त जी को महा शक्तिमान क्षत्रीय के नाम से सम्बोधित किया गया है.
श्री चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुये,
पहली पत्नी सूर्यदक्षिणा / नंदिनी जो सूर्य के पुत्र श्राद्धदेव की कन्या थी, इनसे 4 पुत्र हुए।
दूसरी पत्नी ऐरावती / शोभावति धर्मशर्मा (नागवन्शी क्षत्रिय) की कन्या थी, इनसे 8 पुत्र हुए।
कायस्थ की 12 शाखाएं हैं - श्रीवास्तव, सूर्यध्वज, वाल्मीक, अष्ठाना, माथुर, गौड़, भटनागर, सक्सेना, अम्बष्ठ, निगम, कर्ण, कुलश्रेष्ठ |
इन बारह पुत्रों का वृतांत अहिल्या, कामधेनु, धर्मशास्त्र एवं पुराणों में भी दिया गया है | श्री चित्रगुप्तजी महाराज के बारह पुत्रों का विवाह नागराज बासुकी की बारह कन्याओं से सम्पन्न हुआ, जिससे कि कायस्थों की ननिहाल नागवंश मानी जाती है और नागपंचमी के दिन नाग पूजा की जाती है | माता नंदिनी के चार पुत्र काश्मीर के आस -पास जाकर बसे तथा ऐरावती / शोभावति के आठ पुत्र गौड़ देश के आसपास बिहार, उड़ीसा, तथा बंगाल में जा बसे |
बंगाल उस समय गौड़ देश कहलाता था ।
पदम पुराण में इसका उल्लेख किया गया है | माता सूर्यदक्षिणा / नंदिनी के पुत्रों का विवरण -

1 - भानु (श्रीवास्तव) -

 श्री भानु माता नंदिनी के जेष्ठ पुत्र थे | उनका राशि नाम धर्मध्वज था | श्री भानु मथुरा में जाकर बसे | इसलिये भानु परिवार वाले माथुर कायस्थ कहलाने के साथ - साथ सूर्यवंशी भी कहलाये |

2 - विभानु (सूर्यध्वज) - 

भटनागर उत्तर भारत में प्रयुक्त होने वाला एक जाति नाम है, जो कि हिन्दुओं की कायस्थ जाति में आते है। इनका प्रादुर्भाव यमराज, मृत्यु के देवता, के पाप पुण्य के अभिलेखक, श्री चित्रगुप्त जी की प्रथम पत्नी दक्षिणा नंदिनी के द्वितीय पुत्र विभानु के वंश से हुआ है। उनकी राशि का नाम श्यामसुंदर था | विभानु को चित्राक्ष नाम से भी जाना जाता है। महाराज चित्रगुप्त ने इन्हें भट्ट देश में मालवा क्षेत्र में भट नदी के पास भेजा था। इन्होंने वहां चित्तौर और चित्रकूट बसाये। ये वहीं बस गये और इनका वंश भटनागर कहलाया। इनका वास स्थान भारत के वर्तमान पंजाब प्रदेश में भट्ट प्रदेश था। इनकी पत्नी का नाम मालिनी था। उपासना देवी- जयन्ती

3 - विश्वभानु (बाल्मीकि) -

 श्री विश्वभानु माता नंदिनी के तृतिय पुत्र थे | उनका राशि नाम दीनदयाल था | श्री विश्वभानु का परिवार गंगा - यमुना दोआब, जिसको प्राचीन काल में साकब द्वीप कहते थे, में जाकर बसे | इसलिये विश्वभानु परिवार वाले सक्सेना कायस्थ कहलाने के साथ - साथ सूर्यवंशी भी कहलाये |

4 - वीर्यभानू (अष्ठाना) - 

श्री वीर्यभानू माता नंदिनी के सबसे छोटे पुत्र थे | उनका राशि नाम माधवराव था | श्री वीर्यभानू का परिवार बांस देश (काश्मीर), में जाकर बसे | इसलिये वीर्यभानू परिवार वाले श्रीवास्तव कायस्थ कहलाने के साथ - साथ सूर्यवंशी भी कहलाये |
माता ऐरावती / शोभावति के पुत्रों का विवरण

1- चारु (माथुर) -

 श्री चारु माता ऐरावती / शोभावति के जेष्ठ पुत्र थे | उनका राशि नाम पुरांधर था | श्री चारु का परिवार सूर्यदेश (बिहार) देश, में जाकर बसे और उनके राष्ट्रध्वज का चिन्ह सूर्य होने के कारण सूर्यध्वज कहलाये |

2- सुचारु (गौड़) -

 श्री सुचारु माताऐरावती / शोभावति के द्वितीय पुत्र थे | उनका राशि नाम सारंगधार था | श्री सुचारु का परिवार पश्चिम बंगाल के अम्बष्ठ जनपद, में जाकर बसे इस कारण अम्बष्ठ कहलाये |

3- चित्र (चित्राख्य) (भटनागर) -

 श्री चित्र माता ऐरावती / शोभावति के तृतीय पुत्र थे | उनका राशि नाम सारंगधार था | श्री चित्र का परिवार गौड़ देश (बंगाल), में जाकर बसे इस कारण गौड़ कहलाये |

4- मतिभान (हस्तीवर्ण) (सक्सेना) - 

निगम उत्तर भारतीय कायस्थ होते हैं। श्री मतिभान (हस्तीवर्ण) माता ऐरावती / शोभावति के चौथे पुत्र थे | उनका राशि नाम रामदयाल था | श्री मतिभान (हस्तीवर्ण) का परिवार निगम देश (काशी), में जाकर बसे इस कारण निगम कहलाये|

5- हिमवान (हिमवर्ण) अम्बष्ठ - 

श्री हिमवान (हिमवर्ण) माता ऐरावती / शोभावति के पाँचवें पुत्र थे | उनका राशि नाम सारंधार था | श्री हिमवान (हिमवर्ण) का परिवार गौड़ देश (बिहार), में प्राचीन करनाली नामक ग्राम में जाकर बसे इस कारण कर्ण कहलाये |

6- चित्रचारु (निगम) - 

श्री चित्रचारु माता ऐरावती / शोभावति के छटवें पुत्र थे | उनका राशि नाम सुमंत था | श्री चित्रचारु का परिवार अष्ठाना देश (छोटा नागपुर), जो नागदेश से भी प्रसिद्ध है में जाकर बसे इस कारण अष्ठाना कहलाये |

7- चित्रचरण (कर्ण)- 

श्री चित्रचरण माता ऐरावती / शोभावति के सातवें पुत्र थे | उनका राशि नाम दामोदर था | श्री चित्रचरण का परिवार बंगाल में नदिया जो बंगाल की खाडी के ऊपर स्थित है, में जाकर बसे | सेवा की भावना के कारण अपने कायस्थ कुल में श्रेष्ठ माने गये इस कारण कुलश्रेष्ठ कहलाये |

8- अतिन्द्रिय (जितेंद्रय) (कुलश्रेष्ठ) -

 श्री अतिन्द्रिय (जितेंद्रय) माता ऐरावती / शोभावति के सबसे छोटे पुत्र थे | उनका राशि नाम सदानंद था | श्री अतिन्द्रिय (जितेंद्रय) का परिवार बाल्मीकि देश (पुराना मध्य भारत), में जाकर बसे इस कारण बाल्मीकि कायस्थ कहलाये |
भाई दूज के दिन कलम-दवात पूजा (कलम, स्याही और तलवार पूजा) करते हैं, जिसमें पेन, कागज और पुस्तकों की पूजा होती है। यह वह दिन है जब भगवान श्रीचित्रगुप्त का उदभव ब्रह्माजी केद्वारा हुआ था और यमराज अपने कर्तव्यों से मुक्त हो, अपनी बहन देवी यमुना से मिलने गये, इसलिए इस दिन पूरी दुनिया भैयादूज मनाती है ।

ब्राह्मणों से दान लेने का हक़ सिर्फ कायस्थों को

ब्राह्मणों को हर जाति से दान लेने का अधिकार है लेकिन कायस्थ है कि उन्हे ब्राह्मणों से दान लेने का अधिकार है ।यह बात सुनने में अजीब जरूर लगती है लेकिन किदवंती के अनुसार यह सत्य है । कायस्थों को ब्राह्मणों से दान लेने का अधिकार क्यूं है , पढिये ।

जब भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण छुट जाने से नाराज भगवान् चित्रगुप्त ने रख दी थी कलम ,उस समय परेवा काल शुरू हो चुका था । परेवा के दिन कायस्थ समाज कलम का प्रयोग नहीं करते हैं यानी किसी भी तरह का का हिसाब - किताब नही करते है आखिर ऐसा क्यूँ है ?कि पूरी दुनिया में कायस्थ समाज के लोग दीपावली के दिन पूजन के बाद कलम रख देते है और फिर यमदुतिया के दिन कलम- दवात के पूजन के बाद ही उसे उठाते है I

कायस्थ के देवता कौन है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कायस्थ जाति को उत्पन्न करनेवाले भगवान चित्रगुप्त का जन्म यम द्वितीया के दिन हुआ। इसी दिन कायस्थ जाति के लोग अपने घरों में भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। उन्हें मानने वाले इस दिन कलम और दवात का इस्तेमाल नहीं करते

कायस्थ इतने बुद्धिमान क्यों होते हैं?

चित्रगुप्त जी महाराज यमराज के यहाँ भविष्यवाणी लिखा करते थे। जैसे राजपूत हथियारों की पूजा करते हैं ठीक वैसे ही कायस्थ कलम और दवात की पूजा करता है। पढ़ना और पढ़ाना उसके खून में है। यही कारण है कि कुशाग्र बुद्धि होने के कारण कायस्थ हर क्षेत्र में श्रेष्ठ साबित होते हैं


कायस्थ कितने प्रकार के होते हैं?

कायस्थ जाति 12 उपजातियों में विभाजित है। कायस्थ के उपविभाजन:- उत्तर भारत के चित्रगुप्त कायस्थ, महाराष्ट्र के प्रभु कायस्थ, दक्षिण भारत के कर्णम/करुणीगर (कायस्थ), उड़ीसा के करण (कायस्थ), बंगाल के बंगाली कायस्थ और असम के कलितस (कायस्थ)

श्रीवास्तव कौन सी जाति के होते हैं?

श्रीवास्तव, चित्रगुप्तवंशी कायस्थ के बारह उप-कुलों में से एक हैं, जो परंपरागत रूप से शासन, प्रशासन और सैन्य सेवाओं में शामिल थे। भारतीय उपमहाद्वीप में वैदिक काल , मध्यकालीन हिंदू और इस्लामी साम्राज्यों के दौरान इस कुल के लोग प्रभावशाली थे, तथा लाला और कायस्थ जैसे शीर्षक अर्जित करते थे।

श्रीवास्तव को हिंदी में क्या कहते हैं?

आपको बता दें कि श्रीवास्तव नाम का अर्थ भगवान विष्णु, धन के धाम होता है। 

कायस्थ क्या काम करते हैं?

कायस्थ। विशेष— कायस्थ जाति के लोग प्रायः लिखने पढ़ने तथा युध्द करने का काम करते है और ये लोग उच्च कोटि के संत पुरुष राजा महाराजा व चक्रवर्ती सम्राट होते हैं और ये लोग प्रायः सारे भारतवर्ष में पाए जाते हैं।

कायस्थ समाज की उत्पत्ति कैसे हुई?

चित्रगुप्त जी का जन्म ब्रह्माजी के अंश से हुआ है. वह उनकी काया से उत्पन्न हुए थे, इसलिए कायस्थ कहलाए. इसी तरह उनकी संतानों के जरिए जो वंश आगे बढ़ा और जो जाति बनी वह कायस्थ कहलाई. चित्रगुप्त जी की जन्म कथा भी अद्भुत है

कायस्थ में कितने उपनाम होते हैं?

आज, केवल चार कुलिन परिवार हैं - बोस, घोष (हालांकि आमतौर पर सदगोप-मिल्कमैन समुदाय द्वारा उपयोग किया जाता है), मित्रा, गुहा। मौलिक कायस्थ के अनेक उपनाम हैं, जिनमें से कुछ हैं- दत्ता, चंद्रा, दास (कुछ), पाल, गेन, पुरकायस्थ, विश्वास, कर, सेन, गुहा-ठाकुरता, सोम, पालित, डे, मल आदि

यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

*मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

*जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

*जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

*जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

*दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

12.12.23

भजन लाल शर्मा ,राजस्थान के मनोनीत मुख्य मंत्री का जीवन परिचय






 राजस्थान की राजनीति में एक नए युग का आगाज हुआ है, भाजपा के वरिष्ठ नेता भजन लाल शर्मा राज्य के नए मुख्यमंत्री बने हैं। उनकी नियुक्ति एक ऐसे नेता के रूप में हुई है जो अपने विनम्र स्वभाव, सकारात्मक नेतृत्व और विकास के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं।
तो आज इस आर्टिकल में में हम आपको श्री भजन लाल शर्मा जी के बारें में विस्तार से पूरी जानकारी देंगे ताकि आपको इनके राजनैतिक संगर्ष और इनकी शिक्षा के बारे में सामान्य सी जानकारी हो पाए। इनका सम्पूर्ण जीवन परिचय कुछ इस प्रकार है।
 राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के बाद कयास लगाये जा रहे थे कि राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। 12 दिसम्बर 2023 को भारतीय जनता पार्टी के विधायक दलों के बैठक में भजन लाल शर्मा का नाम चुना गया। अब राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा होंगे।भजन लाल शर्मा राजस्थान के नए सीएम बनें है । सांगानेर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं। अपने राजनितिक करियर में पहली बार विधायक बने हैं। बीजेपी के प्रदेश महासचिव पद हैं।
भरतपुर के रहने वाले भजन लाल शर्मा संगठन में लंबे समय से कार्यरत हैं। मौजूदा विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काटकर भजन लाल शर्मा को प्रत्याशी बनाया था। इसमें इन्होने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा


शर्मा का जन्म 1967 में राजस्थान के जयपुर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक रूप से कमजोर परिस्थितियों में बीता, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा को कभी बाधित नहीं होने दिया। उन्होंने स्नातक की डिग्री पूरी की और बाद में राजनीति में अपना करियर बनाने का फैसला किया।

सफर

राजनीति में शर्मा का प्रवेश 1990 के दशक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ हुआ था। उन्होंने जमीनी स्तर से काम करना शुरू किया और पार्टी के विभिन्न पदों पर रहे। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को जल्द ही पार्टी ने पहचान लिया और उन्हें 2013 में सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में चुना गया।

विधायक के रूप में

विधायक के रूप में शर्मा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए अथक प्रयास किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और कृषि क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा किया। उनकी जनता के प्रति संवेदनशीलता और समस्याओं को तत्परता से हल करने के प्रयास ने उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोकप्रिय बना दिया।

मुख्यमंत्री के रूप में चुनौतियां और अपेक्षाएं

राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शर्मा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। राज्य में बेरोजगारी, गरीबी और किसानों की समस्याएं प्रमुख हैं। इसके अलावा, उन्हें कोविड-19 महामारी के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव से भी निपटना होगा।
हालांकि, शर्मा की विकास परियोजनाओं को पूरा करने और राज्य को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता है। उनकी सकारात्मक नेतृत्व शैली और आम आदमी से जुड़ने की क्षमता उन्हें इन चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी।

राजस्थान के भविष्य के लिए एक आशाजनक नेता

भजन लाल शर्मा एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने राजनीति में अपने वर्षों के अनुभव से जनता की समस्याओं को समझने का कौशल हासिल किया है। वह एक ईमानदार और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी नियुक्ति राजस्थान के भविष्य के लिए एक आशाजनक संकेत है, और उम्मीद है कि वह राज्य को विकास और समृद्धि के नए युग की ओर ले जाएंगे।
नाम          भजन लाल शर्मा

उम्र       56 वर्ष 

जन्म तिथि(Date Of Birth) 1967

जन्म – स्थान(Place) भरतपुर

शिक्षा एम .ए

व्यवसाय राजनीति

धर्म (Religion) हिन्दू

राजनितिक दल भारतीय जनता पार्टी

वैवाहिक स्थिति विवाहित

जाति (Cast) शर्मा

पिता का नाम

पद वर्तमान मुख्यमंत्री (राजस्थान)

नागरिकता (Nationality) भारतीय

मुख्यमंत्री आवास (Chief Minister’s Residence) मुख्यमंत्री कार्यालय, सचिवालय, जयपुर

ई मेल (Mail ID) cmrajasthan@nic.in

संपत्ति (Net Worth ) अभी ज्ञात नहीं

निष्कर्ष 

भजन लाल शर्मा एक ऐसे नेता हैं जिनमें अपने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का दृढ़ संकल्प और जुनून है। उनकी नियुक्ति राजस्थान के लिए एक नए युग की शुरुआत है, और उम्मीद है कि वह राज्य को विकास और समृद्धि के एक नए स्तर पर ले जाएंगे।

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जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

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मध्य प्रदेश के मनोनीत मुख्य मंत्री मोहन यादव का जीवन परिचय






  मध्य प्रदेश विधानसभा की वेबसाइट के अनुसार, मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को हुआ था। उनका जन्म उज्जैन में हुआ था। उनके पिता का नाम पूनमचंद यादव हैं।
उनकी शादी सीमा यादव से हुई हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। मोहन यादव के पास बीएससी, एलएलबी, एमए, एमबीए और पीएचडी सहित कई शैक्षणिक डिग्रियां हैं। मोहन यादव शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
वह 2013 में उज्जैन दक्षिण सीट से पहली बार विधायक बने थे। 2018 मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव में, वह एक बार फिर चुने गए और उज्जैन दक्षिण सीट से विधायक बने। उन्होंने मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। 2 जुलाई 2020 को उन्होंने श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली।

मध्य प्रदेश के मुख्या मंत्री बने 

मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की घोषणा हो गई हैं। मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया हैं। विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लग गई हैं। मोहन यादव ओबीसी वर्ग से आते हैं। वह उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। इस बार वह तीसरी बार विधायक बने हैं। मोहन यादव को मुख्यमंत्री, जगदीश देवड़ा, राजेंद्र शुक्ला को डिप्टी सीएम बनाया गया हैं।

संघ के करीबी 

मोहन यादव को संघ का करीबी बताया जाता हैं। जानकारी के मुताबिक, विधायक दल की बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने खुद मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव रखा. मोहन यादव ने माधव साइंस कॉलेज से पढ़ाई की हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री रह चुके हैं। 1982 में छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए थे।
वे भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य रह चुके हैं। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण के प्रमुख पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। 2013 और 2018 के बाद 2023 में भी वह उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने 163 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कमलनाथ के चेहरे पर लड़ रही कांग्रेस महज 66 सीटों पर सिमट गई। म
ध्य प्रदेश में केंद्रीय पर्यवेक्षकों के साथ विधायक दल की बैठक में मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. मोहन यादव का नाम तय किया गया है।
 मप्र के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम चौंकाने वाला रहा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश का सीएम बनने की दौड़ से सभी नाम बाहर हो गए। अब मप्र की कमान मोहन यादव के हाथ में रहेगी। यानी प्रदेश में अब शिव का राज नहीं मोहन राज होगा। मोहन यादव ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। अब वे प्रदेश के सत्ता के शीर्ष पर विराजमान हो गए हैं। आइए, उनके बारे में विस्तार से जानते हैं..
 छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अगले पांच साल के लिए डॉ. मोहन यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला प्रदेश के नए उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नरेंद्र सिंह तोमर को एमपी विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई है।
 तीन दिसंबर को विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे घोषित होने के बाद से ही लगातार इस बात को लेकर सस्पेंस चल रहा था कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री आखिर कौन होगा इस दौड़ में वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही कहीं वरिष्ठ नेताओं के नाम चल रहे थे, लेकिन सोमवार को भोपाल में मध्य प्रदेश भाजपा विधायक दल के बैठक के दौरान की गई घोषणा ने अचानक सभी को उस समय चौंका दिया, जब उज्जैन दक्षिण के विधायक और शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉ. मोहन यादव को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की घोषणा कर दी गई। यहां याद रहे की उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव वर्तमान में उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं, जो की वर्ष 2013 में पहली बार इस क्षेत्र से विधायक बने थे, जिसके बाद वर्ष 2018 में फिर इसी विधानसभा सीट से विजय श्री हुए। उन्होंने 2 जुलाई 2020 को शिवराज सरकार मे उच्च शिक्षा मंत्री की शपथ ली थी। जिसके बाद 3 दिसंबर 2023 को वे लगभग 13000 मतों से उज्जैन दक्षिण क्षेत्र से विजय श्री घोषित हुए थे। डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव हैं। उनकी पत्नी सीमा यादव हैं

मुख्यमंत्री बनने तक कुल 41 वर्षों का रहा संघर्ष

डॉ. मोहन यादव को मंत्री पद तक पहुंचने के लिए 41 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा है। उन्होंने माधव विज्ञान महाविद्यालय से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। पार्टी में कई पदों पर रहने के बाद सरकार में उन्हें मंत्री बनने का मौका मिला है। कई बार वह बयानों को लेकर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहे हैं। 1982 में वे माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव और 1984 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1984 मे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री और 1986 मे विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। यही नहीं वर्ष 1988 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे हैं। 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री और सन 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री रह चुके हैं।1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खंड कार्यवाह, सायं भाग नगर कार्यवाह और 1996 में खण्ड कार्यवाह और नगर कार्यवाह रहे हैं। संघ में सक्रियता की वजह से मोहन यादव 1997 में भाजयुमो प्रदेश समिति में अपनी जगह बनाई। 1998 में उन्हें पश्चिम रेलवेबोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य भी बने। इसके बाद उन्होंने संगठन में रहकर अलग-अलग पदों पर काम किया। 2004-2010 के बीच वह उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) रहें। 2011-2013 में मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, भोपाल के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) भी बने। पहली बार 2013 में वह विधायक बने। 2018 में भी पार्टी ने उनपर भरोसा किया और वह चुनाव जीतने में सफल रहे। 2020 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो मोहन यादव फिर से मंत्री बने।


मोहन यादव की शिक्षा और करियर

डॉ. मोहन यादव माधव विज्ञान महाविद्यालय से पढ़ाई की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री रहे हैं। 1982 में छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए थे। भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्य प्रदेश की केंद्रीय समिति के सदस्य रहे हैं। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण केप्रमुख, पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं।


कांग्रेस के इन आरोपों का कर चुके हैं सामना

उज्जैन के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए थे। कहा था कि मोहन यादव ने अपने परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान को गलत तरीके से पास कराया है। यादव ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। लोगों ने भी इनआरोपों को गंभीरता से नहीं लिया और मोहन यादव को ही दोबारा विधायक बनाकर भोपाल भेजा है।

इन मामलों में रहे चर्चा में

माता सीता को लेकर एक विवादित बयान भी चर्चा में रहा है। उन्होंने कहा था कि मर्यादा के कारण भगवा राम को सीता को छोड़ना पड़ा था। उन्होंने वन में बच्चों को जन्म दिया। कष्ट झेलकर भी राम की मंगल कामना करती रहीं। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है।


डॉ. मोहन यादव का जीवन परिचय

छात्र राजनीति: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश के विभिन्न पदों पर रहे। राष्ट्र्रीय महामंत्री के पद के दायित्वों का निर्वाहन, माधव विज्ञान महाविद्यालय में 1982 में छात्र संघ के संयुक्त सचिव तथा 1984 में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित।

सामाजिक क्षेत्र: 

2006 में भारत स्काउट एवं गाइड के जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, 2007 में अखिल भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 1992, 2004 एवं 2016 सिंहस्थ उज्जैन केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे। वर्ष 2000-2003 तक विक्रम विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद (सिंडीकेट) सदस्य के दायित्व का निर्वाहन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, विकलांग पुर्नवास केन्द्रों में सक्रिय भागीदारी की।

राजनीतिक क्षेत्र: 

सन 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय छात्रसंघ के सह-सचिव एवं 1984 में अध्यक्ष रहे। सन 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख रहे। सन 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई के प्रदेश मंत्री तथा सन 1991-92 में परिषद के राष्ट्रीय मंत्री सन 1993-95 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, उज्जैन नगर के सह खंड कार्यवाह रहे। सायं भाग नगर कार्यवाह एवं 1996 में खंड कार्यवाह और नगर कार्यवाह रहे। सन 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य रहे। सन 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्य रहे। सन 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उज्जैन संभाग प्रभारी रहे। सन् 2000-2003 में भा.ज.पा. के नगर जिला महामंत्री एवं सन 2004 में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य रहे। सन 2004 में सिंहस्थ, मध्यप्रदेश की केन्द्रीय समिति के सदस्य रहे। सन 2008 से भारत स्काउट एण्ड गाइड के जिलाध्यक्ष रहे।

धार्मिक क्षेत्र: 

विक्रमोत्सव-चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा आरंभ विक्रम संवत पर प्रारंभ होने वाले भारतीय नववर्ष मनाने की परंपरा, विगत 11 वर्षों से प्रतिवर्ष भव्य उत्सव शिप्रा तट पर आयोजित किया जाता है, धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए भारतीय संस्कृति, तीज, त्यौहार, रीति-रिवाज के पारंपरिक आयोजनों में शामिल होकर साहित्यिक, सांस्कृतिक, कला, विज्ञान, पुरातत्व, वेद ज्योतिष से जुडने हेतु जनमानस को अभिप्रेरित किया।

साहित्य: 

विक्रमादित्य शोधपीठ का गठन।

लेखन: 

उज्जैयनी का पर्यटन, विश्वकाल गणना के केंद्र डोंगला का लेखन, संकल्प शुभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव आदि पुस्तकों का प्रकाशन।

विदेश यात्रा: 

अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान, बैंकाक, थाईलैंड, चीन, नेपाल, बर्मा, भूटान, म्यांमार, अरब देशों की यात्रा।

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