लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। सनातन आध्यात्म -जाति इतिहास-दान विमर्श

25.3.24

श्री राधा कृष्णा मंदिर गुराडिया कलां-झालावाड़: डॉ. आलोक का आध्यात्मिक दान पथ: 4 सीमेंट बेंच समर्पित




                                              सेवा ही साधना है

धर्म केवल मंदिर की घंटियों में नहीं, भक्तों को बैठने के लिए मिले दो पल के विश्राम में भी बसता है। इसी भाव को सार्थक करता है शामगढ़ के समाजसेवी, सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. दयाराम जी आलोक का 'आध्यात्मिक दान-पथ'।

गुराडिया कलां, जो राजस्थान के झालावाड़ जिले की डग तहसील से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक शांत ग्राम है, वहाँ भक्तों की आस्था का केंद्र है - सुंदर श्री राधा-कृष्ण मंदिर। मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं, और वर्षों से श्यामदास जी बैरागी परंपरा से इस मंदिर की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। मंदिर की व्यवस्था में गोविंद जी बैरागी और मंदिर के परम भक्त शंकर सिंह जी सोलंकी सालरिया का विशेष योगदान है।

इसी पावन धाम में भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, अपने व्यापक दान-संकल्प के अंतर्गत डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपने पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से 4 सीमेंट की बेंचें मंदिर परिसर में भेंट स्वरूप लगवाई हैं। इन बेंचों की स्थापना का कार्य विष्णु जी विश्वकर्मा मिस्त्री द्वारा किया गया। इस सुविधा से विशेषकर वृद्धजनों, महिलाओं और दूर से आने वाले यात्रियों को बैठने के लिए स्वच्छ और स्थायी स्थान मिला है, जिससे समस्त भक्तों में हर्ष है। इस पावन कार्य हेतु मंदिर समिति और शंकर सिंह जी सोलंकी ने दानदाता का सम्मान कर आभार व्यक्त किया।

जैसा कि इस अवसर पर रचित पंक्तियाँ कहती हैं -

गुराडिया कलां ग्राम में, राधा-कृष्णा धाम।
भक्तों की श्रद्धा बढ़े, गूँजे हरि का नाम।।
सीमेंट बेंचें दान कर, आलोकजी ने दी।
बैठक सुविधा भक्त को, सेवा सदा निधि।।

और श्लोक में -

राधाकृष्णप्रसादेन भक्तानां सुखवर्धनम्।
दानं सिमेन्टपीठानां आलोकस्य महाकृतम्॥

यह एकल घटना नहीं है। यह डॉ. आलोक जी के उस विराट संकल्प का एक छोटा सा पड़ाव है, जिसे उन्होंने सेवानिवृत्ति के पश्चात लिया है।

उनके आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान की प्रमुख विशेषताएँ हैं -

1. पेंशन का परमार्थ में समर्पण: उन्होंने अपनी कुल 5 वर्ष की पेंशन राशि को समाज-कल्याण में लगाने का संकल्प लिया है।
2. स्व-वित्तपोषित एवं तकनीक आधारित मॉडल: यह दान उनकी पेंशन के साथ-साथ गूगल से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो से प्राप्त आय पर आधारित है - अर्थात ज्ञान और तकनीक का परोपकार में उपयोग।
3. व्यापक कार्यक्षेत्र: उनका सेवा-क्षेत्र एक गाँव तक सीमित नहीं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, झालावाड़, आगर, नीमच, रतलाम, झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, गौशालाओं और मुक्ति धामों तक फैला है।
4. सुविधा-केंद्रित सोच: वे भव्य निर्माण से अधिक उस मूलभूत सुविधा पर ध्यान देते हैं जो आम जन के सीधे काम आए - जैसे सीमेंट बेंचें, जिससे थके हुए को विश्राम मिले।
5. निरंतरता और प्रेरणा: अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन और जीर्णोद्धार में वे सहयोग कर चुके हैं। दान पर शिलालेख लगवाकर वे पारदर्शिता बनाए रखते हैं और समाज के अन्य सक्षम जनों को भी इस पथ पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

गुराडिया कलां में लगा यह दान-पट्ट इस बात का प्रतीक है कि जब सेवा निस्वार्थ भाव से की जाती है तो वह समाज में आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता का दीप जलाती है। यह ब्लॉग लेख उसी पवित्र दीप की एक कथा है।

श्री राधा कृष्णा मंदिर गुराडिया कलां हेतु

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़  द्वारा 

सीमेंट की बेंचें भेंट 


काव्यात्मक छंद

 गुराडिया कलां ग्राम में, राधा-कृष्णा धाम। 
भक्तों की श्रद्धा बढ़े, गूँजे हरि का नाम।।

 सीमेंट बेंचें दान कर, आलोकजी ने दी।
 बैठक सुविधा भक्त को, सेवा सदा निधि।।

दामोदर अस्पताल से, अनिल राठौर संग।
 दान-पथ पर अग्रसर, समाज में रच रंग।।

 मंदिर समिति ने किया, दानदात का मान।
 समरसता का दीप है, यह पावन अभियान।।

श्लोक

राधाकृष्णप्रसादेन भक्तानां सुखवर्धनम्।
 दानं सिमेन्टपीठानां आलोकस्य महाकृतम्॥

गुराडियाकलाग्रामे देवालये मनोहरम्। 
अनिलेन सह दत्तं पीठदानं प्रशस्यते॥

समरस्यानुग्रहायै समाजे धर्मवर्धनम्।
 दानपथेन यः याति स आलोकः प्रशंस्यते॥


गुराडीया कलाँ झालावाड़ जिले का डग नगर से कुछ ही किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम है। इस गाँव मे राधा कृष्ण का सुन्दर मंदिर है। मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। श्यामदासजी बैरागी परंपरा से मंदिर की पूजा करते आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों को नकद और सिमेन्ट की बेंचें दान करने के अपने आध्यात्मिक दान -पथ के तहत डॉ दयाराम जी आलोक ने इस मंदिर की बैठक सुविधा उन्नत करने के मकसद से 4 सिमेन्ट बेंचें पुत्र डॉ . अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से मंदिर के परिसर मे लगवा दी हैं, जिससे भक्तों मे हर्ष है| 
मंदिर समिति और शंकर सिंग जी सोलंकी सालरिया ने दान दाता का सम्मान किया और आभार व्यक्त किया है। यह एक सुंदर और पवित्र कार्य है जो समाज में आध्यात्मिक और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है|

गुराडिया कलां के राधा कृष्णा  मंदिर का विडियो 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी
  डॉ. दयाराम आलोक 
                        

     


                                      
                                  


शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
राधाकृष्णा मंदिर में दामोदर हॉस्पिटल की बेंच लगीं विडियो 




राधा कृष्ण मंदिर के शुभचिंतक 

श्यामदास जी बैरागी  गुराडीया कलां-पूजा पाठ 

गोविन्द जी बैरागी ७७२६९-२१६५४ -मंदिर व्यवस्था 

शंकर सिंग जी सोलंकी  सालारिया  ९८२८९-१२४१३ -राधा कृष्ण के परम भक्त 

 विष्णु जी विश्वकर्मा  मिस्त्री   ने दान पट्टिका स्थापित की 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पताल  शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्री राधाकृष्ण मंदिर गुराडीया  कलाँ  हेतु दान सम्पन्न  
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

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पौराणिक कहानियाँ के विडिओ 

मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*दर्जी  वैवाहिक  महिला संगीत के विडिओ 

*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

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मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

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27.2.24

गायत्री शक्ति पीठ सुवासरा:डॉ.आलोक का आध्यात्मिक दान-पथ: 11 हजार नकद दान


                                                
गायत्री शक्ति पीठ, सुवासरा में आध्यात्मिक दान-पथ का एक पावन पड़ाव

युगऋषि परमपूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी की युग परिवर्तनकारी अवधारणा को साकार रूप देने के लिए आज गाँव-गाँव और शहर-शहर में गायत्री शक्ति पीठ मंदिरों की स्थापना हो रही है। इन शक्ति पीठों का मूल उद्देश्य मानव को मनसा, वाचा, कर्मणा जीवन मूल्यों के उच्चतम स्तर को आत्मसात कराना और विचार क्रांति के माध्यम से समाज का नव-निर्माण करना है।

इसी दिव्य परम्परा को आगे बढ़ाते हुए समाजसेवी एवं साहित्य मनीषी डॉ. दयाराम आलोक, शामगढ़ द्वारा अपने संकल्पित आध्यात्मिक दान-पथ के अंतर्गत गायत्री शक्ति पीठ मंदिर, सुवासरा को 11 हजार रुपये की नकद राशि दान स्वरूप भेंट की गई।

डॉ. आलोक जी ने सुवासरा शक्ति पीठ के शुभचिंतक श्री गेंदा लाल जी टेलर से संपर्क कर विधिवत 11 हजार रुपये की दान रसीद प्राप्त की। इस पावन सहयोग की स्मृति में मंदिर परिसर में दान पट्टिका भी स्थापित की गई है। मंदिर समिति के सदस्यों ने इस पुण्य कार्य हेतु दानदाता का सम्मान किया और हृदय से आभार व्यक्त किया। धर्मशास्त्रों में इस प्रकार का मंदिर सहयोग महान पुण्य का कार्य माना गया है।

उल्लेखनीय है कि डॉ. दयाराम आलोक जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और अपनी पेंशन की राशि को समाजहित में लगाने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं। वे मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में निर्माण एवं विकास हेतु नकद दान तथा आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान करने का अनुष्ठान कर रहे हैं। अब तक 151 से अधिक संस्थानों में यह सेवा कार्य संपन्न हो चुका है।

इस समायोजित दान राशि में Google से उनके ब्लॉग और You Tube चैनल से प्राप्त आय भी सम्मिलित है। यह सम्पूर्ण दान-पुण्य उनके पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के नाम से समर्पित है।

सुवासरा गायत्री शक्ति पीठ, जिसका यह दान कार्य सन 2022 में संपन्न हुआ, के वर्तमान ट्रस्ट मंडल में मुख्य ट्रस्टी श्री सुनील जी मान्दलिया, संयोजक श्री लक्ष्मी नारायण जी परमार, ट्रस्टी श्री गेंदमल जी टेलर और कोषाध्यक्ष श्री राजेंद्र जी चौधरी सहित अन्य शुभचिंतक सक्रिय हैं।

डॉ. आलोक जी की वाणी में गायत्री शक्ति पीठ सुवासरा का वीडियो और मंदिर में लगी दान पट्टिका इस सेवा भावना की साक्षी है।

बोलिए गायत्री माता की जय।

गायत्री शक्ति पीठ मंदिर सुवासरा  को

समाज सेवी डॉ.दयाराम आलोक  द्वारा 

११ हजार रूपये का नकद दान 


गायत्री शक्ति पीठ सुवासरा का विडियो डॉ.आलोक की आवाज 



गायत्री शक्ति पीठ सुवासरा में दान पट्टी लगी

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

गायत्री शक्ति पीठ सुवासरा  हेतु 
11 हजार नकद  दान 

 गायत्री शक्ति पीठ  सुवासरा के शुभ चिन्तक- 

अर्जुनलाल जी चौहान- 89894-11420

लक्ष्मी नारायण जी टेलर ९४०६६-५७६१५ 

समिति के अध्यक्ष गेंदमल  जी टेलर हैं

गायत्री ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारी निम्न हैं-

मुख्य ट्रस्टी सुनील जी मान्दलिया हैं,संयोजक लक्ष्मी नारायण जी परमार टेलर हैं. गेंदमल टेलर ट्रस्टी हैं. कोषाध्यक्ष राजेंद्र जी चौधरी हैं .

डॉ.अनिल कुमार दामोदर आत्मज  डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा सुवासरा गायत्री मंदिर हेतु दान सम्पन्न सन २०२२ 
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


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*दर्जी समाज मे मोसर (मृत्युभोज) के विडिओ 

पौराणिक कहानियाँ के विडिओ 

मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*दर्जी  वैवाहिक  महिला संगीत के विडिओ 

*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ  भाग 6 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 7 

*मनोरंजन,शिक्षा ,पर्यटन,उपदेश के विडिओ 

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ 

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17.2.24

सोंधिया राजपूत जाति की उत्पत्ति और इतिहास

 

सौंधिया राजपूत समाज का इतिहास बहुत ही रोचक और गर्व से भरा है। डॉ. दयाराम आलोक के अनुसार, सौंधिया राजपूतों का उद्गम मालवा, मेवाड़ और हाड़ोती के क्षेत्रों में हुआ था, जो उस समय सौंधवाड़ के नाम से जाना जाता था ¹। यह क्षेत्र मंदसौर, झालावाड़, उज्जैन और राजगढ़ जिलों में फैला हुआ था। सौंधिया राजपूतों की उत्पत्ति के बारे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि वे मूल रूप से राजपूत जाति से हैं, जो हिंदू धर्म में क्षत्रिय वर्ण के अंतर्गत आती है ¹। राजपूत जाति को इस देश की सैनिक और शासक जाति माना जाता है, जो युद्धप्रियता और देश एवं धर्म की रक्षा के लिए जानी जाती है। मुस्लिम आक्रमणकारियों के भारत में आने के बाद, राजपूतों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें जीत और हार दोनों शामिल थे ¹। कुछ राजपूतों ने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम धर्म को अपनाया, जबकि अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर बस गए। सौंधिया राजपूत समाज में विभिन्न वंशों के राजपूत शामिल हैं, जिनमें चौहान, तंवर, पंवार, सोलंकी, गहलोत, परिहार, बघेला और बोराना प्रमुख हैं ¹। 16वीं और 17वीं शताब्दी में मेवाड़ और मारवाड़ से कई राजपूत वंश सौंधवाड़ में आकर बसे। समय के साथ, राजपूत समाज ने अपनी अलग पहचान बनाई और स्थानीय सोंधिया राजपूतों से दूरी बनाए रखने के लिए उन्हें "सौंधवाड़ के  सोंधिया " कहकर बुलाया गया ¹। यह नाम धीरे-धीरे "सौंधिया राजपूत" में बदल गया और बोलचाल की भाषा में "सौंधिया" के रूप में प्रचलित हो गया |सोंधिया राजपूत समाज राजस्थान और मध्य प्रदेश में 700 वर्षों से निवास कर रही एक प्रमुख जाति है, जो छोटे किसानों का एक समुदाय है और वैष्णव हिंदू समुदाय से संबंधित है। इस समाज के लोगों की अपनी कोई विशेष रीति-रिवाज नहीं है, लेकिन उन्हें आमतौर पर पिछड़ी जाति श्रेणी से संबंधित माना जाता है ¹। राजपूत समाज की उत्पत्ति के बारे में कहा जाता है कि यह समाज 36 कुलों से बना है, जिनमें दस रवि, दस चंद्र, बारह ऋषि, और चार हुतासन शामिल हैं। इस समाज को क्षत्रिय भी कहा जाता है, जो शासक वर्ग के अच्छे और बुरे दोनों कार्यों के लिए जाना जाता है ¹। अब बात करते हैं राजपूत और ठाकुर में अंतर की। राजपूत एक संघ जाति है, जबकि ठाकुर एक उपाधि है जिसका उपयोग कई जातियों द्वारा किया जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, और मध्य प्रदेश में कई जातियां ठाकुर सरनेम का उपयोग करती हैं, जिनमें नाई, राजपूत, और अहीर (यादव) शामिल हैं। सबसे पहले ब्राह्मणों ने ठाकुर उपाधि का उपयोग किया था, और आज भी गुजरात और बंगाल में ब्राह्मण ठाकुर कहलाते हैं ¹। सौंधवाड़ के सोंधिया राजपूत के प्रमुख व्यक्तियों मे शामिल हैं- समाज प्रदेश अध्यक्ष विधायक नारायण सिंह,जी राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष विधायक चंदरसिंह जी सिसौदिया, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शंभूसिंहजी , जिलाध्यक्ष किशनसिंह जी पावटी, प्रदेश उपाध्यक्ष दिलीपसिंहजी तरनोद, युवा जिलाध्यक्ष दरबार अभयसिंहजी किलगारी, जिला प्रवक्ता डॉ भंवरसिंहजी , प्रदेश सचिव डॉ. भोपालसिंहजी . २०२३ के विधानसभा चुनाव में सुसनेर से भैरो सिंग जी पड़िहार बापू निर्वाचित हुए हैं जो सोंधिया राजपूत समाज से आते हैं
 हमारे देश की भगौलिक रचना कुछ इस प्रकार है कि जो स्वरुप आज दिखाई देता है देश आजाद होने और उसके पूर्व के काल में ऐसा नहीं था । प्राचीन काल में मगध, पाटली पुत्र, पंचनद, उत्कलप्रदेश जैसे नाम प्रचलित थे । मुगलों और अंग्रेजों के काल में मेवाड़, मालवा, सौंधवाड़, हाड़ोती, महाकौशल, बुंदेलखण्ड जैसे नाम अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयोग किये जाते थे । देश आजाद होने के बाद आज उतरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे नाम प्रचलित है ।
हिन्दू धर्म में प्रचलित चार वर्णों में क्षत्रिय वर्ण प्रमुख है इस वर्ण में राजपूत जाति इस देश की सैनिक और शासक जाति रही । \
   जुझारू जाति होने के कारण युद्धप्रियता और देश एवं धर्म की रक्षा का भार राजपूतों पर रहा । मुस्लिम आक्रमणकारियों के भारत में आने के बाद राजपूतों को कहीं जीत तो कहीं हार का सामना करना पड़ा । कहीं राजपूत धर्म परिवर्तन द्वारा मुस्लिम धर्म को अंगीकार करने के लिए बाध्य हुए तो कहीं दूरस्थ क्षेत्र में जाकर बसने को मजबूर हुए । चूँकि मुस्लिम शासकों का दबाव दिल्ली एवं उसके आसपास ज्यादा रहा अतः स्वाभिमानी राजपूत अपनी आन की रक्षा के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर बस गए । उस समय मालवा, मेवाड़ एवं हाड़ोती से लगा हुआ "सौंधवाड़" एक सुरक्षित क्षेत्र था जिस कारण दिल्ली एवं उसके आसपास से राजपूत यहां आकर बसे ।
   जाति इतिहासविद डॉ. दयाराम आलोक के मतानुसार   मंदसौर, झालावाड़, उज्जैन, राजगढ़ आदि जिलों में फैला यह क्षेत्र सौंधवाड़ कहलाता है|। इस क्षेत्र में विभिन्न वंशो के राजपूत आकर बसे जिसमें चौहान, तंवर, पंवार, सोलंकी, गहलोत, परिहार, बघेला, बोराना, आदि प्रमुख है.16 वीं, 17 वीं शताब्दी में मेवाड़, मारवाड़ से इस क्षेत्र में चुण्डावत, राणावत, शक्तावत, भाटी, चौहान, राठोड़, झाला, सोलंकी, पंवार आदि राजपूत आकर बसना शुरू हुए । स्वयं के श्रेष्ठ होने की भावना के कारण अपनी अलग पहचान के लिए इन लोगों ने स्थानीय राजपूतों से दूरी बनाए रखने बाबत् पहले से बसे हुए राजपूतों को "सौंधवाड़" का राजपूत कहकर बुलाया जो कालान्तर में धीरे-धीरे "सौंधिया राजपूत" बन गया और बोलचाल की भाषा में "सौंधिया" के रूप में प्रचलित हो गया ।
सोंधिया राजस्थान और मध्य प्रदेश में 700 वर्षों से निवास कर रही राजपूत जाति  है|
सोंधिया छोटे किसानों का एक समुदाय हैं, |यह  एक वैष्णव हिंदू समुदाय हैं, और उनके कोई विशेष रीति-रिवाज नहीं हैं। सोंधिया को आमतौर पर पिछड़ी जाति श्रेणी से संबंधित माना जाता है।
   मप्र पिछड़ा आयोग की भोपाल में सुनवाई के दौरान सौंधिया राजपूत समाज के पदाधिकारियों ने समाज का पक्ष रखा। कहा कि पिछड़ा वर्ग की जातियों में सौंधिया राजपूत की जगह केवल सौंधिया लिखा है। सौंधिया के साथ राजपूत शब्द जोड़कर जाति को सौंधिया राजपूत किया जाए।
इस हेतु आयोग के समक्ष प्रदेशभर से आए समाजजन ने दस्तावेज पेश किए। समाज प्रदेश अध्यक्ष विधायक नारायण सिंह,


राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष विधायक चंदरसिंह सिसौदिया, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शंभूसिंह, जिलाध्यक्ष किशनसिंह पावटी, प्रदेश उपाध्यक्ष दिलीपसिंह तरनोद, युवा जिलाध्यक्ष दरबार अभयसिंह किलगारी, जिला प्रवक्ता डॉ भंवरसिंह, प्रदेश सचिव डॉ. भोपालसिंह और प्रदेश के पदाधिकारी माैजूद थे।
 

२०२३ के विधानसभा चुनाव में सुसनेर से  भैरो सिंग  पड़िहार बापू   निर्वाचित हुए हैं जो सोंधिया राजपूत समाज से आते हैं  
राजपूत कौन हैं और लोग उन्हें इतना प्रचारित क्यों करते हैं?
 राजपूत और ठाकुरों में क्या अंतर है?
राजपूत संघ है एक जिसमे 36 कुल के लोग शामिल है
“दस रवि से दस चन्द्र से, बारह ऋषिज प्रमाण,
चार हुतासन सों भये , कुल छत्तिस वंश प्रमाण
  मगर फिर घाल मेल हुआ 62 कुल हो गए इनको  क्षत्रिय  भी कहते है | शासक वर्ग के अच्छे बुरे सब कार्य का प्रचार होता है ठाकुर एक उपाधि है कोई संघ या जाती नही इसका प्रयोग लगभग सभी जातियॉ करती है |बिहार उत्तर प्रदेश में नाई जाती  भी  ठाकुर  सरनेम  का प्रयोग कराती है. तो राजस्थान में राजपूत भी  ठाकुर  कहलाते हैं. ,मध्य प्रदेश में घोषी अहीर(यादव) भी करते है  ठाकुर  सरनेम  उपयोग करते हैं. मगर सबसे पहले ब्राह्मणों ने प्रयोग किया था आज भी गुजरात बंगाल में ब्रह्मण  ठाकूर  कहलाते हैं.  राजपूत और ठाकुर में अंतर यहीं है कि राजपूत संघ जाती है . कुल मिलाकर  लोग ठाकुर कहलाने में गौरव  का अनुभव करते हैं ,
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*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ  भाग 6 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 7 

*मनोरंजन,शिक्षा ,पर्यटन,उपदेश के विडिओ 

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ 

*जातियों के महापुरुषों की जीवनी के विडिओ 

*धार्मिक ,सामाजिक त्योहार व  जुलूस के विडिओ

14.2.24

"सिंगपुर शिव-हनुमान मंदिर: भक्तों के लिए डॉ. आलोक का दिव्य आसन प्रसाद"

 झालावाड जिले के सिंगपुर में शिव हनुमान मंदिर  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

४ सीमेंट बेंचें भेंट 

राजस्थान के झालावाड़ जिले के सिंगपुर गाँव मे शिव हनुमान मंदिर बहुत अच्छी लोकेशन पर है और क्षेत्र के हनुमान भक्तों  की आस्था का केंद्र है। मंदिर नया बना है और आधुनिक स्थापत्य  इस्तेमाल किया गया है। रंग रोगन देखते ही बनता है । मांगु सिंग जी चौहान और नारायण सिंग जी सिसौदिया से सपर्क किया गया। उनकी सहमति से मंदिर मे स्थापित की जाने वाली दान पट्टिका भिजवाकर गेट की दीवार पर लगवा दी गई है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों मे  दर्शनार्थियों  के लिए बैठक सुविधा की दृष्टि से समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र  डॉ. अनिल दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा शिव हनुमान मंदिर सिंगपुर को 4 सिमेन्ट बेंच समर्पित की गईं है। जय भोलेनाथ जय बजरंगबली !!


  

नारायण सिंग जी सिसोदिया ने दान पट्टी फिट करने की जगह बताई 


 समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

  साहित्य मनीषी  डॉ.दयाराम जी आलोक  राजस्थान और मध्यप्रदेश के 
मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के  मंदिरों ,मुक्ति धाम और  गौशालाओं में निर्माण व विकास  हेतु नकद और  आगंतुकों के बैठने  हेतु  सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
 डॉ.आलोक जी  एक  सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी  पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ  आध्यात्मिक दान-पथ  पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने  हेतु  सीमेंट  बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में  आपकी वो राशि भी शामिल है जो  google कंपनी से उनके ब्लॉग  और  You tube चैनल से  प्राप्त होती  है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें  पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.

श्री शिव हनुमान मंदिर सिंगपुर हेतु 

4 सीमेंट बेंचें दान 

दान पट्टी  माँगूसिंग जी को भेजी गई


नारायण सिंग जी  सिसोदिया  सिंगपुर ने मंदिर का विडियो भेजा.


सामने वाले पिलर पर दान पट्टी लगने की जगह बताई गई
शिव हनुमान मंदिर के गेट की दीवार पर दान दाता की दान पट्टिका स्थापित की गई 24/6/2024 

मंदिर के शुभचिंतक -

मांगू सिंग जी सिंगपुर  ९५८७९-०७७७८ 

नारायणसिंग जी सिसोदिया  ९५८७९-०८६०४ 

बालूसिंग जी सिंगपुर 

मंदिर के पुजारी रोडूलाल जी शर्मा हैं। 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा
शिव हनुमान मंदिर सिंगपुर हेतु दान सम्पन्न  9/7/2024 
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

*मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

*जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

*जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

*जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

*दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

*मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

12.2.24

सुबह उठते ही इन प्रार्थना श्लोक का उच्चारण करने से प्राप्त होती है सुख -समृद्धि

आज हम आपको कुछ ऐसे ही श्‍लोक और मंत्रों के बारे में बताएंगे, जिनका उच्‍चारण आपको सुबह उठते ही करना चाहिए। ऐसा करने पर आपका केवल दिन ही अच्‍छा नहीं बीतता है बल्कि आपको सुख और समृद्धि की भी प्राप्‍ती होती है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।


भगवान श्री गणेश जी का यह मंत्र काफी प्रभावशाली है। इससे आपके मन में जो भय होता है वह दूर होता है और पूरे दिन आप सही दिशा में काम कर पाते हैं। इतना ही नहीं इस मंत्र का अर्थ है, 'श्री गणेश, जो बुरा कर रहे हैं उनका विनाश करें, आप सौ सूर्य के समान हैं, विघ्नहरता हैं। आज मेरे कार्यों में जो भी बाधा बनने की कोशिश करे या फिर बाधा डाले, उसका सर्वनाश कर दीजिए।'अर्थात आप इस मंत्र का यदि नियमित उच्‍चारण करती हैं, तो आपके काम में आने वाली बाधा दूर हो जाती हैं।

पुण्यश्लोको नलो राजा पुण्यश्लोको युधिष्ठिरः ।

पुण्यश्लोको विदेहश्च पुण्यश्लोको जनार्दनः ।।


इस श्‍लोक का भार्वाथ है कि 'पुण्यवान नल, युधिष्ठिर, विदेह तथा भगवान जनार्दनका मैं स्मरण करता हूं।' इन सभी का स्‍मरण सुबह- सुबह करने से आपका पूरा दिन अच्‍छा बीत जाता है और आप सही मार्ग पर चलते हैं, जिससे न आपसे कुछ गलत होता है न आपके साथ कोई कुछ गलत करता है। यह श्‍लोक पूरे दिन आपको आत्‍मविश्‍वास और आत्‍मबल देता है।


कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती। 
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्..।।



आप अगर ब्रह्म मुहूर्त में उठते हैं तो आपको सुबह सूर्योदय होने पर इस मंत्र का उच्‍चारण करना चाहिए। आपको सूर्य की ओर मुंह करके, आंखे बंद करके और हाथों को जोड़ कर यह प्रर्थना करनी है कि आपके अग्रभाग में लक्ष्‍मी को मध्‍य भाग में सरस्‍वती का और मूल भाग में विष्‍णु जी का निवास हो।

यह बहुत ही शक्तिशाली मंत्र होता है और इसके नियमित उच्‍चारण से भाग्‍य का उदय होना तय होता है। इतना ही नहीं, आप एक मंत्र के माध्‍यम से सुख, समृरिद्ध और विद्या तीनों का वरदान मांग रहे होते हैं, जबकि इनमें से एक भी आपको प्राप्‍त हो जाए तो आपको सब कुछ प्राप्‍त हो जाता है।

‘गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। 
नर्मदे सिन्धु कावेरि जल स्मिन्सन्निधिं कुरु..’।।


इस मंत्र को भी सुबह नींद से जागते ही आपको जपना चाहिए । आप यदि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान करती हैं, तो आपको इस मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। इसका अर्थ होता है कि 'हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्‍वती, नर्मदा, सिंधु कावेरी मैं जिस जल से स्‍नान कर रही हूं, उस जल में पधारिये।' यह सभी दिव्‍य नदियां हैं और यदि इनके जल से आप नहाती हैं, तो आपका केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन भी पवित्र हो जाएगा और आप पूरे दिन सारे काम अच्‍छे से कर पाएंगी।

ओम नमः शिवाय'



भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले शिवजी ने अपने पांच मुखों से यह मंत्र ब्रह्माजी को प्रदान किया था। वेदों और पुराणों के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ “ॐ नमः शिवाय” का जप ही काफी है।

ॐ गं ऋणहर्तायै नमः 
अथवा 
ओम छिन्दी छिन्दी वरैण्यम् स्वाहा।


यह मंत्र कर्ज मुक्ति का मंत्र है। अगर आपने किसी से कर्ज लिया हुआ है और अब आप उसे चुका नहीं पा रहे हैं और इस वजह से आपको नियमित अपमान सहना पड़ता है, तो आपको इस मंत्र का उच्‍चारण रोज करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति अच्‍छी हो जाती है और आपने जो भी कर्ज लिया होता है वह खत्‍म हो जाता है।
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

*दामोदर दर्जी समाज महासंघ  आयोजित सामूहिक विवाह के विडिओ 

*दर्जी समाज मे मोसर (मृत्युभोज) के विडिओ 

पौराणिक कहानियाँ के विडिओ 

मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*दर्जी  वैवाहिक  महिला संगीत के विडिओ 

*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ  भाग 6 

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