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7.10.26

Jat History | जाटों की उत्पत्ति कैसे हुई? | Origin of Jats | Jat Ka Itihas

                                 

                      

एक सवाल।
भारत में एक ऐसी कौम है, जिसे मुगल कभी हरा नहीं पाए।
अंग्रेजों ने जिसके किले को 'लोहागढ़' कहा, क्योंकि वो लोहा था, जीता नहीं जा सका।
वो कौम है - जाट।
लेकिन जाट कौन हैं?
क्या वो भारत के मूल निवासी हैं?
या वो 2000 साल पहले मध्य एशिया से आए हुए Scythian योद्धा हैं, जिन्हें इतिहास में शक कहा गया?
और एक किसान, हल चलाने वाला... वो राजा कैसे बन गया? भरतपुर जैसा अजेय राज्य कैसे बना दिया?
आज इस वीडियो में हम जाटों की उत्पत्ति का पूरा सच, दो हजार साल का इतिहास, डीएनए से लेकर दस्तावेजों तक, बिना किसी मिलावट के जानेंगे।
वीडियो को अंत तक देखना, क्योंकि आखिर में मैं बताऊंगा कि जाट, राजपूत, गुर्जर और अहीर का आपस में क्या खून का रिश्ता है।
चलिए शुरू करते हैं।
नमस्कार, मैं हूँ डॉक्टर  दयाराम आलोक और आप देख रहे हैं "ज्ञानोदय" चैनल 
अगर आप जाट समुदाय से हैं, तो इस वीडियो पर गर्व होगा।
और अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं, तो ये वीडियो आपकी आँखें खोल देगा।
जाटों का इतिहास समझने के लिए हमें तीन शब्द समझने होंगे।
एक - उत्पत्ति। दो - विद्रोह। तीन - राज्य।
सबसे पहले बात उत्पत्ति की।
 उत्पत्ति के दो बड़े सिद्धांत
इतिहासकारों में जाटों की उत्पत्ति को लेकर दो सबसे बड़े सिद्धांत हैं।
पहला सिद्धांत - वैदिक और Indo-Aryan सिद्धांत।
कुछ विद्वान मानते हैं कि जाट शब्द 'ज्ञात' से बना है। ज्ञात का मतलब होता है - जाना पहचाना, प्रतिष्ठित लोग।
ऋग्वेद में 'जट' और 'जटा' जैसे शब्द मिलते हैं। कई इतिहासकार जाटों को वैदिक काल के किसान और पशुपालक समुदाय से जोड़ते हैं, जो पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे बसते थे।
उनका कहना है कि जाट इसी धरती के मूल किसान हैं, जिन्होंने हल चलाना और पशुपालन सबसे पहले शुरू किया।
दूसरा सिद्धांत - Indo-Scythian / शक सिद्धांत - जो सबसे ज्यादा माना जाता है।
दूसरा और ज्यादा मान्य सिद्धांत कहता है कि जाटों का संबंध शक, जिन्हें Scythian कहा जाता है, उनसे है।
इतिहास के दस्तावेज क्या कहते हैं, सुनिए।
राजस्थान सरकार के फाउंडेशन के रिकॉर्ड और राज-रस जैसे इतिहास के स्रोतों के अनुसार, भरतपुर पर राज करने वाला सिंसिनवार गोत्र एक Indo-Scythian tribal community था, जो लगभग 100 ईस्वी में भारत आया था।
इसी तरह के कई ब्रिटिश और भारतीय इतिहासकार, जैसे कि बेनी और लीड्स, लिखते हैं - "भरतपुर और धौलपुर जैसे कुछ राजस्थान के राज्य जाटों द्वारा शासित थे, जिन्हें कुछ अधिकारी, राजपूतों की तरह ही, मध्य एशियाई आक्रमणकारियों यानी Scythians की संतान मानते हैं।"
इसका मतलब क्या हुआ?
लगभग 2000 साल पहले मध्य एशिया के घास के मैदानों से शक और कुषाण नाम के घुड़सवार योद्धा भारत आए। वो पंजाब से लेकर राजस्थान तक फैल गए। धीरे-धीरे उन्होंने खेती शुरू की, यहाँ की भाषा अपनाई, और वो जाट कहलाए।
इसीलिए आप देखते हैं कि जाटों के कई गोत्र, जैसे मान, भुल्लर, औलख, आज भी मध्य एशिया में मिलते हैं।
तो सच क्या है? सच ये है कि जाट न तो पूरी तरह से विदेशी हैं, न पूरी तरह से एक जगह के। वो एक मिश्रण हैं - बाहर से आए वीर योद्धाओं और भारत के मूल किसानों का संगम। इसीलिए उनमें किसानी की सादगी और सैनिक की बहादुरी, दोनों हैं।
 मुगलों के खिलाफ पहला विद्रोह 
अब आते हैं दूसरे पड़ाव पर - विद्रोह।
17वीं सदी। भारत में औरंगजेब का राज है। जजिया कर, मंदिरों को तोड़ना और किसानों पर भारी लगान।
तब मथुरा के पास एक छोटा सा गाँव था - सिंसिनी। वहाँ के जमींदार थे गोकुला जाट।
गोकुला ने पहली बार मुगलों को कहा - नहीं, हम लगान नहीं देंगे।
1669 में गोकुला जाट ने 20 हजार किसानों को इकट्ठा किया और मुगल फौजदार अब्द-उन-नबी को हरा दिया, मार दिया। ये मुगल साम्राज्य के खिलाफ पहला बड़ा किसान विद्रोह था।
औरंगजेब खुद दिल्ली से सेना लेकर आया। गोकुला को पकड़ा गया, आगरा में शहीद किया गया। लेकिन चिंगारी बुझी नहीं, आग बन गई।
गोकुला के बाद आए राजाराम जाट।
राजाराम ने वो किया, जिसकी हिम्मत कोई नहीं करता था। उन्होंने सिकंदरा में अकबर के मकबरे को खोदकर, मुगलों को संदेश दिया कि किसान अब जाग गया है।
राजाराम के भतीजे थे - चूड़ामन जाट। चूड़ामन ने मुगल और जयपुर की लड़ाई का फायदा उठाकर थून में अपना पहला छोटा सा किला बनाया।
यहीं से भरतपुर राज्य की नींव पड़ी।
 महाराजा सूरजमल - जाटों का स्वर्णिम युग 
और अब कहानी में एंट्री होती है इतिहास के सबसे महान जाट शासक की - महाराजा सूरजमल।
अगर जाट इतिहास का कोई सूर्य है, तो वो सूरजमल हैं।
जन्म - 13 फरवरी 1707। पिता - राजा बदन सिंह।
बदन सिंह ने 1733 में भरतपुर शहर की स्थापना की। लेकिन उसे अजेय बनाया उनके बेटे सूरजमल ने।
सूरजमल ने क्या किया?
लोहागढ़ किला बनाया। मिट्टी का किला। अंग्रेजों ने 13 बार हमला किया, तोपें दागीं, लेकिन मिट्टी तोप के गोले को निगल जाती थी। इसीलिए ये भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो कभी किसी युद्ध में हारा नहीं।
सबसे बड़ी विजय। सूरजमल ने मुगलों को, मराठों को, जयपुर के कछवाहों को और रोहिल्लाओं को हराया। एक समय पर उनका राज्य आगरा, मथुरा, धौलपुर, हाथरस, अलीगढ़ से लेकर दिल्ली के पास तक फैला था।
कूटनीति। उन्हें 'जाटों का प्लेटो' कहा जाता था। प्लेटो मतलब ज्ञानी। वो सिर्फ योद्धा नहीं, बहुत बड़े राजनीतिज्ञ थे।
1763 में हिंडौन के युद्ध में लड़ते हुए सूरजमल की मृत्यु हुई।
उनके बाद उनके बेटे जवाहर सिंह और रणजीत सिंह ने राज संभाला। रणजीत सिंह ने 1805 में अंग्रेज जनरल लेक को लोहागढ़ में हराया था। ये अंग्रेजों की भारत में सबसे शर्मनाक हारों में से एक थी।
 जाट संस्कृति - क्यों अलग हैं जाट? 
जाटों को समझना है तो उनकी तीन चीजें समझनी होंगी।
पहला - गोत्र और खाप।
जाटों में 3000 से ज्यादा गोत्र हैं। सिनसिनवार, मान, सिहाग, ढाका, बेनीवाल, मलिक। गोत्र ही उनका इतिहास है। एक ही गोत्र में शादी नहीं होती। और खाप पंचायत, जो गांव के बुजुर्गों की पंचायत है, वो आज भी सामाजिक न्याय का सबसे बड़ा मंच है।
दूसरा - किसानी और स्वाभिमान।
जाट के लिए जमीन माँ है। आपने कहावत सुनी होगी - 'जाट मरा तब जानिए जब तेरहवीं हो जाए।' मतलब जाट कभी हार नहीं मानता।
तीसरा - राजपूत, गुर्जर, अहीर से संबंध।
अब वो सवाल जिसका जवाब मैंने शुरू में देने को कहा था।
7वीं सदी के बाद जब गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य टूटा, तब कई किसान योद्धा समुदायों से नए राजा निकले। जो राजा बन गया, वो राजपूत कहलाया। इसीलिए कई इतिहासकार कहते हैं कि राजपूत, जाट, गुर्जर और अहीर - इन सबकी जड़ें एक ही हैं, बस काम के आधार पर पहचान अलग-अलग हो गई।
तो दोस्तों, ये था जाटों का इतिहास।
एक किसान से, विद्रोही से, और विद्रोही से अजेय राजा बनने का सफर।
जाटों की उत्पत्ति चाहे शक से हुई हो या वैदिक किसानों से, लेकिन उनकी पहचान बनी है उनकी मेहनत, उनकी ईमानदारी और कभी न झुकने वाले स्वभाव से।
अगर आप जाट हैं, तो कमेंट में अपने गोत्र का नाम और 'जय महाराजा सूरजमल' जरूर लिखें।
और अगर आप चाहते हैं कि मैं अगला वीडियो गुर्जर इतिहास पर बनाऊं या यादव / अहीर इतिहास पर, तो कमेंट में बताओ।
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जय हिंद।

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