मृत्यु के ठीक 1 सेकंड बाद... क्या होता है?
क्या आपने कभी सोचा है... जब डॉक्टर कह देता है... He is no more...
उसके बाद... अगले 24 घंटे में... आपकी आत्मा कहाँ जाती है?
गरुड़ पुराण कहता है... मरने के बाद आत्मा... 3 दिन तक... अपने ही घर में रहती है।
वो आपको देखती है... वो सुनती है... वो रोने की आवाज सुनती है...
लेकिन आप उसे नहीं देख पाते।
आज मैं आपको डराने नहीं आया... आज मैं आपको गरुड़ पुराण के 3 सबसे बड़े सत्य बताऊंगा... जो हर हिंदू को मरने से पहले जानने चाहिए।
अगर आपने ये 3 सत्य जान लिए... तो आपको मृत्यु से कभी डर नहीं लगेगा।
वीडियो को अंत तक देखना, क्योंकि अंत में मैं बताऊंगा... गरुड़ पुराण के अनुसार वो कौन सा एक दान है... जो मृत्यु के बाद आत्मा को सबसे पहले मुक्ति देता है।
नमस्कार। मैं हूँ doctor dayaram alok
अगर आप सनातन धर्म, गरुड़ पुराण और जीवन-मृत्यु के रहस्य में विश्वास रखते हैं... तो इस वीडियो को अभी Like करके चैनल को Subscribe कर लीजिए।
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कमेंट में लिखिए - "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" - ताकि इस ज्ञान का फल आपको मिले।
चलिए, गरुड़ पुराण के उस पन्ने को खोलते हैं... जो मृत्यु के बाद पढ़ा जाता है... पर जीते जी सबको पढ़ना चाहिए।
गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने गरुड़ जी को बताया है।
जब मनुष्य की मृत्यु होती है... तो दो यमदूत आते हैं।
कैसे दिखते हैं यमदूत?
गरुड़ पुराण कहता है... पापी आत्मा के लिए... यमदूत बहुत भयंकर होते हैं... काले, बड़ी-बड़ी आँखों वाले, नाखून बड़े-बड़े।
और पुण्य आत्मा के लिए... वही यमदूत... सुंदर, दिव्य रूप में आते हैं।
जैसे ही प्राण निकलते हैं... आत्मा... शरीर को ऊपर से देखती है।
वो देखती है... उसका अपना शरीर पड़ा है... परिवार रो रहा है।
वो उन्हें छूना चाहती है... बोलना चाहती है... पर कोई सुनता नहीं।
गरुड़ पुराण कहता है - पहले 10 दिन तक... आत्मा... अपने घर के आस-पास ही भटकती है।
इसीलिए... 10 दिन तक पिंड दान दिया जाता है।
हर दिन का पिंड... आत्मा के एक नए शरीर का निर्माण करता है।
पहले दिन - सिर बनता है।
दूसरे दिन - गर्दन और कंधे।
तीसरे दिन - हृदय।
और दसवें दिन तक... एक सूक्ष्म शरीर... तैयार हो जाता है... जिसे यातना शरीर कहते हैं।
इसी शरीर से आत्मा यमलोक की यात्रा करती है।
अब सवाल है... यात्रा कितनी लंबी है?
यमलोक का रास्ता
गरुड़ पुराण में लिखा है... यमलोक का रास्ता... 86,000 योजन लंबा है। यानी लगभग... 10 लाख किलोमीटर।
और इस रास्ते पर... न धूप से बचने को छाया है... न खाने को अन्न।
इस रास्ते पर 16 नगर पड़ते हैं।
जैसे - सौम्यपुर, गंधर्वपुर, शैलागम, क्रौंचपुर... और अंत में आता है यमपुरी।
अच्छी आत्मा को ये रास्ता... 3-4 दिन में... विमान से पार करा दिया जाता है।
लेकिन पापी आत्मा को... इस रास्ते पर... 1 साल तक... चलना पड़ता है। घसीटते हुए।
और इसी एक साल को... हम एक वर्ष की बरसी कहते हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात...
रास्ते में आत्मा को क्या-क्या झेलना पड़ता है?
गरुड़ पुराण कहता है... रास्ते में वैतरणी नदी आती है।
वैतरणी नदी... खून और मवाद से भरी हुई है।
पापी आत्मा उसमें डूबती है... और पुण्य आत्मा को... गाय की पूंछ पकड़ कर... पार करा दिया जाता है।
इसीलिए... जीते जी... गौदान को... सबसे बड़ा दान कहा गया है।
सबसे बड़े पाप जो नहीं करने चाहिए]
गरुड़ पुराण में 3 पापों को सबसे बड़ा बताया गया है... जिनकी सजा यमलोक में सबसे ज्यादा है।
पहला पाप... कृतघ्नता... यानी एहसान फरामोश होना।
जिसने आपके साथ अच्छा किया... उसी को धोखा देना।
दूसरा पाप... गुरु, माता-पिता और पत्नी का अपमान... गरुड़ पुराण कहता है... जो व्यक्ति इनका दिल दुखाता है... उसे यमलोक में... सबसे पहले... लोहे की गरम सलाखों पर चलना पड़ता है।
तीसरा पाप... और सबसे बड़ा... दूसरों का हक मारना... किसी गरीब की जमीन, किसी का पैसा, किसी का हक... अगर आपने धोखे से लिया... तो गरुड़ पुराण कहता है... आपको अगले जन्म में... उसी घर में... नौकर बन कर... उसी कर्ज को चुकाना पड़ता है।
अब आप सोच रहे होंगे... तो फिर मुक्ति कैसे मिलेगी?
मुक्ति का उपाय
भगवान विष्णु ने गरुड़ पुराण में 3 उपाय बताए हैं... जो जीते जी करने से... मृत्यु आसान हो जाती है।
उपाय 1 - नाम जप। हर दिन... 10 मिनट... भगवान विष्णु का नाम। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ये नाम... वैतरणी नदी में... नाव बन जाता है।
उपाय 2 - अन्न दान। गरुड़ पुराण कहता है... भूखे को भोजन कराना... 100 यज्ञों के बराबर है। क्योंकि भूखा... सिर्फ शरीर से नहीं... आत्मा से आशीर्वाद देता है।
उपाय 3 - और सबसे बड़ा... तुलसी और गीता का ज्ञान। जिस घर में रोज गीता का एक श्लोक पढ़ा जाता है... उस घर में यमदूत प्रवेश नहीं करते... वहां खुद विष्णु के दूत आते हैं।
और अंत में... वो एक दान... जिसका मैंने शुरू में वादा किया था...
वो है... मृत्यु से पहले... क्षमा दान।
जिसने आपको दुख दिया... उसे क्षमा कर दो।
जिसका आपने दिल दुखाया... उससे क्षमा मांग लो।
क्योंकि गरुड़ पुराण कहता है... क्षमा से बड़ा... कोई पिंड दान नहीं।
तो आज से... डरना बंद... और जीना शुरू।
क्योंकि मृत्यु... अंत नहीं है... ये एक नए सफर की शुरुआत है।
अगर इस वीडियो ने आपके दिल को छुआ... तो इसे अपने परिवार में... उस व्यक्ति को जरूर भेजिए... जो मृत्यु से डरता है।
कमेंट में लिखिए... आपको गरुड़ पुराण की किस बात ने सबसे ज्यादा हिला दिया?
मैं मिलता हूँ... अगले वीडियो में... एक और गहरे सत्य के साथ।
तब तक के लिए... अपने कर्म अच्छे रखिए... क्योंकि यही आपके साथ जाएगा।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
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